TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

Telangana TSBIE TS Inter 1st Year Hindi Study Material Grammar वाक्य संरचना, कारक Questions and Answers.

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

అర్ధవంతమైన పద సముదాయాన్నిवाक्य (Sentence) అంటారు. రచన దృష్ట్యా वाक्य నాలుగు రకాలు అవి –

  1. साधारण वाक्य
  2. मिश्र वाक्य
  3. संयुक्त वाक्य
  4. संक्षिप्त वाक्य

1) साधारण वाक्य :
వాక్యంలో ఒక उद्देश्य (subject) ఒక विधेय (predicate) కలిగి ఉన్న వాక్యాన్ని साधारण वाक्य అంటారు. साधारण वाक्य లో పై రెండిటికి ప్రాధాన్యత ఉంటుంది.
उदा :
1) मजदूर काम कर रहा है ।
2) चिड़िया उड़ रही है।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘मजदूर’, ‘चिड़िया’ उद्देश्य है, वाक्यों का शेष भाग विधेय है ।
साधारण वाक्य లో ఈ దిగువ పదాలు उद्देश्य (Subject) రూపంలో వస్తాయి.
संज्ञा – गोपाल पढता है ।
सर्वनाम – यह सब दौडता है ।
विशेषण – वह मोटा आदमी है ।
क्रियार्थक संज्ञा – खेलना तबीयत के लिए अच्छा है ।
वाक्यांश – आपस में लड़ना बुरा है ।

साधारण वाक्य లో సర్వసాధారణంగా कर्ता ఉంటుంది. అది వాక్యం ఆరంభంలో ఉంటుంది. కాని అప్పుడప్పుడు దాని స్థానంలో कर्म, करण, संप्रदान, మొదలైన అంశాలు రావచ్చు.
कर्म कारक – गोपाल को कलम दो ।
करण कारक – इन बातों से काम नहीं चलता ।
संप्रदान कारक – लड़को के लिए में रोटी लाया ।

2) मिक्ष वाक्य :
ఒక ముఖ్య ఉపవాక్యం, దానికి అనుబంధమైన ఒకటి లేక ఒకటి కంటే ఎక్కువ ఉపవాక్యాలు ఉన్న వాక్యాన్ని मिश्र वाक्य అంటారు.
उदा :
1) जिसने वचन दिया था, उसने धोखा दिया ।
2) मुझे मालूम है कि वह हमेशा बातें करता रहता है काम कूछ नहीं करता ।
आश्रित उपवाक्य మూడు రకాలుగా ఉంటాయి.

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

i) संज्ञा उपवाक्य : ముఖ్య ఉపవాక్యపు संज्ञा గాని లేని संज्ञा वाक्यांश కు గాని బదులుగా ఉపయోగించబడే ఉపవాక్యాన్ని ‘संज्ञा उपवाक्य’ అంటారు. उदाहरण : मुगलों का इतना सौभाग्य कहाँ था कि उन्हें विजय मिले । పై వాక్యంలో ‘उन्हें विजय मिले’ అశ్రిత ఉపవాక్యం. ఇది ముఖ్య ఉపవాక్యము ‘विजय मिलना’ అనే संज्ञा उपवाक्य బదులుగా వచ్చింది. ముఖ్య ఉపవాక్యంలో ఈ ‘संज्ञा उपवाक्य’ యొక్క ప్రయోగం గమనించండి.
क्या मुगलों को विजय, मिलने का सौभाग्य था ?

ii) विशेषण उपवाक्य : ముఖ్య ఉపవాక్యపు ఏదైనా संज्ञा యొక్క విశిష్టతను చెప్పే ఉపవాక్యాన్ని ‘विशेषण उपवाक्य’ అంటారు.
उदाहरण : जो लोग साहसी होते हैं, वे जीतते हैं । ఈ వాక్యంలో साहसी అనే ‘विशेषण’, लोग (संज्ञा) యొక్క విశిష్టతను తెలియజేస్తుంది.

iii) क्रिया – विशेषण उपवाक्य : ముఖ్య ఉపవాక్యపు क्रिया యొక్క విశిష్టతను తెలియపరిచే ఉపవాక్యాన్ని क्रिया – विशेषण उपवाक्य అంటారు.
उदाहरण: जब रात हुई डाकू टूट पडे ।

పై వాక్యంలో ‘जब रात हुई’ क्रिया – विशेषण उपवाक्य ఇది ముఖ్య ఉపవాక్యపు ‘रात’ क्रिया विशेषण స్థానంలో ప్రయోగించబడింది. मिश्र वाक्य లో ముఖ్య ఉపవాక్యపు సంబంధం आश्रित उपावाक्य
తో ఉన్నట్లే आश्रित उपवाक्य యొక్క సంబంధంతో ముఖ్య ఉపవాక్యం కూడా వచ్చే అవకాశం ఉంది.
उदाहरण : बच्चे ने कहा कि जिस दुकान में गया था उसमें रोटी नहीं मिली ।

ఈ వాక్యంలో ‘जिस दुकान में गया था’ అనే ఉపవాక్యం ‘रोटी नही मिली’ అనే संज्ञा उपवाक्य యొక్క विशेषण उपवाक्य అవుతుంది.
పై मिश्र वाक्य లో ప్రధాన ఉపవాక్యం ఒకటే, ఇతర రెండూ आश्रित उपवाक्य లే అని గమనించాలి.

3) संयुक्त वाक्य :
రెండు అంతకు మించి साधारण లేక मिश्र वाक्य కలిగిన వాక్యాన్ని ‘संयुक्त वाक्य’ అంటారు संयुक्त वाक्य లో साधारण, मिश्र वाक्य రెండూ ఉండవచ్చు.
उदाहरण : 1) हम स्टेशन पहुँचे और गाडी आयी ।
2) वे जल्दी आये पर मंत्री को देख नहीं सके ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

‘संयुक्त वाक्य ‘ లో వచ్చే వాక్యాలు అన్ని స్వతంత్ర వాక్యాలే. आश्रित वाक्य కానే కావు. దీనిలో ఒకటి ప్రధాన వాక్యం అయితే మిగతావి समानाधिकरण वाक्य గా ఉంటాయి. समानाधिकरण वाक्य నాలుగు రకాలు అవి –
अ) संयोजक :
1) हम आगे बढ़ गये और वे पीछे रह गये ।
2) एक दौड रहा है और दूसरा चल रहा है ।
పై వాక్యాలలో రెండేసి ఉపవాక్యాలు ఒకదానితో ఒకటి కలుస్తున్నాయి. వాటి పరస్పర కలయిక తెలియపరుస్తున్నాయి. కనుక వాటిని ‘संयोजक’ అంటారు.

आ) विभाजक :
1) हम जायेंगे या वे यहाँ आयेंगे ।
2) उन्हें बहुत समझाया या तो सुने या न सुने ।
పై వాక్యాలలో ‘या’ వలన ఈ ఉపవాక్యాలు వేరవుతున్నాయి. ‘ వీనిలో భావ, ఆలోచన, క్రియ సంబంధమైన విభజన ఉన్నది. కనుక దీనిని ‘विभाजक’ అంటారు.

इ) विरोधार्थक :
1) मैं सब कुछ जानता हूँ पर कमप्यूटर नहीं !
2) वह होशियार है किन्तु पढ़ता नहीं ।
పై వాక్యాలలో ‘परे’, किन्तु మొదలైన పదాలు పరస్పర విరోధాన్ని తెలియజేస్తున్నాయి. కనుక వాటిని ‘विरोधार्थक’ అంటారు.

ई) परिणाम बोधक :
1) छात्र ने खुब पढ़ा इसलिए पास हुआ ।
2) वह कमजोर था अंत : हार गाया ।
పై వాక్యాలలో ఏదేని పరిణామం గోచరిస్తుంది. ‘इसलिए’, ‘अतः’ ద్వారా ఈ పరిణామం వ్యక్తమౌతుంది. కనుక వీటిని ‘परिणाम बोधक संयुक्त वाक्य’ అంటారు.

4) संक्षिप्त वाक्य :

  1. बैठिए ।
  2. सुना है ।
  3. कहते हैं ।
  4. जैसे आपकी मर्जी ।
  5. जो आप समझे ।
  6. जो उचित हो ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

పై వాక్యాలలో కొన్ని పదాలు లోపించాయిలోపించిన శబ్దాలు అత్యావశ్యకమే అయినా, వాటిలేమి కారణంగా అర్ధంలో మాత్రం ఏ లోటు లేదు.

సహజంగా అర్ధమయ్యే శబ్దాల్ని వదిలివేసి ఏ వాక్యాన్ని సంక్షిప్తం చేస్తామో, ఆ వాక్యాన్ని ‘संक्षिप्त वाक्य’ అంటారు. संक्षिप्त वाक्य టెలిగ్రామ్ లో ఎక్కువగా వాడబడతాయి. అతి తక్కువ పదాలతో అత్యధిక భావాన్ని వ్యక్తం చేయటానికి ‘संक्षिप्त वाक्य’ బాగా ఉపయోగపడతాయి .

अर्थ की दृष्टि से वाक्य के भेद : అర్ధం, నిర్మాణం, దృష్ట్యా వాక్యాలు 8 రకాలు, అవి –

1) निषेधार्थक जिस वाक्य से किसी बात के न होने अथवा किसी विषय के अभाव का बोध हो, उसे ‘निषेधार्थक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) वे काम नहीं करते ।
2) हमें रोटी नहीं चाहिए ।

2) विधानार्थक : जिस वाक्य से किसी बात का होना प्रकट हो, उसे ‘विधानार्थक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) भारत में भिन्नता में एकता है ।
2) कॉलेज में छात्र पढते हैं ।

3) आज्ञार्थक : जिस वाक्य से आज्ञा, आदेश, अनुदेश, उपदेश, देने का बाध हो, उसे ‘अज्ञार्थक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) तुम कल उससे मिलो ।
2) राम तुम खुब पढ़ो ।

4) प्रश्नार्थक : जिस वाक्य से किसी विषय के संबंध में प्रश्न पूछने का बोध हो, उसे ‘प्रश्नार्थक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) मजदुर क्या काम कर रहा है ?
2) ये लोग कहाँ के रहनेवाले हैं ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

5) इच्छार्थक : जिस वाक्य से किसी इच्छा था आशीर्वाद के भाव प्रकट हो, उसे इच्छार्थक वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) जुग जुग जियो ।
2) भगवान तुम्हें सदा सुखी रखे ।

6) सन्देहार्थक : जिस वाक्य से किसी कार्य के संभव होने (या) असंभव अथवा सन्देह का बोध हो, उसे ‘संदेहार्थक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) खेल में न जाने कौन जीत जाएगा ।
2) तुम्हें नौकरी मिले या नहीं क्या मालुम ।

7) संकेतार्थ : जिस वाक्य से संकेत के अर्थ का बोध हो, उसे संकेतार्थ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) अगर वह उद्योग करता तो सफल होता ।
2) हम जल्दी जाते तो गाड़ी पकड़ पाते ।

8) विस्मयादि बोधक : जिस वाक्य में विस्मय, आश्चर्य आदि अर्थ प्रकट हो, उसे ‘विस्मयादि बोधक’ वाक्य कहते हैं ।
उदा :
1) अरे तुम्हे क्या हो गया ।
2) ओहो । तुम आ गये ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

वाक्य रचना संबंधी त्रुटियाँ : హిందీ వ్రాసేటప్పుడు అజాగ్రత్త కారణంగా కొన్ని తప్పులు దొర్లుతాయి. కొంచెం జాగ్రత్త పాటిస్తే ఆ తప్పులు నివారించవచ్చు. వ్రాసేటప్పుడు వాక్య నిర్మాణంపై దృష్టి పెట్టాలి. వాక్యంలో శబ్దాలను సరైన క్రమంలో వాడకపోతే వ్యక్తపరచాలనుకున్నా అర్ధంకాక వేరొక అర్ధం ధ్వనిస్తుంది.
उदा : मैं ने टहलतें हुए बाग में एक आम देखा ।

ఈ వాక్యం क्या बाग टहलता है ? అనే ప్రశ్న ఉదయిస్తుంది. అందు కోసం ఇలా వ్రాయాలి.
“जब मैं बाग में टहल रहा था तब एक आम देखा” ।

वाक्य के प्रकार (Types of Sentences)

अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार
अर्थ के आधार पर वाक्य निम्नलिखित आठ प्रकार के होते हैं ।

  1. विधानवाचक वाक्य ( Assertive sentence)
  2. निषेधवाचक वाक्य (Negative sentence)
  3. प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative sentence)
  4. संकेतवाचक वाक्य (Conditional sentence)
  5. संदेहवाचक वाक्य (Sentence indicating doubt)
  6. इच्छावाचक वाक्य (Illative sentence)
  7. आज्ञावाचक वाक्य (Imperative sentence)
  8. विस्मयादिवाचक वाक्य (Exclamatory sentence)

वाक्य रचना संबंधी त्रुटियाँ : हिन्दी लिखते समय असावधानी के कारण कुछ त्रुटियाँ हो जाया करती हैं । यदी थोड़ी-सी सावधानी रखी जाय तो इन त्रुटियों से बचा जा सकता है ।
जैसे :

  1. लिंग, वचन के अनुसार क्रिया रूप लिखना चाहिए ।
  2. काल के अनुरूप धातु-क्रिया रूप बदलना चाहिए ।
  3. वाक्य संरचना कर्ता – कर्मा-क्रिया रूप में होना चाहिए ।
  4. मेरे को, तेरे को के स्थान पर मुझे, मुझे शब्दों का प्रयोग करें ।
  5. वाक्य में भाव के अनुसार कारक चिह्नों का प्रयोग करें ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

शुध्द अशुध्द वाक्यों के उदाहरण :

1) अशुद्ध : राम रावण मारा ।
शुद्ध : राम ने रावण के मारा ।

2) अशुद्ध : वह घर को चला गया ।
शुद्ध : वह घर चला गया ।

3) अशुद्ध: मेरे को बुला रहा है ।
शुद्ध : वह मुझे बुला रहा है ।

4) अशुद्ध : तुम तेरे भाई के साथ खेल ।
शुद्ध : तुम अपने भाई के साथ खेलो ।

5) अशुद्ध : आप तुम्हारा रुपया ले लो ।
शुद्ध : आप अपने रुपये ले लीजिए ।

6) अशुद्ध : आप अच्छी महापुरुष है ।
शुद्ध : आप महापुरुष है ।

7) अशुद्ध : वह सबसे श्रेष्ठतम है ।
शुध्द : वह सबसे श्रेष्ठ है ।

8) अशुद्ध : वह शिक्षा दिया ।
शुद्ध : उसने शिक्षा दी ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

9) अशुद्ध : वे गाँव जाता है ।
शुद्ध : वह गाँव जाता है ।

10 ) अशुद्ध : वह धीरे चला गया ।
शुद्ध : वह धीरे से चला गया ।

11) अशुद्ध : यदि काम करोगे इसलिए पैसा मिलेगा ।
शुद्ध : यदि काम करोगे तो पैसा मिलेगा ।

12) अशुद्ध : उनका प्राण चला गया ।
शुद्ध : उनके प्राण चले गये ।

13) अशुद्ध : मैं चाय पीते हैं ।
शुद्ध : मैं चाय पीता है ।

14) अशुद्ध : उसका होश उड़ गया ।
शुद्ध : उसके होश उड़ गए ।

15) अशुद्ध : कल परिणाम निकलेगी ।
शुद्ध : कल परिणाम निकलेगा ।

16) अशुद्ध : मोहन ने पुस्तक लिखा ।
शुद्ध : मोहन ने पुस्तक लिखी ।

17) अशुद्ध : वह खेल खेला ।
शुद्ध : उसने खेल खेला ।

18) अशुद्ध : अध्यापक ने विद्यार्थी पढ़ाया ।
शुद्ध : अध्यापक ने विद्यार्थी को पढ़ाया ।

19) अशुद्ध : उसने खेलना चाहिए ।
शुद्ध : उसको खेलना चाहिए ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

20) अशुद्ध : खाना खाके आओ ।
शुद्ध : खाने केलिए आओ ।

21) अशुद्ध : वह पढ़ते हैं ।
शुद्ध : वे पढ़ते हैं ।

22 ) अशुद्ध : मैं मेरे गाँव जाऊँगा ।
शुद्ध : मैं अपने गाँव जाऊँगा ।

23) अशुद्ध : तुम तुम्हारी गाड़ी को यहाँ रखो।
शुद्ध : तुम अपनी गाड़ी को यहाँ रखो

24) अशुद्ध: मेरे को कुछ न बोलो ।
शुद्ध : मुझे कुछ न बोलो ।

25) अशुद्ध : आप और आपके बेटे को मैं जानता हूँ ।
शुद्ध : आप को और आपके बेटे को मैं जानता हूँ ।

कारक (CASE)

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों से जाना जाता है, उसे कारक कहते हैं ।
जैसे : राम ने रावण को तीर से मारा ।
नीचे दिये गये वाक्यों में रेखांकित शब्द कारक चिह्न कहलाते है । ललिता ने रवि को पत्र लिखा ।
आप लागों से उसने क्या मांगा ।
मुझको उसके बारे में कुछ नहीं मालुम ।
उनसे पत्र नहीं मिलने से अविनाश बहुत परेशान है ।
अरे! यह क्या हुआ ?

