TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar समास Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

समास का तात्पर्य है ‘संक्षिप्तीकरण’ । दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं । जैसे ‘रसोई के लिए घर’ इसे हम ‘रसोइघर’ भी कह सकते हैं ।

सामासिक शब्द : समास के नियमों से निर्मित शब्द सामासिक शब्द कहलाता है । इसे समस्तपद भी कहते हैं । समास होने के बाद विभक्तियों के चिह्न (परसर्ग) लुप्त हो जाते हैं। जैसे- रायपुत्र ।

समास विग्रह : सामासिक शब्दों के बीच के संबंधों को स्पष्ट करना समास विग्रह कहलाता है । जब समास्त पदों को वास पृथक् पृथक किया जाता है तो उसे समास विग्रह कहते हैं। जैसे गंगाजल गंगा का जल |

पूर्वपद और उत्तरपद :
समास में दो पद (शब्द) होतें हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं । जैसे- गंगाजल । इसमें गंगा पूर्वपद और जल उत्तरपद
हैं ।
समास के भेद :
समास के छः भेद होते हैं –

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. द्विगु समास
  4. द्वंद्व समास
  5. कर्मधारय समास
  6. बहुव्रीहि समास

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

1. अव्ययीभाव समास :
जिस समास का पूर्व पद प्रधान हो, और वह अव्यय हो उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। जैसे – यथामति (मति के अनुसार), आमरण (मृत्यु तक) इनमें यथा और आ अव्यय हैं। जहां एक ही शब्द की बार बार आवृत्ति हो, अव्ययीभाव समास होता है जैसे दिनोंदिन, रातोंरात, घर घर, हाथों हाथ आदि

कुछ अन्य उदाहरण –
आजीवन – जीवन – भर
यथाशक्ति – शक्ति के अनुसार
यथाविधि – विधि के अनुसार
यथाक्रम – क्रम के अनुसार
भरपेट – पेट भरकर
प्रतिदिन – प्रत्येक दिन
निडर – डर के बिना
प्रतिवर्ष – हर वर्ष
आमरण – मरण तक

अव्ययीभाव समास की पहचान :
इसमें समस्त पद अव्यय बन जाता है अर्थात समास लगाने के बाद उसका रूप कभी नहीं बदलता है। इसके साथ विभक्ति चिह्न भी नहीं लगता । जैसे – ऊपर के समस्त शब्द है ।

2. तत्पुरुष समास :
जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद गौण हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे तुलसीदासकृत = तुलसीदास द्वारा कृत (रचित)
सूचना : विग्रह में जो कारक प्रकट हो उसी कारक वाला वह समास होता है ।

विभक्तियों के नाम के अनुसार तत्पुरुष समास के छह भेद हैं-
कर्म तत्पुरुष ( द्वितीया कारक चिन्ह)
(गिरहकट – गिरह को काटने वाला)
करण तत्पुरुष (मनचाहा – मन से चाहा)
संप्रदान तत्पुरुष (रसोईघर – रसोई के लिए घर)
अपादान तत्पुरुष (देशनिकाला – देश से निकाला)
संबंध तत्पुरुष (गंगाजल – गंगा का जल)
अधिकरण तत्पुरुष (नगरवास – नगर में वास)

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3. द्विगु समास :
जिस समास का पूर्वपद संख्यावाचक विशेषण हो उसे द्विगु समास कहते हैं । इससे समूह अथवा समाहार का बोध होता है। जैसे-
समस्त पद – समास विग्रह
नवग्रह – नौ ग्रहों का समूह
दोपहर – दो पहरों का समाहार
त्रिलोक – तीन लोकों का समाहार
चौमासा – चार मासों का समूह
नवरात्र – नौ रात्रियों का समूह
शताब्दी – सौ अब्दो (वर्षों) का समूह
अठन्नी – आठ आनों का समूह
सतसई – सात सौ का संग्रह

4. द्वन्द्व समास :
जिस समास के दोनों पद प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर ‘और’, अथवा, ‘या’, एवं योजक चिन्ह लगते हैं, वह द्वंद्व समास कहलाता है ।

समस्त पद – समास विग्रह
माता – पिता – माता और पिता
भाई-बहन – भाई और बहन
राजा – रानी – राजा और रानी
सुख – दुःख – सुख और दुःख
रात-दिन – रात और दिन
घर-द्वार – घर और द्वार
अपना-पराया – अपना और पराया

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5. कर्मधारय समास :
जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण – विशेष्य अथवा उपमान- उपमेय का संबंध हों वह कर्मधारय समास कहलाता है ।
जैसे – भवसागर (संसार रूपी सागर );
घनश्याम (बादल जैसे काला)

समस्त पद – समास विग्रह
चंद्रमुख – चंद्र जैसा मुख
कमलनयन – कमल के समान नयन
देहलता – देह रूपी लता
दहीबड़ा – दही में डूबा बड़ा
नीलकमल – नीला कमल

6. बहुव्रीहि समास :
जिस समास के दोनों पद अप्रधान हों और समस्तपद के अर्थ के अतिरिक्त कोई सांकेतिक अर्थ (अन्य अर्थ ) प्रधान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं । जैसे –
समस्त पद – समास विग्रह
दशानन – दश है आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण
नीलकंठ – नील है कंठ जिसका अर्थात् शिव
सुलोचना – सुंदर है लोचन जिसके अर्थात् मेघनाद की पन्ती
पीतांबर – पीला है अम्बर (वस्त्र) जिसका अर्थात् श्रीकृष्ण
लंबोदर – लंबा है उदर (पेट) जिसका अर्थात् गणेशजी
जलज – जल में जन्म लेने वाला (कमल)
श्वेतांबर – श्वेत है जिसके अंबर (वस्त्र) अर्थात् सरस्वती जी
पंकज – पंक (कीचड़) में जन्म लेने वाला (कमल)

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

अभ्यास

इसमें सामासिक पद तथा समास का नाम भी दिया गया है ।

प्रश्न 1.
आजीवन
उत्तर:
अव्ययीभाव समास

प्रश्न 2.
गंगाजल
उत्तर:
संबंध तत्पुरुष समास

प्रश्न 3.
नवग्रह
उत्तर:
द्विगु समास

प्रश्न 4.
माता – पिता
उत्तर:
द्वन्द्व समास

प्रश्न 5.
भरपेट
उत्तर:
अव्ययीभाव समास

प्रश्न 6.
चंद्रमुखी
उत्तर:
कर्मधारय समास

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

प्रश्न 7.
नीलकंठ
उत्तर:
बहुव्रीहि समास

प्रश्न 8.
त्रिलोक
उत्तर:
द्विगु समास

प्रश्न 9.
जलज
उत्तर:
बहुव्रीहि समास

प्रश्न 10.
देहलता
उत्तर:
कर्मधारय समास

प्रश्न 11.
कमलनयन
उत्तर:
कर्मधारय समास

प्रश्न 12.
अन्न जल
उत्तर:
द्वन्द्व समास

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar समास

प्रश्न 13.
सतसई
उत्तर:
द्विगु समास

प्रश्न 14.
सप्तग्रह
उत्तर:
तत्पुरुष समास

प्रश्न 15.
चक्रधर
उत्तर:
बहुव्रीहि समास

प्रश्न 16.
शरणागत
उत्तर:
कर्म तत्पुरुष समास

प्रश्न 17.
पंकज
उत्तर:
बहुव्रीहि समास

प्रश्न 18.
राजकुमार
उत्तर:
संबंध तत्पुरुष समास

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प्रश्न 19.
दहीबड़ा
उत्तर:
कर्मधारय समास

प्रश्न 20.
मनचाहा
उत्तर:
तत्पुरुष समास

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

चित्र देखकर उससे जुड़े प्रश्नों के उत्तर अर्थग्राह्यता के साथ देना ही मौखिकेतर अर्थग्रहण कहलाता है। जैसे –

1. नीचे दिया गया विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 1
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
यह विज्ञापन किसके बारे में है ?
उत्तर:
यह विज्ञापन ग्राहकों को जागरुक रखने के लिए हैं ।

प्रश्न 2.
किसे जागरुक बनना चाहिए ?
उत्तर:
ग्राहक जागरुक बनना चाहिए ।

प्रश्न 3.
शिकायत या सुझाव के लिए टोल फ्री नंबर क्या है ?
उत्तर:
1800-11-4000

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 4.
यह विज्ञापन किसके द्वारा दिया गया है ?
उत्तर:
उपभोक्ता मामले विभाग – भारत सरकार – नई दिल्ली ।

2. विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 2
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
फ्लैग डे कब मनाया जाता है ?
उत्तर:
7 दिसंबर फ्लैग डे मनाया जाता है।

प्रश्न 2.
दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी फौज़ कौनसी है ?
उत्तर:
वॉलिंटियर ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 3.
फ्लैग डे के दिन किसके कल्याण के लिए फंड एकत्रित करते हैं ?
उत्तर:
भारतीय सशस्त्र बल से जुडे जवानों के कल्याण के लिए

प्रश्न 4.
दुनिया की सबसे बड़ी वालिंटियर सेना किसके पास है ?
उत्तर:
भारत के पास

3. विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 3
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
यह विज्ञापन किस विभाग का है ?
उत्तर:
आयकर विभाग

प्रश्न 2.
भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?
उत्तर:
सहयोग

प्रश्न 3.
यह विज्ञापन किस स्ताह के संदर्भ में दिया गया है ?
उत्तर:
सतर्कता जागरुकता सप्ताह

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 4.
देश को किससे मुक्त करना है ?
उत्तर:
भ्रष्टाचार से

4. विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 4
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
सड़क पर वाहन कैसे नहीं चलाना चाहिए ?
उत्तर:
तेज़

प्रश्न 2.
यह विज्ञापन किस संदर्भ में जारी किया गया है ?
उत्तर:
सड़क सुरक्षा सप्ताह पर जनहित में जारी

प्रश्न 3.
ओवरटेक कैसे करना चाहिए ?
उत्तर:
सही दिशा से

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 4.
जीवन कैसा है ?
उत्तर:
जीवन अनमोल है

5. विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 5
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
यह विज्ञापन किस मिशन का अंग है ?
उत्तर:
स्वच्छ भारत मिशन ।

प्रश्न 2.
कूड़ा कहाँ डालना चाहिए ?
उत्तर:
कूड़ेदान में डालना चाहिए ।

प्रश्न 3.
हमें किस बात का ध्यान रखना चाहिए ?
उत्तर:
पेयजल और स्वच्छता के बात का ध्यान रखना चाहिए ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 4.
इस अभियान का नाम क्या है ?
उत्तर:
स्वच्छ

6. विज्ञापन देखिए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।
TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास 6
प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
मतदान किसे करना चाहिए ?
उत्तर:
बड़ों और जवान / स्त्री, पुरुष और जवान

प्रश्न 2.
मतदान का अर्थ क्या है ?
उत्तर:
लोकतांत्रिक व्यवस्था में था अन्य समय किसी के पक्ष में अपना ‘मत देने की क्रिया (or) वोटिंग

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar मौखिकेतर अर्थग्रहण अभ्यास

प्रश्न 3.
मतदान का नारा क्या है ?
उत्तर:
बड़े हो था जवान सभी करे मतदान

प्रश्न 4.
यह विज्ञापन किसके बारे में है ?
उत्तर:
अपने मताधिकार का प्रयोग के बारे में

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 6 भारतभूषा वीरयोषा

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 6th Lesson भारतभूषा वीरयोषा Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 6th Lesson भारतभूषा वीरयोषा

लघु समाधान प्रश्नाः  (స్వల్ప సమాధాన ప్రశ్నలు) (Short Answer Questions)

पश्न 1.
एकाकिन्यपि चिन्ता कथं खेलति स्म ?
समादान:
एकाकिन्यपि चिन्ता मृदा दुर्गं निर्माय, पुनः तद्भङ्गलीलां खेलति स्म ।

पश्न 2.
रत्नसिंहः कथं कर्माणि कुर्वन् आसीत् ?
समादान:
रत्नसिंहः कर्तव्यबुद्ध्या एव कर्माणि कुर्वन् आसीत् ।

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 6 भारतभूषा वीरयोषा

पश्न 3.
रत्नसिंहः किमर्थं चितां प्राविशत् ?
समादान:
रत्नसिंहः आत्मनः अपराधस्य प्रायश्चित्तं कर्तुं चितां प्राविशत् ।

एकपद समाधान प्रश्नाः (ఏకపద సమాధాన ప్రశ్నలు)(One Word Questions) 

पश्न 1.
चिन्तादेवी केन पालिता आसीत् ?
समादान:
चिन्तादेवी पित्रा पालिता आसीत् ।

पश्न 2.
राजपुत्रयूनः नाम किम् ?
समादान:
राजपुत्रयूनः नाम रत्नसिंहः ।

पश्न 3.
चिन्तादेवी किं कर्तुं सज्जीबभूव ?
समादान:
चिन्तादेवी परलोकयात्रां कर्तुं सज्जीबभूव ।

कठिनशब्दार्थाः (కఠిన పదాలకు అర్ధాలు)

1. आहवः = युद्धम्
2. अविकत्थनः = अहङ्काररहितः
3. चमूः = सैन्यम्
4. वाजी = अश्वः
5. अनलः = अग्निः

व्याकरणांशाः (వ్యాకరణం)

सन्धयः (సంధులు)

1. अनुग्रहः + चेत् = अनुग्रहश्चेत् – श्रुत्वसन्धिः
2. पुनः + समराङ्गणम् = पुनस्समराङ्गणम् – विसर्गसन्धिः
3. वीराः + ते = वीरास्ते – विसर्गसन्धिः
4. पुरः + सरेयुः = पुरस्सरेयुः – विसर्गसन्धिः
5. अविकत्थनः + च = अविकत्थनश्च – श्श्रुत्वसन्धिः
6. निक्षिपन् + अपि = निक्षिपन्नपि – मुडागमसन्धिः
7. पश्चात् + गन्तुम् = पश्चाद्गन्तुम् – जश्त्वसन्धिः
8. अन्ततः + च = अन्ततश्च – श्रुत्वसन्धिः

समासाः (సమాసాలు)

1. कालिन्दी इति नदी, कालिन्दीनदी, कालिन्दीनद्याः तटः, कालिन्दीनदीतटः तस्मिन् – षष्ठीतत्पुरुषः
2. समुपचितश्च असौ समरश्च समुपचितसमरः समुपचितसमरस्य समयः – तस्मिन् समुपचितसमरसमये – षष्ठीतत्पुरुषः
3. लब्धा जनुः यया सा – लब्धजनुः – बहुव्रीहिः
4. मात्रा विहीना, मातृविहीना – तृतीयातत्पुरुषः
5. निर्गता चिन्ता यस्याः सा, निश्चिन्ता – बहुव्रीहिः
6. तस्य भङ्गः, तद्भङ्गः, तद्भङ्गस्य लीला, तद्भङ्गलीला तां तद्भङ्गलीलाम् – षष्ठीतत्पुरुषः
7. आत्मनः बलिदानम्, आत्मबलिदानम् आत्मबलिदानस्य कथाः ताभिः, आत्मबलिदानकथाभिः – षष्ठीतत्पुरुषः
8. सह चरन्ति इति सहचराः – उपपदतत्पुरुषः
9. अश्रुभिः सह – साश्रु – साश्रूणि नयनानि येषां ते साश्रुनयनाः – बहुव्रीहिः
10. स्मितं मुखं यस्याः सा स्मितमुखी – बहुव्रीहिः
11. सन्तोषं बिभर्ति इति सन्तोषभरः तस्य – सन्तोषभरस्य – उपपदतत्पुरुषः
12. न विद्यते नाथः यस्याः सा अनाथा तस्याः – अनाथायाः – बहुव्रीहिः
13. गम्भीरश्च असौ स्वरश्च – गम्भीरस्वर : – गम्भीरस्वरेण – विशेषणपूर्वपदकर्मधारयः
14. वीरश्च असौ पिता च वीरपिता तस्य वीरपितुः – विशेषण – पूर्वपदकर्मधारयः
15. शान्तः स्वभावः यस्य सः – शान्तस्वभावः – बहुव्रीहिः

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 6 भारतभूषा वीरयोषा

भारतभूषा वीरयोषा Summary in Sanskrit

कविपरिचयः

अस्याः कथायाः रचयिता महामहोपाध्यायः राष्ट्रपतिपुरस्कारभाक् ‘गलगली रामाचार्यः’ कर्णाटकराज्यस्थः सकलशास्त्रपारङ्गतः मधुरवाणीति संस्कृत मास पत्रिकायाः संस्थापकः प्रधानसम्पादकः साहित्यरत्न – बिरुदाङ्कितश्च आसीत् । अयं कविपण्डितः क्रि.श. 1893 तमे वर्षे कर्णाटकस्थबीजापुरजनपदस्य कृष्णानदीकूलस्थे गलगलीग्रामे लब्धजनिः । बहूनां ग्रन्थानां सम्पादकः संशोधकश्च श्रीमान् गलगली रामाचार्यः । प्रस्तुतपाठ्यांशः ‘भारतभूषा वीरयोषा “मधुराञ्जलिः” इति नामकात् पण्डितगलगलीरामाचार्याणां रचनासङ्कलनात् सङ्गृहीतः ।

सारांश

मातृविहीना चिन्तादेवी शूरेण पित्रा पालिता । त्रयोदशे वयसि वीरस्वर्गं गते पितरि सेनायाः नायकत्वं स्वीचकार । सा सर्वतः प्रभुत्वम् आविश्चकार । सैनिकेषु अन्यतमं शूराग्रेसरं रत्नसिंहं परिणीतवती चिन्तादेवी । अकस्मात् दुर्गम् आक्रान्तुम् आगतां शत्रुसेनाम् अभिमुखीकर्तुं स्वसेनया गतः रत्नसिंहः मनसा गृहाभिमुख एवासीत् । सेनां विहाय सः कुत्रापि निलीनः । नायकविहीना सेना शत्रुभिः पराजिता । सेनायाः पराजयस्य वार्तां ज्ञात्वा चितां प्रज्वाल्य चिन्तादेवी परलोकयात्राय सज्जीबभूव । समये आगतेन रत्नसिंहेन निवारितापि सा युद्धक्षेत्रात् पलायितं पतिं धिक्कृत्य चितायां स्वशरीरम् आहुतीकृतवती । पश्चात्तापदग्धः रत्नसिंहः तामेव चितां प्रविश्य प्रायश्चित्तं चकार

भारतभूषा वीरयोषा Summary in English

Introduction

Introduction : The lesson Bharatabhusha Virayosha is taken from Madhuranjali written by Sri Galagali Ramacharya. Sri Rama- charya was born in Galagali in Bijapur district, Karnataka in 1893. He was the founder editor of Madhuravani, a Sanskrit monthly magazine. He received President’s medal and was awarded the title Sahityaralia.

