TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 6th Lesson तेलंगाना के दर्शनीय स्थल Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 6th Lesson तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

दीर्घ प्रश्न (దీర్ఘ సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
‘तेलंगाना के दर्शनीय स्थल’ पाठ का सारांश पाँच छह वाक्यों में लिखिए ।
उत्तर:
सन् 2014 को गठित तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद हैं। इस राज्य का कण कण दर्शनीयस्थल – सा प्रतीत होता है । यह जलसंपदा, खनिज संपदा और प्रकृतिक सुषमा से शोभित है। इसके अलावा ऐतिहासिक भवनों से, विविध धर्मों के मंदिरों से मंडित है । हैदरावाद से लेकर आदिलाबाद तक का हर स्थान अपनी अपनी अलग विशिष्टता से दीपित है । वास्तव में तेलंगाना धरती अपर स्वर्ग है तथा इस धरती की भीनी भीनी और मीठी- मीठी सुगंध भारत-माता के अंग-अंग को सुरभित करती है ।

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
तेलंगाना की राजधानी क्या है ? उसके बारे में लिखिए ।
उत्तर:
तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद है, जो ऐतिहासिक नगर है । इसे भाग्यनगर, मोती का शहर तथा गंगा-जमुना तहजीब का नगर भी कहते हैं । इसके दर्शनीय स्थल हैं गोलकोंडा, चारमीनार, मक्का मस्जिद, कुतुबशाही गुंबद, पैगाह गुंबद, तारामती बारादरी, फलकनुमा महल और चौमोहल्ला महल, जिनमें सजीवता एवं उत्कृष्टता दिखाई देती हैं । इनके अलावा, सालारजंग संग्रहालय, नेहरु चिड़ियाघर, हाइटेक सिटी, हुस्सैन झील आदि भी देखने लायक हैं ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

प्रश्न 2.
तेलंगाना के किसी एक मनपसंद दर्शनीय स्थल के बारे में लिखिए ।
उत्तर:
तेलंगाना के मनपसंद दर्शनीय स्थल अनेक हैं, जिनमें हैदराबाद एक है। तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद है, जो ऐतिहासिक नगर है । इसे भाग्यनगर, मोती का शहर तथा गंगा-जमुना तहजीब का नगर भी कहते हैं । इसके दर्शनीय स्थल हैं गोलकोंडा, चारमीनार, मक्का मस्जिद, कुतुबशाही गुंबद, पैगाह गुंबद, तारामती बारादरी, फलकनुमा महल और चौमोहल्ला महल, जिनमें सजीवता एवं उत्कृष्टता दिखाई देती हैं । इनके अलावा, सालारजंग संग्रहालय, नेहरु चिड़ियाघर, हाइटेक सिटी, हुस्सैन झील आदि भी देखने लायक हैं ।

एक वाक्य प्रश्न (ఏక వాక్య సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
मक्का मस्जिद कहाँ है ?
उत्तर:
हैदराबाद में है ।

प्रश्न 2.
भद्राचलम में किसका मंदिर है ?
उत्तर:
श्री सीताराम मंदिर है ।

प्रश्न 3.
डायोसिस चर्च कहाँ है ?
उत्तर:
मेदक में है ।

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प्रश्न 4.
कोलनुपाका में किनका प्रसिद्ध मंदिर है ?
उत्तर:
जैन धर्मावलंबियो का आराध्य मंदिर है ।

संदर्भ सहित व्याख्याएँ (సందర్భ సహిత వ్యాఖ్యలు)

प्रश्न 1.
इस राज्य का कण-कण दर्शनीय स्थल – सा प्रतीत होता है। एक बार जो इस राज्य की सुंदरता को देख लेता है, उसे यह राज्य स्वर्ग का आभास देता है ।
उत्तर:
संदर्भ : यह उद्धरण संपादक मंडल द्वारा संपादित ‘तेलंगाना के दर्शनीय स्थल’ नामक पाठ के आरंभिक अनुच्छेद से दियागया है । यह उद्धरण तेलंगाना की सुंदरता का वर्णन करते समय संपादक – मेडल द्वारा कहा जाता है ।

व्याख्या : संपादक – मंडल कहते हैं कि तेलंगाना राज्य का हर कण देखने लायक स्थान की तरह लगता है । जो व्यकित इसकी सुंदरता को एकबार देख लेता है, उसको यह तेलंगाना राज्य स्वर्ग – सा लगता है ।

विशेषता : संपादक मंडल द्वारा तेलंगाणा राज्य को अपर – स्वर्ग कहा गया ।

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प्रश्न 2.
वास्तव में तेलंगाना धरती की भीनी भीनी सुगंध माँ भारती के अंग – अंग को सुरभित करती है
उत्तर:
संदर्भ : यह कथन संपादक – मंडल द्वारा लिखित ‘तेलंगाना के दर्शनीय स्थल’ नामक पाठ के अंतिम वाक्या है । संपादक मंडल कहते हैं कि तेलंगाना राज्य का हर एक प्रांत पर्यटकों को अपनी ओर खीचं लेता है । इस संदर्भ में संपादक मंडल द्वारा यह वाक्य कहा गया ।

व्याख्या : वस्तुत: तेलंगाना जमीन की मीठी-मीठी खुशबू भारत-माता के प्रत्येक अंग को सुगंधित करती है । अर्थात् तेलंगाना विशाल भारत की कीर्ति में चार चाँद लगाता है ।

विशेषता: भाषा कवितामय एवं श्तवणा नंदमय है ।

तेलंगाना के दर्शनीय स्थल Summary in Hindi

सारांश

तेलंगाना 14 जून, 2014 को स्थापित भारत का 29 वाँ राज्य है । इसकी राजधानी हैदराबाद है । इस राज्य की सुंदरता असीम, अवर्णनीय तथा वैभवशाली है । इस राज्य का कण कण दर्शनीय स्थल – सा प्रतीत होता है। चलिए, इस राज्य के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर पर्यटन की अनुभूति को प्राप्त करेंगे ।

हैदराबाद : हैदराबाद तेलंगाना राज्य की राजधानी है । यह एक ऐतिहासिक नगर है । कुली कुतुबशाही और निजाम शासकों के द्वारा बसाया श्रेष्टतम नगर है । इसे भाग्य नगर तथा मोती का शहर भी कहते हैं । यहाँ के ऐतिहासिक दर्शनीय स्थलों में चारमीनार, गोलकोंडा, मक्का मसजिद, सालारजंग संग्रहालय, हुसेनसागर, टाँकबंड, नेहरु चिडियाघर, हाइटेक सिटी आदि देखने लायक हैं ।

मेड्चल – मलकाजगिरी : मेडचल मलकाजगिरी जिला के मुख्यालय है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 27 कि.मी. है। यहाँ पर स्थित कीसर गुट्टा शिव भक्तों का प्रमुख मंदिर है ।

रंगारेड्डी : रंगारेड्डी जिला का नाम संयुक्त आंध्र प्रदेश के उप- मुख्य मंत्री तथा स्वतंत्र तेलंगाना आंदोलन के सेनानी कोंडा वेंकट रंगारेड्डी का नाम पर पड़ा। इस जिले में हिमायत सागर रामोजी फिल्मसिटी, चेवेल्ला, कंदुकूर और शादनगर प्रमुख पर्यटन स्थल हैं ।

यादाद्रि – भुवनगिरि: हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 50 कि.मी. है। यहाँ वैष्णव धर्मावलंबियों का प्रसिद्ध तीर्थस्थल यादगिरी गुट्टा है । चालुक्य नरेशों द्वारा निर्मित भुवनगिरी का किला अद्भुत कलाखंड है। एक ही शिला से निर्मित इसकी ऊँचाई लगभग 700 फीट है ।

संगारेड्डी : तेलंगाना के उत्तर पश्चिमी हिस्से में स्थित संगारेड्डी हैदराबाद से 66 कि.मी. दूरी पर है। इस जिले में बी. एच.ई.एल. बी. डी. एल और आई.आई.टी भारत भर में प्रसिद्ध हैं ।

विकाराबाद : तेलंगाना के पश्चिम हिस्से में स्थित विकाराबद हैदराबाद 76 कि.मी. दूरी पर है। इस जिले में अनंतगिरी की पहाडियाँ और अनंत पद्मनाभ स्वामी का मंदिर है । इसके अतिरिक्त रामलिंगेश्वर, भूकैलाश, कोडंगल वेंकटेश्वर, एकांबेश्वर भगवान का मंदिर दर्शनीय हैं ।

मेदक : हैदराबाद से मेदक की दूरी लगभग 77 कि.मी. है। मेदक शब्द तेलुगु भाषा के मेतुकु शब्द से बना है। मेतुकु का अर्थ है – धान । इस जिले में धान की पैदावर अधिक होने के कारण आगे चलकर इस प्रांत का नाम मेदक पड गया । यहाँ का डायोसिस चर्च का पूरे एशिया में प्रसिद्ध है । जोगिनाथ मंदिर, एडुपायला दुर्गा भवानी मंदिर प्रसिद्ध हैं ।

सिद्दिपेट : हैदराबाद से सिद्दिपेट की दूरी लगभग 87 कि.मी. है। अधिक जनसंख्या की दृष्टि से यह जिला महत्वपूर्ण है । शरभेखर मंदिर, रामसमुद्रम मिनी टैंकबंड, बोटिंग पांइट आदि पर्याटक स्थाल हैं ।

जनगाँव : जनगाँव का दूसरा नाम जनगाम भी है । जनगाँव शब्द की उत्पत्ति “जैनगाँव से हुई है । कहा जाता है कि किसी समय यहाँ जैन धर्मावलंबियों की संख्या अधिक थीं । हैदराबाद से जनगाँव की दूरी लगभग 87 कि.मी. है । ऐतिहासिक दृष्टि से कोलनुपाका सर्वप्रसिद्ध तीर्थ व पर्याटन स्थल हैं । जैनों की आराध्य स्थल होने के कारण दूर दूर भक्त आते हैं । विश्व प्रसिद्ध पीतल कारीगरी के लिए “पेंबर्ती” यहीं पर स्थित है । कहा जाता है कि जनगाँव में प्रभु श्रीरामचंद्र स्वर्ण हिरण (मारिच) की खोज में निकले थे ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

नलगोंडा : नलगोंडा दक्षिण तेलंगाण का प्रांत है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 95 कि.मी. हैं। नलगोंडा – नल्ला और कोंडा शब्दों से हुई है । नल्ला का अर्थ काला और कोंडा का अर्थ पहाड । अर्थात् काले पहाडों का प्रांत । कृष्णा, मूसी, आले, पेद्दवागु पालेरू जैसी नदियाँ यहाँ से होकर गुजरती हैं । पानगल में त्रिकुटालयम (सोमेश्वर स्वामी का मंदिर) प्रसिद्ध शैव क्षेत्र है । नागर्जुन सागर, नंदिकोंडा, बौद्ध संग्रहालय प्रसिद्ध हैं ।

महबूब नगर : पहले यह पालमुरु के नाम से जाना जाता है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 110 कि.मी. है। यह प्रांत शातवाहन चालुक्य और गोलकोंडा शासकों के आकर्षण केंद्र बना रहा। यह प्रसिद्ध मंदिर की धरती है । यहाँ पर 700 वर्ष पुराना पिल्ललमर्री नामक बरगद पेड है। कोयलसागर बाँध सबका मन मोह लेती है ।

कामारेड्डी : कुछ समय पूर्व तक यह निजामाबाद जिले का अंग था । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 110 कि.मी. है। यहाँ स्थित पोचाराम परियोजना (project) राज्य में प्रसिद्ध है । यह सुंदर पर्याटक जलक्रीडा क्षेत्र है। सर्दी के दिनों में कोऊल झील विदेशी पक्षियों का केंद्र बनता है । दोमकोंडा और कोऊल किला ऐतिहासिक स्थल हैं ।

राजन्ना सिरसिला : इस जिले के नाम में राजन्ना शब्द प्रभु राजराजेश्वर तथा सिरिसिल्ला हथकर उद्योग का प्रतीक है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 133 कि.मी. है । यहाँ से बहनेवाली मानेरू नदी सुंदर लगती है । प्रसिद्ध शैव क्षेत्र वेमुलवाडा यहीं पर स्थित है । इसे तेलंगाना का दक्षिण कासी भी करते हैं। लक्ष्मीनरसिंहस्वामी का मंदिर तथा सिरिसिल्ला टेक्स्टाइल पार्क महत्वपूर्ण पर्याटक स्थल हैं ।

नागरकर्नूल : तेलंगाना के दक्षिणी प्रांत के इस स्थान की दूरी हैदराबाद से लगभग 33 कि.मी. है। इसका इतिहास 500 वर्ष पुरानी है । यहाँ पर नागार्जुन सागर श्रीशैलम बाघ (Tiger) संरक्षण केंद्र है । यह क्षेत्र उमामहेश्वर स्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है । सोमशिला परियोजना एवं श्रीशैलम बाँध की दर्शन के लिए प्रतिदिन संख्या में पर्याटक आते हैं ।

सूर्यापेट : तेलंगाना के दक्षिणी प्रांत में स्थित इसकी दूरी हैदराबाद से लगभग 137 कि.मी. है। यह प्रांत कृष्णा नदी की कृपा से दक्षिण भारत में सिमेंट उद्योग का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। दूसरी ओर नागार्जुन सागर बाँध के द्वारा प्राप्त जल से यहाँ की कृषि की सुंदरता दिखाई देती है । उडुगोंडा लक्ष्मीनारसिंह स्वामी, अर्वपल्ली और मट्टपल्ली लक्ष्मीनारसिंह स्वामियों के मंदिर, सूर्यापेट वेंकटेश्वर स्वामी, मिर्याला सीतारामचंद्र स्वामियों के मंदिर देखने योग्य हैं ।

वनपर्ति : तेलंगाना के दक्षिण प्रांत में स्थित वनपर्ति की दूरी – हैदराबाद से लगभग 147 कि.मी. है । निजाम के शासन काल में वनपर्ति संस्थान के नाम से प्रसिद्ध था । यह संस्थान तेलंगाना के प्राचीन संस्थानों में एक है । वनपर्ति महल देखने लायक पर्याटक स्थान है। इसे मुस्तफा महल भी कहा जाता है। आगे चलकर इस महल को पॉलिटेकनीक विश्वविद्यालय के रूप में बदल दिया गया । यहाँ से कुछ दूर पर श्रीरंगपुर प्रांत है । यहाँ श्रीरंगनायकस्वामी मंदिर है ।

वरंगल (ग्रामीण तथा शहरी) : तेलंगाना के प्रमुख नगरों में वरंगल एक है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 147 कि. मी. है। काकतीय शासनकाल में यह नगर उनकी राजधानी हुआ करती थी। इसीको ओरुगल्लू या एकशिलानगर के नाम से भी जाना जाता है । यहाँ पर स्थित हजार खंभा मंदिर, भद्रकाली मंदिर, पद्माक्षी मंदिर आदि देखने योग्य हैं ।

करीमनगर : इसका वास्तविक नाम एलगंडाला है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 158 कि. मी. है । निजाम शासक सैयद करीमुल्ला शाह साहेब किलादार नाम से करीमनगर नाम पडा । मानेरु यहाँ पर बहनेवाली प्रमुख नदी है। एलगंडाला किले की विशेषता यह है कि इस में दो पत्थरों की बडी दीवारें, दो मस्जिदें, दो मंदिर, कारागृह, कुएँ तथा अन्य महत्वपूर्ण निर्माण देखने को मिलते हैं। लोअर मानेरू बाँध के पास राजीव गाँधी हिरण उद्यान है । शिवराम उद्यान भी देखने योग्य हैं ।

नारायण पेट : वर्ष 2019 में नवनिर्मित जिलों में यह प्रमुख है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 165 कि. मी. है। सन् 1630 में मराठा सम्राट शिवाजी यहाँ आकर जुलाहों की विशेषता देखकर आश्चर्यचकित रह गए थे । उन्हीं के प्रभाव से मराठा लोग यहाँ आकर बस गए। नारायण पेट की सूती और रेशमी साडियों में तेलंगाना – महाराष्ट्र संस्कृति का प्रभाव दिखायी देता है । नारायणपेट की साडियाँ बहु प्रसिद्ध हैं ।

निजामाबाद : यह तेलंगाना का तीसरा सबसे बड़ा नगर है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 170 कि.मी है । हैदराबाद राज्य के चौथे शासक निजामुल मुल्क के नाम पर इस प्रांत का नाम निजामाबाद पडा । यह नगर धार्मिक सद्भावना तथा सौहार्द का प्रतीक है । निजामाबाद का किलार अशोक सागर झील पर्याटको को अकर्षित करते हैं । अलीसागर हिरण उद्यान और झील तथा मल्लाराम जंगल मनोरंजन का एक अच्छा विकल्प है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

जगित्याल : हैदराबाद से लगभग 186 कि. मी. दूरी पर स्थित जगित्याला गोदावरी नदी की सुंदर देन है । श्रीरामसागर परियोजना बाँध पर्याटकों के आकर्षण केंद्र है। ओदेला में मल्लिखार्जुन स्वामी और कमानपुर में श्री वराहास्वामी के मंदिरों के लिए विख्यात है । गोदावरी के तट पर बसे धर्मपुरी में श्री लक्ष्मीनारसिंह स्वामी, का मंदिर, कोटिलिंगाला ग्राम में कोटेश्वर स्वामी, का मंदिर, आंजनेयस्वामी मंदिर भी हु प्रसिद्ध हैं ।

पेद्दपल्लि : हैदराबाद से लगभग 192 कि. मी. पर पेद्दपल्लि स्थित है । यह उत्तर और दक्षिण भारत को जोडनेवाला प्रमुख रेल्वे केंद्र है । एन. टी. पी. सी रामगुंडम में स्थित है । गोदावरी नदी से प्राप्त जल की वजह से उत्पन्न कपास अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात है । रामगिरी किला यहाँ की ऐतिहासिक इमारत है । पेद्दापल्ली को भारत का प्रथम ISO 14001 प्रामाणित इकाई होने का गौरव प्राप्त है ।

जोगुलांबा – गवाल : हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 192 कि. मी. है । गवाल किले का निर्माण 17 वीं शताब्दी में पेदसोमा भूपालुडु ने करवाया । गवाल विश्वप्रसिद्ध हथकरद्या जरी साडियों के लिए प्रसिद्ध है । जूराला कृष्णा नदी पर बनाया गया सुंदर बाँध है । आलमपुर के पास तुंगभद्रा नदी के तट पर जोगुलांबा देवी का शक्तिपीठ मंदिर है। जोगुलांबा देवी शक्ति पीठ आठारह (18) शक्तिपीठों में से एक है ।

मुलुगु : वर्ष 2019 में भूपालपल्ली जिले के कुछ भागों को अलग कर बनाया गया जिला ही मुलुगु है । हैदराबाद से इसकी दूरी लगभग 193 कि. मी. है। इसी प्रांत में विश्वप्रसिद्ध जनजाति उत्सव सम्मक्का सारक्का जातरा या मेडाराम जातरा का आयोजन प्रति दो वर्ष में एक बार किया जाता है ।

खम्मम : हैदराबाद से खम्मम की दूरी लगभग 200 कि. मी. है । खम्मम शब्द का उद्भव पहाडी स्तंभाद्री से हुआ है। यहाँ पर नरसिंह स्वामी का मंदिर है । शहर का नाम पहले स्तंभाद्र बाद में खंभाद्री, खंभमेट्टु तथा अंत में खम्मम होगया । यह शहर [कृष्णा नदी की सहायक नदी] मुन्नेर नदी के तट पर बसा है । खम्मम किले का निर्माण 950 ई. में. काकतीय शासकों ने किया । जमलापुरम नामक छोटा सा गाँव में भगवान वेंकटेश्वर का प्रसिद्ध मंदिर है । कुसुमांची में गणपेश्वरालयम और मुक्केटश्वरालयम जैसे प्रसिद्ध शैव मंदिर हैं ।

महबूबाबाद : हैदराबाद से महबूबाबाद की दूरी लगभग 212 कि. मी. है । तेलुगु भाषी इस प्रांत को मनुकोटा कहते हैं । मनुंकोटा शब्द का उद्भव तेलुगु के म्रनु यानी पेट तथा कोटा यानी किला शब्द से हुआ है । इसका अर्थ है – पेडवाला किला आगे चलकर महबूब नामक शासक के नाम पर महबूबाबाद पड गया । यहाँ का बय्यारम मंडल लोह खनिज का प्रचुर उत्पादक है । वीरभद्रस्वामी मंदिर में वीरभद्र की मूर्ति क्रोधी भंगिमा के साथ त्रिनेत्री तथा दस हाथों वाले हैं ।

भूपालपल्ली : (आचार्य जयशंकर) : हैदराबाद से भूपालपल्ली की दूरी लगभग 216 कि. मी. है। इस जिले का नाम तेलंगाना राज्य आंदोलन के सिद्धांतकर्ता प्रो. जयशंकर के नाम पर रखा गया है। इस प्रांत में कई सारे आध्यात्मिक दर्शनीय स्थल है । यहीं पर स्थित कालेश्वरम दक्षिण का त्रिवेणी संगम कहलाता है । यहाँ पर गोदावरी, प्राणहिता और भूतल में बहनेवाली अंतर्वाहिनी का संगम होता है। रामप्पा मंदिर काकतीय नरेशों की कलाप्रियता का उदाहरण है। यहाँ पर रामप्पा और लकनावरम झील प्रकृति की सुंदर छटा बिखेरती है ।

निर्मल : हैदराबाद से निर्मल की दूरी लगभग 222 कि. मी. है। यह प्रांत गोदावरी नदी के कारण अत्यंत उपजाऊ है। यह प्रांत बाँस और लकडी के बने खिलौने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं । प्रकृति एवं शिक्षा प्रेमी इस जिले के ज्ञान सरस्वती बासरा के लिए सदा याद करते हैं। गोदावरी के तट पर स्थित बासरा पर्याटकों को अपनी और आकर्षित करता है ।

मंचिरियाल : मंचिरियाल, हैदराबाद से 256 कि. मी दूरी पर स्थित है । यह प्रांत गोदावरी और प्राणहिता नदियों के आशीर्वाद से हरा भरा है । यह प्रांत सिंगरेणी कोयला खदान और सिमेंट उत्पादन के कई कारखानों के लिए प्रसिद्ध हैं । इस जिले के चेन्नूर में मगर मछ संरक्षण उद्यान का केंद्र है । घने जंगलों के बीच बसा कवाल बाध संरक्षण केंद्र बहुत ही सुंदर है । गुडेम श्री सत्यनारायण स्वामी का मंदिर पूजनीय और दर्शनीय है ।

भद्राद्रि कोत्तागुड़ेम : भद्राद्रि कोत्तागुड़ेम, हैदराबाद से 284 कि. मी. की दूरी पर स्थित है । भद्राचलम गोदावरी के तट पर बसा अत्यंत मनोहर तीर्थस्थान है । कोयला खदानों के लिए प्रसिद्ध है । किन्नरसानी, पर्णशाला आदि आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं । किन्नरसानी परियोजना बाँध किन्नरसानी सहायक नदी पर बना है। पुराणों के अनुसार रानण द्वारा सीता की अपहरणस्थली के रूप में दुम्मुगुडेम प्रसिद्ध हैं ।

आसिफाबाद : यह एक जनजाति जिला है । हैदराबाद से इसकी दूरी 291 कि.मी. है । कोमरमभीम नामक जनजाति युवक द्वारा की गई जल, जंगल, जमीन आंदोलन में जनजाति को न्याय मिल सका । इसलिए इस प्रांत को आसिफाबाद कोमरमभीम जिला भी कहा जाता है । पेद्दवागु एक परियोजना है, जो प्राणहित नदी की सहायक नदी पेद्दवागु पर निर्मित है । वट्टी वागु व कोमरमभीम परियोजनाएँ, सप्तगुंडा, पिट्टगुंड और मिट्टेवाटर जलप्रपात तथा सिरपुर कागजनगर आदि प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

आदिलाबाद : हैदराबाद से आदिलाबाद की दूरी लगभग 305 कि. मी. है। इस प्रांत का नाम वीजापुर के शासक अली आदिल शाह के नाम पर पडा । इस प्रांत को दक्षिण भारत का प्रवेश द्वारा कहा जाता है । सहयाद्री पर्वत श्रेणियों तथा उत्तर पश्चिम मानसून के प्रभाव से यह प्रांत हमेशा आनंददायी रहता है । कडेम बाँध, पापहरेश्वर मंदिर, जैनाथ मंदिर तथा कलवा नरसिंह स्वामी मंदिर यहाँ प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं ।

इस तरह तेलंगाना राज्य का प्रत्येक प्रांत अपनी मनोहरी छटा से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है ।

तेलंगाना के दर्शनीय स्थल Summary in Telugu

సారాంశము

छेई 14 జూన్ 2014న స్థాపించబడిన తెలంగాణ రాష్ట్రం భారతదేశానికి 29వ రాష్ట్రం. దీని రాజధాని హైదరాబాద్. ఈ రాష్ట్ర సౌందర్యం అంతులేని, వర్ణించనలవికాని మరియు వైభవోపేతమైనది. ఈ రాష్ట్రంలో అణువణువు దర్శించదగినది. ఈ రాష్ట్రంలోని ప్రముఖ దర్శనీయ స్థలాల విహార పర్యటన అనుభూతులను తెలుసుకుందాం.