कारकों का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता । अतः कारक को समझने के लिए विभक्ति के बारे में जानना आवश्यक है ।

जिन चिह्नों द्वारा संज्ञा की अवस्था प्रकट होती है । उसे विभक्ति कहते हैं । अर्थात् वाक्य की क्रिया अथवा दुसरे शब्दों के साथ संज्ञा का सम्बन्ध जिन चिह्नों से जाना जाता है उन्हें विभक्ति कहते हैं ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

‘ने’, ‘को’, ‘से’, ‘के लिए’, ‘का’, ‘कि’, ‘के’, ‘रा’, ‘री’, ‘रे’, ‘ना’, ‘नी’, ‘में’, ‘पर’, आदि सभी चिह्न विभक्तियाँ कहीं जाती है ।

कारक के आठ प्रकार हैं ।
TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक 1
TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक 2

1) कर्ता कारक – इस कारक का चिह्न ‘ने’ है ।
उदाहरण :
अ) रवि ने दूध पिया ।
आ) मैं ने चिट्टी लिखी ।
इन वाक्यों में संज्ञा या सर्वनाम का रुप ‘ने’ से क्रिया करनेवाला का ज्ञान हुए हैं । अतः इसे कर्ता कारक कहते हैं । हिन्दी में ने प्रत्यय का प्रयोग भूतकाल में होता है ।

2) कर्म कारक – इस कारक का चिह्न ‘को’ है ।
उदाहरण :
अ) इस पुस्तक को वहाँ रख दो ।
आ) रामू कुत्ते को मार रहा है ।
इन वाक्यों में यह स्पष्ट है कि रखी जानेवाली पुस्तक है और मारा जाने वाले कुत्ता है । इस प्रकार इस कारक चिह्न ‘को’ से वाक्य के कर्म का पता चलता है अतः यह कर्म कारक है ।

3) करण कारक – इस कारक का चिह्न से है । इसके द्वारा साधन का बोध होता है ।
जैसे –
अ) मैं ने पत्र से उसे मारा ।
आ) मैं पेन्सिल से लिखता हूँ ।
इन वाक्यों में ‘पत्र’ ‘से’ और ‘पेन्सिल से’ इनके द्वारा साधान का बोध होता है । अतः संज्ञा व सर्वनाम का वह रुप जिससे क्रिया के साधन का बोध होता करण कारक कहते हैं ।

4) सम्प्रदान कारक – इस कारक का चिह्न ‘को’, केलिए हैं ।
जैसे-
अ) मोहन राकेश केलिए मिठाई लाया ।
आ) आप रामू को दस रुपये दीजिए ।
इन वाक्यों में यदि प्रश्न करें तो मिठाई किसके लिए लाया ? ‘राकेश के लिए’ उत्तर है । इसी तरह ‘दस रुपये किस को ‘ तो उत्तर है राम का । इस प्रकार हम देखते हैं कि क्रिया जिस के लिए की जाती है उसका बोध करानेवाले संज्ञा या सर्वनाम के रूप को सम्प्रदान कारक कहा जाता है ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

5) अपादान कारक संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जिससे क्रिया के विभाग की सीमा का पता चलता है उसे अपादान कारक कहा जाता है।
जैसे –
अ) पेड़ से फल गिरा ।
आ) यह बस बासर से जाती है ।
क्रिया से प्रश्न करें कि फल कहाँ से गिरा ? उत्तर – पेड से अभं इस वाक्य में किसी वस्तु का उसके स्थान से अलग होने का बोध होता है ।

6) सम्बन्ध कारक – इस कारक का चिह्न हैं- का, के, की, रा, री, रे, आदि ।
जैसे: –
अ) शीला का घर
आ) प्रभाकर की घड़ी
इ) मेरा विश्वविद्यालय
ई) ललिता के बच्चे
उ) तुम्हारे पैसे
ऊ) मेरी पुस्तकें
संज्ञा का संबंध का, के, की, रा, रे, री, चिह्नों के माध्यम से दूसरी संज्ञाओं से रहा है । अतः संज्ञा के जिस रूप से उसका सम्बन्ध वाक्य की दूसरी संज्ञा से प्रकट हो, उसे ‘सम्बन्ध कारक’ कहते हैं ।

7) अधिकरण कारक – संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के स्थान का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं ।
जैसे – अ) जंगल में पशु-पक्षी रहते हैं ।
आ) पेड़ पर चिड़ियाँ बैठी हैं ।
क्रिया के आधार का बोध ‘में’ और ‘पर’ से हुआ है । अतः ‘में’, और ‘पर’ अधिकरण कारक के चिह्न हैं ।

8) सम्बोधन कारक – सम्बोधन कारक चिह्न हैं- ‘हे’, ‘अरे !’, आदि ।
जैसे – अ) अरे किरण !
आ) हे भगवान !
इ) ओ रामू !
ई) ओह ! कितनी ठंडी है ?
कारक के ये सभी रुप किसी को पुकारने । बुलाने, अपनी व्यथा या पीड़ा सुनाने के लिए प्रकट होते हैं । अतः इन्हें सम्बोधन कारक कहते हैं ।

अंग्रेजी में कारकों को Prepositions कहते हैं और ये शब्द के प्रारंभ में आते हैं । लेकिन हिन्दी में इनका प्रयोग शब्द के बाद में किया जाता है । इसलिए इनको परसर्ग (Post positions) कहते हैं । हिन्दी में कारकों का प्रयोग महत्वपूर्ण है ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

‘ने’ का विशेष प्रयोग होता है। ‘को’, ‘से’ और ‘में’ का प्रयोग अनेक अर्थों में होता है ।

अभ्यास

रिक्त स्थानों की पूर्ति सही कारक चिह्ननों से कीजिए ।

1) राजु ने पढ़ाई की ।
2) वाह ! कितना सुंदर दृश्य है ।
3) मेज पर पुस्तक है ।
4) वह बस से गिर पड़ा ।
5) सोमू को पुस्तक चाहिए ।
6) वह बहुत दूर से आता है ।
7) घर को अनाज चाहिए ।
8) वह रामू से लड़ता है ।
9) किसान मिट्टी में बीज बोता है ।
10) वह पेड़ से फल तोड़ते लगा ।
11) राम कलम से लिखता है ।
12) पिता पुत्र को समझता है ।
13) मेरा घर दिल्ली में हैं ।
14) डाल पर पिड़िया बैठी है ।
15) नोकर ने काम किया ।
16) रमेश की बेटी बीमार है ।
17) आशा ने गीत गाया ।
18) हे, भगवान ! अब मैं क्या करूँ ।
19) यह पूस्तक संगीत की है ।
20) मैं तुम से बड़ा हूँ ।

TS Inter 1st Year Hindi Grammar वाक्य संरचना, कारक

21) राम ने रोटी खायी है ।
22) मैं भारत का निवासी हूँ ।
23) सीता घर से निकलती है ।
24) मेज पर पूस्तकें रखी हैं।
25) बच्चे को खाना खिलाओ ।
26) राम गोपाल से होशियार है ।
27) चीता, घोड़े से तेज दौड़ता है ।
28) चोर ने चाकू से मारा ।
29) मेरी कलम जेब में है ।
30) अध्यापक केलिए कूर्सी लाओ ।

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 13 కర్బన రసాయన శాస్త్రం – సామాన్య సూత్రాలు, విధానాలు

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 13th Lesson కర్బన రసాయన శాస్త్రం – సామాన్య సూత్రాలు, విధానాలు to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 13th Lesson కర్బన రసాయన శాస్త్రం – సామాన్య సూత్రాలు, విధానాలు

→ కార్బన్ సమ్మేళనాలను గురించి తెలిపే విభాగాన్ని కర్బన రసాయన శాస్త్రం అంటారు.

→ కర్బన సమ్మేళనాలను అచక్రీయ మరియు చక్రీయ సమ్మేళనాలుగా విభజించారు. అచక్రీయ సమ్మేళనాలను సంతృప్త అసంతృప్త సమ్మేళనాలుగా విభజించారు.

→ ఏదైనా పరమాణువు లేదా పరమాణువుల సముదాయం విశిష్ట పద్ధతిలో బంధించబడి ఆ కర్బన సమ్మేళన స్వాభావిక రసాయనిక లక్షణాలకు కారణమైందో దానిని ప్రమేయ సమూహం అంటారు.

→ ఒకే ప్రమేయ సమూహాలున్న కర్బన సమ్మేళనాలను సమజాత శ్రేణులు అంటారు.

→ కర్బన సమ్మేళనాలను IUPAC పద్ధతి ద్వారా నామకరణం చేస్తారు.

→ ఒకే అణు సంకేతం కలిగి ఉండి భిన్న ధర్మాలను ప్రదర్శించే సమ్మేళనాలను సాదృశ్యాలు అంటారు. ఈ ప్రక్రియను సాదృశ్యం అంటారు.

→ సాదృశ్యం రెండు రకాలు.

  • నిర్మాణాత్మక సాదృశ్యం,
  • త్రిమితీయ సాదృశ్యం.

→ కర్బన కారకాలు మూడు రకాలు.

  • ఎలక్ట్రోఫైల్లు,
  • న్యూక్లియోఫైల్లు మరియు
  • స్వేచ్ఛా ప్రాతిపదికలు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 13 కర్బన రసాయన శాస్త్రం – సామాన్య సూత్రాలు, విధానాలు

→ ప్రతిక్షేపణ చర్యలు, సంకలనాత్మక చర్యలు, విలోపన చర్యలు, అణుపునరమరికలు మొదలగునవి సాధారణ కర్బన రసాయన చర్యలు.

→ C – C ఏకబంధం ద్వారా భ్రమణం జరిపితే ఆల్కేన్ల అనురూపకాలు వస్తాయి. ఈథేన్, గ్రహణ మరియు అస్తవ్య అనురూపకాలను ఏర్పరుస్తుంది.

→ సమయోజనీయ బంధంపై శాశ్వత ధ్రువణ ప్రభావాలు ఏర్పడతాయి. అవి ప్రేరేపక ప్రభావం మరియు రెజోనెన్స్ ప్రభావాలు.

→ ఎలక్ట్రోమెరిక్ మరియు ధ్రువణశీలత ప్రభావాలు మొదలగునవి తాత్కాలిక ఎలక్ట్రాన్ స్థానభ్రంశ ప్రభావాలు.

→ స్ఫటికీకరణం, ఉత్పతనం, స్వేదనం, పాక్షిక అంశిక స్వేదనం, నిర్వాత స్వేదనం, ద్రావణి నిష్కర్షణ, క్రోమటోగ్రఫీ మొదలగునవి కర్బన పదార్థాలను శుద్ధి చేసే విధానాలు.

→ లాసైన్ (లేదా) సోడియం నిష్కర్షణ పరీక్ష ద్వారా నైట్రోజన్, హాలోజన్, సల్ఫర్లను గుర్తిస్తారు.

→ డ్యూమా మరియు జెల్దాల్ పద్ధతులతో నైట్రోజన్ భారశాతమును కనుక్కోవచ్చు.

→ కేరియస్ పద్ధతిలో హాలోజన్ల భారశాతం కనుక్కోవచ్చు.

→ ఆల్కైల్ హాలైడ్ల క్షయకరణం ద్వారా లేదా ఉర్జి చర్య ద్వారా కాని ఆల్కేనులను తయారు చేస్తారు.

→ ఈథేన్ ప్రతిక్షేపణ చర్యలలో పాల్గొంటుంది. ఈథేన్ క్లోరినేషన్ శృంఖల చర్యకు ఉదాహరణ.

→ ఫ్రూయిండ్ పద్ధతి, విప్లిసెనస్ పద్ధతి, డిక్మెన్ పద్ధతి, డీల్స్-ఆర్డర్ పద్ధతి మొదలగు పద్ధతుల ద్వారా సైక్లోహెక్సేన్ను తయారు చేస్తారు.

→ క్షేత్ర సాదృశ్యం ఆల్కీన్లలో కనిపిస్తుంది. దీనినే సిస్-ట్రాన్స్ సాదృశ్యం అంటారు.

→ ఒక అసమకారకం ద్విబంధం దగ్గర సంకలనం చెందేటప్పుడు మార్కోనికాఫ్ నియమం ప్రకారం జరుగుతుంది.

→ మస్టర్డ్ వాయువు తయారీలో ఇథిలీన్ ను వాడతారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 13 కర్బన రసాయన శాస్త్రం – సామాన్య సూత్రాలు, విధానాలు

→ అయోడోఫామ్ నుంచి లేదా CaC2 నుంచి ఎసిటిలీన్ ను తయారు చేస్తారు.

→ ఎసిటిలీన్లో హైడ్రోజన్లకు ఆమ్ల లక్షణం ఉంటుంది.

→ కోల్తారన్న పాక్షిక స్వేదనానికి గురిచేస్తే బెంజీన్ ఏర్పడుతుంది. ఎసిటిలీన్ ను పాలిమెరీకరణం చేసి బెంజీన్ ను తయారు చేస్తారు.

→ బెంజీన్ ఏరోమాటిక్ ఎలక్ట్రోఫిలిక్ ప్రతిక్షేపణ చర్యలలో పాల్గొంటుంది.

→ క్షేత్ర సాదృశ్యాల నామకరణానికి E – Z పద్ధతిని వాడతారు.

→ బహుకేంద్రక వలయాల హైడ్రోకార్బన్లు క్యాన్సర్ కారకాలు. ఉదా : 1, 2 బెంజ్ పైరీన్.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 12 పర్యావరణ రసాయన శాస్త్రం

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 12th Lesson పర్యావరణ రసాయన శాస్త్రం to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 12th Lesson పర్యావరణ రసాయన శాస్త్రం

→ మనం నివసించే ప్రాంతం లేదా మన చుట్టూ ఉండే గాలి, నీరు, నేల, వాతావరణం, మొక్కలు అన్నింటిని ఉమ్మడిగా పరిసరాలు అంటారు.

→ భూమి చుట్టూ పరివేష్టితమై ఉండే వాయువుల పొరను వాతావరణం అంటారు.

→ పర్యావరణాన్ని నాలుగు భాగాలుగా విభజించారు. అవి

  • వాతావరణం
  • జలావరణం
  • శిలావరణం
  • జీవావరణం.

→ మానవులు లేదా ప్రకృతి కార్యకలాపాల ద్వారా పరిసరాలలోకి వదిలిపెట్టబడి, పరిసరాల మీద దుష్ప్రభావం చూపే పదార్థాన్ని మలినం అంటారు.

→ ప్రకృతిలో సహజంగా లభించని, మానవుల లేదా ప్రకృతి కార్యకలాపాల ద్వారా పరిసరాలలోకి వదిలిపెట్టబడిన పదార్థాన్ని మలినం అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 12 పర్యావరణ రసాయన శాస్త్రం

→ కాలుష్య ప్రభావానికి గురయ్యే మాధ్యమాన్ని గ్రాహకం అంటారు.