भारतभूषा वीरयोषा Summary in Telugu

కవి పరిచయం

“భారతభూషా వీరయోషితా” అనే పాఠ్యభాగాన్ని గలగలీ రామాచార్యులుగారు రచించారు. వీరు రాష్ట్రపతి పురస్కారాన్ని పొందారు. కర్ణాటక ప్రాంత వాసి అయిన వీరు సకల శాస్త్రముల యందు గొప్ప పండితుడు. ‘మధురవాణి’ అనే సంస్కృత పత్రికకు ప్రధాన సంపాదకులుగా పనిచేశారు. సాహిత్యరత్న అనే బిరుదు పొందారు. ఈ మహాకవి క్రీ.శ. 1893వ సంవత్సరంలో కర్ణాటక రాష్ట్రంలోని బీజాపూర్ జిల్లాలోని కృష్ణానదీ తీరంలో గల గలగలీ గ్రామంలో జన్మించారు. వీరు అనేక గ్రంథాలకు సంపాదకులుగాను, పరిశోధకులుగాను వ్యవహరించారు. ప్రస్తుత పాఠ్యభాగము “భారతభూషా వీరయోషా” అనేది “మధూంజలి” అనే పేరుగల రచనా సంకలనం నుండి సంగ్రహింపబడినది.

సారాంశము

చింతాదేవి అనే స్త్రీ తల్లి మరణంతో తండ్రి సంరక్షణలో పెరిగింది. తండ్రి మరణం తరువాత తన పదమూడవ సంవత్సరంలో సేనకు నాయకత్వం స్వీకరించింది. ఆమె తన ప్రభుత్వాన్ని అంతట విస్తరింపజేసింది. సైనికుల్లో అత్యంత అగ్రేసరుడైన రత్నసింహుడు అనే పేరుగల సైనికుడిని వివాహం చేసుకుంది. ఒకసారి అకస్మాత్తుగా శత్రుసేన రాజ్యాన్ని ఆక్రమించుకుంది. వెంటనే రత్నసింహుడు కత్తిని చేతబట్టి, గుర్రాన్ని ఎక్కి యుద్ధానికి వెళ్ళాడు. అయితే అతని మనసంతా ఇంటియందే లగ్నమైంది. శత్రుసైన్యం దగ్గరకు రాగానే రత్నసింహుడు ఎవరికి కనిపించకుండా దాక్కున్నాడు. నాయకత్వం లేకపోవడంతో సైన్యం చిన్నాభిన్నం అయింది. శత్రుసైన్యం రత్నసింహుని సైన్యాన్ని ఓడించింది. సైనికుని ద్వారా పరాజయవార్తను చింతాదేవి వినింది. అభిమానవతి అయిన ఆమె అగ్నిప్రవేశం చేయాలనుకుంది. చితిని ఏర్పాటుచేయమని ఆదేశించింది. ఆ సమయంలో రత్నసింహుడు వచ్చి ఆమెను నిందించాడు. అయినా ఆమె తన ప్రయత్నం మానుకోలేదు. చితిలో దూకి తన ప్రాణాలను వదులుకుంది. పశ్చాత్తాపంతో రత్నసింహుడు కూడా చితిలో దూకి మరణించాడు.

కాళిందీ నదీతీరంలో కాల్పీ అనే పేరుగల నగరం ఉంది. అక్కడ ఒక వీరునికి ఒక కుమార్తె ఉంది. ఆమె పేరు చింతాదేవి. చిన్నతనంలోనే తల్లి మరణించింది. దాంతో ఆమె తండ్రి సంరక్షణలో పెరిగింది. తండ్రి చింతాదేవిని ఒక అరణ్యంలో ఉంచాడు. యుద్ధవిద్యలో శిక్షణ ఇప్పించాడు. తన పదమూడేళ్ళ వయసులో తండ్రి మరణించాడు. తన సహచరుల ద్వారా తండ్రి మరణ వార్త విన్నది. అయినా ధైర్యాన్ని కోల్పోలేదు. ధైర్యంగా జీవించాలని నిర్ణయించుకుంది. తన సేనల సహాయం కోరింది. రాజ్యాన్ని బాగా విస్తరించుకుంది. కొంతకాలానికి తన సైనికులలో ఒక వీరుడైన రత్నసింహుడిని వివాహం చేసుకుంది.

విధి వారిద్దరి అనురాగాన్ని ఎక్కువకాలం నిలువనివ్వలేదు. ఒకసారి శత్రుసైన్యం ఆకస్మికంగా రాజ్యాన్ని చుట్టుముట్టింది. అప్పుడు రత్నసింహుడు కత్తిని చేతబట్టి, గుర్రం ఎక్కి శత్రుసైన్యానికి ఎదురు వెళ్ళాడు. చింతాదేవి వీర తిలకాన్ని దిద్దింది. అయితే అతని మనస్సు ఇంటి మీదనే ఉంది. ఎవరికి చెప్పకుండా, సైన్యాన్ని గాలికి వదిలి ఎక్కడో దాకున్నాడు. నాయకత్వం లేకపోవడంతో సైన్యం ఛిన్నాభిన్నం అయింది. శత్రువుల చేతిలో పరాజయాన్ని పొందింది. ఈ వార్తను ఒక సైనికుని ద్వారా చింతాదేవి వినింది. అది విని వెంటనే చితిని ఏర్పాటుచేయాలని ఆదేశించింది. చితిని ఏర్పాటు చేశారు. అందరు గుమికూడారు. ఆ సమయంలో రత్నసింహుడు ఆ ప్రాంతానికి వచ్చాడు. భార్యను సమీపించి “నీపై ప్రేమ దగ్గలేదు.

ఈ ప్రయత్నం విరమించు” అని ప్రార్థించాడు. ఆమె అతని మాటలను తిరస్కరించింది. దూరంగా తొలగిపొమ్మని ఆదేశించింది. చితిలో ప్రవేశించి ఆత్మార్పణ చేసుకుంది. ఇదంతా చూచిన రత్నసింహుడు ఆశ్చర్యం పొందాడు. తన తప్పుకు ప్రాయశ్చిత్తాన్ని చేసుకొనదలచిన వాడై రత్నసింహుడు చితిలో ప్రవేశించాడు. ఆత్మార్పణ చేసుకున్నాడు. ఆహా ! మన ప్రాచీన మహిళల తెగింపు, సాహసం ఎంత గొప్పదో కదా !

अनुवादः (అనువాదములు) (Translations)

कालिन्दीनदीतटे काल्पीनाम्नी काचन नगरी आसीत् । तस्यां कस्यचन शूरस्य कन्या चिन्तादेवी या समुपचितसमरसमये लब्धजनुः । बाल्ये एव मातृविहीना सा पितैव पालिता आसीत् । चिन्ताया बाल्यम् अतीयाय समरभूमौ एव । पिता किल तां वने कुटीरे त्यक्त्वा रणाङ्गणम् उपधावति स्म । एकाकिन्यपि निश्चिन्ता चिन्ता मृदा दुर्गं निर्माय पुनः तद्भङ्गलीलां खेलति स्म । सा वीराणामात्म- बलिदानकथाभिः सावेशभटमुखनिस्सृताभिः आत्मानं व्यनोदयत् ।

एकदा दिनत्रयं यावत् सा जनकस्य वार्तामपि नाशृणोत् । तृतीये दिने पितुः सहचराः केचन अभ्येत्य साश्रुनयनाः व्यलपन् । तदा त्रयोदशवर्षीया सा धीरा बालिका स्मितमुखी जगाद ‘पितरि मे वीरस्वर्गं गते सन्तोष्टव्ये अस्मिन् प्रसङ्गे कुतो वा शोकावेगः । नायं विलापस्य समयः किन्तु सन्तोषभरस्य इति ।

కాళిందీ నదీతీరంలో కాల్పీ అనే పేరుగల ఒక నగరం ఉండేది. అక్కడ ఒకానొక వీరుని యొక్క కుమార్తె చింతాదేవి అనే పేరుగల యువతి ఉంది. ఆమెకు యుద్ధ నైపుణ్యంలో ప్రావీణ్యం ఉంది. ఆమె బాల్యంలోనే మాతృవియోగాన్ని పొందింది. అప్పటి నుండి ఆమె తండ్రి సంరక్షణలో పెరిగింది. ఆమె బాల్యమంతా రణభూమిలోనే గడిచింది. తండ్రి ఆమెను అరణ్యంలోని ఒక కుటీరంలో విడిచి రణరంగంలోకి దూకాడు. ఒంటరిగా ఉన్నప్పటికి ఆమె సంతోషంతో మట్టితో కోటను నిర్మించి, దానిని పడగొడుతూ ఆడుతుండేది. ఆమె ఎల్లప్పుడు వీరుల గాధలను చదువుతూ ఆత్మానందాన్ని పొందేది.

ఒకసారి మూడు రోజులు గడిచినా తండ్రికి సంబంధించిన వార్తలను వినలేదు. మూడవరోజు కొంతమంది సహచరులు వచ్చి కన్నీళ్ళు పెడుతూ దుఃఖించారు. తండ్రి మరణవార్తను చెప్పారు. ఆ సమయంలో ఆమెకు పదమూడు సంవత్సరాలు. ఆమె ధైర్యంగా నవ్వుతూ “తండ్రి వీర స్వర్గం పొందితే ఆనందించాలి” ఈ సమయంలో విచారింపకూడదు. ప్రస్తుతం దుఃఖించవలసిన సమయం కాదు.” అని పలికింది.

There was a city named Kalpi on the banks of river Yamuna. Chinta Devi, a warrior’s daughter was bom there during the times of war. she lost her mother in childhood, she was brought up by her father. Chinta spent her childhood in battlefields only. Her father used to leave her in a cottage in a wood and go to battle. She would play making mud forts and destroying them. She listened to the adventurous stories of the soldiers.

Once there was no news of her father for three days. On the third day she received the news of the death of her father from his associates, who were sad. But Chinta smiled and said that it was an occasion for rejoicing and not mourning, as her father achieved the heaven of the warriors.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 6 भारतभूषा वीरयोषा

कश्चन सैनिको व्याजहार ‘वयं न शोचामः ते पितुः कृते, परम् अनाथायाः ते स्थितिं परिचिन्त्य । कुत्र वा स्थास्यते भवत्या इतःपरम्’ इति । चिन्ता गम्भीरस्वरेण आह – ‘अहं वीरपितुः कन्या अस्मि । तम् एव अनुचिकीर्षामि तादृशैः एव कर्मभिः । यदि मम जनके वास्तवो वः अभिमानः तर्हि सङ्गृह्यन्तां सैनिकाः । भगवतः अनुग्रहश्चेत् भवत्साहाय्येन आहवे विजयेन सङ्गत्ता स्याम् । साम्प्रतं गम्यतां पुनस्समराङ्गणम् ।’

व्यतीयुः पञ्च वसन्ताः । सर्वतः प्रभुत्वम् आविश्चकार चिन्तादेवी । विजयश्रियम् इव मूर्तिमतीं समरे निश्शङ्कं निर्भयं च अवस्थितां तां निरीक्ष्यैव सैनिका नितराम् उत्साहशालिनः समपद्यन्त । पुरो गच्छन्त्यां तस्यां वीरास्ते पुरुषाः कथं न पुरस्सरेयुः ।

ఒక సైనికుడు మేము మీ తండ్రి గారిని గురించి దుఃఖించడం లేదు, అయితే అనాథ అయిన మీ పరిస్థితి గురించి విచారిస్తున్నాము. మీరు ఇప్పటి నుండి ఎక్కడ ఉండగలరు ? అని పలికాడు. పిమ్మట ఆమె, నేను వీరుడైన తండ్రి కుమార్తెను. ఒకవేళ మీకు మా తండ్రిపై అభిమానం ఉంటే సైనికులందరిని సమీకరించండి. మీ అనుగ్రహం ఉంటే, మీ సహాయంతో యుద్ధంలో విజయాన్ని పొందగలను. ప్రస్తుతం వెళ్ళండి. తిరిగి యుద్ధంలో కలుద్దాం.

ఐదు సంవత్సరాలు గడిచాయి. చింతాదేవి ప్రభుత్వాన్ని అంతట విస్తరించింది. మిక్కిలి ఉత్సాహశీలురాలైన చింతాదేవిని చూచి సైనికులు ఉత్సాహశీలురైనారు. యుద్ధ రంగంలో ఆమెను వీరులు అంతట అనుసరించారు.

When she was reminded of her lonely state, she said that she was the daughter of a warrior. She would follow her far her only. She asked them to gather soldiers. They could win if there was the grace of god.

Five years passed. Chinta Devi established her every-where. Soldiers were inspired by her presence in the battlefield. They followed her.

तेषु सैनिकेषु रत्नसिंहो नाम राजपुत्रयुवा आसीत् यस्मिन् विशेषतो स्निह्यति स्म चिन्ता | शान्तस्वभावः अविकत्थनश्च रत्नसिंहः कर्तव्यबुद्ध्यैव कर्माणि कुर्वन् आसीत् । तस्य पराक्रमेण सन्तुष्टा चिन्ता तं परिणीतवती । प्रायो विधिः न सहते प्रणयिनोः चिरं विलाससुखम् । अकस्मात् दुर्गम् उपासन्ना रिपुवरूथिनी इति वार्तां श्रुत्वा रत्नसिंहः स्वीचकार करे अरिभीकरं करवालम् । हयमारुढं रत्नसिंहं विलोक्य चिन्ता मनसा प्रार्थयामास विजयाय भगवतीं कुलदेवताम् ।

सहचरैः सैनिकैः सह रणाभिमुखं पदं निक्षिपन्नपि मनसा गृहाभिमुख एवासीत् रत्नसिंहः । अतः समासन्ने समरप्रदेशे अनुयायिवर्गं सहसा विहाय तेन अज्ञातः क्वापि निलिल्ये रत्नसिंहः । ततश्च नायकविहीनां शिथिलितोत्साहां च चिन्तादेव्याः चमूं सकलाम् अपि भृशम् अवासादयद् विपुलं रिपुबलम् ।

सन्ध्यासमये कश्चन सैनिकः अभ्येत्य निश्शस्त्रः तूष्णीम् अतिष्ठत् चिन्तायाः पुरतः । तस्य मुखात् सर्वसैन्यस्य क्षयं शत्रूणां दुर्गाक्रमणं च श्रुत्वा निष्कम्पेन स्वरेण आदिदेश चिन्ता – ‘सत्वरं सज्जीक्रियतां चिता’ ।

ఆ సైనికులలో రత్నసింహుడు అనే పేరుగల యువకుడైన రాజకుమారుడు ఉన్నాడు. శాంతస్వభావుడు, అహంకారంలేని రత్నసింహుడు కర్తవ్య బుద్ధితో తన పనుల్లో ఆసక్తిని ప్రదర్శించేవాడు. అతని పరాక్రమాన్ని చూచి చింతాదేవి సంతోషితురాలై అతడిని వివాహం చేసుకుంది. విధివిలాసం వల్ల వారి ప్రణయకాల సుఖం ఎక్కువకాలం జరుగలేదు. ఆకస్మికంగా శత్రుసైన్యం రాజ్యాన్ని ఆక్రమించిందనే వార్త విని రత్నసింహుడు ఖడ్గాన్ని ధరించాడు. గుర్రాన్ని ఎక్కి బయలుదేరుతున్న భర్తను చూచి ఆమె మనసులో విజయం కలగాలని ఆశించింది.

సహచర సైనికులతో రత్నసింహుడు యుద్ధానికి బయలుదేరాడు. అతని మనసు మాత్రం ఇంటియందే లగ్నమైంది. యుద్ధ రంగాన్ని వీడి వెంటనే రత్నసింహుడు ఎక్కడో దాక్కున్నాడు. దాంతో నాయకత్వ లేమితో వీరసింహుడి సైన్యమంతా చెల్లాచెదురైంది. పరాజయాన్ని పొందింది.

సంధ్యా సమయంలో ఒకానొక సైనికుడు ఆయుధాలు లేనివాడై చింతాదేవి ఎదుట నిలబడ్డాడు. అతడి ద్వారా సైన్యమంతా క్షీణించిందని, దుర్గాలను శత్రువులు ఆక్రమించారని విని గద్గదస్వరంతో “చితిని ఏర్పాటుచేయండి” అని ఆదేశించింది.

There was a young Rajput warrior Ratnasimha among the soldiers. He was composed and devoted to his work. Chinta married him. However, fate would not allow happy times to lovers. Suddenly their fort was attacked by the enemy. Ratnasimha took his sword and Chinta prayed for his victory.

Though Ratnasimha went to the battlefield, his mind was at home only. He left his followers and hid somewhere. The enemy easily defeated the army of Chinta that was without leader.

A soldier reported the matter to Chinta that evening. Chinta firmly order to prepare the funeral pyre.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 6 भारतभूषा वीरयोषा

सायं दीपप्रज्वालनसमये चितापि प्रज्वालिता । साध्वी चिन्तादेवी सर्वालङ्कारमण्डिता परलोकयात्रां कर्तुं सज्जीबभूव । चितां परितो दिदृक्षूणां जनानां महान् समूहः समागतः । दुर्गं पर्यवृण्वन् शत्रवः । तदा अश्रूयत वाजिनः खुरपुट ध्वनिः । कोऽपि सैनिकवेषधारी युवा प्राविशत् तत्प्राङ्गणम् । जनाः साश्चर्यम् अपश्यन् । सोऽयं रत्नसिंहः ।

रत्नसिंहः चितासमीपम् आगत्य कम्पमानशरीरो अवदत् प्रिये अद्यापि प्राणिमि रत्नसिंहोऽहम् । किमिदम् असाम्प्रतम् आरब्धं त्वया । परं चिन्तादेवी न ददर्श चक्षुरुन्मील्य तम् । केवलं दक्षिणपाणिसंज्ञया पश्चाद्गन्तुम् असूचयत् तं रत्नसिंहम् ।

तस्याः मुखकमलम् अनलेन कवलितम् । तदानीमपि चिन्ता स्पष्टस्वरेण आह – ‘सर्वं जानामि । भवान् न मे रत्नसिंहः । मदीयो रत्नसिंहः सत्यं शूराग्रेसर आसीत् । एतस्य तुच्छदेहस्य रक्षणाय आत्मनः पवित्रक्षत्रियधर्मात् न कदापि प्रच्युतो भवति । यस्याहं चरणदासी स रत्नसिंहो विभ्राजते देवलोके । मा दूषय रत्नसिंहस्य पावनं नामधेयम् । स वीरो राजपुत्रः’ ।

चरमशब्दे समुच्चार्यमाण एव अग्निज्वालाः समाच्छादयन् चिन्तायाः शिरः । रत्नसिंहो विभ्रान्त इव ददर्श तं भीकरं दृश्यम् । अन्ततश्चैकं निश्वासं निस्सार्य आत्मनः अपराधस्य प्रायश्चित्तं विधातुं प्राविशत् सहसा चिताम् । अहो प्राचीनानाम् आर्यललनानाम् ओजस्विता ।

సాయంత్రం దీప ప్రజ్వాలన సమయంలో చితి కూడా ప్రజ్వరిల్లింది. పతివ్రత అయిన చింతాదేవి సర్వాలంకార సంశోభితురాలై పరలోక యాత్రను చేయడానికి సిద్ధు రాలైంది. చితి చుట్టూ ఎంతోమంది చూడటానికి వచ్చారు. శత్రువులు దుర్గాన్ని చుట్టు ముట్టారు. ఆ సమయంలో రత్నసింహుడు ఆ ప్రదేశానికి వచ్చాడు. ప్రజలు అతడిని ఆశ్చర్యంతో చూశారు.