హైదరాబాద్ : హైదరాబాద్ తెలంగాణ రాష్ట్ర రాజధాని. ఇది ఒక చారిత్రాత్మక నగరం. కులీకుతుబ్షాహీ మరియు నిజాం పాలకులు నిలిపిన శ్రేష్టమైన నగరం. దీనిని భాగ్యనగరం మరియు ముత్యాల నగరం అని కూడా పిలవబడుతుంది. ఇక్కడి చారిత్రాత్మక దర్శనీయ ప్రదేశాలు చార్మినార్, గోల్కొండ, మక్కామసీద్, సాలార్జంగ్ మ్యూజియం, హుసేన్ సాగర్, ట్యాంక్ బండ్, నెహ్రూజులాజికల్ పార్కు, హైటెక్సిటీ మొదలయిన ప్రదేశాలు చూడదగినవి.

మేడ్చల్ – మల్కాజిగిరి : మేడ్చల్ మల్కాజిగిరి జిల్లా ముఖ్య కేంద్రం. ఇది హైదరాబాద్ నుండి సుమారు 27 కి. మీ. దూరంలో ఉంటుంది. ఇక్కడి కీసరగుట్ట శివభక్తుల ప్రముఖ మందిరం.

రంగారెడ్డి : రంగారెడ్డి జిల్లా పేరును సంయుక్త ఆంధ్రప్రదేశ్ ఉపముఖ్యమంత్రి మరియు స్వతంత్ర తెలంగాణ రాష్ట్ర ఆందోళన సేనాని అయిన కొండా వెంకట రంగారెడ్డి గారి పేరున పెట్టడం జరిగింది. ఈ జిల్లాలో హిమయత్సాగర్, రామోజీ ఫిల్మ్ సిటీ, చేవెళ్ళ, కందుకూరు మరియు షాద్నగర్ ప్రముఖ పర్యాటక ప్రదేశాలు.

యాదాద్రి – భువనగిరి : యాదాద్రి – భువనగిరి హైదారాబాద్ నుండి సుమారు 50 కి. మీ. దూరంలో ఉంటుంది. వైష్ణవ భక్తుల ప్రసిద్ధ పుణ్యక్షేత్రం యాదగిరి గుట్ట. ఇక్కడనే ఉంది చాళుక్య రాజుల ద్వారా నిర్మింపబడిన భువనగిరి కోట. ఒక అద్భుత కళాఖండం. ఒకే శిలమీద నిర్మించబడినది. దీని ఎత్తు సుమారు 700 అడుగులు.

సంగారెడ్డి : ఇది (సంగారెడ్డి జిల్లా) తెలంగాణ ఉత్తర – పశ్చిమ భాగంలో ఉంది. హైదరాబాద్ నుండి ఇది 66 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ జిల్లాలో BHEL, BDL మరియు IIT సంస్థలు భారతదేశం మొత్తం ప్రసిద్ధిగాంచాయి.

వికారాబాద్ : ఇది (వికారాబాద్ జిల్లా) తెలంగాణ పశ్చిమ భాగంలో ఉంది. హైదరాబాద్ నుండి ఇది 76 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ జిల్లాలో అనంతగిరి పర్వతాలు మరియు అనంత పద్మనాభస్వామి వారి మందిరం ఉంది. ఇవేకాకుండా రామలింగేశ్వర, భూకైలాశ్, కొడంగల్ వెంకటేశ్వర, ఏకాంబేశ్వర దేవాలయాలు దర్శించదగినవి.

మెదక్ : హైదరాబాద్ నుండి మెదక్ సుమారు 77 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. మెదక్ అనే శబ్దం తెలుగు భాషలోని మెతుకు అనే శబ్దంతో తయారైంది. “మెతుకు అంటే అర్థం – “ధాన్యం”. ఈ జిల్లాలో ధాన్యం అధికంగా పండటం వల్ల మెల్లమెల్లగా ఈ ప్రాంతానికి మెదక్ అనే పేరు పడిపోయింది. ఇక్కడి “డాయోసిస్ చర్చి” ఆసియా ఖండం మొత్తంలో ప్రసిద్ధి. ఇక్కడ జోగినాథ మందిరం, ఏడుపాయల దుర్గాభవాని మందిరం ప్రసిద్ధి చెందినవి.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 6 तेलंगाना के दर्शनीय स्थल

సిద్ధిపేట : హైదరాబాద్ నుండి సిద్ధిపేట సుమారు 87 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. అధిక జనాభా కలిగిన జిల్లాగా ఇది ప్రసిద్ధిగాంచింది. శరభేశ్వర్ మందిరం, రామ సముద్రం, మినీ ట్యాంక్ బండ్, బోటింట్ పాయింట్ మొదలయినవి పర్యాటక ప్రదేశాలు.

జనగాం : జనగాంకి మరొక పేరు “జనగామ”. జనగాం శబ్దం జైనగాంవ్ నుండి ఉద్భవించింది. ఎపుడో ఇక్కడ జైన ధర్మాన్ని అవలంబించిన వారి సంఖ్య ఎక్కువగా ఉండేది అని చెపుతుంటారు. హైదరాబాదున్నుండి జనగాం సుమారు 87 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. చారిత్రక దృష్టిలో కొలనుపాక ఎంతో ప్రసిద్ధమైన తీర్థ మరియు పర్యాటక స్థలం. ఇది జైనుల ఆరాధ్య స్థలం కావడంతో దూర – దూర ప్రాంతాలనుండి భక్తులు వస్తుంటారు. ప్రపంచ ప్రఖ్యాతమైన రాగి పరిశ్రమ “పెంబర్తి” ఈ జిల్లాలోనే ఉంది. జనగాంలో ప్రభుశ్రీరామచంద్రుడు స్వర్ణజింక (మారీచుడు)ను వెదికేందుకు ఇక్కడకు వచ్చారని
చెపుతుంటారు.

నల్లగొండ : నల్లగొండ దక్షిణ తెలంగాణ ప్రాంతంలో ఉంది. హైదరాబాద్ నుండి నల్లగొండ సుమారు 95 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. నల్లగొండ నల్ల మరియు కొండ శబ్దాలతో ఏర్పడింది. నల్లా అనగా నలుపు మరియు కొండ అనగా పర్వతం. అంటే నల్ల కొండలుగల ప్రాంతం. కృష్ణా, మూసీ ఆలేరు, పెద్దవాగు, పాలేరులాంటి నదులు ఈ ప్రాంతం నుండి ప్రవహిస్తాయి. పానగల్లో త్రికుటాలయం (సోమేశ్వరస్వామి మందిరం) ప్రసిద్ధి చెందిన శైవక్షేత్రం. నాగార్జునసాగర్, నందికొండ, బౌద్ధ సంగ్రహాలయం ప్రసిద్ధి చెందినవి.

మహబూబ్నగర్ : మొదట్లో మహాబూబ్నగర్ పాలమూరు పేరుతో పిలవబడింది. హైదరాబాద్ నుండి మహబూబ్నగర్ సుమారు 110 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ ప్రాంతం శాతవాహనుల, చాళుక్యుల మరియు గోల్కొండ శాసకులకు ఆకర్షణ కేంద్రంగా ఉండేది. ఇది ప్రసిద్ధ మందిరాల పుణ్యభూమి. ఇక్కడ 7 వందల సంవత్సరాల పురాతన మర్రిచెట్టు ఉంది. దీని పేరు పిల్లల మర్రి. ఇక్కడి కోయలసాగర్ ఆనకట్ట అందరి మనస్సులను మోహిస్తుంది.

కామారెడ్డి : కొంత కాలం క్రితం వరకు కామారెడ్డి నిజామాబాద్ జిల్లాలోని ఒక భాగం. హైదరాబాద్ నుండి కామారెడ్డి సుమారు 110 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఇక్కడి పోచారం ప్రాజెక్టు తెలంగాణ రాష్ట్రంలో ప్రసిద్ధి చెందిన ప్రాజెక్టు. ఇది అందమైన పర్యాటక జలక్రీడా ప్రాంతం. చలికాలంలో కోవూలా సరస్సు విదేశీ పక్షుల కేంద్రంగా ఉంటుంది. కోవూలా కోట, దోమకొండ చారిత్రాత్మక ప్రదేశాలు.

రాజన్న సిరిసిల్లా : ఈ జిల్లా పేరులో “రాజన్న” శబ్దం రాజ రాజేశ్వర ప్రభువుగా మరియు “సిరిసిల్లా” చేతిమగ్గాల పరిశ్రమకు ప్రతీక / గుర్తు. హైదరాబాద్ నుండి ఈ ప్రాంతం సుమారు 133 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఇక్కడ నుండి ప్రవహించే మానేరు నది అందంగా ఉంటుంది. ప్రసిద్ధ శైవక్షేత్రమైన వేములవాడ ఇక్కడనే ఉంది. దీనిని -తెలంగాణ దక్షిణ కాశీగా పిలుస్తారు. లక్ష్మీనరసింహస్వామి మందిరం మరియు సిరిసిల్లా టెకాయిల్ పార్క్ గొప్ప పర్యాటక ప్రదేశాలు.

నాగర్ కర్నూల్ : తెలంగాణ దక్షిణ ప్రాంతమైన నాగర్ కర్నూల్ హైదరాబాద్ నుండి సుమారు 133 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. దీని చరిత్ర 500 సంవత్సరాల పురాతనమైనది. ఇక్కడ నాగార్జునసాగర్, శ్రీశైలం పులుల సంరక్షణ కేంద్రం ఉంది. ఈ ప్రదేశం ఉమామహేశ్వరస్వామి మందిరానికి ప్రసిద్ధి. సోమశిల మరియు శ్రీశైలం ఆనకట్టలను దర్శించేందుకు ప్రతిరోజు పెద్ద సంఖ్యలో పర్యాటకులు వస్తూ ఉంటారు.

సూర్యాపేట : తెలంగాణ దక్షిణ ప్రాంతంలో ఉన్న సూర్యాపేట హైదరాబాద్ నుండి సుమారు 137 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ ప్రాంతం కృష్ణానది పుణ్యమా అని దక్షిణ భారతదేశంలో సిమెంట్ పరిశ్రమకు ప్రముఖ కేంద్రంగా ఉంది. రెండవ వైపు నాగార్జునసాగర్ ఆనకట్ట ద్వారా లభించే నీటితో ఇక్కడి వ్యవసాయం అందంగా కన్పిస్తుంది. ఉండ్రుగొండ, అర్వపల్లి మరియు మట్టపల్లిలోని శ్రీలక్ష్మినరసింహస్వాముల మందిరాలు, సూర్యాపేట వెంకటేశ్వరస్వామి, మిర్యాల సీతారామచంద్రస్వామి వార్ల మందిరాలు బహు చక్కని చూడదగ్గ ప్రదేశాలు.

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వనపర్తి : తెలంగాణ దక్షిణ ప్రాంతంలో ఉన్న వనపర్తి హైదరాబాద్ నుండి సుమారు 147 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. నిజాం శాసన కాలంలో వనపర్తి ఒక సంస్థానంగా ప్రసిద్ధి చెందినది. తెలంగాణలోని ప్రాచీన సంస్థానాల్లో ఇదీ ఒకటి. వనపర్తి మహల్ చూడదగిన పర్యాటక ప్రదేశం. ఈ మహల్ ముస్తఫామహల్ అని కూడా పిలవబడుతుంది. కొంతకాలం తర్వాత దీనిని పాలిటెక్నిక్ విశ్వవిద్యాలయంగా మార్చబడినది. ఇక్కడ నుండి కొద్ది దూరంలో శ్రీరంగపురం ఉంది. ఈ శ్రీరంగపురంలో ప్రసిద్ధి చెందిన శ్రీరంగ నాయకస్వామి మందిరం ఉంది.

వరంగల్ (గ్రామీణ మరియు పట్టణ) : తెలంగాణ ప్రముఖ నగరాల్లో ఈ వరంగల్ ఒకటి. ఇది హైదరాబాదు నుండి 147 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. కాకతీయులు దీనిని రాజధానిగా చేసుకుని పాలన కొనసాగించారు. దీన్ని ‘ఓరుగల్లు’ లేదా “ఏకశిలా నగరం” అని కూడా పిలిచేవారు. ఇక్కడ “వెయ్యి స్థంభాల గుడి”, “భద్రకాళి మందిరము” మరియు “పద్మాక్షీ మందిరము” ముఖ్యంగా చూడదగిన ప్రాంతాలు.

కరీంనగర్ : దీని అసలు పేరు “ఎలగండాల”. ఇది హైదరాబాదు నుండి సుమారు 158 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. నిజాం శాసకుడు “సయ్యద్ కరీముల్లా షాహ్ సాహెబ్ కిలాదార్” పేరు నుండి “కరీంనగర్” పేరు వచ్చింది. ఇక్కడ ‘మానేరు’ అనే ప్రముఖ నది ప్రవహిస్తుంది. ఎలగండాల కోటలో రెండు రాళ్ళతో కూడిన పెద్ద గోడలు, రెండు మసీదులు, రెండు ఆలయాలు చెరసాల, బావి మరియు ఇతర గొప్ప నిర్మాణాలను చూడవచ్చు. దిగువ మానేరు ఆనకట్ట వద్ద రాజీవ్ గాంధీ జింకల పార్క్ ఉంది. శివరామ్ ఉద్యానవనము కూడా చూడదగిన ప్రాంతమే.

నారాయణపేట : 2019 సంవత్సరములో నూతనంగా నిర్మించబడిన జిల్లాల్లో ఇది ప్రముఖమైనది. హైదరాబాదు నుండి దాదాపు 165 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. 1630 సంవత్సరములో మరాఠా ప్రభువైన శివాజీ ఇక్కడికి వచ్చి, ఇక్కడి నేత పనివారి గొప్పదనం చూసి ఆశ్చర్యచకితులైనారు. దానితో మరాఠీలు ఇక్కడ స్థిరపడినారు. నారాయణ పేట యొక్క పట్టుదారంతో నేసిన చీరల్లో తెలంగాణ మహారాష్ట్ర సంస్క ృతుల ప్రభావం కనిపిస్తుంది. నారాయణపేట చీరలు చాలా ప్రసిద్ధి పొందాయి.

నిజామాబాద్ : ఇది తెలంగాణాలో 3వ పెద్ద నగరం. ఇది హైదరాబాదు నుండి రమారమి 170 కి.మీ. ఉంటుంది. హైదరాబాదు రాష్ట్ర నాల్గవ శాసకుడైన “నిజాముల్ ముల్క్” పేరు మీద ఈ ప్రాంతానికి నిజామాబాద్ అని వచ్చింది. ఈ నగరం ధార్మిక మరియు మైత్రి భావనలకు ప్రతీక. నిజామాబాద్ కోట మరియు అశోక్సాగర్ సరస్సు ఆకర్షణీయమైనవి. ఆలీసాగర్ జింకల పార్క్ మరియు సరస్సు, ముల్లారాయ్ వనము మానసికోల్లాస ప్రాంతాలు.

జగిత్యాల: హైదరాబాదు నుండి సుమారు 186 కి.మీ.ల దూరంలో ఉంది. ఇది గోదావరి నది యొక్క అందమైన వరము. శ్రీరాంసాగర్ ప్రాజెక్ట్ పర్యాటకులకు ఆకర్షణగా నిలిచింది. ఓదెలాలో మల్లిఖార్జున స్వామి మరియు కమాన్పూర్లో శ్రీ వరాహస్వామి ఆలయాలు ప్రసిద్ధి చెందాయి. గోదావరి ఒడ్డున ధర్మపురిలో శ్రీలక్ష్మీ ్మనారసింహస్వామి ఆలయం, కోటిలింగాల గ్రామంలో కోటేశ్వర స్వామి గుడి, ఆంజనేయస్వామి గుడి ప్రసిద్ధి చెందినాయి.

పెద్దపల్లి: ఇది హైదరాబాదు నుండి దాదాపు 192 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఇది ఉత్తర మరియు దక్షిణ భారతాన్ని కలిపే ముఖ్య రైల్వే కేంద్రం. రామగుండంలో NTPC నేషనల్ థర్మల్ పవర్ కార్పోరేషన్ ఉంది. గోదావరి నది నుండి లభించే నీటివల్ల ఉత్పత్తి అయ్యే దూది అంతర్జాతీయ స్థాయిలో ప్రఖ్యాతి చెందినది. రామగిరి కోట ఇక్కడి చారిత్రాత్మక కట్టడం. పెద్దపల్లికి భారతదేశ ప్రథమ ISO 14001 ప్రామాణిత యూనిట్గా గౌరవం లభించింది.

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జోగులాంబ – గద్వాల్ : జోగులాంబ – గద్వాల్ హైదరాబాదు నుండి సుమారు -192 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. 17వ శతాబ్దంలో పెదసోమభూపాలుడు గద్వాల్ కోటను నిర్మింపచేసాడు. గద్వాల్ ప్రపంచ ప్రసిద్ధమైన చేతిమగ్గాల (హ్యాండ్లూమ్) జరీ చీరలకు ప్రసిద్ధి. జూరాల కృష్ణానది మీద కట్టబడిన అందమైన ఆనకట్ట. తుంగభద్రా నదీ తీరంలో జోగులాంబ దేవి శక్తిపీఠమందిరం కలదు. ఇది 18 శక్తి పీఠాలలో ఒకటి.

ములుగు : 2019 సంవత్సరములో భూపాలపల్లి జిల్లా నుండి కొన్ని ప్రదేశాలను వేరుచేసి ఏర్పాటుచేసిన జిల్లాయే ములుగు. హైదరాబాదు నుండి ఇది దాదాపు 193 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ ప్రాంతంలోనే విశ్వవిఖ్యాత జనజాతి ఉత్సవమైన సమ్మక్క- సారక్క లేదా మేడారం జాతర ప్రతి రెండు సంవత్సరాలకు ఒకసారి జరుపబడుతుంది.

ఖమ్మం : హైదరాబాదు నుండి ఖమ్మం సుమారు 200 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. “ఖమ్మం” అనే శబ్దం “స్తంభాద్రి” శబ్దం నుండి పుట్టింది. ఇక్కడ నరసింహస్వామి మందిరం ఉంది. ఈ పట్టణం పేరు మొదటిగా స్తంభాద్రిగాను ఆ తర్వాత క్రమేణా ఖంభాద్రి, ఖంభమెట్టు అని చివరకు ‘ఖమ్మం’గా స్థిరపడింది. ఈ పట్టణం మున్నేరు నదీ తీరంలో ఉంది. క్రీ.శ. 950లో కాకతీయ రాజులు ఖమ్మం కోటను నిర్మించారు. జమలాపురం అనే చిన్న గ్రామంలో వెంకటేశ్వర స్వామివార్ల ప్రసిద్ధ మందిరం కలదు. కూసుమంచిలో గణపేశ్వరాలయం మరియు ముక్కంటేశ్వరాలయంలాంటి ప్రసిద్ధ శైవక్షేత్రాలు / మందిరాలు

మహబూబాబాద్ : హైదరాబాదు నుండి మహబూబాబాద్ సుమారు 212 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. తెలుగువారు ఈ ప్రాంతాన్ని మనుకోట అంటారు. “మనుకోట” శబ్దం తెలుగు భాషలోని “మ్రను” అనగా చెట్టు మరియు “కోట” అనగా కోట శబ్దాల నుండి ఉద్భవించింది. అంటే కోట అని అర్థం. మహబూబ్ అనే శాసకుని పేరే “మహబూబాబాద్” అయినది. ఇక్కడి బయ్యారం మండలం లోహఖనిజాల ఉత్పత్తికి ప్రసిద్ధి. మూడు నేత్రాలు, పది చేతులు కలిగి రౌధ్ర భంగిమలో ఉన్న వీరభద్రస్వామివారి ఆలయం ఇక్కడి విశేషం.