→ కాలుష్యాలతో చర్య జరిపే మాధ్యమాన్ని సింక్ అంటారు.

→ నీటిలో కరిగి ఉండే ఆక్సిజన్ పరిమాణాన్ని విద్రావణ ఆక్సిజన్ అంటారు.

→ ఐదురోజుల కాలంలో నీటిలోని అనువైన సూక్ష్మజీవులు ఉపయోగించుకునే ఆక్సిజన్ పరిమాణాన్ని జీవరసాయన ఆక్సిజన్ అవసరం (BOD) అంటారు.

→ కలుషితమైన నీటిలో కరిగి ఉండే కర్బన రసాయనిక పదార్థాలను పూర్తిగా ఆక్సీకరణం చెందించటానికి అవసరమయ్యే ఆక్సిజన్ పరిమాణాన్ని రసాయనిక ఆక్సిజన్ అవసరం (COD) అంటారు.

→ COD, BOD విలువలు నీటి కాలుష్య పరిమాణాన్ని సూచిస్తాయి.

→ ఒక రోజులో ఒక వ్యక్తి 8 గంటల కాలం గాలిలోని విష పదార్థాలకు లేదా కాలుష్యాలకు గురి అయినప్పుడు వ్యక్తి ఆరోగ్యాన్ని భంగపరచటానికి అవసరమయ్యే పదార్థాల కనీసపు స్థాయిని ఆరంభ అవధి విలు (TLV)

→ pH విలువ 4-5 కలిగిన వర్షాన్ని ఆమ్ల వర్షం అంటారు. గాలి కాలుష్యం ఆమ్ల వర్షానికి ప్రధాన కారణం.

→ వాతావరణంలోని CO2, నీటి ఆవిరులపై అధిక గాఢతల కారణంగా, వాటికి బహిర్గమన నిరోధక ప్రభావం కారణంగా భూమి ఉపరితల ఉష్ణోగ్రత పెరుగుతుంది. దీనిని భూగోళం వేడెక్కడం లేదా గ్రీన్ హౌస్ ఫలితం అంటారు.

→ నీటిలో ఫ్లోరిన్ ఉండదగిన శాతం – < 2 PPM మరియు > 1 PPM.

→ అడవులను నరికివేయటం – గ్రీన్ హౌస్ ఫలితానికి ప్రధాన కారణం.

→ స్ట్రాటో ఆవరణంలోని ఓజోన్ పరిరక్షక పొరగా వ్యవహరిస్తుంది. కానీ, ట్రోపో ఆవరణంలోని ఓజోన్ హానికరమైనది.

→ ఉత్తేజిత చార్కోల్ DDT మరియు ఎండ్రిన్ వంటి కొన్ని సేంద్రీయ పదార్థాలను శోషించుకొంటుంది.

→ అన్ని జీవ పదార్థాలు మరియు వాటి పరిసరాల మధ్య సంబంధాన్ని ఎకోసిస్టమ్ (Eco System) లేదా సమతుల్య వ్యవస్థ అంటారు.

→ అధిక ఫ్లోరిన్ ఫ్లోరోసిస్ వ్యాధిని కలుగచేస్తుంది.

→ కార్బన్, ఫ్లోరిన్ మరియు క్లోరిన్లను కలిగి ఉన్న సమ్మేళనాలను క్లోరోఫ్లోరో కార్బన్లు అంటారు. వీటిని ఫ్రీయాన్లు అని కూడా అంటారు.

→ ఫ్రీయాన్లను శీతలీకరణులుగా ఉపయోగిస్తారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 12 పర్యావరణ రసాయన శాస్త్రం

→ ఓజోన్ను ఆక్సిజన్గా విఘటనం చెందించే ప్రక్రియలో ఉత్తేజిత క్లోరిన్ ఉత్ప్రేరకంగా పనిచేస్తుంది.

→ సల్ఫ్యూరికామ్లం, నత్రికామ్లములు వర్షపు నీటిలో కరగడం వల్ల ఏర్పడే వర్షాలను ఆమ్ల వర్షాలు అంటారు.

→ ఓజోన్ పొరకు చిల్లులు ఏర్పరచే వాయువులలో ముఖ్యమైనవి : CFC’s, NO, క్లోరిన్.

→ వాతావరణంలోని CO2, NO, N2O, CH4, O3, మొ॥ వాయువులు భూగోళం వేడెక్కడానికి లేదా గ్రీన్ హౌస్ ఫలితానికి కారణాలు.

→ పారిశ్రామిక వ్యర్థాల వల్ల కూడా వాతావరణం కాలుష్యం అవుతుంది.

→ పర్యావరణంలో కాలుష్యం రాకుండా చూడటం గురించి చెప్పే రసాయనశాస్త్ర విభాగాన్ని హరిత రసాయనశాస్త్రం అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 11 P-బ్లాక్ మూలకాలు – 14వ గ్రూప్

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 11th Lesson P-బ్లాక్ మూలకాలు – 14వ గ్రూప్ to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 11th Lesson P-బ్లాక్ మూలకాలు – 14వ గ్రూప్

→ కార్బన్ (C), సిలికాన్ (Si), జెర్మేనియం (Ge), టిన్ (Sn), లెడ్ (Pb) మూలకాలు గ్రూపు 14 లో ఉన్నాయి.

→ భూపటలంపై చాలా విస్తారంగా ఉండే మూలకాలలో ద్రవ్యరాశిపరంగా కార్బన్ పదిహేడోది.

→ సిలికాన్ భూపటలంపై విస్తృతంగా లభించే మూలకాలలో రెండోది (27.7% ద్రవ్యరాశిలో)

→ స్వచ్ఛమైన జెర్మేనియం సిలికాన్లను ట్రాన్సిష్టర్లు, అర్ధవాహక ఉపకరణాల తయారీలో ఉపయోగిస్తారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 11 P-బ్లాక్ మూలకాలు – 14వ గ్రూప్

→ 14వ గ్రూపు మూలకాలన్నీ ఘనపదార్థాలు. కార్బన్, సిలికాన్లు అలోహాలు. జెర్మేనియం అర్ధలోహం. టిన్, లెడ్ లు తక్కువ ద్రవీభవన ఉష్ణోగ్రత కల మృదువైన లోహాలు.

→ 14వ గ్రూపు మూలకాల ఆక్సీకరణ స్థితులు +4, +2.

→ లెడ్ సమ్మేళనాలు +2 స్థితిలో స్థిరమైనవి.

→ CCl4, జలవిశ్లేషణం చెందదు. కాని SiCl4, జల విశ్లేషణ చెందుతుంది. దీనికి కారణం Si లో d ఆర్బిటాల్ ఉండటమే.

→ CO2, SiO2, GeO2, లకు ఆమ్ల స్వభావం ఉంది. SnO2, GeO2, లకు ద్విస్వభావం ఉంటుంది.

→ CO తటస్థం. GEO కు స్పష్టంగా ఆమ్లధర్మం. అయితే SnO2, PbO లు ద్విస్వభావం గల ఆక్సెడులు.

→ SiCl4, జలవిశ్లేషణ వల్ల సిలిసిలిక్ ఆమ్లం ఏర్పడుతుంది.

→ కార్బన్ పరమాణువులకు ఒకదానితో ఒకటి సమయోజనీయ బంధాల ద్వారా శృంఖలాలను, వలయాలను ఏర్పరచే ప్రవృత్తి ఉంటుంది. దీనినే కెటనేషన్ అంటారు.

→ కెటనేషన్ సామర్థ్యం C >> Si > Ge = Sn లెడ్ కెటనేషన్ చూపదు.

→ డైమండ్లో ప్రతి కార్బన్ Sp3 సంకరీకరణంలో ఉంటుంది. ప్రతి కార్బన్ నాలుగు ఇతర కార్బన్ పరమాణువులతో Sp3 సంకర ఆర్బిటాల్లను టెట్రా హైడ్రల్ రీతిలో ఉపయోగించుకొని బంధాలను ఏర్పరుస్తుంది. డైమండ్ అత్యంత గట్టి పదార్థం.

→ గ్రాఫైట్ పొర నిర్మాణం ఉంటుంది. ఈ స్థిరమైన పొరల మధ్య మధ్య వానర్వాల్ ఆకర్షణ బలాలుంటాయి. గ్రాఫైట్లో షట్కోణ వలయంలో ప్రతి కార్బన్ పరమాణువు Sp2 సంకరీకరణం చెందుతుంది.

→ జడవాయువులైన హీలియం లేదా ఆర్గాన్ల సమక్షంలో గ్రాఫైట్ను విద్యుచ్ఛాపంతో వేడి చేసిన పుల్లరిన్ తయారవుతుంది.

→ C60 అణువు సాకర్ బంతిని పోలిన నిర్మాణం ఉండటంవల్ల దీనిని బక్ మినిష్టర్ ఫుల్లరిన్ అంటారు. * దీనిలో ఆరు కార్బన్లు ఉన్న వలయాలు 20, ఐదు కార్బన్లు ఉన్న వలయాలు పన్నెండు ఉన్నాయి.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 11 P-బ్లాక్ మూలకాలు – 14వ గ్రూప్

→ గ్రాఫైట్ అధిక స్థిరమైన కార్బన్ రూపాంతరం.

→ SiO2 + 2NaOH → Na2SiO3 + H2O
SiO2 + 4HF → SiF4 + 2 H2O

→ సిలికోన్లు ఆర్గానో సిలికాన్ పొలిమర్లు.

→ అధ్రువ ఆల్కెల్ సమూహాలతో చుట్టుకొన్న సిలికోన్లు జల వికర్షణ స్వభావం ఉన్నవి.

→ సిలికేటులలో నిర్మాణాత్మక యూనిట్ [SiO4]4-.

→ కృత్రిమంగా తయారుచేసిన రెండు ముఖ్య

→ త్రిమితీయ అల్లిక గల సిలికాన్ డై ఆక్సైడులో కొన్ని సిలికాన్ పరమాణువులను అల్యూమినియం పరమాణువులు స్థానభ్రంశం చేస్తే అల్యూమినియం సిలికేట్లు ఏర్పడతాయి. వీటినే జియొలైటులు అంటారు.

→ ZSM – 5 జియొలైట్ ఆల్కహాల్లను నేరుగా గాసోలిన్గా మార్చడానికి ఉపయోగిస్తారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 10 P-బ్లాక్ మూలకాలు – 13వ గ్రూప్

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 10th Lesson P-బ్లాక్ మూలకాలు – 13వ గ్రూప్ to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 10th Lesson P-బ్లాక్ మూలకాలు – 13వ గ్రూప్

→ బోరాన్, అల్యూమినియమ్, గాలియమ్, ఇండియమ్ మరియు థాలియమ్ మూలకాలను 13వ గ్రూపు మూలకాలు అంటారు.

→ ఈ మూలకాల సాధారణ బాహ్య ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం ns2 np1.

→ బోరాన్ యొక్క పరమాణు పరిమాణం తక్కువగా ఉండటం వలన ఇది అసంగత ధర్మాలు ప్రదర్శిస్తుంది.

→ బోరాన్ ఒక అలోహం సంయోజనీయ సమ్మేళనాలను ఏర్పరచును.

→ ఈ గ్రూపు మూలకాలు +1, +3 ఆక్సీకరణ స్థితులు ప్రదర్శిస్తాయి. జడ ఎలక్ట్రాన్ జంట ప్రభావం వలన +3 ఆక్సీకరణ స్థితి యొక్క స్థిరత్వం పై నుంచి క్రిందకు తగ్గుతుంది.

→ బోరాన్ ఆక్సైడ్కు ఆమ్ల స్వభావం, Al, Ga ఆక్సైడ్లు ద్విస్వభావం TV ఆక్సైడ్లకు క్షార స్వభావం ఉంటుంది.

→ బోరాన్ సమ్మేళనాలలో బోరాక్స్, డై బోరేన్ ముఖ్యమైనవి.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 10 P-బ్లాక్ మూలకాలు – 13వ గ్రూప్

→ బోరాన్ పూస పరీక్షను పరివర్తన లోహాలను గుర్తించడానికి ఉపయోగిస్తారు.

→ బోరాన్ జల ద్రావణాన్ని వేడిచేస్తే ఆర్థో బోరిక్ ఆమ్లం ఏర్పడుతుంది.

→ బోరిక్ ఆమ్లంను వేడిచేస్తే చివరగా B2O3 ఏర్పడుతుంది.

→ డై బోరేన్లో బోరాన్ Sp3 సంకరీకరణం జరుపుకుంటుంది. దీనిలో B – H – B బ్రిడ్జ్ బంధాలు ఉంటాయి. వీటినే ‘3 కేంద్రక 2 ఎలక్ట్రాన్ల బంధం’ అని ‘బనానా బంధం’ అని కూడా అంటారు.

→ బోరానన్ను నారపోగులు, తుపాకిగుండు నిరోధక వస్త్రాల తయారీలో వాడతారు.

→ Al ను పరిశ్రమలలో, నిత్యజీవితంలో విస్తృతంగా వాడుతారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 9 S-బ్లాక్ మూలకాలు

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 9th Lesson S-బ్లాక్ మూలకాలు to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 9th Lesson S-బ్లాక్ మూలకాలు

→ లిథియమ్, సోడియమ్, పొటాషియమ్, రుబిడియమ్, సీసియమ్ మరియు ఫ్రాన్షియమ్ మూలకాలను IA గ్రూపు మూలకాలు అంటారు.

→ వీటినే క్షారలోహాలు అంటారు. సాధారణ వేలెన్సి కక్ష ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం – ns1

→ ఇవి ఆక్సీకరణ జ్వాలకు రంగును ప్రదర్శిస్తాయి. ఇవి అధిక ధన విద్యుదాత్మకతగల మూలకాలు. బలమైన క్షయకరణులు.

→ ఇవి ఆక్సిజన్తో చర్య జరిపి మోనాక్సైడ్, పెరాక్సైడ్ మరియు సూపర్ ఆక్సైడ్లను ఏర్పరుస్తాయి.

→ ఇవి ద్రవ NH3 లో కరిగి నీలం రంగు ద్రావణాన్ని ఏర్పరుస్తాయి.

→ గ్రూపులో ఇతర మూలకాలతో పోలిస్తే లిథియమ్ అసాధారణ ధర్మాలు ప్రదర్శిస్తుంది. లిథియమ్, మెగ్నీషియమ్తో కర్ణ సంబంధాన్ని కలిగి ఉంటుంది.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 9 S-బ్లాక్ మూలకాలు

→ Na2CO3 ని సాధారణంగా సాల్వే పద్ధతిలో తయారుచేస్తారు.

→ Na2CO3. 10H2O ను వాషింగ్ సోడా అంటారు. Na2CO3 ను సోడా యాష్ అంటారు. NaHCO3 ను బేకింగ్ సోడా అంటారు.

→ NaOH ను కాప్టనర్ కెల్నర్ పద్ధతి ద్వారా తయారుచేస్తారు.

→ బెరిలియమ్, మెగ్నీషియమ్, కాల్షియమ్, స్ట్రాన్షియమ్, బేరియమ్ మరియు రేడియమ్ మూలకాలను IIA గ్రూపు మూలకాలు అంటారు.

→ వీటినే క్షారమృతిక లోహాలు అంటారు. సాధారణ వేలెన్ని కక్ష ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం – ns2

→ Ba, Ca, Sr లు జ్వాలకు రంగును ప్రదర్శిస్తాయి.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 9 S-బ్లాక్ మూలకాలు

→ బెరిలియమ్ అసంగత ప్రవర్తనను ప్రదర్శిస్తుంది. దీని సమ్మేళనాలు సమయోజనీయ సమ్మేళనాలు.

→ కాల్షియమ్ హైడ్రాక్సైడ్, కాల్షియమ్ సల్ఫేట్, కాల్షియమ్ కార్బొనేట్, సిమెంట్ మొదలైనవి కాల్షియమ్ సమ్మేళనాలు.

→ CaSO4 = \(\frac{1}{2}\)H2O ను ప్లాస్టర్ ఆఫ్ పారిస్ అంటారు. దీనిని గృహ నిర్మాణాల్లో, దంతవైద్యంలో వాడతారు.