రత్నసింహుడు చితిని సమీపించి వణకిపోతూ తన భార్యతో ఓయీ ! ఇప్పటికీ నీయందు ప్రేమ తగ్గలేదు ఎందుకు ఇలాంటి చేయకూడని పని చేస్తున్నావు ?” అని పలికాడు. ఈ మాటలు విని చింతాదేవి అతడిని చూడటానికి కూడా ఇష్టపడలేదు. చేతి సంజ్ఞతో దూరంగా తొలగిపొమ్మని సూచించింది. ఆమె ముఖం కమిలిపోయింది. ఆ సమయంలోను స్పష్టంగా “ఓయీ ! నాకు అంతా తెలుసు. నీవు నా రత్నసింహుడివి కాదు. నా రత్నసింహుడు శూరాగ్రేసరుడు. అతడు తన తుచ్ఛమైన శరీరాన్ని రక్షించు కోవడానికి క్షత్రియధర్మం నుండి మరలడు నా రత్నసింహుడు దేవలోకంలో ప్రకాశిస్తున్నాడు. నీవు పవిత్రమైన రత్నసింహుని పేరును ఉచ్చరించవద్దు. అతడు వీరుడైన రత్నసింహుడు.

చివరి మాటలు మాట్లాడుతుండగనే అగ్ని జ్వాలలు ఆమె శిరస్సును చుట్టు ముట్టాయి. రత్నసింహుడు భీకరమైన ఆ దృశ్యాన్ని ఆశ్చర్యంగా చూశాడు. చివరిగా ఒక నిట్టూర్పు విడిచి తన తప్పునకు ప్రాయశ్చిత్తాన్ని చేసుకోవాలనుకున్నాడు. వెంటనే అదే చితిలో ప్రవేశించాడు. తన తనువు చాలించాడు. ఆహా ! మన ప్రాచీన స్త్రీల తేజస్సు తెగువ ఎంత అద్భుతము !

The pyre was lit at the time of lighting the-evening lamps Chinta Devi adorned herself with ornaments in preparation for her final journey. Onlookers gathered around the pyre. Then they heard the sound of hooves. A person entered that place in the attire of a soldier. Lo, he was Ratnasimha.

He came to the pyre and said that he was alive. But Chinta did not look at him. She waved her right hand to indicate to him to step aside.

Her face was singed with heat. She said clearly that she knew everything. He was not her Ratnasimha. Her husband was a true warrior. He would never step away from his royal duty for the sake of worthless body. He was in heaven now. His name should not be sullied.

As she ended her speech, the fire engulfed her head. Ratnasimha saw that in awe. Later sighing deeply, he also entered the fire as if to atone his sin. Oh, the greatness of the women of ancient times!

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar वाच्य

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar वाच्य Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar वाच्य

वाच्य (Voice) की परिभाषा :
क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते हैं, जिसके द्वारा इस बात का परिचय होता है कि वाक्या के अन्तर्गत कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है ।

वाच्य के प्रयोग :
एसा देखा जाता है कि वाक्य की क्रिया का लिंग, वचन एवं पुरुष कभी कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार होता है, तो कभी कर्म के लिंग- वचन – पुरुष के अनुसार, लेकिन कभी-कभी वाक्य की क्रिया कर्ता तथा कर्म के अनुसार न होकर, एकवचन, पुंलिंग तथा अन्यपुरुष होती है ।

इस तरह के ‘प्रयोग’ तीन प्रकार के होते हैं –
(क) कर्तरि प्रयोग
(ख) कर्मणि प्रयोग
(ग) भावे प्रयोग

(क) कर्तरि प्रयोग :
जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हों तब कर्तरि प्रयोग होता है;
जैसे – मोहन अच्छी पुस्तकें पढता है ।

(ख) कर्मणि प्रयोग :
जब वाक्य की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्म के लिंग वचन और पुरुष के अनुसार हों तब कर्मणि प्रयोग होता है;
जैसे- सीता ने पत्र लिखा ।

(ग) भावे प्रयोग
जब वाक्या की क्रिया के लिंग, वचन और पुरुष कर्ता अथवा कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार न होकर एकवचन, पुंलिंग तथा अन्य पुरुष हों तब भावे प्रयोग होता है;
जैसे- मुझसे चला नहीं जाता। सीता से रोया नहीं जाता ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar वाच्य

इस प्रकार के प्रयोगों के अनुसार वाच्य के तीन भेद हैं- हिंदी में वाच्य के तीन भेद हैं-

  1. कर्तृवाच्य (Active voice)
  2. कर्म वाच्य (Passive voice)
  3. भाव वाच्य (Impersonal voice)

वाच्य के भेद :
1) कर्तृवाच्य : (Active voice)
कर्तृवाच्य प्रधान वाक्य में कर्ता की प्रधानता होती है ।
जैसे – राम पुस्तक पढ़ता है, मैंने पुस्तक पढ़ी ।

2) कर्मवाच्य : (Passive voice)
कर्मवाच्य प्रधान वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है । इस वाक्य में क्रिया के लिंग, वचन कर्म के अनुसार होते हैं ।
जैसे – पुस्तक पढ़ी जाती है; आम खाया जाता है ।
यहाँ क्रियाएँ कर्ता के अनुसार रुपान्तररित न होकर कर्म के अनुसार परिवर्तित हुई हैं। जैसेः सीता से (के द्वारा) आम खाया जाता है ।

3) भाववाक्य : ( Impersonal voice)
क्रिया के उस रुपान्तर को भाववाच्य कहते हैं, जिससे वाक्य में क्रिया अथवा भाव की प्रधानता का बोध हो ।
जैसे – मोहन से टहला भी नहीं जाता। मुझसे उठा नहीं जाता । धूप में चला नहीं जाता ।

भाववाच्य में अकर्मक क्रिया का कर्म वाच्य रुप होता है और कर्म लुप्त होता है । भाववाच्य की क्रिया सदैव अन्य पुरुष, पुल्लिंग, एक वचन में आती है । भाववाच्य की क्रियाएँ अक्सर अशक्तता प्रकट करती हैं । क्रिया को सामान्य भूतकाल में बदलकर उसके साथ ‘जाता’ क्रिया रुप जोड़ने से अकर्मक क्रिया से भाववाच्य बन जाता है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar वाच्य

उदाहरण :
कर्तृवाच्य – कर्तृवाच्य
राम पुस्तक पढ़ता है । – राम से पुस्तक पढ़ी जाती है ।
सीता कहानी लिखती है । – सीता से कहानी लिखी जाती है।
वह खेलता है । – उससे खेल जाता है ।
वह रोटी खाता है । – उससे रोटी खायी जाती है ।
राजु ने गीत लिखा । – राजु से गीत लिखा गया ।
मोहन पाठ पढ़ता है । – मोहन से पाठ पढ़ा जाता हे ।
वह पत्र देता है । – उससे पत्र दिया जाता है ।
तुम फूल तोड़ोगे । – तुम्हारे द्वारा फूल तोड़ा जाएगा।
वह कविता सुनती है । – उससे कविता सुना जाता है ।
अखिला फल खाती है । – अखिला से फल खाया जाता है ।

कर्मवाच्य – भाव वाच्य
सीता नहीं बैठती है । – सीता से बैठा नहीं जाता ।
राजू नहीं चलता है । – राजू से चला नहीं जाता है ।
अखिला नहीं सोती है । – अखिला से सोया नहीं जाता है
वह नहीं हँसता है । – उससे हँसा नहीं जाता है ।
राम नहीं सोता है । – राम से सोया नहीं जाता है ।

निम्नलिखित वाक्यों के वाच्य बदलिए ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
राम पुस्तक पढ़ता है ।
उत्तर:
राम से पुस्तक पढ़ी जाती है ।

प्रश्न 2.
राजु ने गीत लिखा ।
उत्तर:
राजु से गीत लिखा गया ।

प्रश्न 3.
वह रोटी खाता है ।
उत्तर:
उससे रोटी खाया जाता है ।

प्रश्न 4.
अखिला से फल खाया जाता है।
उत्तर:
अखिला फल खाती है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar वाच्य

प्रश्न 5.
सीता नहीं बैठती ।
उत्तर:
सीता से बैठा नहीं जाता ।

प्रश्न 6.
वह नहीं हँसता
उत्तर:
उससे हँसा नहीं जाता है ।

प्रश्न 7.
राम नहीं सोता है ।
उत्तर:
राम से सोया नहीं जाता है ।

प्रश्न 8.
राजु से चला नहीं जाता है ।
उत्तर:
राजु नहीं चलता है ।

प्रश्न 9.
वह पत्र देता है ।
उत्तर:
उससे पत्र दिया जाता है ।

प्रश्न 10.
तुम फूल तोड़ोगे ।
उत्तर:
तुम्हारे द्वारा फूल तोड़ा जाएगा ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar अपठित बोधक गद्यांश Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

अपठित शब्द का अर्थ है जो इससे पहले नहीं पढ़ा गया है। इस तरह के गद्यांश पाठ्यपुस्तकेतर होते हैं। इसका उद्देश्य पठन क्षमता का विकास करना, अर्थग्रहण करना तथा लिखित अभिव्यक्ति पर अधिकार प्राप्त करना है । दैनंदिन जीवन में हमें कई विषयों को पढ़ना पड़ता है, जिनका समाधान हमें सोच – समझकर देना पड़ता है। अतः यहाँ पर पठन और ग्रहण क्षमता का विकास करने के उद्देश्य से कुछ बोधक गद्यांश दिए जा रहे हैं ।

1. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

अपने पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए हमें सबसे पहले अपनी मुख्य जरूरत ‘जल’ को प्रदूषण से बचाना होगा । कारखानों का गंदा पानी, घरेलू, गंदा पानी, नालियों में प्रवाहित मल, सीवर लाइन का गंदा निष्कासित पानी समीपस्थ नदियों और समुद्र में गिरने से रोकना होगा । कारखानों के पानी में हानिकारक रासायनिक तत्व घुले रहते हैं जो नदियों के जल को विषाक्त कर देते हैं, परिणामस्वरुप जलचरों के जीवन को संकट का सामना करना पड़ता है।

दूसरी ओर हम देखते हैं कि उसी प्रदूषित पानी को सिंचाई के काम में लेते हैं जिसमें उपजाऊ भूमि भी विषैली हो जाती है । उसमें उगने वाली फसल व सब्जियां भी पौष्टिक तत्वों से रहित हो जाती हैं जिनके सेवन से अवशिष्ट जीवननाशी रसायन मानव शरीर में पहुंच कर खून को विषैला बना देते हैं । कहने का तात्पर्य यही है कि यदि हम अपने कल को स्वस्थ देखना चाहते हैं तो आवश्यक है कि बच्चों को पर्यावरण सुरक्षा का समुचित ज्ञान समय समय पर देते रहें । अच्छे व मंहगें ब्रांड के कपड़े पहनाने से कहीं पहत्वरूर्ण है उनका स्वास्थ्य, जो हमारा भविष्य व उनकी पूंजी है ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
पर्यावरण को बचाने के लिए सबसे पहले क्या करना चाहिए ?
उत्तर:
पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए हमें सबसे पहले अपनी मुख्य जरूरत ‘जल’ को प्रदूषण से बचाना होगा ।

प्रश्न 2.
नदियों और समुद्रों में क्या निष्कासित किया जा रहा है ?
उत्तर:
कारखानों का गंदा पानी, घरेलू गंदा पानी, नालियों में प्रवाहित मल; सीवर लाइन का गंदा निष्कासित किया जा रहा है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
खून कैसे विषैला बनता है ?
उत्तर:
प्रदूषित पानी को सिंचाई के काम में उपयोगित करके उगनेवाली फसल व सब्जियाँ सेवन से खून विषैला बनता है ।

प्रश्न 4.
हमारे भविष्य की पूंजी क्या है ?
उत्तर:
हमारे भविष्य की पूंजी खास्थ्य है । मनुष्य खस्थ से रहना अधिक धन कमाने से बहतर है !

2. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

एच. आई. वी एक अतिसूक्ष्म विषाणु हैं जिसकी वजह से एड्स हो सकता है। एड्स स्वयं में कोई रोग नहीं है बल्कि एक संलक्षण है । यह मनुष्य की अन्य रोगों से लड़ने की नैसर्गिक प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता हैं । प्रतिरोधक क्षमता के क्रमशः क्षय होने से कोई भी अनसरवादी संक्रमण, यानि आम सर्दी जुकाम से ले कर फुफ्फुस प्रदाह, टीबी, क्षय रोग, कर्क रोग जैसे रोग तक सहजता से हो जाते हैं और उनका इलाज करना कठिन हो जाता हैं और मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है। यही कारण है की एड्स परीक्षण महत्वपूर्ण है ।

सिर्फ एड्स परीक्षण से ही निश्चित रूप से संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। एइस एक तरह का संक्रामक यानी की एक से दूसरे को और दुसरे से तीसरे को होने वाली एक गंभीर बीमारी है। एड्स का पूरा नाम ‘एक्काई इम्यूनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ ( acquired immune deficiency syndrome) है और यह एक तरह के विषाणु जिसका नाम HIV (Human immunodeficiency virus) है, से फैलती है । अगर किसीको HIV है तो ये जरूरी नहीं की उसको एड्स भी है । HIV वायरस की वजह से एड्स होता है अगर समय रहते वायरस का इलाज़ कर दिया गया तो एड्स होने खतरा काम हो जाता है ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
एच. आई. वी. कैसी विषाणु है ?
उत्तर:
एच.आई.वी एक अतिसूक्ष्म विषाणु हैं ।

प्रश्न 2.
किसका परीक्षण महत्वपूर्ण है ?
उत्तर:
एड्स परीक्षण महत्वपूर्ण है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
AIDS का पूर्ण रूप क्या है ?
उत्तर:
एंक्वायई इम्यूनो डेफिसिएंश सिंड्रोम
[Acquired immune deficiency syndrome)

प्रश्न 4.
एड्स का खतरा कैसे कम हो सकता है ?
उत्तर:
HIV वायरस का इलाज सही समय पर दीया गया तो खतरा कम हो सकता है ।

3. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए। प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में समान अनुपात में तीन क्षैतिज पट्टियां हैं : गहरा सरिया रंग सबसे ऊपर, सफेद बीच में और हरा रंग सबसे नीचे है । ध्वज की लंबाई-चौड़ाई-चौड़ाई का अनुपात 3 : 2 है। सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का चक्र है।

शीर्ष में गहरा केसरिया रंग देश की ताकत और को साहस दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का संकेत है । हरा रंग देश के शुभ, विकास और उर्वरता को दर्शाता है ।

इसका प्रारुप सारनाथ में अशोक के सिंह स्तंभ पर बने चक्र से लिया गया है । इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराबर है और इसमें 24 तीलियां हैं । राष्ट्रीय ध्वज श्री पिंगली वेंकैया जी ने डिजाइन किया था । भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
भारत के झंडे में कितने रंग हैं ?
उत्तर:
भारत के झंडे में तीन रंग है ।

प्रश्न 2.
तिरंगे का चक्र किसके नाम पर रखा गया है ?
उत्तर:
अशोक के नाम पर

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
चक्र में कितनी तिलियाँ होती है ?
उत्तर:
24 तीलिया

प्रश्न 4.
सफेद पट्टी किसका संकेत है ?
उत्तर:
शांति और सत्य का संकेत है ।

4. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

गोदावरी दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है । यह नदी दूसरी प्रायद्वीपीय नदियों में से सबसे बड़ी नदी है। इसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है । इसकी उत्पत्ति पश्चिमी घाट में त्रयंबक पहाड़ी से हुई है । यह महाराष्ट्र में नासिक जिले से निकलती है। इसकी लम्बाई प्रायः 1465 किलोमीटर है । इस नदी का पाट बहुत बड़ा है। गोदावरी की उपनदियों में प्रमुख हैं प्राणहिता, इन्द्रावती, मंजिरा । यह महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से बहते हुए राजहमहेन्द्री शहर के समीप बंगाल की खाड़ी मे जाकर मिलती है।

कुछ विद्वानों के अनुसार, इसका नामकरण तेलुगु भाषा के शब्द ‘गोद’ से हुआ है, जिसका अर्थ मर्यादा होता है। एक बार महर्षि गौतम ने घोर तप किया। इससे रुद्र प्रसन्न हो गए और उन्होंने एक बाल के प्रभाव से गंगा को प्रवाहित किया। गंगाजल के स्पर्श से एक मृत गाय पुनर्जीवित हो उठी। इसी कारण इसका नाम गोदावरी पड़ा । गौतम से संबंध जुड जाने के कारण इसे गौतमी भी कहा जाने लगा । इसमें नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। गोदावरी की सात धारा वसिष्टा, कौशिकी, वृद्ध गौतमी, भारद्वाजी, आत्रेयी और तुल्या अतीव प्रसिद्ध है। पुराणों में इनका वर्णन मिलता है ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
गोदावरी कहाँ की प्रमुख नदी है ?
उत्तर:
गोदावरी दक्षिण भारत की प्रमुख नदी है ।

प्रश्न 2.
इस नदी की लंबाई कितनी है ?
उत्तर:
इस नदी की लंबाई 1465 किलोमीटर है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
गोदावरी शब्द का नाम करण किस शब्द से हुआ ?
उत्तर:
गोदावरी शब्द का नामकरण तेलुगु भाषा के शब्द ‘गोद’ से हुआ है।

प्रश्न 4.
गोदावरी का दूसरा नाम क्या है ?
उत्तर:
गोदावरी का दूसरा नाम गौतमी भी है ।

5. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए । प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

मोहनदास करमचन्द गांधी (2 अक्तूबर 1869-30 जनवरी 1948) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे । वे सत्याग्रह ( व्यापक सविनय अवज्ञा ) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया । उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है।

संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है । गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था । उन्हें बापू (गुजराती भाषा में बापू यानी पिता) के नाम से भी याद कया जाता है। सुभाष चन्द्रबोस ने 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगी थीं । प्रति वर्ष 2 अक्तूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है ।

प्रश्न – उत्तर :

प्रश्न 1.
हात्मा गांधी का जन्म कब हुआ ?
उत्तर:
2 अक्तूबर 1869 में गाँधीजी का जन्म हुआ

प्रश्न 2.
गांधी जी को महात्मा नाम से सबसे पहले किसने संबोधित किया ?
उत्तर:
“राजवैद्य जीवराम कालिदास’ ने संबोधित किया ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
रंगून रेडियो से किसने संबोधित किया ?
उत्तर:
“सुभाष चन्द्र बोस’ रंगून रेडियो से संबोधित किया ।

प्रश्न 4.
गांधी जयंती कब मनाते हैं ?
उत्तर:
“2 अक्तूबर” गाँधी जयंती मनाते हैं ।

6. नीचे दिया गया गद्यांश पढ़िए। प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है । पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भैगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्जा के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर – पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं । हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण – पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है । इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है । पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं ।

प्रश्न – उत्तर

प्रश्न 1.
भारत का आधिकारिक नाम क्या है ?
उत्तर:
भारत गणराज्य ।

प्रश्न 2.
भारत पूर्ण रूप से किस गोलार्ध में स्थित है ?
उत्तर:
उत्तरी गोलार्ध में स्थित है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar अपठित बोधक गद्यांश

प्रश्न 3.
उत्तर में भारत की सीमा क्या है ?
उत्तर:
उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से है ।

प्रश्न 4.
अरब सागर कहाँ है ?
उत्तर:
पश्चिम में अरब सागर है ।

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 5th Lesson वृक्षरक्षिका पितामही Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 5th Lesson वृक्षरक्षिका पितामही

निबन्धप्रश्नौ (Essay Questions) (వ్యాసరూప సమాధాన ప్రశ్నలు)

पश्न 1.
वृक्षरक्षणार्थं पितामहया उक्तान् उपायान् लिखत ।
(Write the ideas given by grandmother to save trees)
पश्न 2.
वृक्षणां रक्षणे कसरसिंहस्य श्रद्धां विरादयत ।
(Explain the devotion of Kesara Simha for the protection of trees.)
उत्तर:
‘వృక్షా రక్షికా పితామహీ’ అనే పాఠ్యభాగాన్ని శ్రీ పద్మశాస్త్రిగారు రచించారు. ఇందులో చెట్లను నాటడం, వాటిని సంరక్షించడం వంటి విషయాలను చక్కగా చెట్ల వల్ల కలిగే ప్రయోజనాలను కవి చక్కగా పాఠంలో ఆవిష్కరించారు.