భూపాలపల్లి (ఆచార్య జయశంకర్) : హైదరాబాదు నుండి భూపాలపల్లి సుమారు 216 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ జిల్లా పేరును తెలంగాణ రాష్ట్ర ఆందోళన సిద్ధాంతకర్త ప్రొఫెసర్ జయశంకర్ గారి పేరు మీద పెట్టబడినది. ఈ ప్రాంతంలో అనేక ఆధ్యాత్మిక దర్శనీయ ప్రదేశాలు కలవు. ఇక్కడ ఉన్న కాళేశ్వరాన్ని దక్షిణ త్రివేణి సంగమంగా పిలవబడుతుంది. రామప్ప మందిరం కాకతీయ రాజుల కళాసృష్టికి చక్కటి ఉదాహరణ. ఇక్కడ రామప్ప మరియు లక్నవరం సరస్సులు ప్రకృతి సౌందర్య శోభను వెదజల్లుతాయి.

నిర్మల్ : హైదరాబాదు నుండి నిర్మల్ సుమారు 222 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. ఈ ప్రాంతంలో గోదావరి నది జలాల వల్ల అత్యధిక పంటలు పండించబడతాయి. ఇది వెదురు మరియు కర్రలతో తయారయ్యే బొమ్మలకు ప్రపంచ ప్రసిద్ధి గాంచినది. ప్రకృతి మరియు విద్యా ప్రేమికులు ఈ జిల్లాలోని జ్ఞాన సరస్వతి బాసరని ఎల్లప్పుడు గుర్తు చేసుకుంటారు. గోదావరి నదీ తీరంలో ఉన్న బాసర పర్యాటకులను తనవైపు ఆకర్షించుకుంటుంది.

మంచిర్యాల : మంచిర్యాల హైదరాబాదు నుండి 256 కి.మీ.ల దూరంలో ఉంది. ఇది గోదావరి మరియు ప్రాణహిత నదుల ఆశీర్వాదం వల్ల పచ్చదనంతో నిండినది. ఈ ప్రాంతం సింగరేణి బొగ్గుగనులకు మరియు సిమెంట్ ఉత్పత్తి చేసే అనేక పరిశ్రమల వల్ల ప్రసిద్ధి పొందినది. ఈ జిల్లాలో చెన్నూరులో మొసళ్ళ సంరక్షణా కేంద్రం ఉంది. ఇక్కడ దట్టమైన అడవులలో కవ్వాల్ పులుల సంరక్షణ కేంద్రం చాలా అందంగా ఉంటుంది. ఈ ప్రాంతంలో గుడెంశ్రీ సత్యనారాయణ స్వామి ఆలయం పూజనీయమైనది మరియు దర్శనీయమైనది.

భద్రాద్రి – కొత్తగూడెం: ఇది హైదరాబాదు నుండి 284 కి.మీ.ల దూరంలో ఉంది. గోదావరి నదీ తీరాన ఉన్న భద్రాచలం అతి మనోహరమైన తీర్థము. బొగ్గుగనులకు ప్రసిద్ధి. కిన్నెరసాని, పర్ణశాల మొదలగు స్థలాలు ఆధ్యాత్మిక గొప్ప పర్యాటక స్థలాలు. ఇక్కడి కిన్నెరసాని ఆనకట్ట గోదావరి ఉపనది అయిన కిన్నెరసాని నదిపై నిర్మించారు. పురాణాల ప్రకారం రావణుడు సీతాదేవి అపహరించిన స్థలంగా దుమ్మగూడెం చాలా ప్రసిద్ధి చెందినది.

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ఆసీఫాబాద్ : ఇది ఒక జనజాతి జిల్లా. హైదరాబాదు నుండి 291 కి.మీ. దూరంలో ఉంది. కొమరంభీమ్ అనే పేరుగల జనజాతి యువకుల ద్వారా చేయబడిన నీరు, అడవి, భూమి ఆందోళనలో వీరికి న్యాయం లభించింది. అందుకే ఈ ప్రాంతానికి ఆసీఫాబాద్ కొమరంభీమ్ జిల్లాగా కూడా పేరు ఉంది. ప్రాణహిత నది ఉపనది అయిన పెద్దవాగుపై పెద్దవాగు ప్రాజెక్టు నిర్మించారు. వట్టివాగు లేదా కొమరంభీమ్ ప్రాజెక్టులు, సప్తగుండ, పట్టిగుండ మరియు మట్టినీటి రిజర్వాయర్ మరియు సిరిపురం కాగజ్నగర్ మొదలగునవి చూడదగిన ప్రసిద్ధ స్థలాలు.

ఆదిలాబాద్ : హైదరాబాదు నుండి సుమారు 305 కి.మీ.ల దూరంలో ఉంది. బీజాపూర్ శాసకుడైన అలీఆదిల్షాహ్ పేరు మీద ఈ ప్రాంతానికి ఆ పేరు వచ్చింది. ఈ ప్రాంతం దక్షిణ భారతదేశానికి ప్రవేశద్వారంగా చెప్పబడుతుంది. సహ్యాద్రి పర్వత శ్రేణులు మరియు ఉత్తర – పశ్చిమ పవనాల ప్రభావంతో ఈ ప్రాంతం నిరంతరం ఆహ్లాదంగా ఉంటుంది. కడెం ఆనకట్ట, పాపేశ్వర మందిరము, జైనాథ్ మందిరము మరియు కలవా నరసింహస్వామి ఆలయం ఇక్కడ చూడదగిన ప్రముఖ స్థలాలు.

ఈ విధంగా తెలంగాణ రాష్ట్రంలోని ప్రతీ ప్రాంతం తన మనోహరమైన శోభతో పర్యాటకులను తమవైపు ఆకర్షిస్తాయి.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 5th Lesson बूढ़ी काकी Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 5th Lesson बूढ़ी काकी

दीर्घ प्रश्न (దీర్ఘ సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
‘बूढ़ी काकी’ पाठ का सारांश पाँच-छः वाक्यों में लिखिए ।
उत्तर:
बूढ़ी काकी अपने पति और पुत्र की मृत्यु के बाद सारी संपत्ति भतीजे बुद्धिराम के नाम कर देती है । संपत्ति हायिल करने के बाद बुद्धिराम और उसकी पत्नी रूपा और दो बेटे बूढ़ी काकी के साथ दुर्व्यवहार करते रहते हैं। लेकिन, बुद्धिराम की बेटी लाड़ली काकी का ख्याल रखती है। उसके बेटे मुखराम के तिलक – उत्सव के दिन स्वादिष्ट भोजन आधी रात को की लालसा में बूढ़ी काकी मेहमानों के जूठे खाना खाने लगती है । इस दृश्य को देखते ही, दया और पाप भीति से रूपा पछताती है और काकी को प्रेम से सभी खाद्यों से सज्जित थाली देती है। सभी भूलकर काकी सहर्ष खाना खाने के स्वर्गीय दृश्य देखकर रूपा आनंदमग्न होती है ।

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
प्रेमचंद की कुछ रचनाओं के नाम लिखिए ।
उत्तर:
कथा – सम्राट एंव उपन्यास सम्राट प्रेमचंद ने यथार्थवाद एवं आदर्शवाद से संबंधित लगभग 300 कदानियाँ और एक दर्जन उपन्यास लिखे । पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, कफेन, बूढी काकी आदि कहानियाँ प्रसिद्ध हैं । गोदान, गबन, प्रेमाश्रम, सेवा सदन, निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, प्रतिज्ञा, कायाकल्प आदि प्रसिद्ध उपन्यास हैं । गोदान इनका अंतिम तथा सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है । इनकी श्रेष्ठ वचनाएँ देश- विदेशी भाषाओं में अनूदित हुई और फिल्में भी बनाई गई ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

प्रश्न 2.
बूढ़े लोगों के प्रति हमारा व्यवहार कैसा होना चाहिए ।
उत्तर:
बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है । बूढ़े अपने जीवन काल में अपने परिवार व समाज के लिए अपनी सारी शक्ति खर्च करते हैं और बुढ़ापे में भौद्धिक एवं बौद्धिक शक्ति खो बैठते हैं। इसलिए बूढ़े लोगों के प्रति हमारा व्यवहार अच्छा होना चाहिए। बच्चों की तरह उनकी देख-भाल करनी चाहिए । उनकी समस्याएँ सुनकर, जानकर उन्हें दूर करना चाहिए । उन्हें पूरी तरह भरोसा देनी चाहिए ।

एक वाक्य प्रश्न (ఏక వాక్య సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
बूढ़ी काकी ने अपनी संपत्ति किसके नाम कर दी ?
उत्तर:
भतीजे बुद्धिराम के नाम पर

प्रश्न 2.
बूढ़ी काकी को सबसे अधिक क्या पसंद था ?
उत्तर:
स्वादिष्ट ले-लेकर खाना

प्रश्न 3.
उपन्यास सम्राट किन्हें कहा जाता है ?
उत्तर:
प्रेमचंद को

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

प्रश्न 4.
प्रेमचंद का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास कौनसा है ?
उत्तर:
गोदान

संदर्भ सहित व्याख्याएँ (సందర్భ సహిత వ్యాఖ్యలు)

1. बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन हुआ करता है। बूढ़ी काकी में जिला- स्वाद के सिवा और कोई चेष्टा शेष न थी और न अपने कष्टों की ओर आकर्षित करने का, रोने के अतिरिक्त कोई दूसरा सहारा ही ।

संदर्भ : यह कथा – सम्राट एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की सफल कहानी ‘बूढ़ी काकी’ के आरंभिक उद्धरण है। बुढ़ापा और बचपन में कोई अंतर नहीं, बताते हुए कहानीकार इस कहानी का आरंभ करते हैं ।

व्याख्या : प्रेमचंद कहते हैं कि प्रायः बुढ़ापन और बचपन का कोई अंतर नहीं होता । बुढ़ापन की चेष्टाएँ बचपन की चेष्टाएं जैसी होती हैं। बुढ़ापे में बचपन फिर से आता है। बूढ़ी काकी में जीभ का स्वाद जैसा लेकिन बाकी चेष्टाओं में एक भी न बची थी। उसका सहारा सिर्फ है, कोई दूसरा नहीं है । वह दीन स्थिति में थी ।

विशेषताएँ : आरंभिक पंक्ति एक सूक्ति जैसी है, जो पाठकों को उत्सुकता पैदा करती है। भाषा सरल और सुगम है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

2. परमात्मा, मेरे बच्चों पर दया करो। इस अधर्म का दंड मुझे मत दो, नहीं तो मेरा सत्यानाश हो जाएगा ।

संदर्भ : ये वाक्य महान कहानीकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की सफल कहानी ‘बूढ़ी काकी’ से दिए गए हैं। रात को रूपा की लड़की लाड़ली अपनी चारपाई में न पाकर इधर उधर ढूँढ़ती और देखती कि । जूठे पत्तलों पर से पूडियों के टुकड़े खा रही बूढ़ी काकी के पास खड़ी है। करुणा और भय से रूपा का हृदय द्रवित होता है। वह सच्चे दिल से अकाश की ओर हाथ उठाकर ये वाक्य कहती है ।

ब्याख्या : हे भगवान ! बूढ़ी काकी से किया जा रहा इस दुर्व्यवहार, इस दुस्थिति का कारण पति महित मैं और बच्चे हैं। इस विधर्म चेष्टा की सजा मुझे और बच्चों को मत दो। हम पर रहम करो ।

विशेषता : यह उद्धरण रूपा में स्थित पाप भीति एवं उससे हुआ हृदय – परिवर्तन का परिचायक है ।

बूढ़ी काकी Summary in Hindi

लेखक परिचय

मुंशी प्रेमचंद का जन्म सन् 1880 में उत्तर प्रदेश में वारणासी के निकट लमही नामक गाँव में हुआ था । आपका असली नाम धनपतराय था । आपको हिंदी और उर्दू साहित्य के महान लेखकों में से एक माना जाता है । हिंदी साहित्य में वे ‘प्रेमचंद’ उपनाम से जाने जाते हैं ।

प्रेमचंद ने नवाबराय नाम से उर्दू में भी लेखन कार्य किया था । सन् 1921 में उन्होंने महात्मा गाँधी के आह्वान पर अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया । मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गयी कहानियाँ और उपन्यासों को बाद में कई फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में प्रसारित किया गया । उन्होंने लगभग 300 कहानियाँ लिखी । गोदान उनका अंतिम और सर्वश्रेष्ठ उपन्यास हैं। सन् 1936 में मुंशी प्रेमचंद का निधन हो गया ।

सारांश

कवि परिचय : आधुनिक हिंदी साहित्य में उपन्यास सम्राट के नाम से प्रसिद्ध कहानीकार प्रेमचंद की कहानी बूढ़ी काकी “मानवीय करुणा” की भावना से ओत-प्रोत कहानी है। इसमें लेखक ने “बूढ़ी काकी” के माध्यम से समाज परिवार की उस समस्या को उठाया है जहाँ वृद्धजनों से उनकी जायदाद – संपत्ति लेने के बाद उनकी उपेक्षा होने लगती है । केवल इतना ही नही, बात-बात पर उन्हें अपमानित और तिरस्कृत किया जाता है, भरपेट भोजन तक भी नही मिलता । सामाजिक यथार्थ के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद ने मनुष्य की स्वार्थी भावनाओं का घृणित एवं बीभत्स रूप चित्रित किया है ।

बूढ़ी काकी कहानी का उद्देश्य : कहानी का प्रारम्भ करते हुए लेखक ने मानव-जीवन के वृद्धावस्था और बाल्यावस्था को एक दृष्टि से देखा है । इसमें कोई शक भी नहीं है । बूढ़ी काकी में जीभ के स्वाद के अलावा अन्य कोई इच्छा नही थी । उसे विधवा हुए पाँच वर्ष का समय व्यतीत हो चुका है। उसके जवान बेटे भी असमय मर चुके थे। इस संसार में ऐसा कोई नही था, जिसे बूढ़ी काकी अपना कह सके था तो केवल उसका दूर का भतीजा बुद्धिराम । भलेमानुष पण्डित बुद्धिराम ने बूढ़ी काकी के सामने लम्बे-चौड़े वायदे कर उसकी सब संपत्ति अपने नाम लिखवाली पैसे का लालची बुद्धिराम बहुत जल्दी ही बदलने लगा । बुद्धिराम की पत्नी रूपा भी व्यवहार से कठोर थी लेकिन ईश्वर से अवश्य उसे डर लगता था । इसलिए वह बूढ़ी काकी से दुरव्यवहार करते समय डरती थी ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

बूढ़ी काकी कहानी की समीक्षा : बुद्धिराम और उसकी पत्नी का व्यवहार बूढ़ी काकी के प्रति दिनों दिन कठोर होता चला गया। यहा तक कि जिस बुढ़िया की जायदाद से सौ-डेढ़ सौ रुपये प्रतिमाह की आमदनी थी, वह भोजन तक के लिए तरसने लगी । बूढी काकी जीभ के स्वाद के आगे विवश होकर रोने चिल्लाने लगती थी । हाथ-पैरों से लाचार बुढ़िया जमीन पर पड़ी रहती और अपने प्रति उपेक्षा भरे व्यवहार पर चीखती-चिल्लाती । बुद्धिराम के दोनों बेटे भी उसे चिढ़ाने-परेशान करने में खुश होते थे । यहाँ तक कि वे दोनों उस बुढ़िया के ऊपर अपने मुँह का पानी भी उड़ले देते थे। लेकिन बुद्धिराम की बेटी लाडली ‘’बूढ़ी काकी” से बहुत प्यार करती थी । लाडली भाइयों से तंग होकर बूढ़ी काकी की कोठरी में आ जाती थी और चना चबाना जो कुछ भी होता था, मिल बाँटकर बूढ़ी काकी के साथ खाती थी ।

कुछ समय बाद बुद्धिराम के बेटे मुखराम की सगाई थी। जिसमें भाग लेने के लिए काफी मेहमान आए हुए थे। सारे गाँव में खुशी का माहौल था । चारपाइयों पर आराम कर रहे मेहमानों की नाई सेवा कर रहे थे। कहीं भाट प्रशंसा में यश-गान कर रहे थे। रूपा को भी औरतों से फुरसत नही थी । दौड़-दौड़कर इधर से उधर भाग रही थी। हलवाई भट्टियों पर काम कर रहे थे । कही सब्जियाँ पक रही थी तो कई मिठाइया बन रही थी। खाना पकने की सुगन्धि सारे घर में फैल चुकी थी ।

भीतर ही भीतर बूढ़ी काकी का मन भी लालचा रहा था । परन्तु वह सोच रही थी कि जब उसे भरपेट भोजन ही नही मिलता तो मिठाई और कचैड़ी कौन खिलाएगा। रह-रहकर उसकी जीभ लपलपा रही थी । दिन होता तो वह रो – चीखकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती लेकिन अपशकुन के भय से वह चुपचाप बैठी थी । धीरे-धीरे उसका मन बेकाबू होता चला गया और उकडू बनकर हलवाई के कहाडे के पास जाकर बैठ गई । अचानक रूपा की नज़र बूढ़ी काकी पर पडी तो आग बबूला हो उठी और बूढ़ी काकी को खूब भला-बुरा कहा । अपमानित होकर भी बूढ़ी काकी कुछ नही बोली और रेंगती हुई चुपचाप अपनी कोठरी में चली गयी ।

काफी समय बीत जाने के बाद भी बूढ़ी काकी की किसी ने सुध नही ली तो उसका मन बेचैन हो उठा । तरह- तरह के विचार उसके मन में आने लगे। सभी लोग खा – पी चुके होंगे। तेरी याद किसी को नहीं आएगी। इसी बीच उसकी भूख जोर पकड़ने लगी और हाथों के बल सरकती हुई लोगों के ‘बीच जाकर पत्तल पर बैठ गयी। लोग आश्चर्य से देख रहे थे कि बुद्धिराम की नजर उस पर पड़ गयी । उस दयनीय बूढ़ी काकी को दोनों हाथों से उठाकर कोठरी में लाकर पटक दिया। कभी कचौडिया याद आती तो कभी स्वादिष्ट रायता, लेकिन लाड़ली से अलावा बूढ़ी काकी के पति किसी के मन में कोई सहानुभूति नही थी ।

रात के ग्यारह बज चुके थे। सभी मेहमान आराम कर रहे थे । रूपा सो चुकी थी, लेकिन लाडली थी जो जाग रही थी। वह उस समय की प्रतीक्षा में थी जब अपने हिस्से का मिला हुआ खाना बूढ़ी काकी को जाकर खिलाए । रूपा को पता लगने पर पिटाई होने का डर था । माँ को सोता देखकर लाडली चुपके से अपनी हिस्से की पूड़िया लेकर काकी के पास पहुँची ।

बेसब्री से इंतजार कर रही बुढिया एक ही झटके में सब खा गयी परन्तु इससे उसकी भूख और बढ़ चुकी थी। उसने लाड़ली से मेहमानों के भोजन करने के स्थान पर ले चलने को कहा परन्तु वहाँ पडे टुकडों को चुन-चुनकर खाने के बाद भी उसकी भूख नही मिटी । अंत में उसने लाडली से जूठी पत्तलों के पास ले चलने को कहा। इसी बीच रूपा की आँख खुल चुकी थी । बेटी पास न रहना देखकर इधर उधर देखा तो वह पत्तलों के पास खड़ी थी ।

रूपा बूढ़ी काकी को पत्तलों की जूठन चाटते देखकर आत्मग्लानि एंव पश्चाताप से भर उठी। आज उसे अपने किये पर भारी पछतावा हो रहा था। उसकी साई आत्मा जाग उठी थी । आज उसने बूढ़ी काकी को धमकाया नहीं अपितु उठकर साथ चलने को कहा। उसने सोचा जिस बुढिया की जायदाद से हमें इतनी आमदनी हो रही है, उसके लिए मैं भरपेट भोजन भी नही दे सकी ।

बूढ़ी काकी कहानी में समाज की ज्वलन्त वृद्ध समस्या का यथार्थ चित्रण : ईश्वर से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगती हुई रूपा अपने कमरे में गयी और पकवान तथा मिठाई का थाली, लेकर बूढ़ी काकी के पास पहुँची । कहानीकार कहता है कि भोजन के उस थाल को देखकर काकी का मन आनन्दित हो उठा । रूपा ने बड़े ही प्यार से भोजन करने के लिए कहा और विनती की कि वह ईश्वर से प्रार्थना कर दे कि वह हमारा अपराध क्षमाकर दे । बूढ़ी काकी को उस समय स्वर्गीक आनन्द की अनुभूति हो रही थी ।

बूढ़ी काकी Summary in Telugu

సారాంశము

ఆధునిక హిందీ సాహిత్యంలో ఉపన్యాస చక్రవర్తిగా పేరు పొందిన కథా రచయిత ప్రేమచంద్ ఈ కథ ద్వారా వృద్ధాప్యంలో ముసలివారు తమ జీవితం ఎంతో బాధగా, దీనంగా గడుపుతున్నారు అన్న విషయం మన ముందు తెలియచేస్తున్నారు. ఆ వృద్ధులను ఎంతో అవహేళన చేస్తూ, వారి జీవితాలతో ఏవిధమైన చెలగాటం ఆడుతున్నారని మన కళ్ళకు కట్టినట్లుగా వ్రాశారు. ఇది మన మనస్సులను కదిలివేసేటటువంటి కథ.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

ఈ కథలో ప్రారంభం మన “बूढ़ी काकी” మనస్సు చిన్న పిల్లల మనసు వంటిది. ఆమెకు జిహ్వచాపల్యం ఎక్కువ. ఆమెకు అది తప్ప వేరే ఏ ఆశ లేదు. ఆమె యొక్క భర్త చనిపోయి 5 సంవత్సరాలు. భర్త పోయిన కొద్ది రోజులకే కొడుకుని పోగొట్టుకుంది. ఆస్తి ఆమెకు భగవంతుడు చాలా ఇచ్చాడు. డబ్బుకి ఎటువంటి లోటు లేదు. తన అనే మనుషులు ఆమెకు కరువయ్యాడు. “డే మేనల్లుడు బుద్ధిరామ్.

ఒక్కడే తనకు ఇప్పుడు దగ్గరయ్యాడు. ఆమెకు మంచిమాటలు చెప్పి ఆస్తిని తన పేరుతో వ్రాయించుకున్నాడు. బుద్ధిరామ్ భార్య రూప ఆమె చాలా కఠోరమైన హృదయం కలది. కాని దేవుని యందు భక్తి, శ్రద్ధ ఉండేది. భగవంతుడు అంటే చాలా భయం. “बूढ़ी काकी” పట్ల చెడుగా ప్రవర్తించేటప్పుడు ఎంతగానో భయపడేది.