→ బంకమట్టి, సున్నపురాయిని కలిపి బాగా వేడిచేస్తే సిమెంట్ క్లింకర్ ఏర్పడుతుంది. దీనిని వంతెనెలు, భవనాల నిర్మాణంలో వాడతారు.

→ జీవ రసాయనశాస్త్రంలో Na, K, Mg, Ca లు ముఖ్య పాత్ర వహిస్తాయి.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 3 రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 3rd Lesson రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 3rd Lesson రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం

→ అణువులోని పరమాణువుల మధ్యగల ఆకర్షణ శక్తిని రసాయన బంధం అంటారు.

→ స్థిరత్వం పొందడానికై పరమాణువులు తమ బాహ్య కర్పరంలో అష్టక విన్యాసం పొందడాన్ని అష్టక సిద్ధాంతం అంటారు.

→ ఎలక్ట్రాన్ల స్థానాంతర గమనం వల్ల ఏర్పడే వేలన్సీని ఎలక్ట్రో వేలన్సీ అని, ఎలక్ట్రాన్లను సమిష్టిగా పంచుకోవడం వల్ల ఏర్పడే వేలన్సీని కోవేలన్సీ అని అంటారు.

→ ఎలక్ట్రాన్ల స్థానాంతర గమనం వల్ల ఏర్పడ్డ విరుద్ద ఆవేశాలు గల అయాన్ల మధ్యగల స్థిర విద్యుదాకర్షణ బలాలను అయానిక బంధం లేక ఎలక్ట్రోవేలంట్ బంధం అంటారు.

→ IP విలువ తక్కువ, సైజు ఎక్కువ మరియు ఆవేశం తక్కువ గల పరమాణువుల నుండి సులభంగా కేటయాన్ ఏర్పడుతుంది.

→ E. A విలువ ఎక్కువ, సైజు తక్కువ మరియు ఆవేశం తక్కువ గల పరమాణువుల నుండి సులభంగా ఆనయాన్ ఏర్పడుతుంది.

→ అనంత దూరంలో ఉన్న విరుద్ధ ఆవేశాలు గల అయాన్లను దగ్గరకు చేర్చినపుడు ఒక మోల్ అయానిక స్ఫటికం ఏర్పడుతుంది. అపుడు విడుదలయ్యే శక్తిని లాటిస్ శక్తి అంటారు.

→ లాటిస్ శక్తిని పరోక్షంగా బోర్న్ హేబర్ వలయ పద్ధతి ద్వారా కనుగొంటారు. ఈ వలయ పద్దతి హెస్ సంకలన నియమంపై ఆధారపడి ఉంటుంది.

→ అయానిక పదార్ధంలోని ఏ అతి సూక్ష్మ విభాగాన్ని త్రిజ్యామితీతంగా పునరావృతం చేస్తే మొత్తం స్ఫటికం ఏర్పడుతుందో ఆ సూక్ష్మ విభాగాన్ని యూనిట్ సెల్ అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 3 రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం

→ అయానిక స్పటికంలో కేంద్రక అయాన్ చుట్టూ ఆవరించి ఉన్న విరుద్ద ఆవేశ అయాన్ల సంఖ్యను సమన్వయ సంఖ్య అంటారు.

→ సోడియం క్లోరైడ్ ఫలక కేంద్రిత ఘన నిర్మాణాన్ని మరియు సీసియం క్లోరైడ్ అంతఃకేంద్రిత ఘన నిర్మాణాన్నికలిగి ఉంటాయి.

→ అయానిక పదార్థాలు ధృవ శీలతను కలిగి ఉంటాయి. అందువలన అవి నీరు వంటి ధృవ ద్రావణులలో మాత్రమే కరుగుతాయి. కాని బెంజీన్ వంటి అధృవ ద్రావణులలో కరగవు.

→ ఎలక్ట్రాన్లను సమిష్టిగా పంచుకోవడం వల్ల ఏర్పడే బంధాన్ని సమయోజనీయ బంధం అంటారు. దీనిని జంట బంధం అని కూడా అంటారు.

→ ఒకే మూలకానికి చెందిన పరమాణువులను కలిగి ఉన్న అణువులను సజాతీయ అణువులు అని, విభిన్న మూలకాలకు చెందిన పరమాణువులను కలిగి ఉన్న అణువులను విజాతీయ అణువులు అని అంటారు.

→ సమయోజనీయ సమ్మేళనాలు ఎక్కువగా అధృవ ద్రావణులలో కరుగుతాయి. ధృవ ద్రావణులలో కరగవు.

→ ఏ అణువులలోని కేంద్రక పరమాణువుకు ఎనిమిది కన్నా తక్కువ ఎలక్ట్రాన్లు ఉంటాయో అట్టి వానిని ఎలక్ట్రాన్లు కొరత గల అణువులు అంటారు. ఉదా : BeCl2, BF3 మొ||నవి.

→ వేలన్స్ బంధ సిద్ధాంతం ప్రకారం సగం నిండిన పరమాణువులు గల ఆర్బిటాళ్ళు ఆవరింపు చేసుకోవడం వల్ల సమయోజనీయ బంధం ఏర్పడుతుంది.

→ సగం నిండిన ఆర్బిటాళ్ళు పరస్పరం అభిముఖ ఆవరింపు చేసుకోవడం వల్ల ఏర్పడే సమయోజనీయ బంధాన్ని సిగ్మా బంధం అంటారు.

→ సగం నిండిన ఆర్బిటాళ్ళు పరస్పరం ప్రక్క వాటుగా ఆవరింపు చేసుకోవడం వల్ల ఏర్పడే సమయోజనీయ బంధాన్ని పై బంధం అంటారు.

→ సిగ్మా బంధంలో ఆర్బిటాళ్ళ ఆవరింపు పై బంధంలోని ఆర్బిటాళ్ళ ఆవరింపు కన్నా ఎక్కువగా ఉంటుంది. అందువలన సిగ్మా బంధం పై బంధం కన్నా బలమైనది.

→ VSEPR సిద్ధాంతం అణువుల అకృతులను మరియు బంధ కోణాలను వివరిస్తుంది.

→ కేంద్రక పరమాణువు ఒంటరి ఎలక్ట్రాన్ జంటలను కలిగి ఉంటే అపుడు అణువు ఆకృతిలో విరూపణ మరియు బంధకోణంలో తగ్గుదల ఏర్పడతాయి.

→ అమ్మోనియా అణువు పిరమిడల్ ఆకృతిని కలిగి ఉంటుంది. బంధకోణం 107° ఉంటుంది.

→ నీరు అణువు V ఆకృతిని కలిగి ఉంటుంది. బంధ కోణం 104.5° ఉంటుంది.

→ బంధింపబడి ఉన్న పరమాణువుల మధ్యగల సరాసరి అంతర్కేంద్ర దూరాన్ని బందదైర్ఘ్యం అంటారు.

→ ఒక మోల్ సమయోజనీయ బంధాన్ని దాని అనుఘటక పరమాణువులుగా విడగొట్టడానికి కావలసిన శక్తిని బంధశక్తి అంటారు.

→ దాదాపుగా సమానశక్తి గల పరమాణు ఆర్బిటాళ్ళు ఒక దానితో ఒకటి కలిసిపోయి అంతే సంఖ్యలో సర్వసమానాలైన కొత్త ఆర్బిటాళ్ళను ఏర్పరచే పద్ధతిని సంకరీకరణం అంటారు.

→ PCl5 అణువులో కేంద్రక ‘P’ పరమాణువు sp3d సంకరీకరణం పొందుతుంది. PCl5 అణువు ట్రైగోనల్ బై పిరమిడల్ ఆకృతిని కలిగి ఉంటుంది.

→ SF6 అణువులో కేంద్రక ‘S’ పరమాణువు sp3d2 సంకరీకరణం పొందుతుంది. SF6 అణువు ఆక్టా హెడ్రల్ ఆకృతి కలిగి ఉంటుంది.

→ బంధంలో పాల్గొనే పరమాణువులు సమాన సంఖ్యలో ఎలక్ట్రాన్లను పంచుకున్నప్పుడు ఏర్పడే బంధాన్ని ధృవ సమయోజనీయ బంధం అంటారు. దీనిలో విభిన్న మూలకాలకు చెందిన పరమాణువులు బంధంలో పాల్గొంటాయి.

→ బంధంలో పాల్గొనే పరమాణువులు అసమానంగా ఎలక్ట్రాన్లను పంచుకున్నప్పుడు ఏర్పడే బంధాన్ని ధృవ సమయోజనీయ బంధం అంటారు. దీనిలో విభిన్న మూలకాలకు చెందిన పరమాణువులు బంధంలో పాల్గొంటాయి.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 3 రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం

→ ఒక ధృవశీల అణువులో, ధృవాల మీద ఉన్న ఆవేశిత పరిమాణం మరియు ధృవాల అంతర్ కేంద్ర దూరాల లబ్ధాన్ని ద్విధ్రువ భ్రామకం అంటారు. ఇది సదిశ రాశి. దీనిని డీబై ప్రమాణంలో కొలుస్తారు.

→ పంచుకోబడిన ఎలక్ట్రాన్ జంట బంధంలో పాల్గొనే పరమాణువులలో ఒకేదానికి చెందినపుడు ఏర్పడే బంధాన్ని సమన్వయ సమయోజనీయ బంధం అంటారు.

→ బంధం ఏర్పడటానికి కావలసిన ఎలక్ట్రాన్ జంటను ఏ పరమాణువు దానం చేస్తుందో దానిని దాత అంటారు.

→ బంధ ఎలక్ట్రాన్ జంటను స్వీకరించే దానిని స్వీకర్త అంటారు.

→ ఒక H- పరమాణువుకు అత్యధిక E.N. విలువ గల వేరొక పరమాణువుకు మధ్య ఏర్పడే బలహీన విద్యుదాకర్షణ బలాన్ని హైడ్రోజన్ బంధం అంటారు.”

→ అంతరణుక హైడ్రోజన్ బంధం వల్ల అణువుల కలయిక జరిగి పదార్థాల కరుగు మరియు మరుగు ఉష్ణోగ్రతలలో పెరుగుదల ఏర్పడుతుంది.

→ లోహ పరమాణువులను ఒక దానితో ఒకటి బంధించే ఆకర్షణ బలాలను లోహబంధం అంటారు.

→ ఎసిటిక్ ఆమ్లం యొక్క వింత ప్రవర్తనకు కారణం అది డైమర్గా ఉండటమే.

→ అణువులో బంధిత కేంద్రకాల చుట్టూ ఎలక్ట్రాన్లను కనుగొనే సంభావ్యత అధికంగా ఉన్న ప్రాంతాన్ని అణు ఆర్బిటాల్ అంటారు.

→ సంకలనం చెందే పరమాణు ఆర్బిటాళ్ళ సంఖ్య, దాని ఫలితంగా ఏర్పడే అణు ఆర్బిటాల్ల సంఖ్యకు సమానం.

→ పరమాణు ఆర్బిటాల్ల శక్తి కంటె తక్కువ శక్తి స్థాయిలో ఉన్న అణు ఆర్బిటాల్లను బంధక ఆర్బిటాల్లు అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 3 రసాయన బంధం – అణు నిర్మాణం

→ పరమాణు ఆర్బిటాల్ల శక్తి కంటే ఎక్కువ శక్తి స్థాయిలో ఉన్న అణు ఆర్బిటాల్లను అపబంధన ఆర్బిటాల్లు అంటారు.

→ సంకలన ప్రక్రియలో పాల్గొనని ఆర్బిటాల్లను అబంధక ఆర్బిటాల్లు అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 2 మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు

Here students can locate TS Inter 1st Year Chemistry Notes 2nd Lesson మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes 2nd Lesson మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు

→ మెండలీవ్ ఆవర్తన నియమం : మూలకాల భౌతిక రసాయన ధర్మాలు వాటి వాటి పరమాణు భారాల ఆవర్తన ప్రమేయాలు”.

→ మెండలీవ్ సవరింపబడ్డ ఆవర్తన పట్టిక (modified Mendeleef’s periodic table) లో నిలువు గళ్లను ‘గ్రూపు’ ”శ్రేణులను ‘పీరియడ్’ లని మెండలీవ్ పేరు పెట్టాడు.

→ మెండలీవ్ ఆవర్తన పట్టికలో 9 గ్రూపులు (I నుండి VIII వరకు మరియు ‘సున్నా’ గ్రూపు) మరియు 7 పీరియడ్లు ఉన్నాయి.

→ 1913 సం||లో మోస్లే అను శాస్త్రవేత్త, మూలకాలపై X – కిరణాల ప్రయోగం ద్వారా, ‘పరమాణు సంఖ్య’ను మూలకపు అభిలాక్షణిక ధర్మమని కనుగొన్నారు.

→ మూలకాలకు పరమాణు భారం కాక, పరమాణు సంఖ్య, అభిలాక్షణిక ధర్మమని మోస్లే కనుగొన్నాడు.

→ ఆధునిక ఆవర్తన నియమం : “మూలకాల భౌతిక, రసాయన ధర్మాలు వాటి పరమాణు సంఖ్యల ఆవర్తన ప్రమేయాలు”. ఇది మోస్లే ఆవర్తన నియమము.

→ మూలకాల ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసాలను ఆధారం చేసుకొని నీల్బోర్ విస్తృతావర్తన పట్టికను నిర్మించాడు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 2 మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు

→ సవరించబడిన ఆధునిక ఆవర్తన నియమం : “మూలకాల భౌతిక, రసాయన ధర్మాలు వాటి ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసాల ఆవర్తన ప్రమేయాలు”.

→ విస్తృత ఆవర్తన పట్టికలో మూలకాలను వాటి పరమాణు సంఖ్యల ఆరోహణ క్రమంలో అమర్చారు. * విస్తృత ఆవర్తన పట్టికలో 7 పీరియడ్లు, 18 గ్రూపులు ఉన్నాయి.

→ ఆవర్తన పట్టికలోని గ్రూపులను గుర్తించడానికి

  • అమెరికన్ సంప్రదాయం
  • యూరోపియన్ సంప్రదాయం మరియు
  • IUPAC పద్ధతులు ఉన్నాయి..

→ ప్రస్తుత పాఠ్య గ్రంథంలో వాడినది అమెరికన్ సంప్రదాయం. దీనిలో ప్రధాన గ్రూపులను A తోను ఉపగ్రూపులను B తోను సూచిస్తారు.

→ భేదపరచే ఎలక్ట్రాన్ (differentiating electron) ప్రవేశించే ఉపస్థాయిని బట్టి ఆవర్తన పట్టికలోని మూలకాలను s, p, d, f అనే నాల్గు బ్లాకులుగా వర్గీకరించారు.

→ s బ్లాకు మూలకాల బాహ్య ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం ns1-2

→ p బ్లాకు మూలకాల బాహ్య ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం ns2np1-6

→ జడవాయువుల బాహ్య విన్యాసం ns2 మరియు ns2 np6

→ d బ్లాకు మూలకాల బాహ్య ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం (n – 1) d1-10 ns1-2

→ అంతర్ పరివర్తన మూలకాలు రెండు వరుసలలో ఉన్నాయి. అవి

  • లాంథనైడ్లు
  • ఆక్టినైట్లు

→ అంతర్ పరివర్తన మూలకాల సాధారణ బాహ్య ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసం (n – 2) f1-14 (n – 1) d0 లేదా 1ns2 గా ఉంటుంది.

→ పూర్తిగా మరియు అసంపూర్తిగా నిండిన కర్పరాలను బట్టి విస్తృత ఆవర్తన పట్టికలోని మూలకాలను నాల్గు వర్గాలుగా విభజించారు. అవి

  • జడవాయువులు
  • ప్రాతినిధ్య మూలకాలు
  • పరివర్తన మూలకాలు
  • అంతర్ పరివర్తన మూలకాలు.

ఈ విభజన, మూలకాల లక్షణాలను మరియు వాటి ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసాన్ని కూడా ఆధారం చేసుకొని ఉన్నది.