పూర్వం కాశ్మీర దేశంలో ఒక రైతు కుటుంబం ఉండేది. రైతు కుమారుడు కేసర సింహుడు. అతని తల్లిదండ్రులు, నాయనమ్మ పశుపోషణ, పండ్లను అమ్మడం వంటి పనులు చేస్తూ జీవితం గడుపుతున్నారు. కేసరసింహుని నాయనమ్మ చెట్లను నాటడంలోను, వాటిని పెంచడంలోను ఆసక్తి చూపేది. మంచుపడే కాలంలో మొక్కలను రక్షించడానికి వాటిపై గడ్డిని కప్పి ఉంచేది. కేసరసింహుడు తెలియక చెట్ల కొమ్మలు విరిస్తే ఆమె బాధపడేది. అతడిని కోపగించేది. ఆమె కేసరసింహునికి పక్షులు కొరికిన పండ్లను ‘పండ్లతో ఆహారంగా ఇచ్చేది.

మంచి పండ్లను ఇవ్వమని కేసరసింహుడు అడిగితే కడుపు నింపుకోవడం సాధ్యంకాదు. నీవు యువకుడివై ఆహారాన్ని ఉత్పత్తిచేసే స్థాయికి వచ్చినప్పుడు నేను పండ్లను విక్రయించను. నీవు పండ్లను తినాలంటే మొక్కలను పెంచు’ అని పలికింది. నాయనమ్మ మాటలు కేసరసింహుడిని ఆకట్టుకున్నాయి.

కేసరసింహుడు చెట్ల పెంపకంపై ఆసక్తిని చూపాడు. చెట్లను నాటడంలోను, వాటిని పెంచడంలోను నాయనమ్మకు సహకరించాడు. కొత్త మొక్కలను నాటాడు. తరువాత ఐదు సంవత్సరాలకు నాయనమ్మ మరణించింది. ఆ సమయంలో అతనికి పదహారేళ్ళు. నాయనమ్మ మరణం కేసరసింహునికి బాధ కలిగించింది.

బాగా తలచుకొని దుఃఖించాడు. ఒకరోజు అతనికి రాత్రి కలలో నాయనమ్మ కనిపించింది. అతడు ఆనందంతో ఆమెను కౌగిలించుకున్నాడు. ఇంటికి రమ్మని పిలిచాడు. నీవు నాటిన, పెంచిన చెట్లు నిన్ను ‘నాయనా ! గుర్తుకు తెస్తున్నాయని చెప్పాడు. అది విని నాయనమ్మ కేసరసింహునితో నేను మరణించలేదు.

నా దేహం కృశించిపోవడంతో మరొక శరీరంలో ప్రవేశించాను. నేను ఉన్న చోటు నుండి ప్రస్తుతం నేను రాలేను. నీవు మొక్కలను నాటు, వాటిని పెంచు. దానివల్ల నీవు నన్ను మరచిపోగలవు’ అని చెప్పింది. వెంటనే నాయనమ్మ అదృశ్యమైంది.

కేసరసింహుని నిద్ర చెదరిపోయింది. వెంటనే లేచి చెట్లకు పరిచర్యలు చేయటం మొదలు పెట్టాడు. మరుసటి రోజున మరల నాయనమ్మ కలలో కనిపించింది. ఆమెతోపాటుగా ఇద్దరు దేవకన్యలు కూడా ఉన్నారు. నాయనమ్మ అనేక విధములైన పండ్లతో ఉన్న వెండి పళ్ళెమును అతని ముందు ఉంచింది. కేసరసింహుడు ఒక పండును తీసుకొని తినటం మొదలుపెట్టాడు. ఆ పండు యొక్క రుచి ఇంతకు ముందు తాను ఎపుడూ చూడలేదు.

అపుడు అతనికి మెలకువ వచ్చింది. చాలాకాలం అయింది. కేసరసింహుడు పండ్లను అమ్ముతూ చాలా ధనం సంపాదించాడు. అతడు చాలా శ్రమ పడ్డాడు. చాలా రోజులు గడచినా అతనికి కలలో తన నాయనమ్మ కనబడలేదు. కానీ ఆ రోజు రాత్రి నాయనమ్మ కలలో కనిపించింది. ఆమె తెల్లని సింహాసనంపైన కూర్చుని తెల్లని వస్త్రాలతో దేవకన్యలా కనబడింది. కేసరసింహుడు ఆమెకు నమస్కరించాడు.

ఆమె చాలా ప్రసన్నంగా, ‘నాకు చాలా ఆనందంగా ఉంది. నీవు చాలా చెట్లు నాటి చాలా మంచిపని చేశావు. ఇక నుండి గ్రామంలో అనారోగ్యం ఉండదు’. ఆ మాటలు విని కేసరసింహుడు ‘నాయనమ్మా, నేను వైద్య సంబంధ మొక్కలు నాటలేదు. అనారోగ్యం ఎలా లేకుండా ఉంటుంది ?’ అన్న మనుమడి మాటలకు ‘ఒరే మనుమడా, చెట్ల నుండి మన ఆరోగ్యానికి అవసరమైన స్వచ్ఛమైన గాలి వస్తుంది, అని చెప్పి చప్పట్లు కొట్టగానే, ఇద్దరు “దేవకన్యలు వచ్చారు.

వారు రాగానే ‘నా మనుమడికి పచ్చటి నగరాన్ని, తెల్ల పర్వతాన్ని చూపండి. అపుడు దేవకన్యలు చప్పట్లు కొట్టగానే తెల్లని గుఱ్ఱాలతో ఉన్న తెల్లని రథం కనబడింది. దేవకన్యలు కూడా ఆ రథాన్ని అనుసరిస్తున్నారు. మార్గంలో స్వచ్ఛమైన నదులు ప్రవహిస్తున్నాయి. మంచుతో కప్పబడిన కొండలు, మంచి పూలతో కూడిన చెట్లు మార్గంలో ఉన్నాయి. కేసరసింహుడు మిక్కిలి ఆనందించాడు. నాయనమ్మ కేసరసింహునితో, “నాయనా ! వృక్షాలకు ఈ లోకంలో ఎంతో ప్రాధాన్యత ఉంది. చెట్లు మనకు మంచి మట్టిని, నీటిని, గాలిని అందిస్తాయి.

స్వేచ్ఛగా అడవులను పాడుచేస్తే భూగోళంపై ఉష్ణోగ్రత పెరుగుతుంది. హిమాలయ పర్వతాలు చివరకు కనుమరుగై పోతాయి. సముద్రాలు తమ పరిధిని దాటి ముందుకు వస్తాయి. దానివల్ల ఎన్నో ఉపద్రవాలు కలుగుతాయి. ఈ పరిణామాలను అధ్యయనం చేయాలి. అప్పుడే మానవ జీవన పరిస్థితులు మెరుగుపడతాయి.” అని పలికింది. అప్పటి నుండి కేసరసింహుడు మొక్కలను నాటడం లోను, వాటిని సంరక్షించడంలోను శ్రద్ధ చూపాడు.
वृक्षो रक्षति रक्षितः

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

Introduction: The lesson Vriksharakshika Pitamahi was written by Padma Sastri. It is taken from the author’s Sanskritakatha- satakam Part 1. This lesson narrates the importance of planting the trees.

Kesara Simha’s Grandmother : Kesara Simha lived with his parents in one of the valleys of Kasmir. His grandmother was interested in planting trees. She would cover the trees with grass during winter to protect them from snow. She advised Kesara Simha to plant trees if he wanted to eat fruits. By that, he would get merit. Mother Earth would be pleased. त्वं प्रुथिवि अनेन प्रसन्ना भवति| They would get flowers, fruits and wood. Influenced by the words of his grandmother, Kesara Simha also planted trees, and took care of them. Five years later grandmother died.

Kesara Simha’s Dreams: One day, Kesara’s grandmother appeared in his dream, and consoled him. She looked young. She advised him to plant trees everyday so that he could forget her. Kesara Simha woke up and started to take care of trees. His grandmother again appeared in his dream and offered him delicious fruits in a silver bowl.

Grandmother’s Advice : After many days grandmother appeared in Kesara Simha’s dream sitting on a throne like a celestial damsel. She was pleased as he planted many trees. She said that from that day onwards there would be no disease in the village. As trees would give pure air, there would be the benefit of health. The nymphs who appeared there took him in chariot to see the clear streams and trees full of fruits and flowers. His grandmother advised him that trees alone were the most important ones in this world.

अस्मिन संसारे वृक्षाणामेव प्राधानयम वर्तेते| They would give pure air, water and soil. If the trees were cut indiscriminately, earth would heat up, snow would melt, and oceans would flood the earth. People would suffer. She also advised that education was necessary to know the secrets. अतः पाठनमावश्यकं वर्तते |
Kesara Simha took a firm decision that he would protect the world by growing trees.

लघु समाधान प्रश्नाः  (స్వల్ప సమాధాన ప్రశ్నలు) (Short Answer Questions)

पश्न 1.
वृक्षाः अस्मभ्यं किं किं प्रयच्छन्ति ?
समादान:
वृक्षाः अस्मभ्यं स्वच्छां मृत्तिकां स्वच्छं जलं प्रयच्छन्ति ।

पश्न 2.
केसरिसिंहः कुत्र न्यवसत् ?
समादान:
केसरिसिंहः काश्मीरोपत्यकायां न्यवसत् ।

पश्न 3.
मार्गे नद्यः कथं प्रवहन्ति ?
समादान:
मार्गे स्वच्छाः नद्यः निर्झराः प्रावहन् ।

एकपद समाधान प्रश्नाः (ఏకపద సమాధాన ప్రశ్నలు)(One Word Questions) 

पश्न 1.
शीतर्तौ पितामही वृक्षाणाम् उपरि किम् आच्छादयति स्म ?
समादान:
शीतार्तौ पितामही वृक्षाणां उपरि घासं आच्छादयति स्म ।

पश्न 2.
केसरसिंहः श्रद्धया कस्मिन् संलग्नः ?
समादान:
केसरसिंहः श्रद्धया वृक्षारोपणे संलग्नः ।

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

पश्न 3.
केसरसिंहः कथं धनं आर्जितवान् ?
समादान:
केसरसिंहः फलानि विक्रीय धनं आर्जितवान् ।

कठिनशब्दार्थाः (కఠిన పదాలకు అర్ధాలు)

1. उपत्यका = निम्नभूभागः, అడుగు భూభాగము
2. आजीविका = जीवननिर्वाहाय साधनम्, वृत्तिः, వృద్ధి
3. घासम् = तृणम्, గడ్డి
4. उच्छिष्टफलानि = भुक्तावशिष्टानि फलानि, తినగా మిగిలిన పండ్లు
5. भृशम् = अत्यर्थम्, అధికము
6. जर्जरम् = जीर्णम्, కృశించిన
7. भैषजवृक्षाः = ओषधिगुणयुक्ताः वृक्षाः, ఔషధ చెట్లు
8. तालिकावादनम् = करताडनम्, చప్పట్లు

व्याकरणांशाः (వ్యాకరణం)

सन्धयः (సంధులు)

1. अतः + अस्य = अतोऽस्य – विसर्गसन्धिः
2. पुष्पभाक् + अपि = पुष्पभागपि – जश्त्वसन्धि:
3. तस्मात् + न = तस्मान्न – अनुनासिकसन्धिः
4. पुनः + आगता = पुनरागता – विसर्गसन्धिः
5. हिमवत् + श्वेतवस्त्रवृता = हिमवच्छ्वेतवस्त्रावृता
6. केसरसिंहः + तं = केसरसिंहस्तम् – विसर्गसन्धिः
7. श्वेतपर्वतं + च = श्वेतपर्वतञ्च – परसवर्णसन्धिः
8. पर्वताः + च = पर्वताश्च – श्चुत्वसन्धिः

समासाः సమాసాలు

1. पुण्यं भजतीति – पुण्यभाक् – उपपदतत्पुरुषसमासः
2. निद्रायाः भङ्गः – निद्राभङ्गः – षष्ठीतत्पुरुषसमासः
3. रजतस्य स्थाली – रजतस्थाली तस्या रजतस्थलाम् – षष्ठीतत्पुरुषसमासः
4. स्वादु च तत् फलञ्च स्वादुफलम्, अतिशयेन स्वादुफलं, सुस्वादुफलं – प्रादितत्पुरुषसमासः
5. श्वेतञ्च तत् वस्त्रञ्च श्वेतवस्त्रं, हिमवत् च तत् श्वेतवस्त्रं च हिमवच्छ्छ्रेत- वस्त्रं, तेन आवृता हिमवच्छ्रेतवस्त्रावृता – तृतीयातत्पुरुषसमासः
6. भैषजाश्च ते वृक्षाश्च – भैषजवृक्षाः – विशेषणपूर्वपदकर्मधारयसमासः
7. श्वेतश्च असौ अश्वश्च – श्वेताश्वः, तेन संयुतः – श्वेताश्वसंयुतः – तृतीयतत्पुरुषसमासः
8. पुष्पाणि च फलानि च पुष्पफलानि, तैः सङ्कुलाः पुष्पफलसङ्कुलाः – तृतीयातत्पुरुषसमासः

वृक्षरक्षिका पितामही Summary in Sanskrit

कविपरिचयः

वृक्षरक्षिका पितामही इति पाठ्यांशः पद्मशास्त्रिमहोदयेन रचिते संस्कृतकथा शतकम् इत्याख्ये प्रथमभागे अस्ति । विद्वानयं संस्कृतकथाशतकं भागद्वये रचितवान् । भागद्वये आहत्य शतं कथाः वर्तन्ते । पद्मशास्त्रिमहाभागः १९३५ तमे वर्षे भारतस्य उत्तरप्रदेशे जनिं प्राप्तवान् । राजस्थानराज्ये सर्वकारस्य शिक्षाविभागे प्रशासकपदं निरवहत् । राजस्थानसाहित्य अकाडमीतः सम्मानितोऽयं महाकविः लेनिनामृतं नाम महाकाव्यम् अरचयत् । अपि च सिनेमाशतकम्, विश्वकथाशतकम्, पद्मपञ्च तन्त्रम्, बंग्लादेशविजयः इत्यादीन् विंशत्यधिकान् ग्रन्थान् व्यरचयत् । प्रायः सर्वानपि ग्रन्थान् सरलसंस्कृतभाषया विरच्य आधुनिककाले संस्कृतं सर्वत्र परिव्यापयितुं प्रायतत ।

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

सारांश

काश्मीरदेशे कस्मिंश्चन ग्रामे केसरसिंहो नाम युवा वसति स्म । तस्य पितरौ पितामही च कृषिकर्मणा सह पशून् पालयित्वा वृक्षाणां फलानि विक्रीय जीवनं यापयन्ति स्म । केसरसिंहस्य पितामही तु वृक्षाणामारोपणे तेषां रक्षणे वर्धने च निमग्ना भवति स्म । अपि च एनं सर्वथा वृक्षाणां संवर्धनार्थं प्रेरयति स्म । यथा मया तव पालनं कृतं तथा त्वया जागरूकतया वृक्षाणां पालनं कर्तव्यम् इति वृक्षाः स्वयमातपे स्थित्वा बोधयति स्म । “वृक्षारोपणेन माता पृथिवी प्रसन्ना भवति, उपकरिष्यन्ति । लोकाय छायां दास्यन्ति । वृक्षाः अस्माकं स्वास्थ्यलाभाय बहुधा ते अस्मभ्यं स्वच्छां मृत्तिकां, स्वच्छं जलं, स्वच्छं वायुं च प्रयच्छन्ति । यदि वयं यथेच्छं वनानां कर्तनं कुर्मः तर्हि पृथिवी उष्णा भवति, परिसराः कलुषिताः समुद्रस्य उद्वलज्जलं पृथिव्यां प्रसरिष्यति, जनाः सङ्कटग्रस्ताः भवन्ति” इति अनुदिनं प्रबोधयति स्म । तया प्रभावितः केसरसिंहः स्वस्य अध्ययनेन सह वृक्षारोपणं तेषां संवर्धनेन लोकस्य संरक्षणं विधास्यामि इति दृढनिश्चयम् अकरोत् ।

वृक्षरक्षिका पितामही Summary in English

Introduction

Vriksharakshika Pitamahi is a story from Padma Sastri’s Sanskritakathasatakam Part One. The author wrote hundred stories in two parts. Sri Padma Sastri was born in 1935 in Uttara Pradesh. He wrote more than 20 books, which include Cin-ema Satakam, Viswakatha Satakam etc. He writes simple Sanskrit.