బుద్ధిరామ్, రూపాకి ఇద్దరు మగపిల్లలు, ఒక ఆడపిల్ల. “बूढ़ी काकी ” ని ఇంటి బయట ఒక చిన్న గదిలో ఉంచారు. ఆమెకు సమయానికి తిండి కూడా పెట్టేవారు కాదు. “बूढ़ी काकी” ఆస్తి వారు అనుభవిస్తూ ఆమెను కష్టాలపాలు చేశారు. బుద్ధిరామ్ కూతురుకి “बूढ़ी काकी” అంటే ప్రేమ. తనవంతు తిండి ఆమె దగ్గరకు తెచ్చి ఆమెకు పెట్టి తను తినేది. బుద్ధిరామ్ మగపిల్లలు నోటిలో నీరు పుక్కిలించి (ఆమె) “बूढ़ी काकी” పై ఊసేవారు వారి ఆగడాలకు హద్దు ఉండేది కాదు. బుద్ధిరామ్ పెద్ద కుమారిడికి పెళ్ళి నిశ్చయం అయింది.

ఇంటికి చాలా మంది బంధువులు వచ్చారు. బంధువులతో ఇల్లంతా సందడిగా ఉంది. పెద్ద పెద్ద బాండీలు పెట్టి ఎన్నో రకరకాల తీపి వంటకాలు, కచోరీలు, ఫలహారాలు చేశారు. ఆ వాసన పీల్చిన “बूढ़ी काकी” తన గదిలో ఉండలేక దేకుతూ ఆ ప్రదేశానికి చేరుకుంది. కాని బుద్ధిరామ్ ఆమెను చూసి లాక్కెళ్ళి ఆమె గదిలో పడవేశాడు. ఆమెకు చాలా బాధగా అనిపించింది. బాగా ఆకలి వేస్తుంది, ఎవ్వరు ఆమెను పట్టించుకోవడం లేదు.

పోనీ తను వాళ్ళని తిడదామంటే చుట్టూ వచ్చిన వాళ్ళు తనని తప్పుగా భావిస్తారని భావించి నోరుకట్టుకుని దీనంగా కూర్చుంది. అలా సాయంత్రం అయిపోయింది. బాగా ఆకలివేస్తుంది. తనని పరామర్శించే వ్యక్తులు కరువైపోయారు. ఎవ్వరు ఆమెను పట్టించుకోవడం లేదు. “बूढ़ी काकी” కి ఏడుపు వస్తుంది. రూపకి చుట్టాలతో తీరిక దొరకలేదు. ఆమె “बूढ़ी काकी” ని పూర్తిగా మర్చిపోయింది. రాత్రి చాలా గడిచింది.

రూప, ఇంట్లో అందరు నిద్రించిన తరువాత బుద్ధిరామ్ కూతురు తన వంతు ఆహారాన్ని “बूढ़ी काकी” వద్దకు తెచ్చింది. దానిని అమాంతం తినివేసింది. కాని “बूढ़ी काकी” కి ఆకలి తీరలేదు. బంధువులు తిన్న ప్రదేశానికి తనను తీసుకు వెళ్ళమని ఆ పాపని కోరింది. ఆ ప్రదేశానికి చేరిన తరువాత “बूढ़ी काकी” ఆ విస్తర్లలో మిగిలిన ఆహారాన్ని నాకడం ప్రారంభించింది. గిన్నెలను నాకింది. అయిన ఆకలి తీరలేదు. రూప కూతురు ప్రక్కన లేకపోవడం గమనించి బయటకు వచ్చి చూసింది. ఆ దృశ్యం చూసిన ఆమెకు కన్నీళ్ళు ఆగలేదు. ప్లేటు తీసుకుని అన్ని రకాల తినుబండరాలు “बूढ़ी काकी” కి ఇచ్చింది. తనని క్షమించమని “बूढ़ी काकी” ని, భగవంతుడిని కోరింది.

कठिन शब्दों के अर्थ (కఠిన పదాలు – అర్ధాలు)

पुनरागमन – come back, తిరిగి రావడం.
जिहवां स्वाद – very taste, నాలుకకి రుచించదగిన.
भतीजा – nephew, మేనల్లుడు
अर्धांगिनी – better half, భార్య
सुचेष्टा – well, మంచి
कुल्ली कर देना – Gargle, పుక్కిలించి ఉమ్మివేయు
आर्तनाद – roaring, ఆర్తనాదం
शहनाई – the clarinet, సన్నాయి
भट्टियों – furnaces, అగ్నికుండము
पकवान – puddings, పిండి వంటలు
कोठरी – chamber, గది
शोकमय – woeful, deplorable, దౌర్భాగ్యముగా
पूडियाँ – puri, పూరీలు
कचौडियाँ – pastry, మిఠాయి
अजवाइन – caromseed, వాము
इलायची – cardamom, యాలుకలు
वाटिका – garden, ఉద్యానవనం

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 5 बूढ़ी काकी

उद्विग्न – distraught, విషాదం
भोग – enjoyment, సంతోషకరం
डायन – witch, మంత్రగత్తె
झुंझला – jerk, కుదుపు
पत्तल – leaf on which meal is served, ఆకు
चटकारना – to make a sound while licking, నాకేటప్పుడు చేయు శబ్దం.
तिलमिला – dare, ఆలోచించుకునే శక్తిని పోగొట్టు
बेइमान – dishonest, కపటంతో కూడిన
घसीटना – a drag, లాక్కొనుట
लाडली गुडिया की – tenderling, ప్రియమైన
पिटारी – dolls, బొమ్మలు
टटोला – towel, palpate, స్పర్శద్వారా పరీక్షించు
सदिच्छाएँ – good luck, good desire, మంచి కోరికలు
गुदगुदाना – tickle, చక్కిలిగింత

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 2 भ्रातृवात्सल्यम

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 2nd Lesson भ्रातृवात्सल्यम Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material 2nd Lesson भ्रातृवात्सल्यम

निबन्धप्रश्नौ (Essay Questions) (వ్యాసరూప సమాధాన ప్రశ్నలు)

1. हर्षवर्धनः विन्ध्याध्वीं अवाप्य किमकरोत् ?
(హర్షవర్ధనుడు వింధ్యామార్గముననుసరించి ఏమి చేసెను ?)
(What did Harshavardhana do on reaching Vindhya forest?)

हर्षवर्धनः राज्यश्रियं कथं अरक्षत् ?
(How did Harshavardhana save Rajyasn.)
(హర్షవర్ధనుడు రాజ్యశ్రీని ఏవిధముగా రక్షించెను ?)
జవాబు:
భ్రాతృవాత్సల్యం’ అనే పాఠ్యభాగాన్ని బాణ మహాకవి రచించాడు. ఇందులో భ్రాతృవాత్సల్యాన్ని కవి చక్కగా ఆవిష్కరించాడు. పూర్వం స్థాణ్వీదేశాన్ని ప్రభాకర వర్ధనుడు అనే రాజు పాలించాడు. ఇతని భార్య యశోమతి. వారిద్దరికి రాజ వర్ధనుడు, హర్షవర్ధనుడు అనే ఇద్దరు కుమారులు, రాజ్యశ్రీ అనే కుమార్తె ఉన్నారు. రాజ్యశ్రీ యొక్క వివాహం మౌఖర వంశీయుడైన అవంతి వర్మ కుమారుడు గ్రహవర్మతో జరిపించాడు. కొంతకాలానికి మాలవరాజు గ్రహవర్మను చంపారు. రాజ్యశ్రీని కారాగృహంలో బంధించాడు.

ఒకసారి హర్షవర్ధనుడి మంత్రి భట్టి మలినమైన వస్త్రాలతో ఒక గుర్రంపై రాజభవనానికి వచ్చాడు. హర్షవర్ధనుడు “రాజ్యశ్రీకి అపకారం చేసింది ఎవరు ?” అని అడిగాడు. వెంటనే మంత్రి “రాజా రాజవర్ధనుడు దేవ భూమికి వెళ్ళగా తన పేరు తెలియకుండా రాజ్యశ్రీ కారాగృహం నుండి తప్పించుకొని వింధ్యారణ్య ప్రాంతంలో ప్రవేశించింది. ‘ఆమెను అన్వేషిస్తున్న భటులు ఇంతవరకు తిరిగి రాలేదు.” అని చెప్పాడు. ఈ మాటలు విని హర్షవర్ధనుడు “ఇతర భుటులతో పనియేముంది ? నేనే స్వయంగా వెళతాను” అని నిశ్చయించుకొని, తన చెల్లెల్ని వెతకడంకోసం గుర్రంపై ఎక్కి వింధ్యారణ్యానికి బయలుదేరాడు.

చాలారోజులు వెతికాడు. అరణ్యంలో జీవించే ఆటవిక దళాధిపతి యొక్క కుమారుడు, యువకుడైన ఒక శబరుని తీసుకొని వచ్చి “రాజా ! ఇతడు భూకంపుడనే పేరుగల శబరరాజు యొక్క అల్లుడు నిర్ఘాతుడనే పేరు కలవాడు. ఇతడు ఈ అడవిలో అన్ని ప్రాంతములు తెలిసిన వాడు. అడవిలో చెట్లకు ఉన్న ఆకుల సంఖ్యను కూడా చెప్పగల సమర్ధుడు. మీరు అతని సహకారం పొందవచ్చు.” అని తెలిపాడు. వెంటనే హర్షవర్ధనుడు – “ఓ మిత్రమా ! ఈ అడవిలో నిస్సహాయురాలైన ఒక స్త్రీని ఎక్కడైనా చూశావా ? అని అడిగాడు. ఆ మాటలను విని యువకుడు “ఓ రాజా ! ఇక్కడికి రెండు క్రోసుల దూరంలో అనేక భిక్షువులతో కూడిన దివాకర మిత్రుడనే బౌద్ధ సన్యాసి ఉన్నాడు. అతనికి తెలిసి ఉండవచ్చు.” అని అన్నాడు. ఈ మాటలను విని హర్షవర్ధనుడు స్వర్గస్థుడైన గ్రహవర్మ యొక్క బాల్య మిత్రుడు సౌగతుని నుండి బౌద్ధ భిక్షువుగా సన్యాసం తీసుకొన్నది ఇతడేమో చూడాలి” అని అనుకున్నాడు.

“ఓ మిత్రమా, ఆ ప్రదేశం ఎక్కడ ? మాకు చూపించు’ మని అడిగాడు. అతడు చూపిన మార్గం అనుసరిస్తూ, చెట్ల మధ్య అనేక బౌద్ధభిక్షువుల మధ్యలో ఉన్న నడివయస్కుడైన ప్రశాంతవదనంతో ఉన్న అతనిని చూసి, దూరం నుండే నమస్కరించాడు. దివాకర మిత్రుడు కుడిచేతిని పైకెత్తి మధురంగా మాట్లాడుతూ రాజును దగ్గరకు తీసుకున్నాడు. తన దగ్గరకు వచ్చిన కారణమేమని అడిగాడు.

హర్షవర్ధనుడు చాలా సంతోషంతో, ఓ గురువరా, బంధువులనందరినీ కోల్పోయిన నా చెల్లెలు ఈ అడవిలో ఎక్కడో ఉంది. నేనామెను వెదుకుతున్నాను. తమకు ఈ విషయం గురించి ఏమైనా తెలుసా ? అని అడుగగా, దివాకరమిత్రుడు తనకు ఏమీ తెలియదని చెప్పేలోపలనే ఒక బౌద్ధ సన్యాసి అక్కడకువచ్చి ‘ఓ మహాత్మా, ఒక నిస్సహాయురాలైన స్త్రీ అగ్నిలో దూకి చనిపోవాలనుకుంటున్నది. ఆమెను కాపాడమని తమను కోరుతున్నాను.’ అని పలుకగా, హర్షవర్ధనుడు. చాలా దుఃఖంతో ‘ఆమె ఇక్కడికి ఎంతదూరంలో ఉంది ? మనం అక్కడికి వెళ్ళే వరకూ ఆమె బ్రతికి ఉంటుందా ?’ ఆమెకు సంబంధించిన విషయాలు నీవేమైనా . అడిగావా ?” అని చాలా ఆతృతగా అడిగాడు.

పిమ్మట ఆ బౌద్ధభిక్షువు “ఓ రాజా! నేను సాయంత్రం నది ఒడ్డున విహరి స్తున్నాను. ఆ సమయంలో కొంతమంది స్త్రీల మధ్య బాగా దుఃఖపడుతున్న ఒక వితంతువును దర్శించాను. నేను ఆమెను సమీపించగానే అక్కడి స్త్రీలలో ఒక స్త్రీ చాలా దుఃఖిస్తున్నది. ఈ దుఃఖాన్ని భరించలేక అగ్ని ప్రవేశం చేసి మరణించా లనుకుంది. ఇప్పుడు మీరు ఎలాగైనా రక్షించాలి” అని కోరింది.

నేను మా గురువు అనుమతి కోసం ఇక్కడకు వచ్చాను, అని పలికాడు. అది విని హర్షవర్ధనుడు “ఓ మహాత్మా ! మనం త్వరగా వెళ్ళి నా చెల్లెల్ని రక్షించాలి” అని పలికాడు. వెంటనే దివాకర మిత్రుడు అక్కడికి వచ్చిన బౌద్ధభిక్షువు, అందరూ కలిసి వెళ్ళారు. ఆమెను ఆపద నుండి కాపాడారు. హర్షవర్ధనుడు తన చెల్లెల్ని చూచి ఆనందించాడు. రాజ్యశ్రీ సోదరుడిని కౌగిలించుకొని, మిక్కిలిగా దుఃఖించింది. వెంటనే హర్ష వర్ధనుడు రాజ్యశ్రీతో తన నివాసానికి బయలుదేరాడు.

लघु समाधान प्रश्नाः  (స్వల్ప సమాధాన ప్రశ్నలు) (Short Answer Questions)

पश्न 1.
हर्षवर्धनः भण्डिं किमुवाच ?
समादान:
हर्षवर्धनः भण्डिं राज्यश्री व्यतिकरः कः इति उवाच ।

पश्न 2.
निर्घातः कः ?
समादान:
निर्घातः शबरसेनाधिपतेः भूकम्पस्य स्वस्त्रीयः ।

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 2 भ्रातृवात्सल्यम

पश्न 3.
राजा कीदृशीं राज्यश्रियं ददर्श ?
समादान:
राजा मुह्यन्तीम् अग्निप्रवेशाय उद्यतां राज्यश्रियं ददर्श ।

एकपद समाधान प्रश्नाः (ఏకపద సమాధాన ప్రశ్నలు)(One Word Questions) 

पश्न 1.
राज्यश्री कां प्रविष्टा ?
समादान:
राज्यश्री विन्ध्याटवीं प्रविष्टा ।

पश्न 2.
दिवाकरमित्रः कः ?
समादान:
दिवाकरमित्रः बौद्धभिक्षुः ग्रहवर्मणः बालमित्रं च ।

पश्न 3.
हर्षवर्धनस्य का अवशिष्टा ?
समादान:
हर्षवर्धनस्य यवीयसी स्वसा राज्यश्रीः अवशिष्टा ।

कठिनशब्दार्थाः (కఠిన పదాలకు అర్ధాలు)

1. अर्धगव्यूतिः = क्रोशः, క్రోశ దూరం
2. भदन्तः = बौद्धभिक्षुः, బౌద్ధభిక్షువు
3. स्त्रैणम् = स्त्रीणां समूहः, స్త్రీల సమూహం
4. भण्डिः = हर्षवर्धनस्य मन्त्री, హర్షవర్ధనుడి మంత్రి
5. व्यतिकरः = वृत्तं समाचारः च, సమాచారము
6. हयः = अश्व:, గుర్రము
7. स्वसा = अनुजा, सोदरी, సోదరి
8. स्वस्त्रीयः = स्वसुः पुत्रः, సోదరి కుమారుడు
9. सौगतं मतम् = बौद्धम्, బౌద్ధుడు
10. चीवरपटलम् = बौद्धभिक्षुवस्त्रम्, బౌద్ధ భిక్షువు వస్త్రం
11. यवीयसी स्वसा = अनुजा, తోబుట్టువు
12. योषित् = स्त्री, స్త్రీ
13. रोधः = तीरम्, తీరము
14. राजदुहिता = राजपुत्री, రాజపుత్రి
15. विभावरी = रात्रिः, రాత్రి
16. कटकम् = सेना शिबिरं वा, సేవా శిబిరం
17. देवभूयम् = दिव्यत्वम्, स्वर्गम्, స్వర్గము

व्याकरणांशाः (వ్యాకరణం)

सन्धयः (సంధులు )

1. भण्डिः + एकेन = भण्डिरेकेन – विसर्गसन्धिः
2. हर्षवर्धनः + तम् = हर्षवर्धनस्तम् – विसर्गसन्धिः
3. बन्धनात् + विन्ध्याटवीम् = बन्धनाद्विन्ध्याटवीम् – जश्त्वसन्धिः
4. अन्यस्मिन् + अहनि = अन्यस्मिन्नहनि – ङमुडागमसन्धिः
5. इतः + च = इतश्च – श्रुत्वसन्धिः
6. विन्देत् + वार्ताम् = विन्देद्वार्ताम् – जश्त्वसन्धिः
7. तत् + श्रुत्वा = तच्छ्रुत्वा-जश्त्वम्-श्चुत्वम्-चर्त्वम्-छत्वम्
8. दूरात् + एव = दूरादेव – जश्त्वसन्धिः
9. अपृच्छत् + च = अपृच्छच्च – श्चुत्वसन्धिः
10. गुरुः + अपि = गुरुरपि – विसर्गसन्धिः
11. कियत् + दूरे = कियद्दूरे – जश्त्वसन्धिः
12. चेत् + मुहूर्तमात्रम् = चेन्मुहूर्तमात्रम – अनुनासिकसन्धिः
13. अस्मिन् + उदन्ते = अस्मिन्नुदन्ते – ङमुडागमसन्धिः
14. सः + अहम् = सोऽहम् – विसर्गसन्धिः
15. कथञ्चित् + जीवन्तीम् = कथञ्चिज्जीवन्तीम् – श्रुत्वसन्धिः

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समासाः (సమాసాలు)

1. मलिनं वासः यस्य सः – मलिनवासा – बहुव्रीहिः
2. राज्यश्रियाः व्यतिकरः – राज्यश्रीव्यतिकरः – षष्ठीतत्पुरुषः
3. उदारं रूपं यस्याः सा – उदाररूपा – बहुव्रीहिः
4. शत्रूणां शिरांसि – शत्रुशिरांसि तेषु – षष्ठीतत्पुरुषः
5. अर्धा च सा गव्यूतिश्च – अर्धगव्यूतिः – विशेषणपूर्वपदकर्मधारयः
6. दिवाकरमित्रः इति नामा – दिवाकरमित्रनामा – सम्भावनापूर्वपदकर्मधारयः
7. प्रार्थितञ्च तत् दर्शनञ्च प्रार्थितदर्शनम् विशेषणपूर्वपदकर्मधारयः
8. उपदिश्यमानः मार्गः यस्य सः – उपदिश्यमानमार्गः – बहुव्रीहिः
9. चीवरस्य पटलम् – चीवरपटलम् तेन चीवरपटलेन – षष्ठीतत्पुरुषः
10. आदरेण सह – सादरम् – अव्ययीभावः
11. विन्ध्यः इति वनम् विन्ध्यवनम् सम्भावनापूर्वपदकर्मधारयः
12. उपरचिता अञ्जलिः येन सः उपरचिताञ्जलिः – बहुव्रीहिः
13. शोकस्य आवेशः – शोकावेशः – षष्ठीतत्पुरुषः
14. अग्नौ प्रवेश: – अग्निप्रवेशः तस्मिन् अग्निप्रवेशे – सप्तमीतत्पुरुषः
15. भुवं बिभर्ति इति भूभृत् – उपपदतत्पुरुषः
16. राज्ञः दुहिता – राजदुहिता तस्याम् – राजदुहितरि षष्ठीतत्पुरुषः
17. आर्द्रे लोचने यस्य सः – आर्द्रलोचनः – बहुव्रीहिः

भ्रातृवात्सल्यम Summary in Sanskrit

कविपरिचयः

भ्रातृवात्सल्यम् इति पाठ्यभागोऽयं बाणमहाकविना रचितात् हर्षचरितात् उद्धृतः । अयं स्थाण्वीश्वराधिपतेः हर्षवर्धनस्य आस्थानपण्डितः आसीत् । हर्षवर्धनः ६०६ तः ६४८ पर्यन्तं राज्यं परिपालयामासेति इतिहासकाराः वदन्ति । अतः बाणमहाकवेः समयः सप्तमशतकं सिद्ध्यति । राजदेवी – चित्रभान्वोः पुत्रः अयं हर्षचरितं, कादम्बरी इति गद्यकाव्यद्वयम् अरचयत् । चण्डीशतकम् एवं च मुकुटताजितम्, पार्वतीपरिणयः इति नाटकद्वयमपि अयं रचितवानिति केषाञ्चन पण्डितानाम् अभिप्रायः । बाणमहाकविः कादम्बर्या हर्षचरिते अपि स्ववंशवर्णनं कृतवान् । हर्षचरिते अष्टौ उच्छ्वासाः वर्तन्ते । आद्येषु त्रिषु उच्छ्वासेषु बाणः स्वीयजीवनवृत्तान्तम् अलिखत् । चतुर्थात् आरभ्य अष्टमोच्छ्वासपर्यन्तं हर्षवर्धनस्य चरितम् अवर्णयत् । “करोम्याख्यायिकाम्भोधौ जिह्वाप्लवनचापलम्” इति हर्षचरिते स्वयमुक्तत्वात् अस्य आख्यायिकाग्रन्थरूपत्वं प्रतीतम् ।

सारांश

स्थाण्वीश्वरदेशपालकयोः यशोमती -करवर्धनयो: राज्यवर्धनः, हर्षवर्धन इति द्वौ सुतौ राज्यश्री इति दुहिता चासीत् । प्रभाकरवर्धनः राज्यश्रियः विवाहं मौखरवंशस्य राज्ञः अवन्तिवर्मणः तेन ग्रहवर्मणा सह अकरोत् । किन्तु कालान्तरे मालवराजः ग्रहवर्माणं निहत्य राज्यश्रियं कारागारे न्यक्षिपत् । ज्येष्ठः राज्यवर्धनः मालवराजं दण्डयितुं निरगच्छत् । अत्रान्तरे भण्डिः हर्षवर्धनम्प्रत्यागत्य ” राज्यश्रीः कारागार – बन्धनात् बहिरागत्य विन्ध्याटवीते गता, ताम् अन्वेष्टुं ये नियुक्ताः भटाः ते एतावत्पर्यन्तं न प्रतिनिवृत्ताः” इति वार्ताम् अश्रावयत् ।

तदा धीरो हर्षवर्धनः स्वयमेव स्वभगिनीम् अन्वेष्टुं कतिपयैः परिजनैस्सह विन्ध्याटवीम् अगच्छत् ! तत्र शबरसेनापतिः विन्ध्यारण्यं सकलं जानातीति अशृणोत् ततः तम्प्रति गत्वा सविनयम् अपृच्छत् – मम भगिनी राज्यश्री कुत्रापि दृष्टा वेति । ” समीपे एव दिवाकरमित्रो नाम बौद्धभिक्षुः अस्ति सः जानीयात्” इति शबरसेनापतेः वाक्यं श्रुत्वा हर्षवर्धनः झटिति तत्र गत्वा दिवाकरमित्रम् अमिलत् ।

ततश्च मम भगिनी राज्यश्रीः भर्तुवियोगेन वैरिपरिभवभयेन च दुःखिता विन्ध्याटवीमेनां प्राविशत् । तामन्वेष्टुं वयमटव्यामस्याम् अटामः इति तं प्रति कथयित्वा सा दृष्टा वा भवता इति यदा तं पृच्छति स्म तदा अन्यः कश्चन भिक्षुः वेगेन तत्रागत्य ” कापि स्त्री वनान्ते शोकावेशाभ्यां अग्निं प्रविशन्ती अस्ति, भवान् शीघ्रमागत्य तां रक्षतु ” इति अभ्यार्थयत । सा तस्य भगिनी राज्यश्री एव स्यादिति मत्वा अनुपदमेव दिवाकरमित्रेण: सह हर्षवर्धनः तत्र गत्वा स्वभगिनीम् अग्निप्रवेशात् निवार्य पर्यरक्षत् राजधानी प्रत्यानयच्च ।

भ्रातृवात्सल्यम Summary in English

Introduction

Introduction : The lesson Bhratruvatsalyam is taken from Harshacharjtam. The author was Bana, who was the court poet of Harsha. Bana belonged to the seventh century AD. His parents were Rajadevi and Chitrabhanu. Bana wrote two prose kavyas namely Kadambari and Harshacharita. He also penned Chandisatakam. Harshacharita belongs to the Akhyayika variety of works.