→ Zn, Cd మరియు Hg లు పరివర్తన మూలకాల ధర్మాలు చూపవు. కాని పరివర్తన మూలకాల రసాయన అధ్యయనాన్ని క్రమబద్ధీకరించడానికి వాటిని బ్లాకులో చేర్చారు.

→ ఆవర్తన పట్టికలో మూలకాల ధర్మాలు ఎలక్ట్రాన్ విన్యాసంతో బాటు క్రమంగా మారుతాయి. ధర్మాలలోని ఈ క్రమమైన మార్పు నిర్ణీత వ్యవధుల (మూలకాల తర్వాత) లో పునరావృతమవుతుంది. ఈ విధంగా ఒక ధర్మం (పరమాణు భారం, పరమాణు సంఖ్య కాదు) పునరావృతమవడాన్ని ‘ఆవర్తనం’ అంటారు.

→ పునరావృతమయ్యే ధర్మాలను ‘ఆవర్తన ధర్మాలు’ అంటారు. దీనికి కారణం, ఆ మూలకాల వేలన్నీ కక్ష్యలలో ఒకే సంఖ్యలో ఎలక్ట్రానులుండుట.

→ పరమాణు కేంద్రకం మధ్య బిందువు నుంచి బాహ్యతమ శక్తిస్థాయి ఎలక్ట్రాన్ మేఘానికి మధ్య గల దూరాన్ని పరమాణు వ్యాసార్ధం అంటారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 2 మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు

→ లోహ స్పటికంలో రెండు ఆసన్న లోహ పరమాణు కేంద్రకాంతర్గత మధ్య బిందువుల మధ్య దూరంలో సగాన్ని ‘స్ఫటిక వ్యాసార్ధం లేదా ‘లోహ వ్యాసార్ధం’ అంటారు.

→ అతి సన్నిహితంగా ఉన్న భిన్న అణువుల్లోని రెండు పరమాణువుల కేంద్రకాల మధ్య దూరంలో సగాన్ని వాన్ డర్ వాల్ వ్యాసార్ధం అంటారు.

→ సజాతీయ పరమాణువులున్న అణువులో కోవెలంట్ బంధంతో కలపబడి ఉన్న రెండు పరమాణుకేంద్రకాల మధ్య దూరంలో సగాన్ని కోవెలంట్ వ్యాసార్ధం అంటారు.

→ మాతృపరమాణువు కన్నా దాని కేటయాన్ సైజు అల్పంగాను, దాని ఆనయాన్ సైజు అధికంగాను ఉంటుంది.

→ Ce నుండి Lu వరకు గల లాంథనైడు పరమాణువులలోని పరిమాణం (size) లోని క్రమమైన తగ్గుదలను ‘లాంథనైడ్ సంకోచం అంటారు.

→ కేంద్రకంలో అదనపు ఆవేశంపై కీ ఎలక్ట్రానుల దుర్బల పరిరక్షక ప్రభావం వలన, ఈ మూలకాల సైజులు వరసగా Ac నుండి Lw వరకు తగ్గుతూ ఉంటాయి. దీన్ని ‘ఆక్టినైడ్ సంకోచం’ అంటారు.

→ ఆక్టినైడ్ సంకోచానికి కారణం, f ఆర్బిటాళ్ల విప్పారిన ప్రత్యేక ఆకారాలు.

→ స్వేచ్ఛా స్థితిలో ఉండే వాయు పరమాణువు నుంచి అత్యంత బలహీనంగా బంధితమైన ఎలక్ట్రాన్ను విడదీసి వాయుస్థితిలో అయాన్ను ఏర్పరచడానికి అవసరమైన కనీస శక్తిని అయనీకరణ ఎంథాల్పీ లేదా అయనీకరణశక్తి అంటారు.

→ “వాయుస్థితిలోని మూలకం తటస్థపరమాణువుకు ఎలక్ట్రాన్ను చేర్చి దాన్ని అయాన్గా మార్చినప్పుడు విడుదలైన శక్తిని ఆ మూలకం ఎలక్ట్రాన్ ఎఫినిటి (లేదా ఎలక్ట్రాన్ అపేక్ష)” అంటారు.

→ “విజాతీయ పరమాణువులున్న ఒక ద్విపరమాణుక అణువులో లేదా ధృవ సంయోజనీయ బంధంలో సమిష్టిగా పంచుకొన్న ఎలక్ట్రాన్ జంట(ల)ను మూలక పరమాణువు తనవైపుకు ఆకర్షించుకునే ప్రవృత్తిని ఆ మూలకం ఋణవిద్యుదాత్మకత” అంటారు.

→ ముల్లికెన్ ఋణవిద్యుదాత్మకత స్కేల్ ప్రకారం, “ఏక సంయోజకత గల పరమాణువుల ఋణవిద్యుదాత్మకత వాటి అయనీకరణ శక్తి, ఎలక్ట్రాన్ అపేక్షల సగటు విలువ”.

→ పౌలింగ్, బంధవిలువల నుంచి పరమాణువుల ఋణవిద్యుదాత్మకతను ప్రతిపాదించాడు.

→ పౌలింగ్ ననుసరించి, XA – XB = 0.208\(\sqrt{\Delta_{\mathrm{A}-\mathrm{B}}}\) XA, XB లు A, B పరమాణువుల ఋణవిద్యుదాత్మకతలు.

→ పౌలింగ్, హైడ్రోజన్కు 2.1 ఋణవిద్యుదాత్మకతను ఇచ్చాడు. దీని ఆధారంగా ఫ్లోరిన్కు 4.0 మరియు మిగతా మూలకాల విలువలు నిర్ణయించారు.

TS Inter 1st Year Chemistry Notes Chapter 2 మూలకాల వర్గీకరణ – ఆవర్తన ధర్మాలు

→ వేలన్సీ అనగా ‘కలయిక శక్తి’, ఒక మూలకపు పరమాణువు ఎన్ని హైడ్రోజన్ లేదా ఎన్ని క్లోరిన్ లేదా ఎన్ని ఏకసంయోజక (univalent) పరమాణువులతో కలుస్తుందో, అది ఆ మూలకపు సంయోజకత.

→ ఏదైనా ఒక గ్రూపులో వేలన్సీ ఆ గ్రూపు సంఖ్యకు (IV గ్రూపు వరకు) లేదా (8 – గ్రూపు సంఖ్య)కు (V గ్రూపు నుంచి) సమానమవుతుంది.

→ “ఒక నిర్దిష్ట జాతిలో ఉండే ఒక మూలక పరమాణువు పొందుతుందనుకునే విద్యుదావేశాన్ని ఆ మూలకపు -ఆక్సిడేషన్ స్థితి లేదా ఆక్సిడేషన్ సంఖ్య” అంటారు.

→ కొన్ని p మరియు దాదాపు అన్ని d బ్లాకు మూలకాలు కూడా చర సంయోజకత (variable valency) ని ప్రదర్శిస్తాయి.

→ బాహ్య కక్ష్యలోని ఎలక్ట్రాన్ జంట (అనగా ns’ ఎలక్ట్రాన్లు) ఒంటరి ఎలక్ట్రాన్లుగా విడిపోయి బంధంలో పాల్గొనడానికి చూపే విముఖతను “జడజంట ప్రభావం” అంటారు.

→ జడజంట ప్రభావం, III, IV, V గ్రూపుల ప్రతినిధి మూలకాలలో గ్రూపు చివరి మూలకంలో (Tl, Pb మరియు Bi లలో) గరిష్ఠంగా ఉంటుంది.

→ ఒక మూలకం ఎలక్ట్రాన్లను వదులుకోవడానికి చూపించే సుముఖతను ధనవిద్యుదాత్మకత అంటారు. దీన్నే లోహ ప్రపత్తి (metallic nature) అని కూడా అంటారు.

→ ఆవర్తన పట్టికలో 2వ పీరియడ్లోని ఒక మూలకానికి, ఆ మూలకానికి ఐమూలగా ఉండే తర్వాతి గ్రూపులోని మూలకానికి ధర్మాలలో గల సారూప్యతను, ‘కర్ణ సంబంధం’ అంటారు.

→ కర్ణ సంబంధానికి కారణాలు : రెండు మూలకాలకు
(a) అయాన్ లేదా పరమాణువు సైజులు దాదాపు సమానం.
(b) ఋణవిద్యుదాత్మకతలు దాదాపు సమానం.
(c) ధృవణ సామర్థ్యాలు దాదాపు సమానం.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

Telangana TSBIE TS Inter 1st Year Hindi Study Material 2nd Poem तुलसी के दोहे Textbook Questions and Answers.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material 2nd Poem तुलसी के दोहे

दीर्घ समाधान प्रश्न

प्रश्न 1.
तुलसी के अनुसार विपत्ति के साथी कौन हैं ?
उत्तर:
“तुलसी जी के अनुसार विपत्ति के समय आपको ये सात गुण बचायेंगे :

आपका ज्ञान या शिक्षा, आप की विनम्रता, आपकी बुद्धि, आपके भीतर का साहस, आपके अच्छे कर्म, सच बोलने की आदत और ईश्वर में विश्वास” ।

प्रश्न 2.
तुलसी के अनुसार मीठे वचन बोलने से क्या लाभ है ?
उत्तर:
तुलसी के अनुसार मीठे वचन बोलने से चारों ओर खुशियाँ फैल जाती हैं सब कुछ खुशहाल रहता है। मीठी वाणी से कोई भी इँसान किसी को भी अपने वश में कर सकता है । शत्रु को भी अपना मित्र बनाते है ।

मधुर वाणी सभी ओर सुख प्रकाशित करती है और यह हर किसी को अपनी ओर सम्मोहित करने का कारगर मंत्र है । इसलिए हर मनुष्य को कटु वाणी त्याग कर मीठे बोल बोलना
चाहिए !

एक शब्द में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
तुलसी का अमर काव्य कौनसा है ?
उत्तर:
रामचरित मानस ।

प्रश्न 2.
तुलसीदास के गुरु कौन थे ?
उत्तर:
नरहरिदास ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 3.
तुलसी के अनुसार वशीकरण मंत्र क्या है ?
उत्तर:
मीठे वचन ।

प्रश्न 4.
तुलसी ने काया की तुलना किससे की है ?
उत्तर:
खेत से की है ।

प्रश्न 5.
पावस ऋतु में कौन लते हैं ?
उत्तर:
मेंढ़क

प्रश्न 6.
तुलसीदास के माता पिता का नाम लिखिए ?
उत्तर:
हुलसी और आत्मराम दुबे ।

प्रश्न 7.
तुलसी के दृष्टि में ज्ञानी और गुणी कौन है ?
उत्तर:
ईर्ष्या का त्याग करने वाला ।

प्रश्न 8.
विपत्तियों में किस पर भरोसा रखना है ?
उत्तर:
भगवान (या) ईश्वर पर ।

प्रश्न 9.
तुलसी के अनुसार नाव किससे मित्रता करती है ?
उत्तर:
नदी से ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 10.
तुलसी के अनुसार संत के दृष्टी में कौन कौन समान है ?
उत्तर:
मित्र और शत्रु ।

संदर्भ सहित व्याख्याएँ

प्रश्न 1.
तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर । बसीकरन इक मंत्र है, परिहरु बचन कठोर ।।
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक पध्य भाग से दिया गया है । गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में सगुण भक्तिधारा की राम भक्तिशाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । आप हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि है । हिन्दी का रामकाव्य ‘रामचरित मानस’ आपकी अत्यंत प्रसिद्ध कृति है । आप श्रीराम के महाभक्त थे । ‘राम चरित मानस’ अवधी में लिखित महा काव्य है। ‘दोहावली’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘जानकी मंगल’, ‘पार्वती मंगल’ आदि आपके अन्य काव्य हैं । आपकी भाषा अवधी और बृज है ।

व्याख्या : इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि मीठे वचन बोलने से चारों ओर खुशियाँ फैल जाती हैं। सब कुछ खुशहाल रहता है। मीठी वाणी से कोई भी व्यक्ति किसी को भी अपने वश में कर सकता है । कठोर वचन को छोडने का सलाह देते हैं । कठोर वचन से सब का मन दुखी हो जाता हैं ।

विशेषता :

  1. दुसरों को अपने वश में करने केलिए एक ही मंत्र है, वह है ‘मीठे वचन’ ।
  2. मीठे वचनों से चारों ओर खुशियाँ फैलती हैं ।
  3. कठोर वचन कभी किसी से नही बात करना चाहिए ।
  4. मीठे वचनों से शत्रु भी मित्र बन जाते हैं ।

प्रश्न 2.
तुलसी काया खेत है, मनसा भयो किसान ।
पाप-पुण्य दोउ बीज है, दुवै सो लुनै निदान ॥
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक पध्य भाग से दिया गया है । गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में सगुण भक्तिधारा की रामभक्तिशाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । आप हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि है । हिन्दी का रामकाव्य ‘रामचरित मानस’ आपकी अत्यंत प्रसिद्ध कृति है । आप श्रीरामचन्द्र के महान भक्त थे । ‘रामचरित मानस’ अवधी में लिखित महाकाव्य है । ‘दोहावली’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘जानकीमंगल’, ‘पार्वती मंगल’ आदि आपके अन्य काव्य हैं । आपकी भाषा अवधी और ब्रज है ।

व्याख्या : इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि मानव शरीर खेत के समान है और मन किसान के समान है । पाप – पुण्य दो बीज है, जो बोया जाता है, उसी को प्राप्त करते हैं । किसान अच्छा बीज बोये तो अच्छे फसल मिलता है । बूरा (याने) सस्तै वालै बीज बोये तो बुरा फसल उगता है। हम भी याने मानव पाप कर्म किया तो पापात्मा और पुण्य कर्म किया तो पुण्यात्मा बनते है ।

विशेषता :

  1. इस दोहे में तुलसी शरीर को खेत के समान और मन को किसान के तरह बताना सही है ।
  2. यह एक लोक विश्ष्यात दोहा है ।
  3. मानव के मन में पाप कार्य करने का विचार आते ही एक बार इस दोहे को रटना चाहिए। कभी पाप वह नही करेगा ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 3.
तुलसी साभी विपत्ति के, विध्या, विनय, विवेक ।
साहस, सुकृति, सुसत्य, व्रत, राम भरोसो एक ॥
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा ‘तुलसीदास के दोहे’ नामक पध्य – भाग से दिया गया है । गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में सगुण भक्तिधारा की रामभक्तिशाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । आप हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हैं । हिन्दी का रामकाव्य ‘रामचरित मानस’ आपकी अत्यंत प्रसिद्ध कृति है । आप श्रीरामचन्द्र के महान भक्त थे । ‘राम चरित मानस’ अवधी में लिखित महाकाव्य है । ‘दोहावली’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘जान की मंगल’, ‘पार्वती मंगल’ आदि आपके अन्य काव्य हैं । आपकी भाषा अवधी और ब्रज है ।

व्याख्या : तुलसीदास जी कहते हैं कि किसी भी विपदा से यह सात गुण आपको बचाएंगे,

  1. आपकी विध्या, ज्ञान
  2. आपका विलय, विवेक
  3. आपके अंदर का साहस, पराक्रम
  4. आपकी बुद्धि, प्रज्ञा
  5. आपके भले कर्म
  6. आपकी सत्यनिष्ठा
  7. आपका भगवान के प्रति विश्वास ।

हमेशा ये सात गुण विपत्ति के समय हमको बचायेंगे ।

विशेषता :

  1. विपत्ति के समय शिक्षा, विनय, विवेक, साहस, अच्छे कार्य और सच्चाई की आवश्यकता पड़ती है ।
  2. विपत्ति में हमें धैर्य रखना चाहिए और अधिक मेहनत करनी चाहिए ।
  3. विपत्ति को देखकर कभी नही डरना चाहिए । धैर्य से इसका सामना करना चाहिए ।