वृक्षरक्षिका पितामही Summary in Telugu

కవి పరిచయం

‘వృక్షరక్షికా పితామహి’ అనే పాఠ్యభాగాన్ని పద్మశాస్త్రిగారు రచించారు. ఈ పాఠ్యభాగం వారు రచించిన సంస్కృత కథా శతకంలోని ప్రథమ భాగంలో ఉంది. విద్వాంసుడైన ఇతడు సంస్కృత కథా శతకాన్ని రెండు భాగాలుగా రచించాడు. రెండు భాగాల్లో కలిపి వంద కథలు ఉన్నాయి. పద్మశాస్త్రిగారు. 1935వ సంవత్సరంలో ఉత్తరప్రదేశ్లో జన్మించారు. రాజస్థాన్ రాష్ట్రంలో ప్రభుత్వ శిక్షా విభాగంలో అధికార పదవిలో ఉన్నారు.

రాజస్థాన్ సాహిత్య అకాడమీ నుండి సన్మానం పొందారు. ‘లేనినామృతం’ అనే కావ్యాన్ని రచించారు. మరియు సినేమా శతకం, విశ్వకథా శతకం, పద్మపంచతంత్రం, బంగ్లాదేశ విజయ: మొదలైన ఇరవైకి పైగా గ్రంథాలను రచించారు. అన్ని గ్రంథాలను సరళ సంస్కృత భాషలో రచించారు. ఆధునిక కాలంలో సంస్కృత భాష అంతట వ్యాప్తి చెందడానికి కృషి చేశాడు.

సారాంశము

కాశ్మీర దేశంలో ఒకానొక గ్రామంలో కేసరసింహుడు అనే పేరుగల యువకుడు ఉన్నాడు. అతని తల్లిదండ్రులు, నాయనమ్మ వ్యవసాయ పనులు చేస్తూ, పశువులను కాపలా కాస్తూ, చెట్ల పండ్లను అమ్ముతూ జీవితాన్ని గడుపుతున్నారు. కేసరసింహుని యొక్క నాయనమ్మ అయితే మొక్కలను నాటడం, వాటిని రక్షించడం, పెంచడం అనే పనుల్లో మునిగిపోయేది. అంతేగాదు చెట్లను పెంచడానికి ప్రేరేపిస్తుంది. తాను ఎలా చెట్లను కాపాడుతుందో అదేవిధంగా జాగ్రత్తగా చెట్లను రక్షించాలని బోధించేది. మొక్కలను నాటడంవల్ల భూమాత ప్రసన్నురాలౌతుంది. చెట్లు తాము ఎండలో ఉంటూ ఇతరులకు చల్లని నీడను ఇస్తుంటాయి. ఆ చెట్లు ఆరోగ్యపరంగా మనకు ఉపయోగపడుతున్నాయి.

అవి మనకు స్వచ్ఛమైన మట్టిని, స్వచ్ఛమైన నీటిని, వాయువును ఇస్తుంటాయి. ఒకవేళ మనం యధేచ్ఛగా చెట్లను నరికినట్లైతే భూగోళం వేడెక్కుతుంది. పరిసరాలు కలుషితంగా మారుతాయి. సముద్రంలో జలాలు ముందుకు వస్తాయి. జనాలు ఎన్నో కష్టాలు అనుభవిస్తారు. ఇలాంటి విషయాలను మనకు చెట్లు ఉపదేశిస్తుంటాయి. ఈ విషయాలతో కేసరసింహుడు ప్రభావితుడు అయ్యాడు. మొక్కలను నాటాలని, వాటిని పోషించాలని, రక్షించాలని నిశ్చయించుకున్నారు.

కాశ్మీర దేశంలో ఒక రైతు కుటుంబం ఉండేది. వారంతా పశుపోషణ, పండ్లను అమ్మటం వంటి పనులు చేస్తూ జీవనం సాగిస్తున్నారు. రైతుకు కేసరసింహుడు అనే -కుమారుడు ఉన్నాడు. అతని నాయనమ్మ మొక్కలను నాటడం, వాటిని పోషించడం వంటి పనులు చేసేది. ఒకరోజు కేసరసింహునికి పక్షులు కొరికిన పండ్లను తినటానికి ఇచ్చింది. పెద్ద అయిన తరువాత పండ్లను అమ్మి డబ్బు సంపాదించే సమయానికి మంచి పండ్లు తిందువుగాని అని చెప్పింది.

కేసరసింహుడు కూడా నాయనమ్మ మాటలతో మార్పు చెందాడు. మొక్కలను నాటడం ఆరంభించాడు. ఐదు సంవత్సరాల తరువాత నాయనమ్మ చనిపోయింది. కేసరసింహుడు చాలా విచారించాడు. ఒకరోజు రాత్రి కలలో కేసరసింహునికి కలలో నాయనమ్మ కనిపించింది. కేసరసింహుడు ఆమెను కౌగిలించుకొని ఇంటికి రమ్మని కోరాడు. దానికి అంగీకరించక ఓదార్చింది. ఒకసారి కలలో నాయనమ్మ ముసలిదానిగా కాక యువతిలా కన్పించింది. నాయనమ్మ మాటలతో కేసరసింహుడు మొక్కలను నాటడం, పెంచే విషయంలో నిమగ్నుడైనాడు.

ఒకరోజు ఆమె అతనికి కలలో కనిపించింది. ఆమెతోపాటు ఇద్దరు దేవకన్యలు కూడా వచ్చారు. నాయనమ్మ అనేక పండ్లతో కూడిన ఒక వెండి పళ్ళాన్ని కేసరసింహుని ముందు ఉంచింది. ఆమె తెల్లని సింహాసనంపైన కూర్చొని తెల్లని వస్త్రాలతో దేవకన్యలా ఆమె అతడికి కన్పించింది. చెట్ల వల్ల అందరికి మంచి గాలి, మంచి మట్టి లభిస్తుంది. ఆ తరువాత ఆమె రథం ఎక్కి వెళ్ళింది. దేవకన్య ఆమెను అనుసరించారు.

మొక్కలను మనం నాటాలి. వాటిని మనం రక్షించాలి. అంతేగాని చెట్లను విచక్షణారహితంగా నరక కూడదు. దీనివల్ల భూమి మీద ఉష్ణోగ్రతలు పెరుగుతాయి. మానవులు ఎల్లప్పుడు పర్యావరణ పరిస్థితులపై అధ్యయనం చేయాలి. లేకపోతే మానవాళి మనుగడ కష్టమౌతుంది.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

अनुवादः (అనువాదములు) (Translations)

कश्मीरस्योपत्यकायां कृषकस्य पुत्रः केसरसिंहो न्यवसत् । तस्य पितरौ पशून् पालयित्वा फलानि विक्रीय च कार्यमचालयताम् । केसरसिंहस्य पितामही सर्वदा कार्ये व्यापृता तिष्ठति । वृक्षारोपणमासीत् तस्या अभिरुचिः । शीतर्तौ सा वृक्षाणामुपरि घासमाच्छादयति येन हिमकणेभ्यो वृक्षाणां रक्षा भवति स्म । पशुभ्यो वृक्षान् रक्षितुमपि सा सर्वदा प्रयतते ।

यदा कदा केसरसिंहो वृक्षेभ्यो लघुशाखाः पृथक् करोति स्म । तद्वीक्ष्य पितामही दुःखिता सती तं निर्भर्त्सयति स्म । सा कथयति स्म – “यथा मया तव पालनं कृतं तथैव वृक्षाणामेतेषामपि । केसरसिंहः प्रत्युवाच – “त्वन्तु वृक्षाफलानां विक्रयं करोषि । अस्मत्कृते तु पक्षिणा – मुच्छिष्टफलान्यवशिष्यन्ते” । पितामही ब्रूते – “केवलं फलैः उदरं पूरयितुं न शक्यते, फलानि विक्रीयान्नमेतदर्थमेव क्रीयते चास्माभिः । त्वं युवा भूत्वा यदा अन्नोत्पादने समर्थो भविता तदा प्रभृति नाहं फलानां विक्रयं करिष्यामि ” ||

కాశ్మీర దేశంలో ఒక రైతు పుత్రుడు ఉన్నాడు. అతని పేరు కేసరసింహుడు. అతని తల్లిదండ్రులు పశువులను కాస్తూ, పండ్లను అమ్ముతూ ఉండేవారు. కేసరసింహుని యొక్క నాయనమ్మ ఎల్లప్పుడు పనిలో నిమగ్నురాలై ఉండేది. మొక్కలు నాటడంలో ఆమెకు అభిరుచి. చలికాలంలో ఆమె చెట్లపై పడే మంచు బిందువుల నుండి చెట్లను కాపాడటానికి వాటిపై గడ్డి కప్పేది. పశువులు మొక్కల్ని పాడుచేయకుండా ఆమె వాటిని కాపాడుతూ ఉండేది.

ఎప్పుడెప్పుడు కేసరసింహుడు చెట్ల కొమ్మలను విరిచినా ఆమె బాధపడేది. ఆ సమయంలో ఆమె అతడితో – “నాయనా ! నిన్ను నేను ఎలా పెంచానో అదేవిధంగా మొక్కలను పెంచాలి”. అని చెప్పింది. అది విని కేసరసింహుడు “నీవు చెట్లకు కాసిన పండ్లను అమ్ముతావు. నాకు మాత్రం పక్షులు తిన్నవి ఉంచుతావు’ అని పలికాడు. వెంటనే నాయనమ్మ – “నాయనా ! కేవలం పండ్లతో కడుపును నింపుకోవడం సాధ్యంకాదు. పండ్లను అమ్మి అన్నము మొదలైన ఆహార పదార్థాలను తయారుచేసుకోవడం సాధ్యం అవుతుంది. నీవు యువకుడవై ఆహారాన్ని ఉత్పత్తిచేసే స్థాయికి వచ్చినప్పుడు నేను పండ్లను విక్రయింపను” అని పలికింది.

Kesara Simha, a son of a farmer, lived in Kashmir valley. Rearing cattle, and selling fruits, his parents passed days. Kesara Simha’s grandmother was always engaged in work. She was interested in planting trees. During winter, she would cover the trees with grass to protect them from snow. She always tried to protect the trees from cattle also.

Sometimes Kesara Simha would cut the small branches of the trees. On seeing this, his grandmother would become sorrow-ful, and chide him. She said, “Just as I take care of you, so also of these trees”. Kesara Simha replied, ‘You sell the fruits of the trees. For us the fruits eaten by birds remain”. Grandmother said, You cannot fill your stomach with fruits only. Hence, we sell fruits and buy rice for that purpose. When you become young, and be able to grow rice, then I will stop selling the fruits”.

“यदि त्वं फलानि खादितुमिच्छसि चेत् तर्हि वृक्षारोपणं कुरु । अनेन त्वं पुण्यभागपि भविता माता पृथिवी अनेन प्रसन्ना भवति । इत्थं फलानि, पुष्पाणि, काष्ठान्यपि प्राप्यन्ते | वृक्षच्छायायां परिश्रान्तो जनः सुखं लभते” । केसरसिंहः पितामह्याः वचनं निशम्य नितरां प्रभावितोऽभवत् । स वृक्षाणां पर्यवेक्षणे तस्याः साहाय्यमप्यकरोत् नवीनान् वृक्षानप्यारोपयत् । पञ्चवर्षानन्तरं पितामही दिवङ्गता । तदा सा षोडशवर्षदेशीयश्चासीत् । पितामहीं स्मृत्वा स रोदिति स्म । एकदा स्वप्ने स पितामहीमपश्यत् । तामालिङ्ग्य स भृशं रुरोद । तस्य नेत्राभ्यामश्रूणि न्यपतन् ।

इत्थं प्ररुदन्तं केसरसिंहं विलोक्य पितामही प्राह – “पुत्र ! अलं रुदितेन । पश्य, नाहं मृता, मम शरीरं जर्जरमभूदतो मया नूतनं शरीरं धारितम्” | केसरसिंहेन दृष्टं यत्तस्य पितामही युवती दृश्यते सम्प्रति । स प्राह पितामही ! गृहं चल, त्वया विना शून्यमिव प्रतीयते मम गृहम् । तव कराभ्यामारोपिता वृक्षाः सर्वदा तव स्मृतिं कारयन्ति ।

ఒకవేళ నీవు పండ్లను తినాలని ఇష్టపడితే అప్పుడు ముందుగా చెట్లను నాటడం మొదలుపెట్టు. దీనివల్ల నీకు పుణ్యం కూడా కలుగుతుంది. దాంతో భూమాత కూడా ప్రసన్నురాలౌతుంది. ఈవిధంగా పండ్లు, పూలు, కట్టెలు పొందవచ్చు. అలసట పొందిన ప్రజలు చెట్ల నీడలో విశ్రాంతి తీసుకుంటారు” అని పలికింది. కేసరసింహుడు నాయనమ్మ మాటలు విని మిక్కిలి ప్రభావితుడు. అయ్యాడు.

చెట్లను సంరక్షించే విషయంలో నాయనమ్మకు బాగా సహకరించాడు. కొత్త మొక్కలను కూడా నాటినాడు. ఐదు సంవత్సరాల తరువాత నాయనమ్మ మరణించింది. ఆ సమయంలో కేసరసింహుని వయసు పదహారు సంవత్సరాలు. నాయనమ్మను తలచుకొని అతడు దుఃఖించాడు. ఒకసారి నాయనమ్మ అతని కలలో కన్పించింది. ఆమెను కౌగిలించుకొని మిక్కిలిగా దుఃఖించాడు. ఆ సమయంలో అతని కన్నుల నుండి కన్నీళ్ళు వచ్చాయి.

ఈ విధంగా దుఃఖిస్తున్న కేసరసింహునితో నాయనమ్మ – “నాయనా ! ఎందుకు ఏడుస్తున్నావు ? నీవు ఏడవవద్దు. నేను మరణించలేదు. నా శరీరంలో బలం తగ్గినందున నేను మరొక శరీరంలో చేరాను” అని పలికింది. ఆ సమయంలో అతడి నాయనమ్మ వృద్ధురాలుగా కాకుండా యువతిగా కనిపించింది. పిమ్మట అతడు నాయనమ్మతో- “నాయనమ్మా ! నీవు ఇంటికి రా ! నీవు లేకపోతే ఇంటిలో వెలితిగా ఉంది నీ చేతులతో నాటిన మొక్కలు నిన్ను గుర్తుకు తెస్తున్నాయి.” అని పలికాడు.

“If you want to eat fruits, then plant trees. You will get merit also by that. Mother Earth will be pleased. By that, we can get fruits, flowers and wood too. People take rest under the shade of the trees.” Kesara Simha was very much influenced by those words of his grandmother. He helped her in taking care of the trees. He planted new trees also. Five years later grandmother died. Then he was sixteen years old. He mourned a lot thinking about his grandmother. One night, he saw her in his dream. He hugged her, and wept inconsolably. Tears dropped from his eyes.

Grandmother said to Kesara Simha who was weeping like that. “Son, don’t cry. See, I am not dead. As my body became old, I took a new one.” Kesara Simha observed that his grandmother looked young. He asked, “Grandmother, let us go home. -Without you, I feel vacuum in the house. The trees you planted with your hands bring back your memories”.

पितामही प्रोवाच – “सम्प्रति यत्राहं निवसामि तस्मान्नाहमागन्तुं शक्रोमि । त्वं प्रत्यहं नूतनान् वृक्षानारोपय, येन त्वं मां विस्मरिष्यसि । अयमेव संसारस्य क्रमः” । इत्युक्त्वा पितामही तिरोहिताऽभवत् । केसरसिंहस्य निद्राभङ्गो जातः । उत्थाय तेन वृक्षाणां परिचर्या प्रारब्धा । अन्यदा पितामही स्वप्रे पुनरागता । तया सह द्वे देवकन्ये चास्ताम् । पितामही रजतस्थाल्यां अनेकविधान्यद्भुतानि फलानि तत्समक्षमुपस्थापितवती । केसरसिंहः फलमेकमादाय खादितुं लग्नः । तेनाद्यावधि एवंविधं सुस्वादुफलं न भक्षितमासीत्कदाचिदपि । तदैव तस्य निद्रा भग्ना |

నాయనమ్మ అతడితో “నాయనా ! ప్రస్తుతం నేను ఉన్న ప్రదేశం నుండి రాలేను. నీవు ప్రతిరోజు కొత్త కొత్త మొక్కలను నాటుతూ ఉండుము. దానివల్ల నీవు నన్ను మరచిపోగలవు. ఇదే జీవన విధానం” అని పలికింది. ఈ విధంగా పలికి నాయనమ్మ తిరిగి వెళ్ళిపోయింది. కేసరసింహునికి నిద్రాభంగం అయింది. నిద్ర నుండి లేచి చెట్లకు పరిచర్యలు చేయడం మొదలుపెట్టాడు. మరుసటిరోజు మరల నాయనమ్మ కలలో కనిపించింది. ఆమెతోపాటుగా ఇద్దరు దేవకన్యలు కూడా వచ్చారు. నాయనమ్మ అనేక విధములైన పండ్లతో ఉన్న వెండి పళ్ళాన్ని అతని ముందు ఉంచింది. కేసరసింహుడు ఒక పండును తీసుకొని తినటం మొదలుపెట్టాడు. ఆ పండు యొక్క రుచి ఇంతకు ముందు తాను ఎప్పుడూ చూడలేదు. వెంటనే అతనికి నిద్రాభంగమై మేల్కొన్నాడు.