The Lesson: King Prabhakaravaxdhana had two sons and one daughter. The daughter Rajyasri was married to Grahavarman. But the king of Malaya killed Grahavarman. Her elder brother Rajyavardhana went to attack the king of Malaya, but he also died. Rajyasri was captured by the enemy, and was put in the prison. But she escaped from the prison, and entered the Vindhya forest. Harsha vardhana went in search of her, and rescued her while she was about to enter fire.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 2 भ्रातृवात्सल्यम

भ्रातृवात्सल्यम Summary in Telugu

కవి పరిచయం

భ్రాతృవాత్సల్యం’ అనే పాఠ్యభాగాన్ని మహాకవి బాణుడు రచించాడు. ఈ మహాకవి రచించిన ‘హర్షచరితం’ నుండి స్వీకరింపబడింది. ఇతడు స్థాణ్వీశ్వరాధిపతి అయిన హర్షవర్ధనుని యొక్క ఆస్థాన పండితునిగా ఉన్నాడు. హర్షవర్ధనుడు 709 నుండి 747 మధ్య కాలంలో రాజ్యాన్ని పాలించాడు. అందువల్ల బాణమహాకవి జననం ఏడవ శతాబ్దంగా నిర్ణయింపవచ్చు. రాజదేవి, చిత్రభానువు అనే వారు ఇతని తల్లిదండ్రులు. ఈయన ‘కాదంబరి’ అనే కావ్యాన్ని రచించాడు. చండీశతకం, ముకుటతాజితం, పార్వతీ పరిణయః అనే నాటకాలను కూడా రచించాడు. ఇతడు కాదంబరి, హర్షచర్ కం, అనే గద్య కావ్యాల్లో తన వంశవర్ణను చేశాడు.

ఈ హర్షచరితమందు ఎనిమిది ఉచ్ఛా వారాలు ఉన్నాయి. మొదటి మూడు ఉచ్ఛ్వాసాలయందు తన జీవన వృత్తాంతాన్ని రాశాడు. నాలుగవ ఉచ్ఛ్వాసము నుండి ఎనిమిదవ ఉచ్ఛ్వాసం వరకు హర్షవర్ధనుని యొక్క చరిత్ర వర్ణింపబడింది.

TS Inter 2nd Year Sanskrit Study Material Chapter 2 भ्रातृवात्सल्यम

సారాంశము

స్థాణ్వీదేశాన్ని ప్రభాకరవర్ధనుడు పాలించాడు. అతని భార్య యశోమతి. వీరికి రాజవర్ధనుడు, హర్షవర్ధనుడు అనే ఇద్దరు కుమారులు రాజ్యశ్రీ అనే పేరుగల కుమార్తె ఉన్నారు. ప్రభాకరవర్ధనుడు రాజ్యశ్రీ యొక్క వివాహాన్ని మౌఖరవంశ రాజైన అవంతివర్మ కుమారుడైన గ్రహవర్మతో వివాహం జరిపించాడు. అయితే కాలాంతరంలో మాలవరాజు గ్రహవర్మను చంపి రాజ్యశ్రీని కారాగారంలో బంధించాడు. పెద్దవాడైన రాజ్యవర్ధనుడు మాలవరాజును దండించడానికి బయలుదేరాడు. అంతలో ఛండి హర్షవర్ధనుని సమీపించి, “రాజ్యశ్రీ కారాగార బంధనం నుండి బయటకు వచ్చి వింధ్యాటవీ ప్రాంతానికి వెళ్ళింది.

ఆమెను వెతకడానికి ఏ భటులను నియమించామో వారు ఇంతవరకు తిరిగి రాలేదు.” అనే వార్తను వినిపించాడు. అప్పుడు ధీరుడైన హర్షవర్ధనుడు స్వయంగా తన సోదరిని వెతుకుటకు కొంతమంది పరిజనులతో కలిసి వింధ్యాటవికి వెళ్ళాడు. అక్కడ శబరసేనాపతి వింధ్యారణ్యమంతా తెలిసినవాడని విన్నాడు. పిమ్మట అతడిని సమీపించి, వినయ పూర్వకంగా “నా సోదరి రాజ్యశ్రీని ఎక్కడైనా చూచారా ! అని అడిగాడు. పిమ్మట శబరసేనాపతి సమీపంలోనే దివాకరమిత్రుడు అనే పేరుగల బౌద్ధభిక్షువు ఉన్నాడు. అతనికి తెలుస్తుంది.” అని పలికాడు. ఈ మాటలను విని హర్షవర్ధనుడు వెంటనే అక్కడికి వెళ్ళి. దివాకర మిత్రుడిని కలిశాడు.

ఆ తరువాత “నా సోదరి రాజ్యశ్రీ భర్తృవియోగంతో శత్రువులు అవమానిస్తారనే భయంతో దుఃఖితురాలై ఈ వింధ్యాటవిలో ప్రవేశించింది. ఆమెను వెతుకుటకు మనం ఈ అడవిలో తిరుగుదాము” అని పలికి నీవు ఆమెను చూచావా ? అని ఎప్పుడు అడిగాడో అప్పుడు మరొక భిక్షకుడు వేగంగా అక్కడికి వచ్చి “ఒకానొక స్త్రీ దుఃఖంతో కూడినదై అగ్నిలో ప్రవేశిస్తూ ఉంది. మీరు త్వరగా వచ్చి ఆమెను రక్షించండి.” అని ప్రార్థించాడు. ఆమె అతని యొక్క సోదరి రాజ్యశ్రీ అయి ఉంటుందని తలచి వెంటనే దివాకర మిత్రునితో కలిసి హర్షవర్ధనుడు అక్కడికి వెళ్ళి తన చెల్లెలని అగ్నిప్రవేశం నుండి నివారించి, రక్షించి రాజధానికి తిరిగి వచ్చాడు.

స్థాణ్వీదేశాన్ని ప్రభాకరవర్ధనుడు పాలించాడు. అతని భార్య యశోమతి. వీరికి రాజవర్ధనుడు, హర్షవర్ధనుడు అనే ఇద్దరు కుమారులు రాజ్యశ్రీ అనే పేరుగల కుమార్తె ఉన్నారు. ప్రభాకరవర్ధనుడు రాజ్యశ్రీ యొక్క వివాహాన్ని మౌఖరవంశ రాజైన అవంతివర్మ కుమారుడైన గ్రహవర్మతో వివాహం జరిపించాడు. అయితే కాలాంతరంలో మాలవరాజు గ్రహవర్మను చంపి రాజ్యశ్రీని కారాగారంలో బంధించాడు. పెద్దవాడైన రాజ్యవర్ధనుడు మాలవరాజును దండించడానికి బయలుదేరాడు. అంతలో ఛండి హర్షవర్ధనుని సమీపించి, “రాజ్యశ్రీ కారాగార బంధనం నుండి బయటకు వచ్చి వింధ్యాటవీ ప్రాంతానికి వెళ్ళింది.

ఆమెను వెతకడానికి ఏ భటులను నియమించామో వారు ఇంతవరకు తిరిగి రాలేదు”. అనే వార్తను వినిపించాడు. అప్పుడు ధీరుడైన హర్షవర్ధనుడు స్వయంగా తన సోదరిని వెతుకుటకు కొంతమంది పరిజనులతో కలిసి వింధ్యాటవికి వెళ్ళాడు. అక్కడ శబరసేనాపతి వింధ్యారణ్యమంతా తెలిసినవాడని విన్నాడు. పిమ్మట అతడిని సమీపించి, వినయ పూర్వకంగా “నా సోదరిని రాజ్యశ్రీని ఎక్కడైనా చూచారా ! అని అడిగాడు. పిమ్మట శబరసేనాపతి సమీపంలోనే దివాకరమిత్రుడు అనే పేరుగల బౌద్ధభిక్షువు ఉన్నాడు. అతనికి తెలుస్తుంది”. అని పలికాడు.

ఈ మాటలను విని హర్షవర్ధనుడు వెంటనే అక్కడికి వెళ్ళి దివాకర మిత్రుడిని కలిశాడు. ఆ తరువాత “నా సోదరి రాజ్యశ్రీ భర్తృవియోగంతో శత్రువులు అవమానిస్తారనే భయంతో దుఃఖితురాలై ఈ వింధ్యాటవిలో ప్రవేశించింది. ఆమెను వెతుకుటకు మనం ఈ అడవిలో తిరుగుదాము” అని పలికి నీవు ఆమెను చూచావా ?” అని ఎప్పుడు అడిగాడో అప్పుడు మరొక భిక్షకుడు వేగంగా అక్కడికి వచ్చి “ఒకానొక స్త్రీ దుఃఖంతో కూడినదై అగ్నిలో ప్రవేశిస్తూ ఉంది. మీరు త్వరగా వచ్చి ఆమెను రక్షించండి.” అని ప్రార్థించాడు.

ఆమె అతని యొక్క సోదరి రాజ్యశ్రీ అయి ఉంటుందని తలచి వెంటనే దివాకర మిత్రునితో కలిసి హర్షవర్ధనుడు అక్కడికి వెళ్ళి తన చెల్లెలని అగ్నిప్రవేశం నుండి నివారించి, రక్షించి రాజధానికి తిరిగి వచ్చాడు.

अनुवादः (అనువాదములు) (Translations)

कदाचित् मालवराजसाधनमादायागतः भण्डिरेकेनैव वाजिना मलिनवासा राजद्वारमाजगाम । राजा हर्षवर्धनस्तमुवाच – “राज्यश्रीव्यतिकरः कः ?” इति । सोऽवादीत् – “देव ! देवभूयं गते देवे राज्यवर्धने, गुप्तनाम्ना च गृहीते कुशस्थले देवी राज्यश्रीः परिभ्रश्य बन्धनाद्विन्ध्याटवीं प्रविष्टेति वार्तामशृण्वम् । तां प्रति प्रहिता अन्वेष्टारस्तु नाद्यापि निवर्तन्ते” इति । भूपतिरब्रवीत् -“किमन्यैः अनुपदिभिः ? स्वयमेवाहं यास्यामि’ ।

अथ अन्यस्मिन्नहनि हयैरेव स्वसारमन्वेष्टुं विन्ध्याटवीमवाप, आट च तस्यां सुबहून्दिवसान् । एकदा तु आटविकसामन्तस्य सूनुः कञ्चित् शबरयुवानम् आदाय आगत्य विज्ञापयामास – “देव ! शबरसेनापतेः भूकम्पस्यायं निर्घातनामा स्वस्त्रीयः, सकलस्यास्य विन्ध्यारण्यस्य पर्णानामप्यभिज्ञः किमुत प्रदेशानाम् । एनं पृच्छतु देवः” इति । अवनिपतिः तमप्राक्षीत् – “अङ्ग ! युष्मासु कस्यचित् उदाररूपा नारी न गता दर्शनगोचरम्” ? इति । निर्घातः व्यज्ञापयत् – “देव इतश्च अर्धगव्यूतिमात्र एव प्रभूतान्तेवासिपरिवृतः दिवाकरमित्रनामा भदन्तः गिरिनदी माश्रित्य प्रतिवसति, स यदि विन्देद्वार्ताम्” इति ।

స్థాణ్వీ దేశాన్ని ప్రభాకరవర్ధనుడు పాలించాడు. అతనికి యశోమతి అనే భార్య, రాజవర్ధనుడు, హర్షవర్ధనుడు అనే ఇద్దరు కొడుకులు, రాజ్యశ్రీ అనే కుమార్తె ఉన్నారు. రాజ్యశ్రీ యొక్క వివాహం మౌఖర వంశీయుడైన అవంతివర్మ కుమారుడు గ్రహవర్మతో జరిపించారు. కొంతకాలానికి మాలవరాజు గ్రహవర్మను చంపి, రాజ్యశ్రీని కారాగృహంలో బంధించాడు.

ఒకప్పుడు హర్షవర్ధనుని మంత్రియైన భండి మురికిపట్టిన వస్త్రాలతో ఒక గుర్రంపై రాజభవనానికి వచ్చాడు. హర్షవర్ధనుడు రాజ్యశ్రీకి చెడు చేసినవాడెవడు ?” అని చెప్పగా, మంత్రి ‘రాజా రాజవర్ధనుడు దేవభూమికి వెళ్ళగా, తన పేరు తెలియనీయకుండా రాజ్యశ్రీ కారాగృహం నుండి తప్పించుకొని వింధ్య అడవులలో ప్రవేశించింది. ఆమెను వెదుకుతున్న భటులు కూడా ఇంతవరకూ తిరిగిరాలేదు.’

Once bringing the army force of Malava king, Bhandi ap-proached the royal gate wearing dirty clothes and with a single horse. Harshavardhana asked him regarding news about Rajyasri. He said that he heard the news that after Rajyavardhana died, Rajyasri was captured by Gupta at Kusasthali. However, she es¬caped from the custody, and entered the Vindhya forest. Those who went in search of her did not return until then. Then Harsha ,-t decided that instead of others, he himself should go in search of her.

The next day riding on horse, he went to the forest of Vindhya, and spent many days there searching for her. One day the son of the tribal chief brought one tribal boy and told Harsha that he was Nirghata, the son of the sister of the tribal chief Bhukampa. He knew the details of every leaf in the forest, let alone the places. The king should query him. When Harsha asked him whether they had seen a noble looking woman anywhere, the boy said that at some distance, there was a Buddhist monk Divakaramitra living near a hill stream with his many disciples, and he might know of her

ఆ మాటవిని హర్షవర్ధనుడు ‘వేరే భటులు వెదకుట ఎందుకు ? నేనే వెడతాను’ అని అన్నాడు. మరునాడు హర్షవర్ధనుడు తన చెల్లెలను వెదకటం కోసం గుర్రంపై వింధ్యాటవికి బయలుదేరాడు. చాలా రోజులు అడవిలో వెదికాడు. అడవిలో జీవించే ఆటవిక దళాధిపతి యొక్క కుమారుడూ, యువకుడైన ఒక శబరుని తీసికొనివచ్చి, ఈ విధంగా చెప్పాడు.

రాజా ఇతడు భూకంపుడనే పేరుగల శబరరాజు యొక్క అల్లుడు నిర్ఘాతుడనే పేరు కలవాడు. ఇతడు ఈ అడవిలో అన్ని ప్రాంతములు తెలిసినవాడు. అడవిలో చెట్లకు ఉన్న ఆకుల సంఖ్యను కూడా చెప్పగల సమర్థుడు. మీరు ఇతనిని సహాయం కోరవచ్చు.’ అని తెలుపగా, ఓ మిత్రమా, ఈ అడవిలో నిస్సహాయురాలైన ఒక స్త్రీని ఎక్కడైనా చూశావా ? అని అడిగాడు. ఆ మాటవిన్న యువకుడు ‘ఓ రాజా, ఇక్కడికి రెండు క్రోసులదూరంలో అనేక భిక్షువులతో కూడిన దివాకర మిత్రుడనే బౌద్ధ సన్యాసి ఉన్నాడు. అతనికి ఏమైనా తెలిసుండవచ్చు’ అన్నాడు. దివాకర మిత్రుడిన బౌద్ధ సన్యాసి ఉన్నాడు. అతనికి ఏమైనా తెలిసుండవచ్చు అన్నాడు.

तच्छ्रुत्वा नरपतिरचिन्तयत् श्रूयते हि स्वर्गतस्य ग्रहवर्मणो बालमित्रं सौगते मते युवैव काषायाणि गृहीतवान् इति । पश्यामः प्रयत्नप्रार्थितदर्शनं तं जनम्” इति । प्रकाशं चाब्रवीत् – “अङ्ग ! समुपदिश तं देशं यत्रास्ते स” इति । तेनैव उपदिश्यमानमार्गः क्रमेण तरुणां मध्ये अरुणेन चीवरपटलेन, संवीतम्, वसि वर्तमानं दिवाकरमित्रमद्राक्षीत् । प्रशान्तगम्भीरेण तस्य आकारेण आरोपितबहुमानः सादरं दूरादेव ववन्दे । दिवाकरमित्रस्तु उत्क्षिप्य दक्षिणं हस्तं स्निग्धमधुरया वाचा राजानमन्वग्रहीत्, अपृच्छच्च तस्यागमनकारणम् ।

राजा तु सादरमब्रवीत् – “आर्य ! धन्योऽस्मि । मम हि विनष्टनिखिलबन्धोः एकैव यवीयसी स्वसावशिष्टा । सापि भर्तुर्वियोगात् वैरिपरिभवभयाच्च भ्रमन्ती कथमपि विन्ध्यवनमिदमविशत् । अतस्तामन्वेष्टुं वयमिमाम् अटवीमटामः । कथयतु च गुरुरपि यदि कदाचित् श्रुता तद्वार्ता” इति ।

अथ तच्छ्रुत्वा “धीमन् ! नैवंरूपो वृत्तान्तोऽस्माभिः श्रुतः” इत्येवं वदत्येव तस्मिन् अकस्मादागत्य अपरः संभ्रान्तः उपरचिताञ्जलिः भिक्षुरभाषत “भगवन्भदन्त ! महत्करुणं वर्तते । कापि स्त्री शोकावेशविवशा वैश्वानरं विशति । सम्भावयतु ताम् अप्रोषितप्राणां भगवान्” इति ।

राजा तु जातानुजाशङ्कः दुःखेन तं पप्रच्छ – ” कियद्दूरे सा योषित् ? जीवेद्वा कालमेतावन्तम् ? पृष्टा वा त्वया, भद्रे ! कासि को हेतुः अग्निप्रवेशे इति । इच्छामि श्रोतुं कथमार्येण दृष्टा, आकारतो वा कीदृशी” इति ।

समिक्षुराचचक्षे – “महाभाग ! श्रूयताम् – अहं हि प्रत्युषसि नंदीरोधसा विहृतवानतिदूरम् । एकत्र वनलतागहने नारीणां रुदितमाकर्ण्य गतोऽस्मि तं प्रदेशम् । दृष्टवानस्मि च, कतिपयाभिः अबलाभिः परिवृताम्, दग्धां चण्डातपेन वैधव्येन च योषितम् । सा तु समीपगते मयि तदवस्थापि मां प्रणतवती ।

ఆ మాటలు విన్న హర్షవర్ధనుడు స్వర్గస్థుడైన గ్రహవర్మ యొక్క బాల్యమిత్రుడు . సౌగతుని నుండి బౌద్ధభిక్షువుగా సన్యాసం తీసుకున్నది ఇతడేనేమో చూడాలి’ అని అనుకున్నాడు.

ఓ మిత్రమా, ఆ ప్రదేశం ఎక్కడ ? మాకు చూపించు’మని అడిగాడు. అతడు చూపిన మార్గం అనుసరిస్తూ, చెట్ల మధ్య అనేక బౌద్ధ భిక్షువుల మధ్యలో ఉన్న నడి వయస్కుడైన ప్రశాంతవదనంతో ఉన్న అతనిని చూసి, దూరం నుండే నమస్కరించాడు. ‘దివాకర మిత్రుడు కుడిచేతిని పైకెత్తి మధురంగా మాట్లాడుతూ రాజును దగ్గరకు తీసుకున్నాడు. తన దగ్గరకు వచ్చిన కారణమేమని అడిగాడు.

హర్షవర్ధనుడు చాలా సంతోషంతో, ఓ గురువరా, బంధువులనందరినీ కోల్పోయిన నా చెల్లెలు ఈ అడవిలో ఎక్కడో ఉంది. నేనామెను వెదకుతున్నాను. తమకు ఈ విషయం గురించి ఏమైనా తెలుసా ? అని అడుగగా, దివాకరమిత్రుడు తనకు ఏమీ తెలియదని చెప్పేలోపలనే ఒక బౌద్ధసన్యాసి అక్కడకు వచ్చి ‘ఓ మహాత్మా, ఒక నిస్సహాయురాలైన స్త్రీ అగ్నిలో దూకి చనిపోవాలనుకుంటున్నది. ఆమెను కాపాడమని తమను కోరుతున్నాను.’ అని పలుకగా, హర్షవర్ధనుడు చాలా దుఃఖంతో ‘ఆమె ఇక్కడికి ఎంతదూరంలో ఉంది ? మనం అక్కడికి వెళ్ళేవరకూ ఆమె బ్రతికి ఉంటుందా ?’ ఆమెకు సంబంధించిన విషయాలు నీవేమైనా అడిగావా ?” అని చాలా ఆతృతగా అడిగాడు.

ఆ బౌద్ధభిక్షువు ‘ఓ రాజా నేను సాయంకాలం నది ఒడ్డున విహరిస్తున్నాను. ఆ సమయంలో కొంతమంది స్త్రీల మధ్య బాగా దుఃఖపడుతున్న ఒక వితంతువును చూశాను. నేను ఆమెను సమీపించగానే అక్కడ స్త్రీలలో ఒక స్త్రీ చాలా బాధపడుతూ నాకు నమస్కరించి,

On listening that, the king thought it was heard that Graha- varman’s childhood friend became a Buddhist monk at a young age. He could meet him after requesting for an audience. Asking him to show the way, he followed that way, and found in the midst of the trees the middle-aged Divakaramitra wearing saffron clothes. On seeing his calm appearance, becoming respectful, he bowed to him from a distance. Divakaramitra raised his right hand, and blessed him with sweet words, and enquired the reason for his arrival.