दोहों के भाव

प्रश्न 1.
तुलसी इस संसार में, भांति भांति के लोग ।
सबसे हस मिल बोलिए, नदी नाव संजोग ।।
उत्तर:
भावार्थ : तुलसीदास जी इस दोहे “मिल जुलकर ” रहने से क्या लाभ होते है, इसके बारे में हमें बता रहे हैं। इस दुनिया में तरह- तरह के लोग रहते हैं, यानी हर तरह के स्वभाव और व्यवहार वाले लोग रहते है, आप हर किसी से अच्छे से मिलिए और बात करिए । जिस प्रकार नाव नदी से मित्रता कर आसानी से उसे पार कर लेती है, वैसे ही अपने अच्छे व्यवहार से आप भी इस भव सागर को पार कर लेंगे ।

భావం : ఈ దోహాలో తులసీదాసు కలసి మెలసి ఉండటం వలన కలిగే లాభాలను గురించి మనకు వివరించుచున్నారు. ఈ ప్రపంచంలో రకరకములైన ప్రజలు నివశిస్తున్నారు. వారి యొక్క స్వభావం మరియు వారియొక్క ఆచరణ భిన్నంగా ఉంటుంది. అటువంటి భిన్న స్వభావం మరియు వ్యవహారం ఉన్న వ్యక్తులతో చక్కగా, వారి మనసు సంతోషపెట్టే విధంగా మంచి మాటలు మాట్లాడాలి. ఏవిధంగానైతే నావ నదితో స్నేహం చేసి ఒడ్డుని (తీరాన్ని) తేలికగా చేరుకుంటుంది. అదేవిధంగా మంచి నడవడికతో, వ్యవహారంతో మీరు కూడా ఈ భవసాగరాన్ని దాటవచ్చు అని తెలియచేసిరి.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 2.
तुलसी मीठे वचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर ।
बसीकरन इक मंत्र है, परिहरु वचन कठोर ।।
उत्तर:
भावार्थ : इस दोहे में तुलसीदास “मधुर वाणी” के महत्व के बारे में हमें बता रहे हैं । तुलसीदास कहते हैं कि मीठे वचन सब ओर सुख फैलाते हैं। किसी को भी वश में करने का ये एक मन्त्र होते हैं । इसलिए मानव को चाहिए कि कठोर वचन छोडकर मीठा बोलने का प्रयास करे । मीठे वचन बोलने से सब का मन प्रसन्न रहता हैं और शत्रु भी मित्र होते है । कठोर वचन बोलने से सब हमसे घृणा करते हैं ।

భావం : ఈ దోహానందు తులసీదాసు మంచి మాటల యొక్క గొప్పతనమును మనకు వివరించుచున్నారు. మంచి మాటలు మాట్లాడితే మన చుట్టు ప్రక్కల అంతా సుఖంగా ఉంటుంది. నాలుగువైపుల సంతోషమైన వాతావరణం కనిపిస్తుంది. ఇతరులను మన వశం చేసుకోవాలంటే ‘మధురమైన మాటలు’ ఒక మంత్రంవలె పనిచేస్తాయి. అందువలన కఠినంగా మాట్లాడటం మాని తియ్యని మాటలు మాట్లాడటం నేర్చుకోవలెను. మధురమైన మాటల వలన అందరూ మన మిత్రులు అవుతారు. కఠినమైన మాటల వలన శత్రువులు అగుదురు.

प्रश्न 3.
सोई ज्ञानी सोई गुनी जन सोई दाता ध्यानी ।
तुलसी जाके चित्त भई, राग द्वेष की हानि ॥
उत्तर:
भावार्थ: तुलसीदास इस दोहे में ‘ईर्ष्या का त्याग करने के लिए कहते हैं । तुलसीदास कहते है कि जिसके मन में अनुराग होती है। वहीं गुणवान, ज्ञानी और ध्यानी होता है। अगर मन में ईर्ष्या होती तो वह कभी गुणवान नही होता । मन में ईर्ष्या को अंत करके दुनिया को देखने से सब कुछ हमें समझ में आता हैं। तभी हम ज्ञानवान बनते हैं ।

భావం : తులసీదాసు ఈ దోహానందు ఈర్ష్యను మన మనస్సు నుండి త్యజించవలెను అని తెలియచేసినారు. ఎవరి మనస్సునందు అనురాగం ఉండునో వారు గుణవంతులు, జ్ఞానవంతులు మరియు ధ్యానవంతులు కాగలరు అని చెప్పుచున్నారు. ఒకవేళ మనసు నందు ఈర్ష్య ఉన్నట్లయితే వారు ఎప్పటికి జ్ఞానవంతులు, గుణవంతులు కాలేరు. మనసులోని ఈర్ష్య తొలగించి ప్రపంచమును చూసినట్లయితే అంతా మనకు అర్థమగుతుంది. అప్పుడే మనము జ్ఞానవంతులు కాగలము.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 4.
तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय ।
न जाने किस रूप में, नारायण मिल जाय ।।
उत्तर:
भावार्थ : तुलसीदास इस दोहे में “प्रेम की भावना” के बारे में हमें बता रहे हैं । तुलसीदास जी कहते है कि सारे संसार में मै दौड़कर भगवान से मिलने गया लेकिन इस दुनिया में भगवान कितना दौड़ने पर भी किसी जगह नही मिला । अंत में मैने नारायण को एक जगह देखा, जहाँ प्रेम होता है वही भगवान का दर्शन होता है । जिसके मन में ‘प्रेम की भावना होती है उसके अंदर भगवान वास करते हैं ।

భావం : తులసీదాసు ఈ దోహానందు ప్రేమతత్వం యొక్క గొప్పతనమును వివరించెను. ఈ ప్రపంచంనందు భగవంతుని దర్శనం కొరకు అంతటా నేను పరుగుతీసి అలసిపోయేంత వరకు వెతికాను. ఎంతో వెతికినా నాకు ఏ ప్రదేశంలో భగవంతుడు దర్శనము దొరకలేదు. కాని ఏ ప్రదేశంలో ‘ప్రేమ’ ఉన్నదో ఆ ప్రదేశంలో నాకు నారాయణుడు దర్శనం ఇచ్చినాడు. ఎవరి మనసునందు ప్రేమతత్వం ఉండునో వారి చిత్తమునందు భగవంతుడు నివాసం ఉండును అదే ఈ దోహా యొక్క అర్థం.

प्रश्न 5.
तुलसी काया खेत है, मनसा भयो किसान ।
पाप-पुण्य दोउ बीज है, बुवै सो लुनै निदान ॥
उत्तर:
भावार्थ : तुलसीदास इस दोहे में “नीति की बात” हमें बता रहे हैं । तुलसीदास जी कहते है कि हमारा शरीर खेत के समान है और मन किसान के समान है। पाप – पुण्य दो बीज हैं, जो बोया जाता है उसी को प्राप्त करना पड़ता है। हम अपने मन में पाप के बारे में सोचकर पाप कार्य करे तो हम पापात्मा बनते है । अगर इसके विपरीत पुण्य कार्य करे तो पुण्यात्मा बनते है । लोग हमें आदर से देखकर इज्जत करते है ।

భావం : తులసీదాసు ఈ దోహానందు “నీతి” యొక్క గొప్పతనమును వివరించెను. మానవ శరీరం తులసీదాసు దృష్టిలో పొలముతో సమానం. మనసు రైతుతో సమానం. పాపపుణ్యములు రెండు విత్తనములు. వేటినైతే నాటతామో అదే ఫలితమును పొందును. మన చిత్తమునందు పాపము . గురించి ఆలోచించి పాపం పనులు చేస్తే పాపాత్ముడు అని, దానికి వ్యతిరేకంగా మంచి పనులు చేస్తే పుణ్యాత్ముడు అని అంటారు. పుణ్యాత్ములను గౌరవంగా చూస్తారు. గౌరవాన్ని మనకు ఎక్కడకు వెళ్లినా ఇస్తారు.

प्रश्न 6.
तुलसी साथी विपत्ति के, विद्या, विनय, विवेक ।
साहस, सुकृति, सुसत्य क्रत, राम भरोसो एक ॥
उत्तर:
भावार्थ: तुलसीदास इस दोहे में “विधा, विनय, विवेक जैसे गुणों के महत्व” के बारे में बता रहे हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि विपत्ति में अर्थात मुश्किल वक्त में ये चीजे मनुष्य का साथ देती है, वे है ज्ञान, विनम्रता पूर्वक व्यवहार, विवेक, साहस, अच्छे कर्म, आपका सत्य और राम (भगवान) का नाम । विपत्ति के समय शिक्षा, विनय, विवेक, साहस, अच्छे कार्य और सच्चाई ही साथ देते हैं । ये सभी मुश्किलों से हमें बचाते हैं ।

భావం : తులసీదాసు ఈ దోహానందు విద్య, వినయం మరియు వివేకము వంటి గుణముల గొప్పతనమును వివరించెను. జ్ఞానము, వినమ్రతతో కూడిన వ్యవహారం, వివేకం, సాహసం, మంచి పనులు, మన యొక్క సత్యము మరియు భగవంతుని నామస్మరణ. ఇవి అన్నియు కష్టకాలం నందు మనకు సహాయముగా ఉండును. కష్టకాలము నందు శిక్ష, వినయం, వివేకం, సాహసం, నిజాయితీ మన తోటి ఉండును. కష్టము నుండి కాపాడును.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

प्रश्न 7.
तुलसी पावस के समै, धरी कोकिला, मौन ।
अब तो दादुर बोलि है, हमें पुछि है कौन ॥
उत्तर:
भावार्थ : इस दोहे में तुलसीदास हमें “समयानुसार बोलने का महत्व” के बारे में बात रहै हैं । तुलसीदास जी कहते है कि वर्षा ऋतु के समय पर कोकिला मौन धारण कर लेती है । अब मेंढक ही बढ़कर बोलने लगते है। यह सोचते हुए कि ‘हमें अब पूछनेवाला कौन है’ । तुलसीदास विद्वानों के स्वभाव का संकेत देते हैं । जहाँ मूर्ख लोग बोलने लगते हैं, वहाँ विद्वान लोग चुप हो जाते हैं । वे जानते हैं कि उनकी बात अब कोई नहीं सुनेगा । विद्वान को समय और परिस्थिति को देखकर भाषण करना चाहिए ।

భావం : ఈ దోహాలో తులసీదాసు ఇలా చెబుతున్నారు. “వర్షాకాలం వచ్చిందంటే ఇక కోయిలలు కూయడం మానేసి మౌనంగా ఉంటాయి. కానీ ఈ సమయంలో కప్పలు మాత్రం తమను అడిగే వారెవరన్నట్లు ఇష్టం వచ్చినట్లు మాట్లాడటం మొదలు పెడతాయి”. వర్షాకాలంలో కప్పల బెకబెకలను తులసీదాసు పామరుల మాటలతో పోలుస్తున్నారు. విద్వాంసులు తమ మాట చెల్లదని భావించిన సమయంలో మౌనం వహిస్తారనీ, అదే అదనుగా పామరులు అధిక ప్రసంగం చేస్తారనీ ఈ దోహా అంతరార్ధం. అదను చూసి మాట్లాడే వారే నిజమైన విద్వాంసులని కవి చెబుతున్నారు.

प्रश्न 8.
सम कंचन काँचौ गिनत सत्रु मित्र सम होई ।
तुलसी या संसार में कहत संतजन सीइ ॥
उत्तर:
भावार्थ : इस दोहे में तुलसीदास हमें “सत्पुरुष की महानता’ के बारे में बता रहे हैं। इस संसार में महान लोग सोना और काँच को एक ही तरह मानते है । याने सोना मुल्यवान और काँच साधारण मुल्यवाली धातु हैं। लेकिन दोनों भगवान की दिया हुइ चीज़ है । दोनों धातुओं को समान द्वष्टि से देखना चाहिए। उसी तरह इस दुनिया में शत्रु और मित्र दोनों सत्पुरुषों की द्वष्टि में समान है । सत्पुरुषों की द्वष्टि में सब लोग समान है ।

భావం : ఈ దోహానందు తులసీదాసు మనకు సత్పురుషుల యొక్క గొప్పతనమును మనకు వివరించుచున్నారు. ఈ ప్రపంచం నందు బంగారం మరియు గాజు (అద్దం) రెండు మహాత్ముల దృష్టిలో సమానమే అనగా బంగారం విలువైనది అని గాజు సాధారణ వెలగలది అని రెండు ధాతువులు గురించి చెబుతున్నారు. ఈ రెంటిని భగవంతుడు సృష్టించాడు. దేవుని దృష్టిలో ఈ రెండు ధాతువులు సమానం. అలాగే సత్పుర్షుల దృష్టిలో ఈ ప్రపంచం నందు మిత్రులు మరియు శత్రువులు ఒక్కరే సత్పురుషుల దృష్టిలో మానవులంతా సమానమే.

कवि परिचय

गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल में सगुण भक्तिधारा की रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है | आप हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हैं । हिन्दी का रामकाव्य ‘रामचरित मानस’ आपकी अत्यंत प्रसिद्ध कृति है । आपका जन्म संवत् 1554 में उत्तर प्रदेश के में हुआ। ‘पिताजी का नाम आत्माराम दुबे और माताजी का नाम हुलसी था । आपके गुरूजी नरहरिदास थे । तुलसीदास पहले भोग-विलासी एवं मोह में लिप्त थे किन्तु पत्नी रत्नावली के कारण उनका ज्ञानोदय हुआ । आप श्रीरामचन्द्र के महाभक्त थे !

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

‘रामचरित मानस’ अवधी में लिखित महाकाव्य है । ‘दोहावली’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘जानकीमंगल’, पार्वतीमंगल आदि आपके अन्य काव्य है । आपकी भाषा अवधी और ब्रज है । संवत् 1680 में आपका स्वर्गवास हो गया ।

कठिन शब्दों के अर्थ

1.
संसार = जगत्, जग्, world, ప్రపంచం
भांति-भांति = तरह-तरह के कई प्रकार के, so many types, రకరకములైన.
लोग = जन, व्यक्ति, people, జనులు
ह्स = हसते हुए, laugh, నవ్వుతూ
संजोग = मिलाप, unity, కలయిక

2.
वचन = बोली, speech, మాట.
उपजत = पैदा होना, उत्पन्न होना, born, పుట్టుట, ఉద్భవించుట
चहुँओर = चारों ओर, foursides, నలుదిక్కులు
वसीकर = वश में करने वाला, enchantment, వశము చేసుకొనుట.
परिहरु = हरण करना, avoidance, విడిచిపెట్టు.
कठोर = कटु शब्द, hard words, కఠిన పదాలు.