Grandmother said. “Now I cannot leave the place where I live. You plant new trees so that you forget me. This is the process of the world.” Having said so, she disappeared. Kesara Simha woke up. He started to take care of the trees after getting up. On another day, grandmother again appeared in his dream. There were two divine damsels with her. Grandmother placed a silver bowl with many wonderful fruits in front of him. Kesara Simha took one fruit and started to eat. He never tasted such a fruit till then. Then he woke up.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 5 वृक्षरक्षिका पितामही

भूयान् समयो व्यतीतः । केसरसिंहः फलानि विक्रीय प्रभूतं धनमर्जितवान् । स भृशं श्रममप्यकरोत् । स व्यचारयत् बहूनि दिनानि व्यतीतानि स्वप्ने न दृष्टा पितामही । तस्यामेव रात्रौ पितामहीं दृष्टवानयम् । सा हिमशुभ्रवस्त्रावृता श्वेतसिंहासने समुपविष्टा देवकन्येव प्रतीयते स्म । केसरसिंहस्तां प्रणनाम | सा स्नेहेन प्रावोचत् – “अतीव प्रसन्नाहं सम्प्रति । वृक्षारोपणं कृत्वा त्वया सुकर्म कृतम् । अद्यारभ्य ग्रामेऽस्मिन् रोगा नागमिष्यन्ति । केसरसिंहः प्राह – “पितामहि ! न मया भैषजवृक्षाः समारोपिताः, कथं तर्हि रोगा न भविष्यन्ति” । पितामही प्रोवाच – पुत्र ! वृक्षेभ्यो वयं शुद्धं वायुं प्राप्स्यामः । येन स्वास्थ्यलाभो भवति । सहसा सा तालिकावादनमकरोत् । तदैव द्वे देवकन्ये समुपस्थिते । सा प्रोवाच – “दर्शय मत्पौत्रं हरितनगरं श्वेतपर्वतञ्च । देवकन्ये तालिकावादनमकुरुताम् । सहसा तत्र श्वेताश्वसंयुतः श्वेतरथः समुपस्थितः । देवकन्ये सहैव प्राचलताम् । मार्गे स्वच्छाः नद्यो निर्झराः प्रावहन् । सर्वत्र पुष्पफलसंकुला वृक्षा हिमाच्छादिताः पर्वताश्चासन् तत्र ।

చాలాకాలం గడిచింది. కేసరసింహుడు పండ్లను అమ్మి ఎంతో ధనాన్ని సంపా దించాడు. అతడు ఎంతో శ్రమపడ్డాడు. చాలా రోజులు గడిచినా అతనికి కలలో నాయనమ్మ కనిపించలేదు. కాని ఆరోజు రాత్రి నాయనమ్మ కలలో కనిపించింది. ఆమె తల్లిని సింహాసనంపైన కూర్చుని తెల్లని వస్త్రాలతో దేవకన్యలా ఆమె కనిపించింది. కేసరసింహుడు ఆమెకు నమస్కరించాడు. నాయనమ్మ చాలా ప్రసన్నంగా ‘నాకు చాలా ఆనందంగా ఉంది. నీవు చాలా చెట్లు నాటి చాలా మంచిపని చేశావు. ఇక నుండి గ్రామంలో అనారోగ్యం ఉండదు” అని పలికారు. ఈ మాటలు విని కేసరసింహుడు “నాయనమ్మా ! నేను వైద్య సంబంధమైన మొక్కలు నాటలేదు.

అనారోగ్యం లేకుండా ఎలా ఉంటుంది ? అని పలికారు. అది విని నాయనమ్మ “ఓరీ ! చెట్ల నుండి మన ఆరోగ్యానికి అవసరమైన స్వచ్ఛమైన గాలి వస్తుంది”. అని చెప్పి చప్పట్లు కొట్టగానే ఇద్దరు దేవకన్యలు వచ్చారు. వారు రాగానే మనుమడికి పచ్చటి నగరాన్ని, తెల్ల పర్వతాన్ని చూపండి. అప్పుడు దేవకన్యలు చప్పట్లు కొట్టగానే తెల్లని గుర్రాలతో ఉన్న తెల్లని రథం కనబడింది. దేవకన్యలు కూడా ఆ రథాన్ని మంచుతో కప్పబడిన అనుసరిస్తున్నారు. మార్గంలో స్వచ్ఛమైన నదులు ప్రవహిస్తున్నాయి. పర్వతాలు, పుష్పాలతో కూడిన చెట్లు మార్గంలో ఉన్నాయి.

Much time passed. Kesara Simha earned a lot of money by selling fruits. He worked very hard. He spent many days. Grand-mother was not seen in dreams. However, on that day itself he saw her in his dream. She sat on a throne wearing snow white clothes, and looked like a celestial damsel. Kesara Simha bowed to her. She spoke affectionately, “I am very much pleased today. By planting trees you did a meritorious deed.

From today onwards there will not be any disease in this village”. Kesara Simha said, “Grandmother, I have not planted any medicinal plants. Then how is it possible that there will not be any diseases?” Grandmother replied, “Son, we get pure air from trees. By that, there will be the benefit of health”. She clapped her hands. At once two nymphs appeared. She said to them, “Show my grandson the green wood and white mountain”. The nymphs clapped their hands. Immediately there came a white chariot having white horses. He went along with the nymphs. On the way, clear streams and rivers flowed. Everywhere there were trees full of flowers and fruits. Snow covered mountains were also there.

केसरसिंहश्चातीव प्रसन्न आसीत् । पितामही पुनस्तमवदत् – “अस्मिन् संसारे वृक्षाणामेव प्राधान्यं वर्तते । वृक्षा एवास्मभ्यं स्वच्छां मृत्तिकां, स्वच्छं जलं वायुञ्च प्रयच्छन्ति । यदि वयं यथेच्छं वनानां कर्तनं करिष्यामस्तर्हि पृथिवी उष्णा भविष्यति, हिमानी द्रविता भविष्यति । समुद्रस्योद्वलज्ञ्जलं पृथिव्यां प्रसरिष्यति । संसारस्य जनाः संकटग्रस्ता भविष्यन्ति । अध्ययनबलेनैव त्वं सर्वं रहस्यं ज्ञास्यसि । अतः पठनमप्यावश्यकं वर्तते । सः पितामहीं प्रणनाम । पुनः श्रद्धया वृक्षारोपणे संलग्नः केसरसिंहः । दृढनिश्चयमकरोत्सः, यदहं वृक्षसंवर्धनेन संसारस्य संरक्षणं विधास्यामि ।

కేసరసింహుడు మిక్కిలి ప్రసన్నుడయ్యాడు. అతడి నాయనమ్మ మరల అతనితో ఈ సృష్టిలో వృక్షాలకు చాలా ప్రాధాన్యత ఉంది. చెట్లు మనకు మంచి మట్టిని ఇచ్చి మంచి గాలిని ఇస్తాయి. మనం స్వేచ్ఛగా అడవులను పాడుచేస్తే దానివల్ల భూమిపై ఉష్ణోగ్రత బాగా పెరుగుతుంది. హిమాలయ పర్వతాలు కరుగుతాయి. సముద్రాలు తమ పరిధిని దాటి ముందుకు వచ్చి ఊళ్ళల్లోకి ప్రవహిస్తాయి.

ఈ పరిణామాలను అధ్యయనం చేస్తే నీకు రహస్యం మొత్తం తెలుస్తుంది. పరిస్థితులను అధ్యయనం చేయాలి. తరువాత అతడు నాయనమ్మకు నమస్కరించాడు. పిమ్మట కేసరసింహుడు చెట్లను నాటే విషయంలో మిక్కిలి శ్రద్ధ చూపాడు. అప్పటి నుండి అతడు చెట్లను నాటే విషయంలో, వాటిని పెంచే విషయంలో దృఢ నిశ్చయాన్ని తీసుకున్నాడు.

Kesara Simha was very much pleased. Grandmother said to him again, ‘Trees are the most important ih this world. Trees alone give us pure soil, water and air. If we cut woods indiscriminately, then the earth will heat up; snow will melt; the ocean will flood the earth; people in the world would be put to difficulty. You know all the secrets by the strength of study only. Hence, education is also necessary”. He bowed to grandmother. Kesara Simha was engaged in planting trees with devotion again. He made a firm decision that he would guard the world by planting trees.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 Consignment Accounts

Here students can locate TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 Consignment Accounts to prepare for their exam.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 Consignment Accounts

→ Consignment means sending goods from the owner to his agents for sale on a commission basis. The agent only sells the goods on behalf of the owner for the sake of commission, at the risk of the owner.

→ Consignor is the person who sends the goods to the agent for sale on a commission basis is called the consignor.

→ Consignee is the person to whom the goods are sent for the sale on a commission basis.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 Consignment Accounts

→ There are two documents prepared in the consignment. They are :

  • proforma invoice
  • Account sales.

→ Proforma Invoice is a statement prepared by the consignor containing the description of goods to be sold, quantity, rate, discount etc.

→ Account sales is the statement prepared by the consignee giving the details of sales effected, expenses incurred and commission charged. The consignee remits to the consignor, the net proceeds of sales.

→ Commission is the remuneration paid to the consignee by the consignor for selling the goods on behalf of consignor. The commission is three types :

  • ordinary commission
  • Delcredere commission
  • Overriding commission

→ Delcredere commission is the remuneration or additional commission paid to the consignee for taking the responsibility of collecting the amount on credit sales made by him.

→ Overriding commission is an extra commission granted when the consignor wants his agent to put in extra hard work to increase sales, especially in case of new products.

→ Loading is the difference between the invoice price and cost price.
Loading = IP – CP

→ Normal loss arises due to the nature of goods. This type of losses cannot be avoided in spite to best efforts. Nobody can prevent this type of loss.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 కన్సైన్మెంట్ ఖాతాలు

→ కన్సైన్మెంట్ : ఒక ప్రాంతంలో ఉన్న వర్తకుడు సరుకును వేరొక ప్రాంతంలో ఉన్న తన ప్రతినిధికి కమీషన్ మీద అమ్మకానికి పంపడాన్ని గణకశాస్త్ర పరిభాషలో కన్సైన్మెంట్ అంటారు.

→ కన్సైనార్, కన్సైనీ : సరుకు పంపే వర్తకుడిని (యజమాని) ‘కన్సైనార్’ అని, సరుకు స్వీకరించే వర్తకుడిని ‘కన్సైనీ’ అని, పంపిన సరుకును ‘కన్సైన్మెంట్పై పంపిన సరుకు’ అంటారు.

→ ప్రొఫార్మా ఇన్వాయిస్ : కన్సైనార్ సరుకును కన్సైన్మెంట్పై పంపినప్పుడు, దానితోపాటు తన ప్రతినిధికి ఒక నివేదికను పంపుతాడు, దీనినే ‘ప్రొఫార్మా ఇన్వాయిస్’ అంటారు. ఈ నివేదికలో సరుకు వివరాలు, గుణగణాలు, పరిమాణం, ధరలు ఖర్చులు మొదలైనవి ఉంటాయి.

→ అకౌంట్ సేల్స్ : కన్సైనీ తాను అమ్మిన సరుకు వివరాలను చూపుతూ కన్సైనార్కు నిర్ణీత కాలాల్లో ఒక నివేదికను పంపుతాడు. దానినే అకౌంట్ సేల్స్ అంటారు. దానిలో సరుకు అమ్మకం వివరాలతో పాటు ఖర్చులు, భీమా, గిడ్డంగి ఖర్చులు, కన్సైనీ కమీషన్, బయానా మొదలైనవి ఉంటాయి.

→ ముగింపు సరుకు విలువ కట్టడం : ఆర్థిక సంవత్సరానికి సరుకులో కొంత భాగం అమ్మకం కాకుండా కన్సైనీ వద్ద మిగిలిపోవచ్చును. ఖచ్ఛితమైన లాభనష్టాలు కనుక్కునేందుకు మిగిలిపోయిన సరుకును తగువిధంగా విలువ కట్టాలి.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 2 Consignment Accounts

→ కమీషన్ వస్తువులు అమ్మినందుకు గాను కన్సైనార్, కన్సైనీకి చెల్లించే పారితోషికం.

→ డెల్డరీ కమీషన్ : అరువుపై వస్తువులను అమ్మినప్పుడు కన్సైనీ సొమ్ము వసూలుకు పూర్తి బాధ్యత వహించినందుకు చెల్లించే అదనపు పారితోషికం.

→ సరుకు నష్టం : కన్సైన్మెంటుపై పంపిన సరుకు తరుచుగా కొన్ని నష్టాలకు గురికావచ్చు. ఈ నష్టం స్వభావాన్ని బట్టి రెండు రకాలుగా వర్గీకరించవచ్చు అవి. ఎ) సాధారణ నష్టం బి) అసాధారణ నష్టం

→ అసాధరణ నష్టం : అనుకోని విధంగా సరుకుకు నష్టం ఏర్పడితే ఆ నష్టాన్ని అసాధారణ నష్టం అంటారు. ఉదా : అగ్ని ప్రమాదం, దొంగతనం, అజాగ్రత్త వల్ల కానీ, ఈ రకమైన నష్టం వాటిల్లవచ్చు.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar पत्र लेखन Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

अभ्यास – 1

पत्र एक ऐसा कागज़ होता है जिस पर कोई बात लिखी या छपी हो जिसके बल पर सूचनाओं का आदान प्रदान होता है। पत्र लेखन के माध्यम से हम अपने भावों और विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। पत्र को अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी माना जाता है। इससे अपनी बातों को लिखकर बहुत दूर तक पहुंचाया जा सकता है।

पत्र लेखन बहुत ही पुराना साधन है। पहले आधुनिक साधन नहीं थे इसलिए पत्रों के माध्यम से ही एक दूसरे से बात हुआ करती थी ।

  1. अपने भावों और विचारों को दूसरों से संप्रेषित करने के लिए पत्रों का प्रयोग किया जाता है । अतः व्यावसायिक, सामाजिक, कार्यालय से संबंधित विचारों को पत्रों के माध्यम से ही व्यक्त किया जाता है ।
  2. पत्रों के माध्यम से मित्रों और परिजनों के साथ संबंध स्थापित किये जा सकते हैं । इनके माध्यम से मनुष्य प्रेम, सहानुभूति, क्रोध प्रकट कर सकते हैं ।
  3. जब कार्यालय और व्यवसाय में मुद्रित रूप में पत्रों का विशेष प्रयोग किया जाता है । मुद्रित रूप के पत्रों को सुरक्षित रखा जा सकता है ।
  4. छात्रों के जीवन में भी पत्रों का बहुत महत्व होता है । छात्र को अवकाश लेने, फ़ीस माफ़ी, स्कूल छोड़ने, स्कोलरशिप पाने, व्यवसाय चुनने, नौकरी पाने के लिए पत्र की जरूरत पडती है ।
  5. पत्रों के द्वारा सामाजिक संबंधों को मजबूत किया जाता है । पत्र को भविष्य का दस्तावेज भी कहा जा सकता है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

पत्र लेखन के लिए आवश्यक बातें :

  1. जिसके लिए पत्र लिखा जाता है उसके लिए शिष्टाचार पूर्ण शब्दों का प्रयोग करना चाहिए ।
  2. पत्र में हृदय के भाव स्पष्ट दिखाई देने चाहिए ।
  3. पत्र की भाषा आसान और स्पष्ट होनी चाहिए ।
  4. पत्र में बेकार बातें नहीं लिखनी चाहिए उसमे मुख्य विषय के बारे में ही बातें लिखी जाती हैं ।
  5. पत्र में आशय स्पष्ट करने के लिए छोटे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। 6) पत्र लिखने के बाद उसे दुबारा जरूर पढ़ना चाहिए ।
  6. पत्र प्राप्तकर्ता की आयु, संबंध और योग्यता को ध्यान में रखकर भाषा का प्रयोग करना चाहिए ।
  7. अनावश्क विस्तार से हमेशा बचना चाहिए ।
  8. पत्र में लिखा हुआ लेख साफ व स्वच्छ होना चाहिए ।
  9. भेजने वाले और प्राप्त करने वाले का पता साफ लिखा होना चाहिए ।

पत्र लेखन की सामान्य विशेषताएँ इस प्रकार होनी चाहिए :

  1. सरल भाषा का प्रयोग ।
  2. लेखन तथा भावों में स्पष्टता ।
  3. मुद्दे की बात करना । संक्षिप्तता बनाए रखना ।
  4. अपने मूल विचारों की अभिव्यक्ति करना ।
  5. उद्देश्यपूर्णता का होना ।

पत्र के अंग :

  1. संबोधन : यह पत्र भेजनेवाले और पानेवाले के परस्पर संबंध पर आधारित होता है। जैसे प्रिय महोदय (अपरिचित लोगों के लिए), पूज्यवर, मान्यवर, आदरणीय ( बड़ों के लिए), प्रिय, चिरंजीवी (छोटों के लिए), श्रीमती जी, महोदया, आदरणीया (स्त्रियों के लिए) ।
  2. अभिवादन : नमस्ते, सादर प्रणाम, प्रसन्न रहो, आशीर्वाद आदि ।
  3. विषय-वस्तु : पत्र की मूल बात ।
  4. समापन वाक्यांश और स्वनिदेश अधोलेख : अभिवादन सहित, शुभकामनाओं सहित और अधोलेख में आपका, भवदीय, शुभाकांक्षी, सस्तेही आदि ।
  5. प्रेषती का पता : प्रेषक का नाम ( बाई ओर आरंभ में), प्रेषती का पता ( अंत में), सेवा में ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

पत्र लेखन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं :
1) औपचारिक पत्र (कार्यालयी अथवा व्यावसायिक)
ये पत्र औपचारिक संदर्भों में लिखे जाते हैं। जिन लोगों के साथ इस तरह का पत्राचार किया जाता है, उनके साथ हमारे व्यक्तिगत सबंध नहीं होते। हम उन्हें जानते तक नहीं हैं । औपचारिक परिवेश होने के कारण इन पत्रों में तथ्यों और सूचनाओं को अधिक महत्व दिया जाता है ।

2) अनौपचारिक पत्र ( निजी अथवा व्यक्तिगत )
जिन लोगों से हमारे व्यक्तिगत संबंध होते हैं, उन्हें हम अनौपचारिक पत्र लिखते हैं । इन पत्रों में व्यक्ति अपने मन की अनुभूतियों, भावनाओं, सुख – दुख की बातों आदि का उल्लेख करता है । अतः इन पत्रों को व्यक्तिगत पत्र भी कहा जाता है । इन पत्रों की भाषा शैली में अनौपचारिकता का पुट देखा जा सकता है ।

औपचारिक पत्र के उदाहरण

प्रश्न 1.
छुट्टी के लिए आवेदन पत्र ।
उत्तर:

दिनांक : 23.07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
शासकीय महाविद्यालय,
मलकपेट, हैदराबाद ।

विषय : तीन दिनों के अवकाश हेतु प्रार्थना पत्र

माननीय महोदय,

सविनय निवेदन है कि पिछले दो दिनों से माँ अस्वस्थ हैं। डॉक्टर ने उन्हें तीन दिनों तक आराम करने की सलाह दी है। घर पर उनकी देख- रेख करने के लिए कोई नहीं है । अतः मैं दिनांक 24.07.2019 से 26.07.2019 तक महाविद्यालय में अनुपस्थित रहुँगा । कृपया मुझे इन तीन दिनों का अनकाश प्रदान करें ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

धन्यवाद ।

आपका आज्ञाकारी छात्र
अभिनव कुमार,
क्र. सं. 14,
एम. पी. सी. प्रथम वर्ष ।

प्रश्न 2.
उच्च शिक्षा के लिए टी.सी. (स्थानांतरण पत्र) तथा शैक्षणिक प्रमाण – पत्र के प्रधानाचार्य को पत्र ।
उत्तर:

दिनांक : 23.07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

सेवा में,
प्रधानाचार्य,
शासकीय महाविद्यालय,
नामपल्ली, हैदराबाद ।

विषय : उच्च शिक्षा के लिए टी. सी. ( स्थानांतरण- पत्र ) तथा शैक्षिक प्रमाण – पत्र की आवश्यकता हेतु ।

माननीय महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैंने आपके महाविद्यालय से एम. पी. सी. ग्रूप, द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण किया है । उच्च शिक्षा के लिए मुझे टी. सी. ( स्थानांतरण- पुत्र) और बोनाफाइड (शैक्षिक प्रमाण-पत्र ) की आवश्यकता है ।