The king told him that he had lost all his relations except one younger sister. Having lost her husband, and disgraced by the enemies, while wandering, she entered the Vindhya forest. We were searching for her in the forest. He asked him whether he heard any news of her.

एका योषित्पादयोः पतित्वा मामभिहितवती – “भगवन् ! इयं नः स्वामिनी मरणेन पितुः, अभावेन भर्तुः, प्रवासेन च भ्रातुः, दारुणं दुःखमपारयन्ती सोढुम्, अग्निं प्रविशति । परित्रायताम्’ । तामुत्थाप्य अहम् अभिहितवान् – “आर्ये ! शक्यते चेन्मुहूर्तमात्रमपि त्रातुम् उपरिष्टान्न व्यर्था इयमभ्यर्थना भविष्यति । मम हि गुरुरपर इव भगवान्सुगतः समीपगत एव । कथिते अस्मिन्नुदन्ते नियतमाग मिष्यति परमदयालुः, एनां प्रबोधयिष्यति च” इति । ” त्वरतामार्यः” इत्यभिदधाना सा पुनरपि पादयोः पतितवती । सोऽहमुपागत्य त्वरमाणो व्यतिकरमिमं गुरवे निवेदितवान् इति ।

अथ भूभृत् सर्वाकारसंवादिन्या दशयैव दूरीकृतसंदेहः श्रमणाचार्यं – “आर्य ! नियतं सैवेयं मे भगिनी’ इत्युक्त्वा तं श्रमणं – “आर्य! दर्शय क्कासौ । कथञ्चिज्जीवन्तीं सम्भावयामः” इति भाषमाण एवोत्तस्थौ ।

अथ समग्रशिष्यवर्गानुगतेनाचार्येण अनुगम्यमानः तेन श्रमणेन प्रदिश्य- मानवर्त्मा च पद्भ्यामेव तं प्रदेशं प्रावर्तत । क्रमेण च समीपमुपगतः शुश्राव महतः स्त्रैणस्य विलापान्, ददर्श च मुह्यन्तीम् अग्निप्रवेशाय उद्यतां राजा राज्यश्रियम् । आललम्बे च तां सम्भ्रमम् । राज्यश्रीः च असम्भावितागमनस्य भ्रातुः कण्ठं समाश्लिष्य अतिदीर्घं रुरोद |

शनैराचार्यस्तु तथा हर्ष इति विज्ञाय विवर्धितादरः शिष्येणोपनीतं स्वयमेवादाय मुखप्रक्षालनाय उदकमुपनिन्ये । ततो नरेन्द्रो मन्दं मन्दमब्रवीत् स्वसारम् – ‘वत्से ! वन्दस्वात्र भवन्तं भदन्तम् । एष ते भर्तुः मित्रम् अस्माकं च गुरुः” इति । राजदुहितरि पतिपरिचयश्रवणेन पुनरानीताश्रूणि नमन्त्याम् आचार्यः आर्द्रलोचनः, मधुरया वाचा व्याजहार – ” अलं रुदित्वातिचिरम् । स्नात्वा च गम्यतां भवदीयामेव भूयो भुवम्” इति ।

अथ पार्थिवस्तत्र तामुषित्वा विभावरीमुषसि च वसनादिप्रदानपरितोषितं निर्घातमाचार्येण सह विसर्ज्य, स्वसारमादाय, प्रयाणकैः कतिपयैरेव अनुजाह्नवि निविष्टं कटकं प्रत्याजगाम ।

ఒక స్త్రీ చాలా బాధపడుతూ నాకు నమస్కరించింది. ఆమె “ఓ పూజ్యుడా ! ఈమె తన తండ్రిని, భర్తను పోగొట్టుకొని మిక్కిలి దుఃఖిస్తున్నది. ఈమె తన దుఃఖాన్ని తట్టుకోలేక అగ్నిలో పడి చనిపోవాలనుకుంటున్న ఈమెను మీరు ఎలాగైనా రక్షించాలి” అని కోరింది. నేను ఆమెను లేపి – “పూజ్యురాలా ! ఈమెను రక్షించడానికి సమర్ధుడనే, కాని మా గురువుగారి అనుమతి అవసరం. దీనిని మా గురువుకు నివేదిస్తాను.” అని పలికాడు.

ఆ మాటలు విని “త్వరగా చేయండి” అని ఆమె పలికి తిరిగి నా కాళ్ళపై పడింది. వెంటనే గురువును సమీపించి నివేదించాడు. అది విని హర్షవర్ధనుడు “పూజ్యుడా ! ఏ స్త్రీ గురించి అతడు చెప్పాడో ఆమె నా సోదరి అని పలికి, “అయ్యా ! ఆమెను చూపించండి. ఆమె ఎక్కడ ఉంది ? ఆమె జీవించి ఉండవచ్చు.” అని పలికి ఇద్దరు పైకి లేచారు. శిష్యులతో కలిసి బయలుదేరాడు. అతనితో హర్షవర్ధనుడు అనుసరించాడు. కొంతదూరం వెళ్ళిన తర్వాత అతడు వీరిద్దరిని ఆ ప్రాంతానికి తీసుకొని వెళ్ళాడు.

అనేకమంది స్త్రీలతో కూడి విలపిస్తున్న అగ్నిలో ప్రవేశిస్తున్న ఆమెను చూశాడు. వెంటనే ఆమెను పట్టుకున్నాడు. రాజ్యశ్రీ కూడా అనుకోకుండా వచ్చిన సోదరుడిని చూచి, అతనిని గట్టిగా కౌగిలించుకొని మిక్కిలిగా దుఃఖించింది. వెంటనే ఆమె నీళ్ళతో ముఖాన్ని కడుక్కుంది. పిమ్మట రాజు ఆమెతో “అమ్మా ! ఈయనకు నమస్కరించు. ఈయన నీ భర్త యొక్క మిత్రుడు, మనకు గురువు”. అని పలికాడు. ఆ గురువు కూడా “అమ్మా ! ఇక దుఃఖించవద్దు. స్నానంచేసి నీ సోదరునితో కలిసి నీ సొంత ఇంటికి వెళ్ళు.” అని పలికాడు. పిమ్మట హర్షవర్ధనుడు తన సోదరిని తీసుకొని కొద్దిరోజుల్లో తన కటకానికి తిరిగి వెళ్ళాడు.

The monk replied that he did not heard any such news. At that very moment, another monk came there hurriedly, and having bowed to him said that some woman was ready to enter the fire, and the teacher should rescue her. The king doubted whether she was his sister, and asked him how far she was, how she looked like, whether she would live till they went, whether he enquired about her and the reason to enter fire.

The monk replied that he went on long walk on the riverside early in the morning, when he heard in a bower of creepers the weeping of women. He went there and saw a woman surrounded by many other women and distressed because of the heat of the sun, and her widowhood. She bowed to him even in such a situation.

One of the women fell on his feet and said that the woman lost her father and husband, and as her brother was away, was about to enter the fire unable to bear her grief. The monk requested her to wait for a few moments as his teacher was nearby. When he was informed, he would come and advise her. She asked him to hurry up, and once again fell at his feet. He hurried to report the matter to his teacher.

The king confirmed to himself that it was his sister, and told so the teacher. He requested the monk to show the way hoping that they could somehow see her living. When all of them went there, and heard the loud weeping of the women, the king saw Rajyasri, who was prepared to enter the fire. As he caught her, she embraced her brother’s neck and wept for a long time.

The teacher understood that it was Harsha, and with growing respect for him, brought water for her to wash her face. The king told his sister that the monk was her husband’s friend, and asked her to bow to him. As she bowed to him with tears appearing again at the mention of her husband’s acquaintance with him, the monk spoke soothingly to her not to weep, and return to her land.

The king spent the night there, made Nirghata happy by presenting him clothes etc., and having taken leave of the teacher, reached their camp near Ganga accompanied by his sistie”.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 4th Lesson धरती Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 4th Lesson धरती

दीर्घ प्रश्न (దీర్ఘ సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
‘धरती’ पाठ का सारांश पाँच- छह वाक्यों में लिखिए ।
उत्तर:
भारतदेश की आशा उसकी धरती और उसके किसान हैं । भारतीय किसान आत्मविर्भर एवं परिश्रमी होते हैं। उन्हें धरती तथा गृह गृहस्थी से प्रेम होता है । किसान की जिंदगी में परस्पर सहयोग एवं सादगी की भावना, हर काम में कई कहानियाँ, लोकगीत, हजारों कहावतों का स्मरण हो आता है । वास्तव में किसान अन्नदाता, सुखदाता एवं जीवनदाता हैं । इमारी सहानुभूति और सहयोगिता से किसान फलेंगे फूलेंगे और चहूँ और सुख- समृद्धि लहराएगी। हमारी पढ़ाई-लिखाई तथा रहन सहन का आदर्श यही बनना चाहिए कि किसानों की श्रेणी में हमारी गिनती हो ।

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
भारत का किसान अपना घर किन चीजों से बनाता है ?
उत्तर:
किसान अपना घर बाँस और बल्लियों के ठाठ से, अपने ही जंगल के बाँस और फूँस से अपने ताल की मिट्टी से पाथी हुई कच्ची ईंटों से बनाता है । घर की लिपाई – पुताई में उसकी घरवाली उसका हाथ बँटाती है। ऐसे फूँस और छप्पर के कच्चे घर में रहना किसान पसंद करता है । ऐसा घर सर्दी में गरम और गर्मी में ठंडा लगता है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

प्रश्न 2.
भारतीय किसान के जीवन की कुछ विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर:
भारतीय किसान भारत माँ की आशा है । वे धरती के बेटे हैं। वे गाँवों में, अपने लिपे-पुते कच्चे घरों में रहकर सादगी से जीवन बिताते हैं । वे स्वावंलबी होकर परस्पर सहयोगिता से जीवन यापन करते हैं। वे कथा – वार्ता और लोकगीत – लोकनृत्य से अपना मनोंरजन करते हैं । किसान के बलिष्ठ शरीर ही उनकी संपत्ति है, उसकी लक्ष्मी है । परिश्रमयुत एवं संतोषमय भारतीय किसानों का जीवन सर्वोपरि है ।

एक वाक्य प्रश्न  (ఏక వాక్య సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
हमारा राष्ट्रीय पेशा कौन-सा है ?
उत्तर:
खेती

प्रश्न 2.
भारतीय किसान अपना मनोरंजन कैसे करता है ?
उत्तर:
कथा-वार्ता और लोकगीत – लोकनृत्य द्वारा

प्रश्न 3.
आत्मनिर्भरता किसका गुण है ?
उत्तर:
भारतीय किसान का

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

प्रश्न 4.
किसानों के लिए आवश्यक सभी औजार कहाँ तैयार होते हैं ?
उत्तर:
गाँवों में ही

संदर्भ सहित व्याख्याएँ  (సందర్భ సహిత వ్యాఖ్యలు)

1. आत्मनिर्भरता भारतीय किसान का …………… मुहँ नहीं ताकना पड़ता ।

संदर्भ : प्रस्तुत उद्धरण पुरातत्व विद्, इतिहासकार एवं निबंधकार वासुदेवशरण अग्रवाल के निबंध, ‘धरती’ स दिया गया । यह उद्धरण भारतीय किसान की आत्मनिर्भरता एवं उसके स्ववलंबन का गुणगान करते संदर्भ में निबंधकार ये वाक्य कहते हैं ।

व्याख्या : भारत के कृषक का महान गुण है, आत्मनिर्भरता अर्थात् आत्मावलंबन । वह सब काम अपने बल पर करता है । इसी विषय पर यदि सावधानी से अध्ययन करें, तो ऐसे हज़ारों तत्थ हमारे सामने आएँगे, जिनको भारतीय कृषक अपने हाथ से खुद कर लेते हैं, जैसे खेती के औज़ार, घर के निर्माण की सामग्री, घर की आवश्यक सामग्री, दवा-दारु आदि । इससे बाहर के यंत्र और यंत्रविदों पर निर्भर होना न पड़ता ।

विशेषताएँ : निबंधकार इस उद्धरण द्वारा भारतीय किसान के संपूर्ण जीवन के अध्ययन पर ज़ोर दे रहे हैं, जो अनिवार्य है। भाषा सरल और सुबोध है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

2. हमारा देश किसानों का देश सब से गर्व की बात है ।

संदर्भ : प्रस्तुत निबंधांश पुरातत्ववेत्ता, इतिहासकार एवं निबंधकार वासुदेवशरण अग्रवाल के निबंध, ‘धरती’ के अंतिम अनुच्छेद से दिया गया है। किसान को पैसा नहीं चाहिए, चाहिए कि बलिष्ठ शरीर । उससे वह धरती- माँ से सहगामी होकर फलने फूलने लगेगा। इस संदर्भ डाँ० वासुदेवशरण यह कथन कहते हैं ।

व्याख्या : किसानों का देश है, हमारा भारत । कृषि हमारे भारतदेश का पेशा है; जीविका के लिए किए जानेवाला धंधा है, व्यवसाय है । कृषक होना हमारे भारतीयों के लिए बड़े गर्वका विषय है । क्यों कि कृषक अन्नदाता हैं और जीवनदाता हैं । राष्ट्रकल्याण का मूलस्तंभ है ।

विशेषता : निबंधकार इस कथन दवारा कृषक – महत्व को उजागर करते हैं ।

धरती Summary in Hindi

कवि परिचय

कवि परिचय : डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल” का जन्म सन् 1904 ई में लखनऊ में हुआ था । उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक और एम. ए. परीक्षा उत्तीर्ण की। पुरातत्व विषय पर उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से.डी. लिट् की उपाधि प्रप्त की । वे केंद्रीय सरकार के पुरातत्व विभाग के संचालक । काशी विश्वविद्यालय के भारती महा विद्यालय के पुरातत्व और प्राचीन इतिहास विभाग के अध्यक्ष एवं आचार्य रहे। सन् 1967 ई में उनका स्वर्गवास हो गया ।

इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं ” कल्पवृक्ष”, “पृथ्वी पुत्र,” “भरत की एकता”, “माता भूमि” “कला और संस्कृति” आदि । पुरातत्व और प्राचीन इतिहास के अतिरिक्त ये काव्यं प्रेमी भी ये ।

“धरती” पाठ का लेखक “डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल’ जी हैं । ये पुरातत्व और प्राचीन इतिहास के अतिरिक्त ये काव्य प्रेमी भी थे । इस पाठ में भारतीय किसान की महानता के बारे में चर्चा की गयी ।

सारांश

भारत की आशा उसकी धरती और किसान है। भारत एक कृषि प्रधान देश है । किसान धरती के बेटे हैं। भारत का किसान सदियों से अपना काम चतुराई के साथ करता आ रहा है। खेत में जब उतरता है तो खून – पसीना एक कर देता है। सर्दी – गर्मी और बारिश से वह जी नहीं चुराता । भारतीय किसान के शरीर और मन में अपने घर को बाँस, बल्लियों और ठाठ से और अपने ताल की मिट्टी से बनाता है ।

आत्म निर्भरता भारतीय किसान का बहुत बडा गुण है । भारतीय किसान अपने हाथ से अपने गाँव में ही हजारों बातें कर लेते हैं । उसे बाहर से यंत्रों और मैकेनिकों का मुँह नहीं ताकना पडता । उनके इस कौशल की प्रशंसा होनी चाहिए ।

भारतीय किसान के पास हाथ पैर का बल है, उसके मन में काम करने का उत्साह है । उसे अपनी धरती और घर-गृहस्थी से प्रेम है, बुद्धि का गुण भरपुर मात्रा में है। किसान भाषा और भाव दोनों का धनी है। उसमें मिल- जुलकर जीवन चलाने का अद्भुत गुण है । गाँव का हर एक काम में एक – दूसरे का हाथ बाँटना देखने लायक होता है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

भारतीय किसान कथा – वर्ता का प्रेमी रहा है। उसे अपने पूर्वजों के चरित्र में रुचि है । आँख उसकी काले अक्षर नहीं देखती, पर कानों के द्वारा और कंठ के द्वारा लाखों ग्राम – गीत, हजारों कहानियाँ, लोकोक्तियाँ, ऋतु एवं प्रकृति की बातें किसानों और बरसात के घेरते – गरजते समय के कंठ में है ।जोडों की चिलकती धूप गर्मी की प्रशांत रात्री में और वसंत के फगुवा बयार में किसान का रोम रोम नृत्य और गीत के लिए फडकने लगता है ।

किसान को सहानुभूति का स्वर चाहिए। उसके जीवन को समझने, परखने और संभालने की आवश्यकता है, अस्त व्यस्त करने की नहीं । भारतीय किसानों का जीवन कठिभाइयों से नारा है। उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए और उनकी स्थिति सुधारने के लिए सरकार को उनके लिए कुछ सफल प्रयास करना चाहिए। उनकी सुथ सरकार को रखना चाहिए। तभी देरा की प्रगति सुविधा, खेती का ख्याल संभव है ।

धरती Summary in Telugu

కవి పరిపచయం

“ధరతీ పాఠం రచయిత డా. వాసుదేవ శరణ్ అగ్రవాల్ గారు. ఈయన పురాతత్వ మరియు ప్రాచీన చరిత్రతో పాటుగా కావ్య ప్రేమికుడు కూడా. ఈ పాఠంలో భారతీయ రైతు గొప్పతనాన్ని గూర్చి చర్చించడమైనది.

సారాంశము

భారత్ ఆశ – భూమి మరియు రైతు. భారత్ ఒక వ్యవసాయ ప్రధాన దేశం. రైతులు భూమాత బిడ్డలు. భారతదేశ రైతు కొన్ని శతాబ్దాలుగా నేర్పరితనంతో తన పనులు చేసుకుంటూ ఉన్నాడు.

రైతు పొలంలోకి దిగాడంటే తన రక్తాన్ని చెమటను ఒకటిగా చేస్తాడు. చలి, ఎండ మరియు వానకు భయపడడు. భారతీయ రైతు శరీరంలో, మనస్సులోను మరియు సంతోషంలో శ్రమ పడుటలో ప్రపంచంలోనే ఉన్నత స్థానాన్ని కల్గి ఉన్నాడు. రైతు తన ఇంటిన వెదురు, తీగలు మరియు వెదురు గడ్డితో తన చేతితో కలిపిన మట్టితో తయారుచేస్తాడు.

“ఆత్మనిర్భరత” భారతీయ రైతు యొక్క అతిపెద్ద గుణం. రైతు తన చేతులతో తన గ్రామంలోనే అనేక విషయాలను) పనులను చేసేసుకుంటాడు. తను బయట నుండి యంత్రాలను, మెకానిక్ల మొహం చూడవలసిన పనిలేదు. ఈ విధమైన వారి నేర్పరితనాన్ని మెచ్చుకోవలసి ఉంది.

భారతీయ రైతుల్లో కాళ్ళు – చేతుల బలం, వారి మనస్సులో పని చేయాలన్న ఉత్సాహం ఉంది. వారికి తమ భూమియన్న, ఇల్లు మరియు కుటుంబం అన్న ప్రేమ, బుద్ధి అనే గుణం సంపూర్ణంగా ఉంది. రైతు “భాష మరియు భావం” అనే రెండింటిలోనూ ధనికుడే. అతనితో కలిసి మెలిసి జీవితాన్ని నడపాలన్న అద్భుతమైన గుణం ఉంది. గ్రామంలోని ప్రతి ఒక పనిలోనూ ఒకరినొకరు చేయూతనందించడం చూడదగినది.

భారతీయ రైతు కథా – వార్తల ప్రేమికుడు. అతనికి తన పూర్వికుల చరిత్ర అన్న చాలా ఇష్టం. కళ్ళు నల్లని అక్షరాలను చూడలేకపోయినా చెవులు మరియు కంఠం ద్వారా లక్షల గ్రామ గీతాలు, వేలకొలది కథలు, సామెతలు, ఋతు మరియు ప్రకృతిలోని విషయాలు రైతుల కంఠంలో ఉన్నాయి. ఉండి ఉండి మెరిసే ఎండ. వేసవి ప్రశాంత రాత్రిలో, చుట్టుముట్టి గర్జిస్తున్న మేఘాలు వర్షించే సమయంలో మరియు వసంతంలోని హోలీ పండుగ గాలిలోను రైతుల రోమాలు పాటలు మరియు నృత్యాలకోసం పరితపిస్తూ ఉంటాయి.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 4 धरती

రైతుల యెడల సానుభూతిపరుల స్వరాలు కావాలి. వారి యొక్క జీవితాన్ని అర్థం చేసుకుని, మంచి చెడులను గుర్తించే జాగరూకత పడవలసిన అవసరం ఉంది. అంతేకాని అస్తవ్యస్తంగా కాదు. భారతీయ రైతుల జీవనం చాలా సమస్యలతో నిండి ఉంది. వారి కష్టాలను / సమస్యలను దూరం చేయడం కోసం మరియు వారి స్థితి బాగుచేయడంకోసం ప్రభుత్వం వారికోసం కొన్ని సఫలీకృత ప్రయత్నాలు చేయాలి. వారి యొక్క సుఖ – సౌకర్యాలు, పంటల యెడల ప్రభుత్వం దృష్టిని సారించాలి. అప్పుడే దేశ ప్రగతి సంభవం అవుతుంది.