3.
सोई = वही, in tracks, ఎవడైతే
गुनी = गुणवान, talented worthy, గుణవంతుడు
जाके = जिसके, whose, ఎవని యొక్క,
चित्त = मन, heart, మనస్సు
भई = में, भीतर, Inside, లోపల
राग = अनुराग, love, ప్రేమ, ఆప్యాయత.
द्वेष = ईर्ष्या, hatred, ద్వేషం
हानि = अंत, समाप्त होना, an end, conclude, అంతము.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

4.
मिलिए = मिलना, to join to be mingled, కలుసుకొనుట
धाय = दौड़कर भागकर, to run, పరుగెత్తుకొని
नारायण = ईश्वर, god, ఈశ్వరుడు

5.
काया = शरीर, body, శరీరము
मनसा = मन, heart, మనస్సు
भयो = होना, to continue became, అగుట
दोउ = दोनों, two sides, ఇరువైపుల
बुवै = बोना, to cause to sow, నాటుట
सो = जैसा, such as, అదే విధంగా.
लुनै = लेना, मिलना काटना, फसल कटाई, obtain, పొందుట
निदान = समाधान, diagnose, సమాధానం

6.
साथी = मित्र, दोस्त, friend, స్నేహితుడు
विपत्ति = मुसीबत, कष्ट, a calqnity, కష్టకాలం
विनय = विनम्रता, decency, humility, modesty, వినయం, వినమ్రత.
विवेक = बुद्धि, wisdom, తెలివి, వివేకము.
साहस = धैर्य, courage, సాహసము
सुकृति = अच्छे कर्म, good works, auspicious, మంచి పనులు.
सुसत्य व्रत = सत्य का पालन, truth telling, సత్యమును అనుసరించుట.
भरोसो = विश्वास, faith, నమ్మకం

7.
पावस = वर्षा, बरसात, rainy season, వర్షాకాలం
समै = समय, time, సమయం
मौन = चुप, silent, మౌనం
दादुर = मेंढ़क, frog, కప్ప
बोल है = बोलते है, आवाज करते है, to talk, make sounding, శబ్దం చేయుట
पूछि है = पूछना, सम्मान करना (या) आदर करना, to ask, give respect, గౌరవించుట, అడుగుట,

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 2 तुलसी के दोहे

8.
सम = के समान, equal, సమానంగా
कंचन = सोना (मूल्यवान), gold, బంగారం
काँचौ = (काँच) साधारण मूल्यवाली, mirror, గ్లాసు (అద్దం)
गिनत = गिनता है, counting, లెక్కించుట
सत्रु = शत्रु, दुश्मन, enemy, శత్రువు
मित्र = दोस्त, friend,స్నేహితుడు
या = इंस, or, లేక
सोइ = वही, ibidem (verb), అదేవిధంగా

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

Telangana TSBIE TS Inter 1st Year Hindi Study Material 1st Poem कबीर के दोहे Textbook Questions and Answers.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material 1st Poem कबीर के दोहे

दीर्घ समाधान प्रश्न

प्रश्न 1.
सत्गुरु के विषय में कबीर के क्या विचार है ?
उत्तर:
कबीरदास गुरु का बड़ा मान रखते थे । उनकी दृष्टि में गुरु का स्थान भगवान से भी बढकर है । गुरु की महिमा अपार और अनंत है, जो शब्दों से बयान नही होती । गुरु ही अपने अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके ज्ञान रूपी दीप (ज्योती) जलाते है ! सत्गुरु ही भगवान के बारे में हमें बताते है । भगवान तक पहुँचने के मार्ग हमें दिखाते हैं ।

प्रश्न 2.
कबीरदास का संक्षिप्त परिचय लिखिए ।
उत्तर:
कबीरदास का स्थान भक्तिकाल के ज्ञानाश्रयी शाखा में सर्वोन्नत है । वे ज्ञानाश्रयी शाखाः के प्रवर्तक माने जाते हैं। कबीरदास के जन्म और मृत्यु को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं । किंतु अधिकार विद्वानों के मतानुसार कबीर का जन्म काशी में संवत् 1455 (सन् 1398) में हुआ। कबीर का देहातं संवत् 1575 (सन् 1518 ) में मगहर में हुआ । कबीर अनपढ़ और निरक्षर थे । उनके गुरु रामानंद थे । कबीर समाज सुधारक महान कवि और दार्शनिक माने जाते हैं। उनकी वाणी ‘बीजक’ नाम से संग्रहित की गयी है । इसके तीन भाग हैं – 1. साखी 2 सबद 3. रमैनी

कबीर का विवाह लोई नामक स्त्री से हुआ। उनके दो बच्चे भी हुए जिनेक नाम हैं कमाल और कमाली ।

एक शब्द में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1.
कबीर के गुरु कौन थे ?
उत्तर:
रामानन्द ।

प्रश्न 2.
कबीर की एक मात्र प्रामाणिक रचना का नाम क्या है ?
उत्तर:
‘बीजक’ ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 3.
कबीर ने दुर्जन की तुलना किससे की है ?
उत्तर:
मिट्टी का घड़ा से की है ।

प्रश्न 4.
कबीर के अनुसार जहाँ दया होती है, वहाँ क्या होता है ?
उत्तर:
धर्म होता है ।

प्रश्न 5.
कबीरदास किस शाखा के प्रमुख कवि थे ?
उत्तर:
निर्गुण भक्ति शाखा ।

प्रश्न 6.
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार कबीर को क्या कहते थे ?
उत्तर:
वाणी के डिक्टेर ।

प्रश्न 7.
कबीरदास किस काल के कवि हैं ?
उत्तर:
भक्तिकाल के ।

प्रश्न 8.
कबीरदास के अनुसार सज्जन किसके समान है ?
उत्तर:
सोना ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 9.
“काल” शब्द का अर्थ क्या है ?
उत्तर:
मृत्यु, समय, वक्त ।

प्रश्न 10.
कबीरदास समय की तुलना किससे की है ?
उत्तर:
अमोल हीरा से की है ।

संदर्भ सहित व्याख्याएँ

प्रश्न 1.
सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार ।
लोचन अनंत उघारिया, अनंत दिखावनहार ॥
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है। कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकालं की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं- ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “सतगुरु की महिमा” अनन्त है और उनके उपकार भी अनन्त हैं । उन्होंने मेरी अनन्त दृष्टि खोल दी जिससे मुझे उस अनन्त प्रभु का दर्शन प्राप्त हो गया । सतगुरु ही भगवान के बारे में हमें बताते हैं । भगवान तक पहुँचने के मार्ग वही हमें दिखाता है ।

विशेषताएँ: इस दोहे में कबीरदास गुरु की महिमा का वर्णन करते है । उनके अनुसार गुरु भगवान से भी महान है । गुरु महिमा का वर्णन संत काव्यधारा की एक प्रमुख विशेषता है ।

प्रश्न 2.
साच बराबर तप नही, झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदे साच है, ता हिरदे गुरु आप ॥
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है । कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं- ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “सत्य का महत्व” के बारे में बताया । कबीरदास जी कहते है कि इस जगत् में सत्य के मार्ग पर चलते से बडी कोई तपस्या नही है और ना ही झूठ बोलने सं बडा कोई पाप है । क्यों कि जिसके हृदय में सत्य का निवास होता है उसके हृदय में साक्षात परमेश्वर का वास होता है । सत्य मार्ग में चलनेवालों पर हमेशा भगवान की कृपा होती है ।

विशेषताएँ : कबीरदास इस दोहे में सत्य की महानता के बारें पर जोर देते है । सत्य मार्ग पर चलनेवालों पर ही भगवान की कृपा होती है। झूठ बोलता बड़ा पाप है। सत्य बतानेवाले के हृदय में भगवान रहता है ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 3.
सोना सज्जन साधुजन, टूटि जुटै सौ बार ।
दुर्जन कुंभ कुम्हार का, एकै धका दरार ।।
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है। कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं – ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “सज्जन के गुण” कैसे होना है इसके बारे में हमें बता रहे है। सोने को अगर सौ बार भी तोडा जाए, तो भी उसे फिर जोड़ा जा सकता है। इसी तरह भले मनुष्य हर अवस्था में भले की रहते हैं । इसके विपरीत बुरे या दृष्ट लोग कुम्हार के घड़े की तरह होते हैं जो एक बार टूटने पर दुबारा नही जुड़ता । बुरे आदमी के स्वभाव हमेशा दूसरों की प्रती बुरा ही होता है ।

विशेषताएँ : इस दोहे में सज्जन महानता के बारे में बताया । सज्जन सोने के समान और दुर्जन कुम्हार के घड़े की तरह होते है ।

प्रश्न 4.
जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय ।
यह आपा तू डरि दे, दया करै सब कोय ।
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है। कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं- ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “अहंकार को त्याग” करने के लिए कहते है । आपके मन में यदि शीतलता है अभति दया और सहानुभूति है, तो संसार में आपकी किसी से शत्रुता नही हो सकती। इसलिए अपने अहंकार को निकाल बाहर करे और आप अपने प्रति दूसरों में भी संवेदना पायेंगे ।

विशेषताएँ: इस दोहे में कबीरदास मन में हुए “अहंकार” को त्याग करने लिए कहते है । दया और सहानुभूति हमारे मन में हो तो संसार के सभी अपने मित्र होते है ।

प्रश्न 5.
बोली तो अनमोल है, जो कोइ जानै बोल ।
हिये तराजू तोलि के, तब मुख बाहर खोल ।।
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है । कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं – ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं !

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “मधुर वाणी” की महानता के बारे हमें बता रहे हैं। यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है। तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है । इसलिए वह हृदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुँह से बाहर आने देता है ।

विशेषताएँ : इस दोहे में कबीर ‘वाणी’ की महिमा का वर्णन करते हैं । दूसरों को अपने वश करने के लिए हमेशा मधुर वाणी में बोलने की सलाह दे रहे हैं।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 6.
जहाँ दया तहँ धर्म है, जहाँ लोभ तहँ पाप ।
जहाँ क्रोध तहँ काल है, जहाँ छिमा तहँ आप ॥
उत्तर:
संदर्भ: प्रस्तुत दोहा कबीरदास के दोहे नामक पाठ से संकलित है। कबीरदास हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि हैं । ‘बीजक’ आपकी रचनाओं का संकलन है। इसके तीन भाग हैं- ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ । कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

व्याख्या : कबीरदास इस दोहे में “दया और क्षमा’ जैसे गुणों का महत्व के बारे में बता रहे हैं । जहाँ दया भाव है वहाँ धर्म व्यवहार होता है। जहाँ क्षमा और सहानुभूति होती है वहाँ भगवान रहते है । दया और क्षमा दोनों इस दुनिया में सबसे महान गुण है ।

विशेषताएँ: इस दोहे में कबीरदास दया और क्षमा पर जोर देते हैं। जिसके हृदय में दया भाव है उसके हृदय में भगवान रहते हैं । उपकार के बदले उपकार करना ही क्षमा गुण है ।

दोहों के भाव

प्रश्न 1.
सतगुरु की महिमा अनंत, अनंत किया उपकार ।
लोचन अनंत उघारिया, अनंत दिखावनहार ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “सतगुरु की महिमा” के बारे में बताया । सतगुरु की महिमा अनन्त है और अनेक उपकार भी अनन्त हैं। उन्होंने मेरी अनन्त दृष्टि खोल दी जिससे मुझे उस अनन्त प्रभु का दर्शन प्राप्त हो गया। सतगुरु ही भगवान के बारे में हमें बताते हैं । भगवान तक पहुँचने के मार्ग वही हमें दिखाता हैं ।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహాలో గురువు యొక్క మహిమను వివరించు చున్నారు. సద్గురువు యొక్క మహిమ మరియు గురువు యొక్క ఉపకారం అనంతమైనది. గురువు నా యొక్క జ్ఞానదృష్టిని తెరిపించిరి. ఆ జ్ఞానదృష్టి సహాయంతోనే నేను భగవంతుని సాక్షాత్కారం పొందగలిగాను అని కబీర్ అంటున్నారు. భగవంతుని వద్దకు వెళ్ళుటకు సరియైన మార్గమును చూపించ గలిగే వ్యక్తి సద్గురువు.

प्रश्न 2.
साच बराबर तप नही, झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदे साच है, ता हिरदे गुरु आप ।
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “सत्य का महत्व” के बारे में बताया । कबीरदास जी कहते है कि इस जगत् में सत्य के मार्ग पर चलने से बड़ी कोई तपस्या नही है और ना ही झूठ बोलने से बड़ा कोई पाप है । क्यों कि जिसके हृदय में सत्य का निवास होता है उसके हृदय में साक्षात् परमेश्वर का वास होता है । सत्य मार्ग में चलनेवालों पर हमेशा भगवान की कृपा होती है ।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహాలో సత్యము యొక్క గొప్పతనాన్ని వివరించిరి. సత్యమార్గమునందు పయనించువారు ఒక మహాతపస్వి కంటే గొప్పవారు. అసత్యము మాట్లాడేవారి కంటే పాపాత్ములు ఈ భూమినందు లేరు. ఎవరైతే ఎల్లప్పుడు సత్యమునే మాట్లాడతారో వారి హృదయంనందు సాక్షాత్తు భగవంతుడు ఉంటాడు. సత్యమార్గమునందు ప్రయాణంచేయు వారిపై ఎల్లప్పుడు భగవంతుని కృప ఉంటుంది.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 3.
सोना सज्जन साधुजन, टूटि जुटै सौ बार ।
दुर्जन कुंभ कुम्हार का, एकै धका दरार ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “सज्जन के गुण” कैसे होते है इसके बारे में हमें बता रहे है। सोने को अगर सौ बार भी तोड़ा जाए, तो भी उसे फिर जोड़ा जा सकता है। इसी तरह भले मनुष्य अवस्था में भले ही रहते हैं। इसके विपरीत बुरे या दुष्ट लोग कुम्हार के घड़े की तरह होते हैं जो एक बार टूटने पर दुबारा नही जुड़ता । बुरे आदमी के स्वभाव हमेशा दूसरों की प्रती बुरा ही होता है ।

భావం :- కబీర్ దాసు ఈ దోహాలో మంచి వ్యక్తి యొక్క గుణం ఏవిధంగా ఉండునో మనకు వివరించుచున్నారు. బంగారం మనం ఎన్నిసార్లు ముక్కలు చేసినను మరల అతుకవచ్చునో అదేవిధంగా మంచి వ్యక్తి ఎటువంటి పరిస్థితులలోనైనా మంచితనంగానే ఉండును. కాని చెడ్డ వ్యక్తి. కుమ్మరివాని యొక్క కుండతో సమానం. ఒక్కసారి కుండను విరగగొట్టిన మరల ఎప్పటికి అతుకదు. చెడ్డవారి మనస్థితి ఎల్లప్పుడు చెడుగానే ఉండును.

प्रश्न 4.
जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय ।
यह आपा तू डरि दे, दया करै सब कोय ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “अहंकार को त्याग” करने के लिए कहते है । आपके मन में यदि शीतलता है अर्थात दया और सहानुभूति है, तो संसार में आपकी किसी से शत्रुता नही हो सकती। इसलिए अपने अहंकार को निकाल बाहर करे और आप अपने प्रति दूसरों में भी समवेदना पायेगें ।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహాలో మనిషి తనలోని అహంకారమును త్యాగం చేయవలనని చెబుతున్నారు. మన మనస్సునందు సానుభూతి మరియు దయాగుణము ఉన్నట్లయితే ఈ ప్రపంచంతో శతృత్వం అనేది ఉండదు. అందువలన మనయందు ఉండు అహంకారాన్ని బయటకు త్రోయవలెను. ఇతరుల నుండి మనము సమవేదన పొందుతాము.

प्रश्न 5.
बोली तो अनमोल है, जो कोइ जानै बोल ।
हिये तराजू तोलि के, तब मुख बाहर खोल ।।
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “मधुरवाणी’ की महानता के बारे हमें बता रहे हैं। यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न है । इसलिए वह हृदय के तराजू में तोलकर ही उसे मुँह से बाहर आने देता है।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహానందు “మధురవాణి” అనగా మంచి మాటల యొక్క గొప్పతనము వర్ణించుచున్నారు. ఇతరులతో మంచి మాటలు మాట్లాడటం తెలిసినట్లయితే బహుశా వానికి మంచిమాట అనేది అమూల్యమైన రత్నం అని తెలియును. అందువలన హృదయం అనే తరాజు (కాటా)లో కొలచి నోటి నుండి బయటకు పంపును.

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

प्रश्न 6.
कबीर गर्व न कीजिये, काल गहे कर केस ।
ना जानौ कित मारि है, क्या घर क्या परदेस ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “जीवन की अनिश्चितता” के बारे में बता रहे है। अपनी शक्ति और संपत्ति देखकर घमंडी मत बनिए । इस शरीर से आत्मा कब निकल जाती है किसी को पता नही । मृत्यु किस रूप मे आती है हमें पता नही । किसी भी क्षण हमें अपने साथ ले जाती है । बाल (या) अपना हाथ पकडकर अपने साथ काल ले जाता है । तब इस दुनिया में तुम्हारा घर (ठिकाना) नही होता । मृत्यु कही भी हो (या) किधर भी हो, चाहे घर में हो या परदेश में भी तुमको आने साथ ले जाती है ।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహానందు జీవితం యొక్క అనిశ్చితత గురించి వివరించుచున్నారు. మన యొక్క శక్తి మరియు సంపదను చూసి ఎప్పుడు గర్వపడకూడదు. ఈ శరీరం నుండి ఆత్మ ఎప్పుడు బయటకు వెళుతుందో ఎవ్వరికి తెలియదు. మృత్యువు ఏ రూపములో వచ్చునో మనము ఊహించ లేము. ఏ క్షణములోనైనా మనలని తనతో మృత్యువు తీసుకువెళ్ళును. మన శిరస్సులోని వెంట్రుకలను (లేక) మన చేతులు పట్టుకొని యముడు ప్రాణాలు హరించును. అప్పుడు ఈ ప్రపంచంనందు నీకు ఉండుటకు ಇಲ್ಲು ఉండదు. మృత్యువు నిన్ను ఎక్కడ దాగి ఉన్న తనతోపాటు తీసుకుపోవును.