अतः आपसे निवेदन है कि उपर्युक्त प्रमाण-पत्र यथाशीघ्र देने की कृपा करें ।

धन्यवाद ।

आपका आज्ञाकारी छात्र
अभिनव कुमार,
क्र. सं. 14,
एम. पी. सी. ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

प्रश्न 3.
बस में छूटे सामान के बारे में परिवहन अधिकारी के नाम पत्र ।
उत्तर:

दिनांक : 24.07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

सेवा में,
श्रीमान प्रबंधक,
तेलंगाना परिवहन निगम,
हैदराबाद ।

विषय : बस में छूटे सामान के बारे में ज्ञापित करने हेतु ।

माननीय महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपको बस में छूटे अपने सामान के बारे में ध्यान दिलाना चाहता हूँ । मैं 23.07.2019 को बस संख्या टीएस 09 1411 से दिलसुखनगर से कोठी जा रहा था। मैं उस दिन जल्दी में था । इसी कारण बस से उतरते समय अपना बैग भूल गया । उसमें मेरी पुस्तकें रह गयी हैं। आपसे निवेदन है कि यदि आपको मेरी पुस्तकें मिली हैं तो कृपया लौटाने की कृपा करें। आशा है कि आप मेरे निवेदन पर गंभीरता से विचार करेंगें ।

धन्यवाद ।

आपका आज्ञाकारी छात्र
अभिनव कुमार,
क्र. सं. 14,
एम. पी. सी. प्रथम वर्ष ।
शामकीय महाविद्यालय,
न्यू मलकपेट ।

औपचारिक पत्र

प्रश्न 1.
परीक्षा में अच्छे अंक पाने पर भाई को बधाई देते हुए पत्र लिखिए ।
उत्तर:

दिनांक : 23.07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

प्रिय राकेश,

शुभाशीष । आशा करता हूँ कि तुम वहाँ सकुशल होगे। तुम्हारा पत्र मिला । मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई कि तुमने पिछली परीक्षा की तुलना में इस परीक्षा में खूब मेहनत की। इसी का परिणाम हैं कि तुम्हें अच्छे अंक प्रात्प हुए । मैं तुम्हें इस सफलता के लिए ढेर सारी बधाई देता हूँ । आशा करता हूँ कि भविष्य में भी इसी तरह अच्छे अंक प्रात्प करोगे ।

तुम्हारा भैया
अभिनव कुमार,

पता :
सेवा में,
राकेश कुमार,
कक्षा : नवीं, क्र.सं. 15,
सरकारी उच्च पाठशाला,
वरंगल, तेलंगाना ।.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

प्रश्न 2.
समय का महत्व बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखिए ।
उत्तर:

दिनांक : 23.07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

प्रिय नरेश,

मैं यहाँ कुशल हूँ । तुम्हारी कुशलता की प्रार्थना करता हूँ । तुमने पिछली बार परीक्षा की तैयारी के लिए उपाय पूछे थे। मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे पहला नियम समय का पालन होता है। जो व्यक्ति समय का पालन करता है, वह सदैव सफलता प्राप्त करता है। रात को जल्दी सोना और सुबह समय पर उठना एक अच्छे छात्र का लक्षण होता है । मैं भी तुम्हें परीक्षा की तैयारी के लिए समय पालन करते हुए समय सारिणी बनाकर आगे बढ़ने का सुझाव देना चाहता हूँ । आशा करता हूँ कि तुम मेरे सुझाव का अवश्य पालन करोगे ।

तुम्हारा मित्र
अभिनव कुमार,

पता :
सेवा में,
नरेश कुमार,
म. नं. 8.7.69,
गाँधीनगर, महबूबाबाद ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar पत्र लेखन

प्रश्न 3.
विज्ञान यात्रा पर जाने के लिए पिताजी से रुपये माँगने हेतु पत्र लिखिए ।
उत्तर:

दिनांक : 23 07.2019
स्थान : हैदराबाद ।

पूज्यनीय पिताजी,

सादर प्रणाम । मैं यहाँ कुशल हूँ । आपकी और माताजी की कुशलता की प्रार्थना करता हूँ । मेरी पढ़ाई अच्छी चल रही है। पत्र लिखने का कारण यह है कि महाविद्यालय की ओर से अगले सप्ताह विज्ञान यात्रा पर बेंगलूर जाने का निर्णय लिया गया है। इसमें मैं भी जाना चाहता हूँ । इस विज्ञान यात्रा में जाने के लिए एक हजार रुपये की आवश्यकता है । आश करता हूँ कि आप मुझे विज्ञान यात्रा पर अवश्य भेजेंगे ।

आपका पुत्र
अभिनव कुमार,

पता :
सेवा में,
सुरेश कुमार,
म. नं. 2.6.89,
पुराना बाजार, कामारेड्डी ।

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Grammar संधि Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

संधि ( सम् + धि) शब्द का अर्थ है ‘मेल’ । दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है वह संधि कहलाता है । जैसे –
सम् + तोष = संतोष
देव + इंद्र = देवेंद्र
भानु + उदय = भानूदय ।

संधि के भेद :
संधि तीन प्रकार की होती हैं –

  1. स्वर संधि,
  2. व्यंजन संधि,
  3. विसर्ग संधि

1. स्वर संधि :
दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर संधि कहते हैं । जैसे – चिकित्सा + आलय = चिकित्सालय ।
स्वर – संधि पाँच प्रकार की होती हैं।
क) दीर्घ संधि,
ख) गुण संधि,
ग) वृद्धि संधि,
घ) यण संधि,
ङ) अयादि संधि

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

क) दीर्घ संधि :
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद यदि ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ आ जाएँ तो दोनों मिलकर दीर्घ आ, ई और ऊ हो जाते हैं । जैसे-

(अ) अ / आ + अ / आ = आ
अ + अ = आ – धर्म + अर्थ = धर्मार्थ
अ + आ = आ – हिम + आलय = हिमालय
अ + आ = आ – पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
अ + आ = आ – विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
अ + आ = आ – विद्या + आलय = विद्यालय

(आ) इ और ई की संधि
इ + इ = ई – रवि + इंद्र = रवींद्र; मुनि + इंद्र = मुनींद्र
इ + ई = ई – गिरि + ईश = गिरीश; मुनि + ईश = मुनीश
ई + इ = ई – मही + इंद्र = महींद्र नारी + इंद्र = नारींद्र
ई + ई = ई – नदी + ईश = नदीश; मही + ईश = महीश

ग) उ और ऊ की
उ + उ = ऊ – भानु + उदय = भानूदय; विधु + उदय = विधूदय
उ + ऊ = ऊ – लघु + ऊर्मि = लघूर्मि; सिधु + ऊर्मि = सिंधूर्मि
ऊ + उ = ऊ – वधू + उत्सव = वधूत्सव; विधू + उल्लेख = वधूल्लेख
ऊ + ऊ = ऊ – भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व; वधू + ऊर्जा = वधूर्जा

ख) गुण संधि :
इसमें अ, आ के आगे इ, ई हो तो ए; उ, ऊ हो तो ओ तथा ॠ हो तो अर् हो जाता है । इसे गुण – संधि कहते हैं। जैसे –
(अ) अ + इ = ए; नर + इंद्र = नरेंद्र
अ + ई = ए; नर + ईश = नरेश
आ + इ = ए; महा + इंद्र = महेंद्र
आ + ई = एं; महा + ईश = महेश

(आ) अ + उ = ओ ; ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश
आ + उ = ओं; महा + उत्सव = महोत्सव
अ + ऊ = ओ; जल + ऊर्मि = जलोर्म
आ + ऊ ओ; महा + ऊर्मि = महोर्मि

(इ) अ + ऋ = अर् देव + ऋषि = देवर्षि

(ई) आ + ऋ = अर् महा + ऋषि = महर्षि

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

ग) वृद्धि संधि :
अ, आ का ए, ऐ से मेल होने पर ऐ तथा अ, आ का ओ, औ से मेल होने पर औ हो जाता है । इसे वृद्धि संधि कहते हैं । जैसे –

(अ) अ + ए = ऐ; एक + एक = एकैक
अ + ऐ = ऐ ; मत + ऐक्य = मतैक्य
आ + ए = ऐ: सदा + एव = सदैव
आ + ऐ = ऐ; महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य

(आ) अ + ओ = औ ; वन + औषधि = वनौषध
आ + ओ = औ ; महा + औषधि = महौषधि
अ + औ = औ ; परम + औषध = परमौषध
आ + औ = औ ; महा + औषध = महौषध

(घ) यण संधि :
(अ) इ, ई के आगे कोई विजातीय (असमान) स्वर
होने पर इ ई को ‘य्’ हो जाता है ।

(आ) उ, ऊ के आगे किसी विजातीय स्वर के आने पर उ ऊ को ‘व्’ हो जाता है ।

(इ) ‘ऋ’ के आगे किसी विजातीय स्वर के आने पर ऋ
को ‘र’ हो जाता है। इन्हें यण संधि कहते हैं ।
इ + अ = य् + अ ; यदि + अपि = यद्यपि
ई + आ = य् + आ; इति + आदि = इत्यादि
ई + अ = य् + अ नदी + अर्पण = नद्यर्पण
ई + आ = य् + आ; देवी + आगमन = देव्यागमन

(ई) उ + अ = व् + अ ; अनु + अय = अन्वय
उ + आ = व् + आ; सु + आगत = स्वागत
उ + ए = व् + ए; अनु + एषण = अन्वेषण
ऋ + अ = र् + आ; पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

ङ) अयादि संधि :
ए, ऐ और ओ औ से परे किसी भी स्वर के होने पर क्रमशः अय्, आय्, अव् और आव् हो जाता है । इसे अयादि संधि कहते हैं ।
(अ) ए + अ = अय् + अ; ने + अन = नयन
(आ) ऐ + अ = आय् + अ ; गै + अक = गायक
(इ) ओ + अ = अव् + अ ; पो + अन = पवन
(ई) औ + अ = आव् + अ; पौ + अक = पावक
औ + इ = आव् + इ; नौ + इक = नाविक

2. व्यंजन संधि :
व्यंजन के निकट स्वर या व्यंजन आने से व्यंजन में जो परिवर्तन होता है उसे व्यंजन संधि कहते हैं । जैसे- शरत् + चंद्र शरच्चंद्र । उत् + ज्वल = उज्जवल ।

(अ) किसी वर्ग के पहले वर्ण क्, च्, ट्, त्, प् का मेल किसी वर्ग के तीसरे अथवा चौथे वर्ण या य्, र्, ल्, व्, ह या किसी स्वर से हो जाए तो क् को को ज् ट् ग् च् को -ड़ और को ब् हो जाता है । जैसे –
क् + ग = ग्ग ; दिक् + गज = दिग्गज ।
क् + ई = गी ; वाक् + ईश = वागीश ।
च् + अ = ज् ; अच् + अंत = अजंत ।
ट् + आ = डा ; षट + आनन = षडानन ।

(आ) यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) का मेल न् या म् वर्ण से हो तो उसके स्थान पर उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण हो जाता है। जैसे –
क् + म = वाक् + मय = वाङ्मय
ट् + म = ण् षट् + मास = षण्मास
त् + न = न् उत् + नयन = उन्नयन

(इ) त् का मेल ग, घ, द, ध, ब, भ, य, र, व या किसी स्वर से हो जाए तो द् हो जाता है । जैसे –
त् + भ = द्भ सत् + भावना = सद्भावना
त् + ई = दी जगत् + ईश = जगदीश
त् + भ = द्भ भगवत् + भक्ति = भगवद्भकति
त् + र = द्र तत् + रूप = तद्रूप
त् + ध = द्ध सत् + धर्म = सद्धर्म

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

(ई) त् से परे च् या छ् होने पर च, ज् या झ् होने पर ज्, ट् या ट् होने पर ट्, ड् या ढ् होने पर ड् और ल होने पर ल् हो जाता है । जैसे-
त् + च = च्च उत् + चारण = उच्चारण
त् + च = ज्ज सत् + जन = सज्जन
त् + ट = ट्ट तत् + टीका = तट्टीका
त् + ड = ड्ड उत् + डयन = उड्डयन
त् + ल = ल्ल उत् + लास = उल्लास

(उ) यदी म के बाद क्से म् तक कोई व्यंजन हो तो म् अनुस्वार में बदल जाता है । जैसे –
म् + क = सम् + कल्प = संकल्प
म् + च = सम् + चय = संचय
म् + त = सम् + तोष = संतोष
म् + ब = सम् + बंध = संबंध
म् + प = सम् + पूर्ण = संपूर्ण

(ऊ) म् के बाद म का द्वित्व हो जाता है। जैसे
म् + म = म्म सम् + मति = सम्मति
म् + म = म्म सम् + मान = सम्मान

3. विसर्ग संधि :
विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो विकार होता है उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे – मनः + अनुकूल = मनोनुकूल है। जैसे –

(अ) विसर्ग के पहले यदि ‘अ’ और बाद में भी ‘अ’ अथवा वर्गों के तीसरे, चौथे पाँचवें वर्ण, अथवा य, र, ल, व हो तो विसर्ग का ओ हो जाता है। जैसे-
मनः + अनुकूल = मनोनुकूल
अधः + गति = अधोगति
मनः + बल = मनोबल

(आ) विसर्ग से पहले अ, आ को छोड़कर कोई स्वर हो और बाद में कोई स्वर हो, वर्ग के तीसरे, चौथे, पाँचवें वर्ण अथवा य, र, ल, व, ह में से कोई हो तो विसर्ग का र यार हो जाता है । जैसे –
निः + आहार = निराहार;
निः + आशा = निराशा
निः + धन = निर्धन

(इ) विसर्ग से पहले कोई स्वर हो और बाद में च, छ या श हो तो विसर्ग का श हो जाता है। जैसे –
निः + चल = निश्चल;
निः + छल = निश्छल;
दु: + शासन = दुश्शासन

(ई) विसर्ग के बाद यदि त या स हो तो विसर्ग स् बन जाता है । जैसे –
नमः + ते = नमस्ते;
निः + संतान = निस्संतान;
दु: + साहस = दुस्साहस

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

(उ) विसर्ग से पहले इ, उ और बाद में क, ख, ट, ठ प फ में से कोई वर्ण हो तो विसर्ग का षं हो जाता है। जैसे-
निः + कलंक = निष्कलंक
चतुः + पाद = चतुष्पाद;
निः + फल = निष्फल:

(ऊ) विसर्ग से पहले अ, आ हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। जैसे – निः + रोग = निरोग; निः + रस = नीरस (ॠ) विसर्ग के बाद क, ख अथना प, फ होने पर विसर्ग में कोई परिवर्तन नहीं होता । जैसे-
अंतः + करण = अंतःकरण

अभ्यास

(इसमें संधि तथा संधि विच्छेद भी दिया गया है ।)

1) हिमालय = हिम + आलय
2) विद्यार्थी = विद्या + अर्थी
3) नरेश = नर + ईश
4) एकैक = एक + एक
5) स्वागत = सु + आगत
6) यद्यपि = यदि + अपि
7) नयन = ने + अन
8) जगदीश = जगत् + ईश
9) महेंद्र = महा + इंद्र
10) सज्जन = सत् + जन

TS Inter 2nd Year Hindi Grammar संधि

11) सम्मान = सम् + मान
12) मनोनुकूल = मनः + अनुकूल
13) निराशा = निर + आशा
14) सदैव = सदा + एव
15) महेश = महा + ईश
16) पुस्तकालय = पुस्तक + आलय
17) परोपकार = पर + उपकार
18) मतैक्य = मत + ऐक्य
19) मुनींद्र = मुनि + इंद्र
20) देवर्षि = देव + ऋषि

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 2 गाँव का ईश्वर

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material उपवाचक 2nd Lesson गाँव का ईश्वर Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक 2nd Lesson गाँव का ईश्वर

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
रतन कौन है ? उसके बारे में तीन – चार वाक्य लिखिए ।
उत्तर:
रतन शिवपाल का शिक्षित जेष्ठ पुत्र जो शहर में नौकरी करता घर चलाने के लिए हर महीना पैसा भेजता है । उसमें विनय विवेक, वात्सल्य, उदात्त भाव आदि कूट कूट कर भरे रहते हैं। अपनी छोटी बहन केशर को, बेमेल विवाह से बचाने की भरसक कोशिश करता है। शहर में उसे पढ़ाकर सयानी कर योग्य युवक से शादी कराना चाहता है। सचमुच रतन घर का, गाँव का और समाज का रतन है ।

प्रश्न 2.
‘गाँव का ईश्वर’ प्रकांकी का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर:
‘अशिक्षा से ग्रामीण प्रांतों में कई दुष्परिणाम होते रहते हैं । उनमें बेमेल विवाह, बाल्यविवाह, लडकियों को समान अधिकार न देना, शिक्षित संतान की भावनाओं को प्राथमिकता न देना, बडों की पसंद को छोटों की पसंद बनाकर थोपना, बड़ा आदमी चाहे कैसे भी हो, गाँव का ईश्वर समझना आदि हैं। इन बिंदुओं की ओर पाठकों की दृष्टि आकृष्ट कर इन दुष्परिणामों को दूर कराने की कोशिश करना ही इस एकांकी का मुख्य उद्देश्य है ।

गाँव का ईश्वर Summary in Hindi

लेखक परिचय

डॉ. लक्ष्मीनारायण लाल का जन्म सन् 1927 में हुआ था । तथा निधन सन् 1987 में हुआ था । वे न केवल श्रेष्ठ नाटककार थे, बल्कि एकांकीकार, कहानीकार, उपन्यासकार और समीक्षक भी थे। वे संगीत नाटक अकादमी द्वारा सम्मानित किए गए तथा साहित्य कला परिषद एवं हिंदी अकादमी द्वारा पुरस्कृत किए गए ।

लक्ष्मीनारायण लाल जी के प्रमुखनाटक हैं- अंधाकुआँ, मादा केक्टस, सुंदर रस, सुखा सरोवर आदि । इनके एकांकी संग्रह हैं – पर्वत के पीछे, नाटक बहुरूपी, ताजमहल के आँसू, मेरे श्रेष्ठ एकांकी आदि । इनके आनेवाला कल, लेडी डॉक्टर डाकू आए थे, मेरी प्रतिनिधि कहानियाँ आदि प्रसिद्ध कहानी संग्रह हैं । इनके उपन्यासों के अंतर्गत धरती की आँखें, बया का घोंसला और सांप, काले फूल का पौधा, अपना-अपना राक्षस आदि प्रसिद्ध हैं । आधुनिक हिंदी कहानी, आधुनिक हिंदी नाटक और रंगमंच आदि इनके समीक्षा – ग्रंथ हैं ।

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 2 गाँव का ईश्वर

आपकी रचनाओं में मध्यवर्गीय नागरिक जीवन, ग्रामीण जीवन, मानवीय संबंध, प्रेमकी विभिन्न मनोदशाएँ आदि प्रतिबिंबित हैं ।