कठिन शब्दों के अर्थ (కఠిన పదాలు – అర్ధాలు)

बंधार – పూర్తి నష్టం
हड्डी पेलने – వెన్ను విరుచుకొనే
असौज – ఆశ్వీయుజమాసం
भरकम – దేహపు ఒడ్డు-పొడవు
फूँस और छप्पर – ఎండు గడ్డి మరియు చూరు, కప్పు
भाया – సౌందర్యం, ప్రేమ
बल्लियाँ – నావ నడుపు తెడ్డు
ठाठ से – వెదురుగడతో చేసిన
पंजाली – పాడె, పంజరం
बरत – త్రాడు
पुराही – చాలా ప్రాచీనకాలమున
कुदाल – త్రవ్వుగోల
हँसिया – గొడ్డలి
गठियाता – ముడివేయుట
धकडा – ఎద్దుబండి
पेरने – ఒత్తుట, ప్రేరేపించుట
लिपे – पुते – అలకబడిన (పేడతో)
पुताई – పేడ / సున్నంతో అలుకుట
मँडनी – సమర్థించుట
फडकने – త్రుల్లుట, కదులుట, అదురుట
टोटा – తక్కువ, లోటు
फगुनहटा – ఫాల్గుణ మాసంలో వీచుగాలి
ताकता – తేరిపార చూచుట
चिलकता – ఉండి – ఉండి మెరయుట, బాధకల్గుట
फगुआ – హోలీ పండుగ
बयार – గాలి

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 3rd Lesson सयानी बुआ Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material 3rd Lesson सयानी बुआ

दीर्घ प्रश्न (దీర్ఘ సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
‘सयानी बुआ’ पाठ का सारांश पाँच-छः वाक्यों में लिखिए ।
उत्तर:
सयानी बुआ कठोरता से समय पालन करनेवाली एवं अनुशासन रखनेवाली नारी है । कहानीकार को पढ़ाई के लिए उनके घर में रहना पड़ता । कठोरता के कारण उनकी नन्ही बेटी अन्नू डरती है। डॉक्टर सलह देते हैं कि बुआ के बिना अन्नू को पर ले जाया जाए । तदनुसार उनके पति अन्नू को पहाड़ पर लेजाते हैं। बेटी की तबीयत के बारे में बुआ और उनके पति के बीच रोज पत्रव्यवहार चलता रहता है। एक महीने के बाद पति से देर से पत्र आता है, जिसमें लिखगया है कि सारी सतर्कता के बावजूद मैं उसे नहीं बचासका, इस चोट को धैर्य पूर्वकं सहलेना…। यहाँ तक पढ़ते ही बुआजी और कहानीकार जी यह समझकर चीखकर रो पड़ती कि अन्नू मरगईं । लेकिन वे अंतिम हिस्सा पढ़कर रोते रोते हँस पड़ती हैं, क्यों कि पति पचास रूपए वाले प्याले सेट को बचा न सका, अन्नू तो अच्छी है ।

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
मन्नू भंडारी के बहुचर्चित उपन्यास कौन से हैं। उनकी विशेषता क्या है ?
उत्तर:
मन्नू भंडारी के बहुचर्चित उपन्यास हैं – एक इंच मुस्कान (उनका पहला उपन्यास), महाभोज, एक कहानी है भी आपका बंटी आदि । इनमें नारी जीवन की समस्याएँ, उनकी मानसिक स्थिति का विश्लेषण, युगीन समाज की यथार्थता आदि प्रति बिंबित हैं। इनकी भाषा सरल व सुबोध है। ये सब मन्नू भंडारी जी के उपन्यासों की विशेषता है ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

प्रश्न 2.
सयानी बुआ के व्यक्तित्व का संक्षिप्त परिचय दीजिए ।
उत्तर:
सयानी बुआ बचपन से ही कठोरता से पालन करनेवाली एवं अनुशासन रखनेवाली नारी हैं । वे अपने घर में रहनेवाले सभी से भी इन नियमों का पालन कराती हैं । वे सारे घर को सुव्यवस्ति, सुंदर और साफ रखती हैं । उनकी भयंकर कठोरता में कोमलता भी छिपी है। अन्नू को खूब प्यार करती हैं । अन्नू का सुरक्षित समाचार सुनकर इतना हर्षित होती है मानों उन्हें स्वर्ग की निधि मिलगई हो ।

एक वाक्य प्रश्न (ఏక వాక్య సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
‘सयानी बुआ’ नामक कहानी की लेखिका कौन हैं ?
उत्तर:
मन्नू भंडारी

प्रश्न 2.
सयानी बुआ के पास पढ़ाई करने कौन गयी थी ?
उत्तर:
कहानीकार मन्नू भंडारी

प्रश्न 3.
अन्नू को बुखार आने पर डॉक्टर ने क्या सलाह दी ?.
उत्तर:
अन्नू को पहाड़पर लेजाने की

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

प्रश्न 4.
सयानी बुआ को किसने पत्र लिखा ?
उत्तर:
उनके पति ने

संदर्भ सहित व्याख्याएँ (సందర్భ సహిత వ్యాఖ్యలు)

1. कहते हैं, जो पेंसिल वे एक बार खरीदती थीं, वह जब तक इतनी छोटी न हो जाती कि उनकी पकड में भी न आए तब तक उससे काम लेती थीं ।

संदर्भ : प्रस्तुत कथा – अंश सुप्रसिद्ध कहानीकार एवं उपन्यासकार श्रीमती मन्नू भंडारी की सफल कहानी, ‘सयानी बुआ’ से लिया गया है । बचपन में ही बुआ कितनी सुव्यवस्थता और पाबंदी से, कितने अनुशासन से रहती है, उसका एक उदाहरण के रूप में कहानीकार यह उद्धरण देती है ।

व्याख्या : कहा जाता है कि सयानी बुआ बचपन में, पढ़ाई के समय, पेंसिल का पूरी तरह उपयोग में लाती थीं। छोटी होते हुए पकड़ में न आने तक पेंसिल का इस्तेमाल करती थीं ।

विशेषताएँ : इस उद्धरण मे स्पष्ट होता है कि सयानी बुआ के ‘सयानापन का बीज बचपन में ही बोया गया। कहा जाता है कि बचपन की आदतें आजीवन जारी होती हैं।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

2. यों बुआजी की गृहस्थी जमे पंद्रह वर्ष बीच चुके थे, पर उनके घर का सारा सामान देखकर लगता था, मानों सब कुछ अभी कल ही खरीदा हो ।

संदर्भ : यह वाक्य हिंदी की सुप्रसिद्ध कहानीकार एवं उपन्यासकार मन्नू भंडारी की सफल कहानी, ‘सयानी बुआ’ से उद्धृत है । सयानी बुआ के घर के नीरस और यंत्रचालित कार्यक्रम के बारे में बताते हुए प्रस्तुत वाक्य कहती हैं ।

व्याख्या : कहानीकार कहती हैं कि पंद्रह वर्ष के पहले बुआजी गृहिणी बन गई । लेकिन तब खरीदी गई घर की सारी सामग्री को देखकर ऐसा अनुभव होता है, मानो वह सारी सामग्री कल ही खरीदी हो । अर्थात् सारा सामन जैसा – का – तैसा नवीनता से चमक रहा है ।

विशेषताएँ : यह उद्धरण सयानी बुआ जी की सुव्यवस्थिता, सतर्कता, एवं उनके अनुरक्षण का परिचायक है ।

सयानी बुआ Summary in Hindi

लेखक परिचय

मन्नू भंडारी का जन्म सन् 1931 में मध्यप्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था । वे हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं । मन्नू भंडारी ने नारी जीवन की समस्याओं को चित्रित करने, उनकी मानसिकस्थिति का विश्लेषण करने तथा युगीन समाज के यथार्थ को चित्रित करने में सफलता प्राप्त की है ।

मन्नू भंडारी की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं- “बिना दीवारों का घर”, “आपका बंटी”, अपने पति राजेंद्र यादव के साथ लिखा गया उनका उपन्यास ‘एक इंच मुस्कान’ हिंदी साहित्य में विशेष स्थान रखता है । मन्नू भंडारी को हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत किया गया ।

सारांश

सयानी बुआ कहानी में सयानी बुआ लेखिका की अपनी बुआ थी। जो हर काम को समय से करना ज्यादा पसंद करती थी। वह काफी कठोर थी । सबसे अपनी बात मनवाने में माहिर थी । अनावश्यक चीजों का दुरूपयोग उनको पसंद नहीं था ।

वह स्वयं स्कूल में एक पेंसिल को जब तक छोटा होकर हाथ में न आ जाए उससे लिखती थी । रबर को भी 4 – & साल तक चलाती थी । चीजों को संभाल कर रखना वह खूब जानती थी ।

लेखिका को अपनी बुआ के बारे में पिताजी से पता चला । वह भी सयानी बुआ से बहुत डरती थी । एक दिन उनके पिताजी ने आगे की पढ़ाई के लिए उनको सयानी बुआ के यहाँ भेज दिया ।

लेखिका सहमी सहमी गई थी । परिस्थिति सच में बहुत गंभीर थी । सयानी बुआ साफ सफाई बहुत पसंद करती थी । एक बार एक नौकर ने उनके 4 रूपयों के कांच के डब्बे को तोड़ दिया था तो उन्होंने उस बच्चे की बहुत पिटाई की थी।

सयानी बुआ की बेटी अन्नू बहुत उदास रहती थी । अपनी माँ की डर से, एक दिन वह बीमार पड़ गई थी जो पहाड़ी परिवेश में जाकर ही ठीक हो पाता । सयानी बुआ ने जा पाए इसलिए डाक्टर ने माँ को जाने से मना किया था । रोते हुए बुआ अनु की विदाई कर रही थी । पहली बार माँ की ममता लेखिका को नज़र आई । आखिर वह क्षण भी आ पहुँचा, जब भाई साहब (लेखिका की बुआजी के पति) एक नौकर और अन्नू को लेकर चले गए । बुआजी ने अन्नू को खूब प्यार किया, रोई भी । उनका रोना मेरे लिए नई बात थी । उसी दिन पहली बार लगा कि उनकी भयंकर कठोरता में कही कोमलता भी छिपी है । पर दूसरे ही दिन घर वैसे ही चलने लगा ।

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

भाई साहब का पत्र रोज आता था । जिसमें अन्नू की तबीयत के समाचार रहते थे । करीब एक महीने के बाद एक दिन भाई साहब का पत्र नही आया । दूसरे दिन भी नहीं आया। बुआजी बड़ी चिंतित हो उठी । उस दिन उनका मन किसी भी काम में नहीं लगा। तीसरा दिन भी निकल गया ।

अब तो बुआजी की चिंता का पार नहीं रहा । लेखिका के मन में भी कुछ अन्नू के ख्याल से, कुछ बुआजी की यह दशा देखकर बडा दुःखी हो रहा था । तभी नौकर ने भाई साहब का पत्र लाकर दिया । बडी व्यग्रता से काँपते हाथों से बुआजी ने उसे खोला और पढ़ने लगी । लेखिका बुआजी के मुँह की ओर देख रही थी कि एकाएक पत्र फेंककर सिर पीटती बुआजी रो पडी ।

(मै) बुआजी को देखकर लेखिका पत्र पढ़ रही है, पत्र पढते समय लेखिका के मन में भी अन्नू याद आने लगी, सयानी बुआ अन्नू की खाने के मैनू, उसके कपड़े सब तैयार कर दिये थे और 50/- रूपये के कप सेट को तोड़ ने मना किया था । मगर वह कप सेट टूट जाता। इसका संदेश जब सयानी बुआ को मिलता है तो वह पहले पत्र पढ़कर घबराती है बाद में हंसती है। अन्नू अच्छी है। शीघ्र ही हम लोग खाना होने वाले हैं ।

सयानी बुआ Summary in Telugu

సారాంశము

తెలివిగల మేనత్త మన రచయిత్రి (మన్ను బండారీ) అత్త. మేనత్త చాలా తెలివిగలది. ఏ పని అయిన సమయానికి చేసితీరాలి. సమయపాలన అంటే ఆమెకు చాలా ఇష్టం. ఆమె కొంచెం కఠోరమైన హృదయం కలది. ప్రతి ఒక్కరికి ఆమె మాట శాసనం, ప్రతివారితో ఆమె పని చేయించగల నైపుణ్యం కల స్త్రీ. అనవసర ఖర్చులు, ఆమెకు ఇష్టం ఉండదు. పనికిరాని వస్తువులకు డబ్బు ఖర్చు పెట్టనిచ్చేది కాదు. తన మాటను ఒప్పించగల నైపుణ్యం ఉన్న స్త్రీ మన రచయిత్రి మేనత్త.

ఆమె చిన్నప్పటి నుండి ప్రతి వస్తువును జాగ్రత్తగా వాడేది. ఒక పెన్సిల్ను 4, 5 సంవత్సరములు వాడినది. ఆ పెన్సిల్ చేతిలో (చిన్నదై) వాడలేనంత చిన్నదైనప్పుడే పడివేసేది. ప్రతి వస్తువును జాగ్రత్తగా వాడటం ఆమెకు వెన్నతో పెట్టిన విద్య. మన రచయిత్రికి వాళ్ళ నాన్నగారు మేనత్త గురించి చెబుతుండేవారు. ఆయనకి వాళ్ళ చెల్లెలంటే చాలా భయం. మన రచయిత్రిని పై చదువుల కోసం వాళ్ళ మేనత్త దగ్గరకు పంపించారు. మన రచయిత్రికి వాళ్ళ మేనత్త ఇల్లు ఒక బంధీఖానాలాగా ఉంది. మేనత్త కూతురు అన్ను, ఆమె భర్తని చూస్తే చాలా జాలిగా అనిపించేది. పనివారందరికి ఆమె అంటే చాల భయం. ఎవరైన పనివారు ఏ వస్తువునైన విరగకొడితే వారికి కఠినమైన శిక్ష విధించేది.

ఆమె యొక్క కఠినమైన నియమాలు మరియు నిబంధనలను చిన్ని హృదయమైన అన్ను తట్టుకోలేకపోయేది. కొద్ది రోజులకు ఆ లేత హృదయం (గాయపడి) బాధపడి మంచం పట్టింది. వైద్యులు పరీక్షించి ఆమెను ఎక్కడికైన పర్వత ప్రాంతాలకు దూరంగా, తల్లికి దూరంగా ఆహ్లాద వాతావరణంలో ఉంచమని చెప్పారు. రచయిత్రి మేనత్త ఎంత కఠినంగా పైకి కనిపించినా, మనసులో తల్లి హృదయం తట్టుకోలేకపోయింది.

కూతురుని వదలి ఉండటానికి చాల బాధపడింది. తప్పక భర్తని, కూతురుని పంపడానికి నిర్ణయించుకుంది. భర్త మరియు కూతురు వెళ్ళడానికి వారి సామానులు, బట్టలు అన్నీ తానే నిర్ణయించింది. కప్పుకోడానికి దుప్పట్లు, స్వెటర్లు, బూట్లు అన్నీ ఆమె సర్దింది. ప్రతి వస్తువుని జాగ్రత్తగా ఉంచమని వారికి సలహా ఇచ్చింది. ఒక గిన్నెల సెట్టు ఇచ్చి దాన్ని 50/- కి కొన్నాను. జాగ్రత్తగా చూసుకోమని చెప్పింది. భర్తకి ప్రతిరోజు ఉత్తరం వ్రాయమని చెప్పింది. వారు బయలుదేరి వెళ్ళేటప్పుడు మేనత్త మనసులో ఎంతో బాధపడింది. తను లేకుండా భర్త, కూతురు ఎలా ఉంటారో అని మనసులో పరితపించింది.

TS Inter 2nd Year Hindi Study Material Chapter 3 सयानी बुआ

కొన్ని రోజులు గడిచిపోయాయి. రోజు భర్త నుండి ఉత్తరం వచ్చేది. మేనత్త చదివి తృప్తిపడేది. కాని కొద్ది రోజులుగా ఉత్తరం రావడం లేదు. మేనత్త మనస్సు ఎందుకో కంగారుగా అనిపించింది. అకస్మాత్తుగా ఒకరోజు ఉత్తరం వచ్చింది. దానిని మేనత్త చదవడం ప్రారంభించింది. కాని సగంలో ఏడుస్తూ క్రింద పడేసింది. మన రచయిత్రి కంగారుగా ఉత్తరం చదవడం ప్రారంభించింది.

దానిలో మేనత్త భర్త ఏదీ శాశ్వతం కాదు, మన చేతిలో ఏమి ఉండదు. ఏది జరిగినా దైవాదీనంగా భావించాలి. ఆ ఉత్తరంలో అన్నుకి ఏమైన అపాయం జరిగిందా అని అనిపించింది. కాని మేనత్త పంపిన గిన్నెల .సెట్టు విరిగినది, క్షమించు’ అని చివరికి తెలియజేశాడు. ఆ ఉత్తరం పూర్తిగా చదవక మేనత్త బాగా ఏడ్చింది. పూర్తిగా చదివిన తర్వాత ఆమె బాగా నవ్వుకుంది.

कठिन शब्दों के अर्थ (కఠిన పదాలు – అర్ధాలు)

सयानी – Clever, తెలివిగల
टहलना – to walk, నడవడం
कायदा – rule, drew, దేశాలు, నియమాలు
पारखी – discerning, తెలుసుకొను, కనుక్కొనుట
पाबंद – punctured, సరియైన సమయాన్ని పాటించు
चतुराई – dexterity, సామర్థ్యం
गुहारना – hue and cry, అప్పీలు చేయు, ఏడుపు, చాటింపు, దండోరా.
तिरोहित – diagonally, disappeared, అదృశ్యమైన, వికర్ణంగా
नन्हा – small, చిన్న
प्रौढ – mature, adult, పెద్ద సంతోషం
मजाल – fun, సంతోషం
सुराही – pot, కుండ
कसूर – mistake, తప్పు
बर्दाश्त – sufferance, అనుమతించు
सतर्कता alertness, అప్రమత్తత
उपचार – treatment, జరిపించు పద్ధతి
पीली पड़ना – pale, పాలిపోయిన
ग्रसते – suffering, బాధ
इलाज – treatment, చికిత్స
आनाकानी – in attentiveness, అశ్రద్ధగా ఉండటం
ओढ़ना – wrap, కప్పుకొనుట
हिदायत – instruction, సూచనలు
छिपजाना – hidden, disappear, దాక్కొనుట
लटकना – hang up, వ్రేలాడదీయు
चीखना – scream, గట్టిగా ఏడ్చు, బిగ్గరగా నవ్వు
नश्वर – mortal, అశాశ్వతం
टूट जाना – rupture, చీలిక
हतबुद्धि – foolish, తెలివితక్కువ
खयाल रखना – take care, జాగ్రత్త
जोर-शोर – loud noises, పెద్ద శబ్దాలు
चहचहाहट – twitter, chatter, అరుపులు

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 3 अशोक का शस्त्र त्याग

Telangana TSBIE TS Inter 2nd Year Hindi Study Material उपवाचक 3rd Lesson अशोक का शस्त्र त्याग Textbook Questions and Answers.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक 3rd Lesson अशोक का शस्त्र त्याग

लघु प्रश्न (లఘు సమాధాన ప్రశ్నలు)

प्रश्न 1.
सम्राट अशोक के बारे में आप क्या जानते हैं ? उनके बारे में तीन – चार वाक्य लिखिए ।
उत्तर:
सम्राट अशोक युद्ध – पिपासी होने के कारण, चार साल से कलिंग से युद्ध करते रहने पर भी जीत न पाते हैं । कलिंग की राजकुमारी पद्मा पुरुष वेष में शस्त्र सज्जित करके विशाल स्त्री सेना से अशोक- सेना के सम्मुख आती है । स्त्रियों पर शस्त्र प्रयोग शात्र विरूद्ध होने के कारण अशोक विचलित होकर शस्त्र त्याग करते हैं । अपने सभी सरदारियों के साथ अशोक बौद्ध भिक्षु बनजाते हैं और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का पालन शक्तिभर करने की प्रतिज्ञा करते हैं ।

प्रश्न 2.
अशोक ने शस्त्रों का त्याग क्यों किया ?
उत्तर:
अशोक स्वयं अपनी सेना का संचालन करते समय शत्रु- कलिंग की सभी सेना महिलाएँ हैं । उसकी संचालन करनेवाली राजकुमारी पद्मा भी स्त्री है। स्त्रियों पर शस्त्र चलाना शास्त्र – विरुद्ध है । इसे दृष्टि में रखने और स्त्री – सेना को देखकर अपना हृदय परिवर्तित होने के कारण अशोक ने शस्त्रों का त्याग किया ।

अशोक का शस्त्र त्याग Summary in Hindi

लेखक परिचय

बंशीधर श्रीवास्तव का जन्म बिहार में हुआ था। इनकी सही जन्मतिथि एवं निधन तिथि का विवरण अनुपलब्ध हैं । पाठ्यपुस्तक में भी इनकी सूचना नहीं दी गई । श्रीवास्तव जी के पिता का नाम रूपनारायण था। इनकी शिक्षा- दीक्षा उच्चस्तर तक पूरी तरह हिंदी में ही हुई । इन्हें हिंदी भाषा और साहित्य में विशेष रुचि थी ।

इन्होंने आजीवन गाँधीजी के वचनों का पालन किया । इसी कारण से इनकी रचनाएँ शांति, अहिंसा, धर्म, न्याय आदि गाँधीवादी विचारधारा से मंडित हैं । इनकी सृजन क्षमता में भाषा की सरलता, शब्दों का चयन तथा सुंदर सूक्तियों का प्रयोग प्रशंसनीय है । “इनकी प्रमुख रचनाओं में उल्लेखनीय हैं- नयी तालीम का ध्रुवतारा, खादी और गोसेवा, विकास का सच्चा अर्थ, ईश्वर अल्ला तेरे नाम, देवनागरी लिपि की लोकप्रियता, विश्व हिंदी विद्यापीठ, शोषण और पोषण आदि ।

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 3 अशोक का शस्त्र त्याग

प्रस्तुत ऐतिहासिक एकांकी, ‘अशोक का शश्त्र त्याग’ में युद्ध पिपासी, महान सम्राट अशोक के शस्त्र – त्याग द्वारा युद्ध के दुष्परिणाम एवं अहिंसा के महत्व के साथ – साथ कलिंग की राजकुमारी के शैर्य और साहस को महिला-शक्ति के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया है । इस दृष्टि से यह एक सफल एकांकी है ।

सारांश

चार सालों से मगध और कलिंग के बीच युद्ध चल रहा है। कलिंग के महाराज मारे गए तथा उनके सेनापति पहले ही कैद हो चुके हैं । फिर भी कलिंग – दुर्ग के फाटक बंद हैं । दूसरे दिन, युद्ध पिपासी अशोक स्वयं कलिंग – दुर्ग के फाटक के सामने सेना का सचालन करता है और सेना को उत्साहित करता हैं । कुछ देर बाद सहसा दुर्ग का फाटक खुल जाता है ।

शस्त्र सज्जित स्त्रियों की विशाल सेना फांटक के बाहर निकलने लगती है । सेना के आगे पुरुष वेष में कलिंग महाराज की पुत्री पद्मा साक्षात् चंडी दिखाई देती है । अशोक सहित उसकी सारी सेना आश्चर्य में डूब जाती है । वीरांगना पद्मा वीर रस से प्लावित भाषाण से सेना को भड़काती है । अशोक के पूछने पर पद्मा अपना परिचय देते हुए उसे ललकारती है कि जब तक मैं हूँ, मेरी ये वीरांगनाएँ हैं, कलिंग के भीतर कोई पैर नहीं रख सकता । मेरे पिता के हत्यारे से द्वंद्व युद्ध करना चाहती हूँ । अशोक दुविधा में पड़जाता है कि स्त्रियों पर शस्त्र चलाना शास्त्रसम्मत नहीं है ।

इसलिए बह अपना निर्णय प्रकट करता है कि मैं शस्त्र नहीं चलाऊँगा मैं स्त्री- वध नहीं करूँगा मैं यह पाप नहीं करूँगा । वह आगे अपनी सेना को आशा देता है कि वे स्त्रियों पर हाथ न उठाना । इस पर व्यंग्य करती हुई पद्मा पूछती है कि क्या शास्त्र निरपराधियों की हत्याकरने को कहता है; लाखों माताओं की गोद सूनी करने को कहता है; लाखों स्त्रियों की माँग का सिंदूर पोंछ डालने को कहता है । वह आगे कहती है कि मैं तुमसे शास्त्र सीखने नहीं आई हूँ, शस्त्र चलाने आई हूँ । कलिंग की स्त्रियाँ तुमसे कुछ नहीं चाहती केवल युद्ध चाहती हैं ।

अशोक सिर झुकाकर तलवार नीचे फेंक देता है और अपने सैनिकों से भी तलवारें फेंकवा देता है । वह आगे कहता है कि काट लीजिए मेरे सिर को । मैं हथियार नहीं उठाऊँगा । मेरी प्रतिज्ञा अटल है । इसपर पद्मा यह कहते हुए अपनी स्त्री सेना के साथ दुर्ग में चली जाती है कि तो जाइए महाराज ! स्त्रियाँ भी निहत्थे पर वार नहीं करेंगी ।

अंत में, अशोक और उसके सभी सरदार पीलेवस्त्र धारणकर बौद्ध भिक्षु से दीक्षा पाते हैं और बौद्ध धर्म के सिद्धांत अहिंसा, करुणा, शांति, लोक कल्याण – के मार्ग पर आजीवन चलने की प्रतिक्षा करते हैं ।

अशोक का शस्त्र त्याग Summary in Telugu

సారాంశము

నాల్గు సంవత్సరాల నుండి కళింగ మగధ రాజ్యాల మధ్య యుద్ధం జరుగుతూనే ఉంది. కళింగరాజ్య మహారాజు యుద్ధంలో చనిపోయారు. ఆయనే సేనాపతి అంతకుముందే బందీ అయినాడు. అయినా కళింగదుర్గం మహాద్వారం మూసే ఉంచబడింది. మర్నాడు యుద్ధ పిపాసి అయిన అశోకుడు స్వయంగా ఆ మహాద్వారం ముందు సైన్యాన్ని నడిపిస్తూ, వారిని ఉత్సాహపరుస్తూ ఉంటాడు. కొంతసేపటికి మహాద్వారం అకస్మాత్తుగా తెరుచుకొంటుంది.

TS Inter 2nd Year Hindi उपवाचक Chapter 3 अशोक का शस्त्र त्याग

శస్త్రధారులై స్త్రీల విశాల సైన్యం మహాద్వారం నుండి వెలుపలకు వస్తూ ఉంటుంది. సైన్యం ముందు పురుష వేషంలో కళింగ రాకుమారి పద్మ సాక్షాత్ చండీలా దర్శనమిస్తుంది. అశోకునితో పాటు, అతని సైన్యమంతా ఆశ్చర్య చకితులవుతారు. వీరాంగన పద్మ వీరరసప్లావితమైన ఉపన్యాసంతో ఉత్తేజపరుస్తూ ఉంటుంది. అశోకుడు అడిగిన మీదట పద్మ తన పరిచయాన్ని తెల్పుతూ, నేను, నా ఈ వీరాంగనలు బ్రతికున్నంత వరకు కళింగరాజ్యంలో పలకాలు మోపలేరని హూంకరిస్తుంది.

నా తండ్రి హంతకుడితో ద్వంద్వయుద్ధం చేయాలని అనుకొంటున్నా. అశోకుడు సందిగ్ధంలో పడ్డాడు. ఎందుకంటే స్త్రీలపై శస్త్ర ప్రయోగం శాస్త్రవిరుద్ధం. నేను శస్త్ర ప్రయోగం చేయలేను. నేను స్త్రీలను వధించలేను. ఆ పాపం నేను చేయలేనంటూ సైన్యాన్ని కూడ, స్త్రీలపై శస్త్రాలు ఎక్కు పెట్టవద్దని ఆజ్ఞాపిస్తాడు. అటుపిమ్మట పద్మ, శాస్త్రం నిరపరాధుల్ని హత్యచేయమని చెప్పిందా; లక్షలమంది తల్లులకు గర్భశోకం కల్గించమందాం; లక్షల స్త్రీల మాంగల్యాన్ని తెంపేయమందా అని నిలదీస్తుంది. నేను నీతో శాస్త్రం నేర్చుకోవటాన్కిరాలేదు శస్త్రప్రయోగం చేయటాన్కి వచ్చా. కళింగరాజ్య స్త్రీలు నీతో యుద్ధం చేయాలని కోరుకొంటున్నారు; మరేమీ కోరటంలేదు అని గర్జిస్తుంది.

అశోకుడు నతమస్తకుడై కరవాలాన్ని క్రింద పడేస్తాడు. తన సైనికుల్ని కూడ తమ తమ కత్తుల్ని క్రింద పడేయమని ఆజ్ఞాపిస్తాడు. ఇదిగో నా శిరస్సు నరికేయి. నేను ఆయుధాల్ని ముట్టను. నా ప్రతిజ్ఞ భీషణం, తిర్గులేనిది అంటాడు పద్మతో. అయితే వెళ్ళంగి, మహాప్రభో, స్త్రీలుకూడ నిరాయుధుల్ని వధించదు, అంటూ తన విశాల స్త్రీసేనతో పద్మదుర్గంలో పలికి వెళ్ళిపోతుంది.

చివరగా, అశోకుడు తన సేనాధి కారులతో పాటు పసుపు వస్త్రాల్ని ధరించి బౌద్ధబిక్షువుతో దీక్ష తీసుకొని బౌద్ధ ధర్మ సిద్ధాంతాలైన – అహింస, దయ, శాంతి, ప్రజా సంక్షేమాలతో కూడిన మార్గాన్ని ఆ జీవనం అనుసరిస్తానని ప్రతిజ్ఞ చేస్తారు.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 9 Emergence of Telangana State

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TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 9 Emergence of Telangana State

→ The Emergence of Telangana State in 2014 is the result of a long drown struggle. It has a history of sixty years of struggle and movements marked by agitations, negotiations, formation and merger of parties, agreements and violation of agreements.

→ The Telangana region, marked by the trilingual character of Marathi, Kannada and Telugu-speaking people, remains as an independent state from 1948 to 1956 in the Indian federation.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 9 Emergence of Telangana State

→ The demand for separation became a serious and uncompromising issue resulting in the Telangana movement between 2001 and 2014.

→ The States Reorganization commission Recommended Separate Telangana.

→ Mulki Rules were framed for the interest of Telangana-educated youth.

→ Telangana Praja Samithi was formed by Dr.M.Chenna Reddy in 1969.

→ Telangana Rashtra Samithi was formed by K.Chandra Sekhar Rao on April 27, 2001, with an exclusive one point Agenda of creating a separate Telangana State with Hyderabad as its capital.

→ Sri Krishna Committee was appointed by the government of India on 3rd February 2010.

→ The Telangana State was formed on 2 June 2014 as the 29 states in the Union of India.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 9 తెలంగాణ రాష్ట్రఅవతరణ

→ తెలంగాణ రాష్ట్రం 2014, జూన్ 2వ తేదీ దీర్ఘకాలంగా వివిధ రూపాల్లో నడిచిన పోరాటాల ఫలితంగా ఏర్పడింది.

→ హైదరాబాద్ సంస్థాన రాజ్యం నైజాం పాలనలో అనేక భాషలు, మతాలు. సంస్కృతులతో భాసిల్లింది.

→ భారత యూనియన్ జరిపిన పోలీసు చర్య పర్యవసానంగా స్వపరిపాలన కలిగిన హైదరాబాద్ రాజ్యం 1948లో హైదరాబాద్ రాష్ట్రంగా భారత యూనియన్లో విలీనమైంది.

→ నవంబరు 1, 1956వ దేశంలోనే మొదటి భాషా ప్రయుక్త రాష్ట్రంగా ఆంధ్రప్రదేశ్ ఏర్పడింది.

→ ఆంధ్ర, తెలంగాణ నాయకుల మధ్య జరిగిన పెద్ద మనుషుల ఒప్పందంలో భాగంగా తెలంగాణ ప్రాంతీయ సమన్వయ సంఘం ఏర్పాటయ్యింది.

→ పరిస్థితి తీవ్రతను దృష్టిలో ఉంచుకొని కేంద్రం 3 ఫిబ్రవరి, 2010న రిటైర్డ్ సుప్రీంకోర్టు ప్రధాన న్యాయమూర్తి బి.యస్ శ్రీ కృష్ణ నేతృత్వంలో కమిటీని నియమించింది.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 9 Emergence of Telangana State

→ తెలంగాణ ఉద్యోగులు, విద్యార్థులు, ఒక మహా సమ్మె తలపెట్టారు. 13 సెప్టెంబర్ నుంచి 24 అక్టోబర్ 2011 వరకు నలభై రోజులు తెలంగాణలో సాధారణ జన జీవితం స్తంభించింది.

→ తెలంగాణ ఉద్యమం ప్రారంభించి, తీవ్రతరం చేసి వివిధ కళాశాలల విద్యార్థులు రాష్ట్ర సాధనకు ఎంతో కృషి చేశారు.

→ దశాబ్దాల పోరాటం తరువాత తెలంగాణ రాష్ట్రం రూపొందించి, జూన్ 2. 2014 చరిత్రలోనూ, తెలంగాణ ప్రజల జ్ఞాపకాలలోను నిలిచిపోయింది.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 Centre-State Relations

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TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 Centre-State Relations

→ The center-state relations is the most important aspect of a federal system.

→ The union and state relations are divided into three heads. They are :

  1. Legislative
  2. Administrative and
  3. Financial Relations.

→ The central Government has more powers than the states in legislative, administrative and financial matters.

→ Our constitution divides the powers into three lists viz, the union list, the state list and the concurrent list.

→ Union list at present comprises a Hundred Subjects.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 Centre-State Relations

→ State list at present comprises sixty-two subjects.

→ All present there are 52 subjects in the concurrent list.

→ The residuary powers are given to the union government.

→ The government plays key role in union-state relations.

→ Finance commission is appointed by the president for every 5 years.

→ The purpose of the finance commission is to recommend the distribution of taxes and grants between states.

→ The states have to depend on the center for financial aid in many respects.

→ When a Constitutional emergency is declared in the state,- Parliament is empowered to make laws for the state.

→ Sarkaria commission was appointed in March 1983 to re-view center-state relations.

→ A permanent Inter-State Council called the Inter-Government council should be set up under Article 263.

→ The Inter-State Council settles the disputes which arise between states.

→ NITI Aayog. National Development Council, National Integration Council, and Interstate Council are extra-constitutional devices of the union government.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 Centre-State Relations

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 కేంద్ర-రాష్ట్ర సంబంధాలు

→ సమాఖ్య వ్యవస్థలో కేంద్ర-రాష్ట్ర సంబంధాలు ప్రముఖమైన స్థానాన్ని కలిగి ఉంటాయి. రాజ్యాంగ నిర్మాతలు శాసనపరమైన అంశాలను మూడు జాబితాల కింద విభజించారు. అవి :

  1. కేంద్ర జాబితా
  2. రాష్ట్ర జాబితా
  3. ఉమ్మడి జాబితా

→ రాజ్యాంగంలోని 248 అధికరణ ప్రకారం అవశిష్ట అధికారాలు కేంద్రానికి ఉన్నాయి.

→ రాజ్యాంగం 11వ భాగంలో కేంద్ర – రాష్ట్రాల మధ్య ఉండే పరిపాలన సంబంధాలు వివరించబడ్డాయి.

→ భారత రాజ్యాంగం 12వ భాగంలో 280, 281 ప్రకరణలు ఆర్థిక సంఘం నిర్మాణం, అధికారాలు, విధుల గురించి పేర్కొన్నాయి.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 5 Centre-State Relations

→ భారత రాజ్యాంగం 263వ ప్రకరణం ఆధారంగా అంతర్రాష్ట్రమండలి ఏర్పాటయింది.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 Depreciation

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TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 Depreciation

→ Depreciation means a permanent, continuing and gradual shrinkage in the value of fixed assets.

→ Depreciation is recorded in the books of accounts to replace the assets, to find true financial position.

→ Cases of Depreciation are: Wear and tear, depletion, Accidents, Obsolence, the passage of time and fluctuations.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 Depreciation

→ The various methods of depreciation are:

  1. Fixed Instalment method
  2. Diminishing Balance method
  3. Annuity method
  4. Depreciation Fund Method
  5. Depletion method
  6. Machine Hour rate method
  7. Sum of year digits method.

→ Fixed instalment method is also called as equal instalment method or original cost method or straight-line method under this method depreciation is charged on the original cost of the asset every year. In this method annual depreciation is fixed or uniform.

→ Diminishing balance method is also called as written down value method (WDU) or reducing balance method under this method depreciation is calculated at a fixed percentage on the diminishing value of the asset.

→ In the annuity method takes into account the interest lost on the acquisition of an asset. Interest is calculated on the book value.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 తరుగుదల

→ అర్థం: తరుగుదల అనే పదం లాటిన్ భాషలో డిప్రీసిమ్ ICS అనే పదం నుండి వచ్చింది. దీని అర్థం స్థిరాస్తి విలువలో తగ్గుదల.

→ తరుగుదల: ఆస్తులను నిరంతరం ఉపయోగించడం వల్ల కానీ లేదా ఇతర కారణాల వల్ల ఆస్తుల నాణ్యతను లేదా విలువలను కోల్పోతాయి. ఈ రకంగా తగ్గిన లేదా కోల్పోయిన విలువే తరుగుదల.

→ తరుగుదల ఏర్పాటు ఆవశ్యకత లేదా ప్రాముఖ్యత:

  • వ్యాపార వ్యవహారాల ఖచ్చితమైన ఫలితాలను కనుక్కోవడానికి.
  • ఆస్తి అప్పుల పట్టీలో స్థిరాస్తిని సముచిత విలువకు చూపించడానికి.
  • వాస్తవమైన ఉత్పత్తి వ్యయాన్ని కనుక్కోవడానికి.

→ తరుగుదల కారణాలు: అరుగు, తరుగు, ఉద్గ్రహణ, లుప్తత, కాలగమనం వల్ల స్థిరాస్తులలో తరుగుదల వస్తుంది.

→ తరుగుదల పద్ధతులు

  1. స్థిర వాయిదాల పద్ధతి
  2. తగ్గుతున్న నిల్వల పద్ధతి
  3. వార్షిక పద్ధతి
  4. తరుగుదల నిధి పద్ధతి
  5. బీమా పాలసీ పద్ధతి

→ స్థిర వాయిదాల పద్ధతి: ఈ పద్ధతిలో ప్రతి సంవత్సరం ఆస్తి ఖరీదుపై తరుగుదలను లెక్కిస్తారు. అందువల్ల ప్రతి సంవత్సరం తరుగుదల సమానంగా ఉంటుంది.

TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 Depreciation

→ స్థిర వాయిదాల పద్ధతిలో వార్షిక తరుగుదలకు సూత్రం:
TS Inter 2nd Year Accountancy Notes Chapter 1 Depreciation 1

→ తగ్గుతున్న నిల్వల పద్ధతి: ఈ పద్ధతిలో మొదటి సంవత్సరంలో ఆస్తి కొన్న ఖరీదుపై మరియు మిగతా సంవత్సరాలలో ఆస్తి యొక్క తగ్గుతున్న నిల్వలపై ఒక నిర్ణీత రేటు ప్రకారం తరుగుదలను లెక్కిస్తారు.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 4 State Government

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TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 4 State Government

→ The Governor is the constitutional head of the State.

→ The Governor is appointed by the President of India.

→ The Chief Minister is the Leader of the Majority part in the Legislative Assembly.

→ The Chief Minister has full Liberty in the formation of the Ministry.

→ The Real Powers are exercised by the Council of Ministers headed by the Chief Minister.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 4 State Government

→ The State Council of Ministers includes i) The Chief Minister ii) Ministers of cabinet rank iii) Ministers of State rank and some times Deputy Ministers.

→ The lower house of State Legislature is called Legislative Assembly.

→ Legislative Assembly is more powerful than Legislative Council.

→ The term of a member of the Legislative council is 6 years and 1/3 rd of its members retire every 2 years.

→ The Union and State relations are divided into three heads. They are:

  1. Legislative
  2. Administrative and
  3. Financial relations.

→ Our constitution divides the powers into three lists V12, the union list, the State list and the concurrent list.

→ Sarkaria Commission was appointed in 1983 to review Centre-State Relations.

→ The Inter-State Council settles the disputes which arise between States.

→ Finance commission is appointed by the President for every 5 years.

→ NITI Ayog replaces the planning commission.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 4 రాష్ట్ర ప్రభుత్వం

→ భారత రాజ్యాంగం ఆరో భాగంలో 152 నుండి 237 వరకు ఉన్న ప్రకరణాలు రాష్ట్ర ప్రభుత్వానికి సంబంధించిన విషయాలను పేర్కొంటున్నాయి
.
→ రాష్ట్ర కార్యనిర్వాహక శాఖలో గవర్నర్, ముఖ్యమంత్రి, రాష్ట్ర మంత్రిమండలి వారికి పరిపాలనలో సహకరించేందుకు ఉన్నతస్థాయి అధికారులు ఉంటారు.

→ గవర్నర్ రాష్ట్ర కార్యనిర్వాహక శాఖకు రాజ్యాంగబద్ధమైన అధిపతి. ఇతను రాష్ట్రపతిచే నియమించబడతాడు.

→ రాష్ట్ర ప్రభుత్వ వ్యవహారాలన్నీ గవర్నర్ పేరు మీదే అమలవుతాయి.

→ రాష్ట్ర శాసన సభలో మెజార్టీ పార్టీ నాయకుడిని ముఖ్యమంత్రిగా గవర్నర్ నియమిస్తాడు.

→ ముఖ్యమంత్రి సలహాపై ఇతర మంత్రులను గవర్నర్ నియమించును.

→ వాస్తవంగా రాష్ట్రపాలనా యంత్రాంగాన్ని నడిపించేది ముఖ్యమంత్రి, ఆయన ఆధీనంలో పనిచేసే మంత్రిమండలి.

→ రాష్ట్ర శాసన నిర్మాణశాఖ గవర్నర్, రెండు సభలు ఉన్నప్పుడు విధానసభ, విధాన పరిషత్లతో, ఒకే సభ ఉన్నప్పుడు విధాన సభతో కూడి ఉంటుంది.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 4 State Government

→ కేంద్ర, రాష్ట్రాల మధ్య సంబంధాలు i) శాసన ii) పరిపాలన iii) ఆర్థిక సంబంధాలుగా విభజింపబడినాయి.

→ శాసన సంబంధాలు i) కేంద్ర జాబితా, ii) రాష్ట్ర జాబితా iii) ఉమ్మడి జాబితాలుగా విభజింపబడినాయి.

→ కేంద్ర – రాష్ట్ర సంబంధాలను పునః పరిశీలించేందుకు 1983 జూన్ 9న భారత ప్రభుత్వం సర్కారియా కమీషన్ ను ఏర్పాటు చేసింది.

→ ప్రతి 5 సంవత్సరాలకొకసారి రాష్ట్రపతి ఆర్థిక సంఘాన్ని ఏర్పాటు చేస్తాడు. కేంద్రం – రాష్ట్రాల మధ్య ఆదాయ వనరుల పంపిణీ విషయంలో ఆర్థిక సంఘం రాష్ట్రపతికి తగిన సిఫార్సులు చేస్తుంది.

→ రాష్ట్రాల మధ్య సహకార, సమన్వయాలను సాధించేందుకు 1990 మే 28న అంతర్ రాష్ట్రమండలిని ఏర్పాటు చేశారు.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 11 India and the World

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TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 11 India and the World

→ Jawaharlal Nehru, our Prime Minister left a legacy on India’s Foreign Policy by enunciating its basic principles.

→ Panchasheel is the most important feature of India’s Foreign Policy.

→ India played affairs by being a part of the Non-Aligned Movement (NAM).

→ BRICS is the acronym for an association of five major emerging economies of the world namely. Brazil, Russia, India, China, and South Africa (BRICS).

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 11 India and the World

→ The Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Co-operation (BIMSTEC) is an organization set up in 1997 with some of the nations of South Asia and South East Asia. The members of this organization are India, Bangladesh, Nepal, Bhutan, Sri Lanka, Myanmar and Thailand.

→ South Asian Association for Regional Co-operation (SAARC) was launched on 18th December 1985 by Bangladesh, Bhutan, India, Maldives, Nepal, Pakistan, Srilanka, and Afghanistan.

→ The United Nations Organization (UNO) is an international organization that came into existence on 24th October 1945. It consists of 194 member states.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 11 భారతదేశం-ప్రపంచదేశాలు

→ అంతర్జాతీయ సమాజంలో రాజ్యాలు, ఇతర రాజ్యాల సహకారం లేకుండా మనుగడ సాగించలేవు.

→ ఒక రాజ్య విదేశాంగ విధానానికి కొన్ని నిర్దిష్ట లక్ష్యాలు తప్పనిసరిగా ఉండాలి. ఈ లక్ష్యాలు జాతీయ ప్రయోజనాల ఆధారంగా రూపొందుతాయి.

→ విదేశాంగ విధాన రూపకల్పనలో ప్రతి రాజ్యం తన సార్వభౌమాధికారం-ప్రాదేశిక సమగ్రతల పరిరక్షణకు ప్రాధాన్యం ఇస్తుంది.

→ భారత విదేశాంగ విధానం ప్రధానంగా వలసవాదాన్ని, సామ్రాజ్యవాదాన్ని వ్యతిరేకిస్తుంది.

→ ఐక్యరాజ్య సమితి తర్వాత భారీ సభ్యత్వమున్న సమూహంగా అలీనోద్యమాన్ని పేర్నొవచ్చు.

→ అలీనోద్యమం ప్రఛ్ఛన్న యుద్ధాన్ని, అగ్రరాజ్యాల సైనిక మైత్రీ కూటములను వ్యతిరేకిస్తుంది.

→ దక్షిణాసియా ప్రాంతీయ సహకార సంఘం (South Asian Association of Regional Co-operation) లోని ఆంగ్ల ప్రథమాక్షరాల పదబంధంగా సార్క్ (SAARC) అని దీనిని వ్యవహరిస్తారు.

TS Inter 2nd Year Political Science Notes Chapter 11 India and the World

→ ప్రపంచంలోని శాంతిభద్రతలను పరిరక్షించడానికి ఏర్పడిన ఒక ప్రధాన అంతర్జాతీయ సంస్థగా ఐక్యకాజ్యసమితిని పేర్కొనవచ్చు.

→ ఛార్టర్ అంటే ఐక్యరాజ్యసమితికి రాజ్యాంగం వంటిది. దీనిలో 111 ప్రకరణాలు, 19 అధ్యాయాలు ఉన్నాయి.