प्रस्तुत एकांकी ‘गाँव का ईश्वर’ गाँव की अशिक्षा से होनेवाले बेमेल विवाह अंध विश्वास आदि दुष्परिणामों को दर्शानेवाला सफल पुकांकी है ।

सारांश

ग्रामीण शिवपाल के परिवार में उसकी पत्नी, रतन जतन नामंक दो बेटे तथा केशर नामक बेटी हैं। बेटी पूरे तेरह साल की भी नहीं है। शिवपाल उस नादान बेटी केशर का बेमेल विवाह दोबार विवाहित एक विधुर बूढ़े से करने की कोशिश करता है । वह किसीका नहीं सुनता। यह विवाहं केशर को पसंद नहीं है । वह पिता को अपनी अनिच्छा बताने से डरती है । उसका बड़ा भाई रतन शिक्षित और शहर में रहकर नौकरी करता है । उसकी कमाई से घर चलता है । वह भी इस विवाह का विरोध करता है । इस कारण शिवपाल रतन से नाराज होता है और गालियाँ देता रहता है । रतन की माँ उसका खंडन करती है ।

एक ओर विवाह की तैयारियाँ होती रहती हैं। सभी सगे – संबंधी आ जाते हैं । कोलाहल मच जाता हैं। लेकिन रतन नहीं आपाता है । कुछ बुजुर्ग रतन और शिवपाल के बारेमें बातचीत करते रहते हैं । इतने में मुहूर्त के पहले रतन आता है । वह बुजुर्गों और माँ का चरणस्पर्श करता है । पिता का अभिवादन करता है । सभी सगे-संबंधियों को कपड़े और बच्चों को मिठाई, खिलौने लाता है । बहन को विवाह संबंधी वस्त्र और आभूषण लाता है ।

साथ साथ पैसा भी लाता है । फिर भी रतन और केशव खुश नहीं हैं । अकेले रतन केशव से कहता है कि मेरी दुन्तारी मुन्नी ! चल, भाग चल ! मैं तुझे इसी तरह शहर ले जाऊँगा, छिप जाऊँगा तुझे लेकर। शहर में तुझे पढ़ाऊँगा, सयानी करूँगा, और जब जीवन के प्रति तेरा दृष्टिकोण निश्चित हो जाएगा, तब तेरी शादी करूँगा ठीक तेरे ही योग्य । नहीं तो यह घर, यह गाँव, यहाँ का ईश्वर तुझे इसी तरह जिंदा गाड़ देगा इसी धरती । इस तरह कई प्रकार वह समझ – बुझाता, उत्साह भरने की कोशिश करता है । लेकिन बेबस केशर, ऐसा नहीं भइया, कहते हुए सिसकती उसके पैरों से लिपट जाती हैं । रतन भी रो पड़ता है ।

विफल होकर निस्सहाय रतन चुपचाप घर छोड़कर राहर लौट जाता है । माँ और बेटी से पड़ती हैं। पिता गाली देता है। बाकी लोग आश्चर्यपूर्ण दुःख से एक- दूसरे को देखते ही रह जाते हैं ।

गाँव का ईश्वर Summary in Telugu

సారాంశము

గ్రామీణుడైన శివపాల్ కుటుంబంలో అతని భార్య, రతన్, జతన్ అనే పేరుగల ఇరువురు కుమారులు, కేశర్ అనే పేరుగల ఒక కుమార్తె ఉంటారు. శివపాల్ తన 13 ఏళ్ళు కూడ లేని అమాయకపు కూతురు కేశర్ వివాహం రెండు పెళ్ళిళ్ళయి భార్యలు చనిపోయిన వృద్ధునితో చేయటాన్కి ప్రయత్నిస్తాడు.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 2 गाँव का ईश्वर

అతను ఎవరి మాట వినని, మొండిఘటం. కేశర్కి ఈ సంబంధం ఇష్టం లేదు. కాని తండ్రికి ఈ మాట చెప్పటాన్కి భయపడ్తుంది. తన పెద్దన్న రతన్ విద్యావంతుడు. పట్టణంలో ఉంటూ ఉద్యోగం చేస్తుంటాడు. అతని సంపాదనతో ఇల్లు గడుస్తుంది. అతను కూడా ఈ వివాహాన్ని వ్యతిరేకిస్తాడు. రతనంటే శివపాల్కు పడదు; అతడంటే కోపడతాడు, తిడుతుంటాడు. రతన్ తల్లి ఖండిస్తూ ఉంటుంది.

ఒకవైపు పెళ్ళి పనులు ముమ్మరంగా జరుగుతాయి. బంధుమిత్రులు వస్తారు. ఇల్లంతా సందడి. కాని రతన్ ఇంకా రాలేదు. కొందరు పెద్దలు, తండ్రి-పెద్దకొడుకు రతన్ గురించి మాట్లాడు కొంటూ ఉంటారు. ఇంతలో ముహూర్తానికి ముందుగ రతన్ వచ్చిపెద్దలకు, తల్లికి పాదాభివందనంచేస్తాడు. తర్వాత ఆలస్యంగా వచ్చిన తండ్రికి అభివాదం చేస్తాడు.

బంధువు లందరికి కొత్త బట్టలు, పిల్లలకు మిఠాయి ఆట వస్తువులు, చెల్లకి పెళ్ళిబట్టలు-నగలు తీసుకువస్తాడు. అంతేకాకుండా అవసరమైన డబ్బు తీసుకొస్తాడు. అయినా రతనక్కు, చెల్లికి సంతోషముండదు. ఒంటరిగా ఉన్నపుడు చెల్లికి హితబోధ చేస్తుంటాడు-నా ముద్దులమున్నా! రా, నాతో వచ్చేయ్, పారిపోదాం, పట్నానికి తీసుకుపోతా, ఎవరికి కనపడకుండా ఉందాం, పట్నంలో నిన్ను చదివిస్తా, తెలివైనదానిగా తయారుచేస్తా, జీవితం మీద అవగాహన కల్గినపుడు నీకు సరిజోడైన యువకునితో పెళ్ళిచేస్తా.

ఒప్పుకోకపోతే ఈ యిల్లు, ఈ పల్లె, ఇక్కడ దేవుళ్ళు- ఈ పెద్దలు నిన్ను ఇదే విధంగా ఈ నేలలో బతికుండగానే పాతరేస్తారు. ఈ విధంగా పరిపరివిధాల నచ్చజెప్తూ ప్రోత్సహిస్తూ ఉంటాడు. కాని నిస్సహాయురాలు కేశర్, వద్దన్నయ్యా, అలా కాదు అంటూ ఎక్కెక్కి ఏడుస్తూ అన్న కాళ్ళను చుట్టేసుకొంటుంది. రతన్ కూడ ఏడ్వటం మొదలెట్టాడు.

చివరకు విఫలంచెంది దిక్కుతోచక రతన్ మెల్లగా ఎవరికీ తెలియకుండా ఇల్లు విడచి పట్నం వెళ్ళిపోతాడు. తల్లి, కూతురు భోర్మని ఏడుస్తుంటారు. తండ్రి తిట్లు లంకించుకొంటాడు. మిగిలిన జనం ఆశ్చర్యం చెంది దుఃఖంతో ఒకరిముఖాలు ఒకరు చూసుకొంటూ ఉంటారు.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 1 अंधेर नगरी

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material उपवाचक 1st Lesson अंधेर नगरी Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक 1st Lesson अंधेर नगरी

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
गोबरधनदास के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर:
गोबरधनदास गुरू महंत का एक शिष्य है । वह बहुत बडा लोभी हैं। गुरू महंत के साथ देशाटन करते हुए अंधेर नगरी पहुँचता है । वहाँ हर चीज टके सेर मिलती है । गुरूजी मना करने के बाद भी वहीं रहना चाहता हैं । भिक्षा में पैसे मिले तो मिठाई लाकर खाता है । एक दिन किसी दीवार टूटने से एक बकरी दबकर मर जाती है । फरियादि के अनुसार राजा दीवार बनानेवाले कोतवाल को फाँसी देने का आदेश देता हैं । गोबर धनदास मोटा आदमी होने के वजह से सिपाही उसको पकड लेते हैं । तब गुरू की दुहाई देता है । गुरू आकर कहता है कि इस शुभ घडी में मरनेवाला सीधे स्वर्ग जाएगा । यह सुनते ही हर आदमी फाँसी पर चढने तैयार होता है । आखिर राजा खुद फाँसी पर चढकर मर जाता है। गुरू महंत और शिष्य उस नगरी से भाग निकलते हैं ।

प्रश्न 2.
“अंधेर नगरी’ एकांकी के अंत में फाँसी पर कौन चढा ? और क्यों ?
उत्तर:
“अंधेर नगरी’ एकांकी के अंत में चौपट राजा खुद फाँसी पर चढता है और मरजाता है । क्यों कि गुरू महंत ने गोबरधनदास को बचाने के लिए कहा कि इस शुभ घडी में मरनेवाला सीधे स्वर्ग जाएगा। सीधे स्वर्ग जाने की लालच में राजा फाँसी पर चढा । गोबर धनदास मोटा आदमी होने के वजह से सिपाही उसको पकड लेते हैं ।

अंधेर नगरी Summary in Hindi

लेखक परिचय

आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म सन् 1850 में हुआ था । इनका मूल नाम “हरिश्चंद्र’ था, “भारतेंदु” उनकी उपाधि थी । हिन्दी साहित्य में आधुनिक काल का प्रारंभ भारतेंदु माना जाता है । इन्होंने अपनी रचनाओं में देश की गरीबी, पराधीनता का चित्रण किया है । हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी इनका योगदान रहा। यह एक मौलिक नाटक है ।

साहित्यिक परिचय : भारतेंदु बहुमुखी प्रतिभा संपन्न थे । वे एक उत्कृष्ट कवि, व्यंग्यकार सफल नाटककार, जागरूक पत्रकार तथा ओजस्वी गद्यकार थे। इसके अलावा लेखक, कवि, संपादक, निबंधकार एवं कुशल वक्ता भी थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं सत्य हरिश्चंद्र, चंद्रावली, भारत दुर्दशा, नीलदेवी, अंधेर नगरी, प्रेम जोगनी, वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति । इन्होंने “हरिश्चंद्र पत्रिका”, “कविवचन सुधा’ और बालविबोधिनी पत्रिकाओं का संपादन भी किया । केवल पैंतीस वर्ष की आयु तक इन्होंने अनेक दिशाओं में काम किया । इनका निधन सन् 1885 में हुआ था ।

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 1 अंधेर नगरी

कवि परिचय : आधुनिक हिन्दी साहित्य के पितामह श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र का जन्म सन् 1850 में हुआ था । इनको आधुनिक काल के प्रवक्त माना जाता है । इसलिए इस युग को “भारतेंदु युग’ भी कहा जाता है । इनका मूल नाम ‘ हरिश्चंद्र’ था, भारतेंदु उनकी उपाधि थी । इन्होंने अपनी रचनाओं में देश की गरीबी, पराधीनता का चित्रण किया ।

सारांश

‘अंधेर नगरी’ हास्यात्मक एकांकी है । एकांकी हमें यह सबक देता है कि मूर्खों का संग कभी हमारा भला नहीं करता । एकांकीकार भारतेंदु हरिश्चंद्र हिन्दी के बहुमुखी साहित्यकार हैं ।

गुरू महंत एक बार देशाटन करते हुए अपने दो शिष्य गोबर्धनदास और नारायणदास के साथ किसी शहर में आते हैं । उस शहर का नाम अंधेर नगरी है और वहाँ हर चीज़ टके सेर मिलती है। तब गुरु बताते हैं कि यहाँ रहने से आफ़त होगी । लेकिन शिष्य गुरु की बात नहीं मानते । वे वहीं रहना चाहते हैं । गुरू महंत यह कहकर चले जाते हैं कि आफत के समय मेरी याद करना ।

एक दिन किसी दीवार के टूटने से एक बकरी दबकर मर जाती है । राजा के पास इसकी शिकायत आती है, तब कल्लु बनिया बुलाया जाता है । क्यों कि बह टूटी दीवार कल्लु बनिये की थी । कल्लू वनिया कहता है कि यह कारीगर का कसूर है। कारीगर चूनेवाले को, चूनेवाला भिश्ती को, भिरती कसाई को, कसाई गडरिये को और गडरिया कोतवाल को अपराधी बताते हैं । आखिर कोतवाल को दोषी ठहराकर उसे फाँसी की सजा दी जाती है ।

फांसी का फंदा बड़ा निकलता है और कोतवाल दुबला है, तो राजा आदेश देता है कि कोतवाल के बदले किसी मोटे आदमी को फाँसी पर बढ़ाया जाए ।

शिष्य गोवर्धनदास काफ़ी मोटा था, इसलिए सिपाही गोबर्धनदास को कड़ लेते हैं । जब सारी बातें मालूम होती हैं तब गोबर्धनदास को बड़ा छतावा होता है । वह गुरू की दुहाई देता है । गुरु आते हैं और कहते हैं के इस शुभ घडी में मरनेवाला सीधे स्वर्ग जाएगा ।

यह सुनते ही हर आदमी फाँसी पर चढने तैयार होता है । लेकिन ग़जा के होते हुए यह भाग्य दूसरे को कहाँ मिलेगा ? राजा खुद फाँसी पर ढ़ता है और मर जाता है । गुरू महंत और शिष्य उस शहर से भाग नेकलते हैं ।

इस एकांकी में भारतेंदु ने चौपट राजा के माध्यम से राजनीतिक भ्रष्टाचार, दूरदृष्टि हीनता और कौशल हीनता को प्रकट किया है ।

विशेषताएँ : इस एकांकी में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए उसे अपने ही कर्मों द्वारा नष्ट होते दिखया गया है ।

अंधेर नगरी Summary in Telugu

కవి పరిచయం

ఆధునిక హిందీ సాహిత్య పితామహుడు శ్రీ భారతేండు హరిశ్చంద్రుడు 1850 సం॥లో జన్మించారు. ఈయన్ని ఆధునిక కాల ప్రవర్తకుడు అని, ఈయన కాలాన్ని “భారతేందు యుగం” అని పిలవబడుతుంది. ఈయన అసలు పేరు “హరిశ్చంద్ర్” భారతేందు ఆయన బిరుదు. ఈయన తన రచనల్లో దేశ పేదరికం, పరాధీనతను చిత్రీకరించారు.

సారాంశము

“అంధేర్ నగరీ” హాస్యాత్మక ఏకాంకి మూర్ఖులతో స్నేహం మనకు మంచిని చేయదని ఈ ఏకాంకి మనకు గుణపాఠం నేర్పుతుంది. ఈ పాఠ రచయిత “భారతేందు హరిశ్చంద్” బహుముఖ సాహిత్యవేత్త.

ఒకసారి గురు మహంత్ దేశాటన చేస్తూ తన ఇద్దరు శిష్యులైన గోబర్ ధన్ దాస్ మరియు నారాయణ దాస్తో కలిసి “అంధేర్ నగరీ” అనే పట్టణానికి వస్తారు. అక్కడ ప్రతి వస్తువు “సేరు అర్ధణా” కే లభిస్తుంది. ఇక్కడ ఉండటం ప్రమాదమని గురువు చెప్తారు. అయినా శిష్యులు ఆయన మాట వినక అక్కడే నివసించాలని అనుకుంటారు. సరేనంటూ ఆపద సమయంలో నన్ను గుర్తు చేసుకోమని చెప్పి గురుమహంత్ వెళ్ళిపోతారు.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 1 अंधेर नगरी

ఒకరోజు ఏదో ఒక గోడ కూలిపోవడంతో దాని క్రింద ఒక మేక పడి చనిపోతుంది. ఈ విషయమై రాజు వద్దకు ఫిర్యాదు చేయబడుతుంది. అందుకు ఆ గోడ యజమాని కల్లు అనే పేరు గల వైశ్యుడు / వ్యాపారిని పిలవబడుతాడు. ఈ తప్పు గోడకట్టిన (తాపీ మేస్త్రి) కార్మికునిదని చెబుతాడు. ఈ విధంగా గోడ నిర్మాణ కార్మికుడు సున్నం కలిపినవాడు తప్పని, ఇతను నీటిని తెచ్చేవాడిని (బిశ్రీ), బిశ్రీ కసాయివాడిని, కసాయి గొర్రెల కాపరిని, గొర్రెల కాపరి పోలీస్ ఇన్స్పెక్టర్ని దోషులుగా చెప్పబడుతుంది. చివరకు పోలీస్ ఇన్ స్పెక్టర్ని దోషిగా నిర్ణయించి ఉరిశిక్ష విధించడమైనది.

ఉరితాడు ఉచ్చు పెద్దగా ఉండటం మరియు పోలీస్ ఇన్స్పెక్టర్ బలహీనంగా ఉండటంతో రాజు పోలీస్ ఇన్స్పెక్టర్కి బదులుగా ఎవరైనా బలంగా లావుగా ఉన్న వ్యక్తికి ఉరి వేయవలసినదిగా ఆదేశిస్తాడు.

గురు మహంత్ శిష్యుడు గోబర్ ధన్దాస్ చాలా లావుగా ఉంటాడు. అందువల్ల రాజుగారి సైనికులు గోబర్ ధన్ దాసుని పట్టుకెళతారు. అప్పుడుగానీ అన్ని విషయాలు తెలుసుకొన్న గోబర్ ధన్ దాసు చాలా పశ్చాత్తాప పడతాడు. గురువు గారిని సహాయం (రక్షింపమని) వేడుకుంటాడు. గురువుగారు వచ్చి అక్కడి వారినందరిని ఉద్దేశించి “ఈ శుభఘడియలో ఎవరైతే మరణిస్తారో వారు సూటిగా స్వర్గానికి వెళతారు” అని చెప్తారు.

ఈ మాట వినడంతోనే ప్రతి ఒక్కరు ఉరిశిక్షకు సన్నద్దం అవుతారు. అయితే రాజుగారంతటివారే ఉండగా వేరే ఎవరికో ఈ అదృష్టం ఎలా దక్కుతుంది. కాబట్టి రాజుగారే స్వయంగా ఉరిశిక్షకు పాత్రుడవుతారు మరియు మరణిస్తారు. ఇంతటితో గురు మహంత్ మరియు శిష్యులు ఆ పట్టణం నుండి (అంధేర్ నగరీ నుండి) పారిపోతారు.

ఈ పాఠంలో ఏకాంకీకార్ భారతేందు చౌపటేరాజుగారి ద్వారా చెడిపోయిన రాజకీయాలు, దూరదృష్టి లేకపోవడం, నేర్పరితనం తేకపోవడాన్ని ప్రకటించారు.

విశేషత : ఈ పాఠంలో వివేకంలేని, నిరంకుశ పాలనా వ్యవస్థను హేళన చేస్తూ తానే స్వయంగా నష్టపోవడాన్ని చూపించడం జరిగింది.