प्रश्न 7.
जहाँ दया तहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप ।
जहाँ क्रोध तहँ काल है, जहाँ छिमा तहँ आप ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “दया और क्षमा” जैसे गुणों का महत्व के बारे में बता रहे हैं । जहाँ तया भाव है वहाँ धर्म व्यवहार होता है । जहाँ क्षमा और सहानुभूति होती है वहाँ भगवान रहते है । दया और क्षमा दोनों इस दुनिया में सबसे महान गुण हैं ।

భావం : కబీర్దాసు ఈ దోహానందు “దయ మరియు క్షమాగుణం” యొక్క గొప్పతనమును చెప్పుచున్నారు. ఎక్కడైతే దయా భావం ఉండునో అక్కడ ధర్మ వ్యవహారం ఉండును. ఎక్కడైతే దురాశ మరియు కోపం ఉండునో అక్కడ పాపం ఉండును. ఎక్కడైతే క్షమ మరియు సహానుభూతి ఉండునో అక్కడ దేవుడు ఉండును. దయ మరియు క్షమాపణ ఈ రెండు ప్రపంచం నందు మహాగుణములుగా చెప్పుదురు.

प्रश्न 8.
रात गाँवाई सोय करि, दिवस गाँवाये खाय ।
हीरा जनम अमोल था, कौडी बदले जाय ॥
उत्तर:
भावार्थ : कबीरदास इस दोहे में “समय का महत्व” के बारे में बता रहे हैं । जो व्यक्ति इस संसार में बिना कोई कर्म किए पूरी रात को सोते हुए और सारे दिन को खाते हुए ही व्यतीत कर देता है, वह अपने हीरे तुल्य अमूल्य जीवन को कौड़ियों के भाव व्यर्थ ही गवा देता है । समय एक बार ने हाथ से छूट जाए तो फिर वापस कभी नही आता । इसलिए इस जीवन में समय को व्यर्थ न कीजिए ।

భావం : కబీర్ దాసు ఈ దోహానందు సమయం యొక్క గొప్పతనాన్ని వివరించుచున్నారు. ఏ వ్యక్తి అయితే ఈ ప్రపంచంనందు ఎటువంటి పని చేయకుండా రాత్రి అంతా నిద్రిస్తూ, పగలంతా ఆహారం తింటూ గడుపుతాడో ఆ వ్యక్తి తస వజ్రం వంటి విలువైన జీవితమును ఎందుకు పనికి రాకుండా వ్యర్థం చేసుకొనును. సమయం ఒక్కసారి మన చేతినుండి జారిపోతే తిరిగి ఎప్పటికిరాదు, అందువలన ఈ జీవితంలో సమయమును వ్యర్థం చేసుకోరాదు.

कवि परिचय

सन्त कबीरदास का हिंदी साहित्य के भक्तिकाल में एक विशिष्ट स्थान है । आप भक्तिकाल की निर्गुण भक्तिधारा में ज्ञानश्रयी शाखा अथवा ‘संत काव्यधारा’ के प्रतिनिधि कवि थे। कहा जाता है कि आपका जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था । लोकलाज के भय से उसने शिशु को लहरतारा नामक तालाब के पास छोड़ दिया। तब नीरू और नीमा नामक मुसलमान दम्पति ने कबीर को पाल-पोसकर बड़ा किया ।

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

कबीरदास ‘अनपढ़’ थे । आप पेशेवर जुलाहा थे । एक ओर अपना काम करते हुए भी आपने देशाटन, सज्जन – सांगत्य तथा अनुभव से ज्ञान समुपार्जन किया । रामानन्द आपके गुरु थे । कबीरदास की ‘रचनाओं को शिष्यों ने ‘बीजक’ नाम से संकलित किया जो ‘साखी’, ‘सबद’ और ‘रमैनी’ नामक तीन भागों में है । नीति, मिथ्या, विश्वास एवं मूढ परंपराओ का खण्डन तीखी भाषा आपकी कविता की विशेषताएँ हैं । सर्वधर्म – समानता का संदेश देकर हिन्दू-मुसलमान की एकता के लिए कबीरदास ने विशेष प्रयास किया। कबीर की भाषा सधुक्कडी अर्थात् “साधुओं की भाषा’ थी । इसमें कई भाषाओं के शब्द पाये जाते हैं । ज्ञानी, भक्त एवं समाज सुधारक के रूप में कबीरदास हिन्दी साहित्य में अमर हैं ।

कठिन शब्दों के अर्थ

1.
सत्गुरु = सत्य के मार्ग दर्शक – गुरु, सच्चा गुरु, Master, true teacher, గురువు (సత్యమార్గం చూపించు)
महिमा = गुण- गान, महत्व, Greatness, స్తుతించు
अनंत = जिसका कोई अंत न हो, Infinite, endless, అనంతం
उपकार = भलाई, Help, favour, ఉపకారం
लोचन अनंत = ज्ञान की दृष्टि, Vision of knowledge, జ్ఞానదృష్టి
उघारिया = खोलना, खोलदिया, Opend, తెరచుట
दिखावनहार = दर्शन कराने वाला , To be shown the correct, మంచిమార్గం- చూపించువాడు.

2.
साच = सच्चाई, सत्य, Truth, నిజము, సత్యము.
तप = कठिन परिश्रम, तपस्या, Hardwork, penance, కఠిన పరిశ్రమ, తపస్సు.
झूठ = असत्य, Falsehood, అబద్దం
पाप = बुरा कार्य, Sin, evil, పాపం
जाके = जिसके, In whom, ఎవనికైతే
हिरदे = मन, दिल, Heart, మనస్సు
ता = उसके, Belongs to, అతనియొక్క

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

3.
सोना = स्वर्ण, Gold, బంగారం
सज्जन = सच्चे मनुष्य, Good person, మంచివ్యక్తి
जुटै = जुड़ना, मिलना, To be joined, కలుపుట,
दुर्जन = बुरे मनुष्य, Bad person, చెడ్డ వ్యక్తి.
कुंभ = मिट्टी का घड़ा, Pot, మట్టికుండ
एकै = इसको, He (possesed), ఇతనికి
धका = धक्का, ठोकर, मारना, Push, jerk, నెట్టుట
दशार = तड़कना, Crack, పగులు, బీటిక,

4.
जग = संसार, जगत, दुनिया, World, ప్రపంచం
बैरी = दुश्मन, शत्रु, Enemy, శత్రువు
शीतल = ठंडा (शांत अथवा क्रोधरहित, Cold, చల్లని
होय = होना, Completed, పూర్తియగు
आपा = अहंकार, घमंड, Proud, గర్వం
डारि = छोड़कर, Except, తప్ప
कोय = हर कोई (प्रति व्यक्ति, Every person, ప్రతి మనిషి,

5.
बोली = बोलना, वाणी, Speech, ఉపన్యాసం, పలుకుట,, మాట్లాడుట.
अनमोल = अमूल्य (जिसका कोई मोल न हो), Priceless, వెలకట్టలేనటువంటి.
जानै = जानकर, Understand, అర్థం చేసుకొనుట.
हिये = हृदय, मन, Heart, హృదయం
तराजू = काँटा, Weighing balance, బరువు కొలుచు యంత్రం
तौलि = तोलकर, तोलना, To weight, బరువు కొలుచుట.
के = करना, To do, చేయుట
मुख = मुँह, Mouth, నోరు
आनि = आने देना, To come, రావడం

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

6.
गर्व = घमडं करना, To feel proud, గర్వపడుట
काल = मृत्यु, समय, वक्त, death, (కాలుడు) యముడు
गहे = पकड़े, a hold, పట్టుకొనుట
कर = हाथ, Hand, చేయి
केस = केश, बाल, Hair, జుట్టు
ना जानी = मालूम नही, Don’t know, తెలియదు.
कित = कहाँ, Where, ఎక్కడ.
मारि = मारना, To kill, చంపుట.
क्या = किसी भी, किधर भी, कही भी, What, any, ఏమిటి, ఏదైన

7.
दया = कृपा, रहम, Kindness, దయ
तहाँ = वहाँ, There, అక్కడ
लोभ = लालच, Greed, దురాశ
पाप = बुरा कार्य, Sin evil, పాపం
छिमा = क्षमा, दया, रहम, Pity, kind hearted, దయార్ధహృదయం.
काल = मृत्यु, मौत, समय, death, చావు
आप = स्वयं / परमात्मा, God, దేవుడు

TS Inter 1st Year Hindi Study Material Poem 1 कबीर के दोहे

8.
गवाई = नष्ट किया, खोया, व्यर्थकिया, lost, పోగొట్టుకొనుట
सोय कर = सोते रहना, नींद, निद्रा, सोकर To sleep, నిద్రించుట
दिवस = दिन, Day, రోజు
खाया = खाना-पीना ( आराम करना), To eat & drink, To take rest, తినుట-త్రాగుట.
हीरा = मूल्यवान वस्तु, Diamond, వజ్రం
जनम = जन्म, जीवन, Birth, జన్మ
अमोल = अमूल्य, Precious, priceless, మూల్యమైన, విలువైన
कौडी = = कम से कम मूल्य, Very less, price, తక్కువ వెల.
बदले जाय = = अदल बदल किया जाय, विनिमय, Exchange, మార్పులు చేర్పులు.

TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం

Here students can locate TS Inter 1st Year Physics Notes 13th Lesson ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం to prepare for their exam.

TS Inter 1st Year Physics Notes 13th Lesson ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం

→ ఉష్ణగతిక శాస్త్రము ఉష్ణశక్తి మరియు యాంత్రిక శక్తుల మధ్యగల సంబంధాలను వివరిస్తుంది.

→ ఉష్ణ సమతాస్థితి : ఒక వ్యవస్థలో స్థూల చలరాశులైన పీడనం, ఘనపరిమాణం, ఉష్ణోగ్రత, ద్రవ్యరాశి వాటి సంఘటన కాలంతోపాటు మారకుండా ఉంటే ఆ వ్యవస్థ ఉష్ణ సమతాస్థితిలో ఉంది అంటారు.
రెండు వ్యవస్థలు ఉష్ణ సమతాస్థితిలో ఉండాలంటే ఆ రెండు వ్యవస్థల ఉష్ణోగ్రతలు సమానంగా ఉండాలి.

→ ఉష్ణగతికశాస్త్ర శూన్యాంక నియమం : రెండు వ్యవస్థలు (A, B) విడివిడిగా మూడవ వ్యవస్థ ‘C’ తో ఉష్ణ సమతా స్థితిలో ఉంటే ఆ వ్యవస్థలు A, B లు కూడా ఒక దానితో ఒకటి ఉష్ణసమతాస్థితిలో ఉంటాయి.

→ అంతరికశక్తి (U) : ప్రతివ్యవస్థ అసంఖ్యాకమైన అణువుల సముదాయము. వ్యవస్థలో గల మొత్తం అణువుల స్థితిశక్తి మరియు గతిశక్తుల మొత్తాన్ని అంతరికశక్తి అంటారు.
లేదా
వ్యవస్థలో ఉన్న అణువుల క్రమరహితచలనం వల్ల వస్తువు కలిగి ఉండే స్థితిశక్తి, గతిశక్తుల మొత్తాన్ని అంతరికశక్తి అంటారు.

→ ఉష్ణగతికశాస్త్ర మొదటి నియమం : ఏదైనా వ్యవస్థకు అందించిన మొత్తం ఉష్ణరాశి ΔQ, ఆ వ్యవస్థ జరిపిన పని ΔW మరియు వ్యవస్థ అంతరికశక్తిలోని మార్పుల ΔU ల మొత్తానికి సమానము.
ΔQ = ΔU + ΔW లేదా ΔQ = ΔU + PΔV

→ విశిష్టోష్ణ సామర్ధ్యం (S) : ప్రమాణ ద్రవ్యరాశిగల పదార్థంలో ఏకాంక ఉష్ణోగ్రతా మార్పు కోసం అందజేసిన ఉష్ణరాశిని లేదా కోల్పోయిన ఉష్ణరాశిని విశిష్టోష్ణ సామర్థ్యము అంటారు.
విశిష్టోష్ట సామర్థ్యం S = \(\frac{1}{m} \frac{\Delta Q}{\Delta T}\) ప్రమాణము J/kg-k

TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం

→ స్థిరఘనపరిమాణ మోలార్ విశిష్టోష్ణ సామర్ధ్యము (C) : స్థిరఘనపరిమాణము వద్ద ఒక గ్రామ్ మోల్ ద్రవ్యరాశి గల వాయువు ఉష్ణోగ్రతను 1°C లేదా 1 కెల్విన్ పెంచడానికి కావలసిన ఉష్ణరాశిని స్థిరఘనపరిమాణ మోలార్ విశిష్టోష్ణ సామర్థ్యము Cగా నిర్వచించినారు.
Cv = \(\frac{1 \mathrm{dQ}}{\mu \mathrm{dT}}\) μ = వాయువులోని మోల్ల సంఖ్య

→ స్థిరపీడన మోలార్ విశిష్టోష్ణ సామర్ధ్యము (C): స్థిరపీడనము వద్ద ఒక గ్రామ్ మోల్ ద్రవ్యరాశి గల వాయువు ఉష్ణోగ్రతను 1°C లేదా 1 కెల్విన్ మేరకు పెంచడానికి కావలసిన ఉష్ణరాశిని స్థిరపీడన మోలార్ విశిష్టోష్ట సామర్థ్యము Cp గా నిర్వచించినారు.
Cp = \(\frac{1}{\mu} \frac{d Q}{d T}\) μ = వాయువులోని గ్రామ్ మోల్ల సంఖ్య
గమనిక : విశిష్టోష్ణము మరియు విశిష్టోష్ణ సామర్ధ్యములను ఒకే అర్థంలో వాడతారు.

→ సమ ఉష్ణోగ్రతా ప్రక్రియ : ఉష్ణ యాంత్రిక మార్పులు జరుగుతున్నంతసేపు ఒక వ్యవస్థ ఉష్ణోగ్రత T ని స్థిరంగా ఉంచితే ఆ ప్రక్రియను సమఉష్ణోగ్రతా ప్రక్రియ అంటారు.

→ సమ పీడన ప్రక్రియ : ఈ విధమైన ప్రక్రియలో ఉష్ణ యాంత్రిక మార్పులు జరుగుతున్నంత సేపు వ్యవస్థ పీడనం (P) స్థిరము.

→ సమ ఘనపరిమాణ ప్రక్రియ : ఇటువంటి ప్రక్రియలో ఉష్ణ యాంత్రిక మార్పులు జరుగుతున్నంతసేపు వ్యవస్థ ఘనపరిమాణం (V) స్థిరంగా ఉండాలి.

→ స్థిరోష్ణక ప్రక్రియ : ఇటువంటి ప్రక్రియలో ఉష్ణ యాంత్రిక మార్పులు జరుగుతున్నంతసేపు వ్యవస్థ మొత్తం శక్తి (Q) స్థిరంగా ఉండాలి.

→ చక్రీయ ప్రక్రియ : చక్రీయ ప్రక్రియలో ఉష్ణ యాంత్రిక వ్యవస్థపై అన్ని ప్రక్రియలు జరిపిన తరువాత చివరికి అది తొలి ఉష్ణోగ్రతా పీడనాలను పొందుతుంది. చక్రీయ ప్రక్రియలో ΔU = 0 కావున వ్యవస్థ శోషించుకున్న ఉష్ణరాశి చక్రీయ ప్రక్రియలో జరిగినపని. (చక్రీయ ప్రక్రియలో dW – dQ)

→ ఉష్ణగతిక శాస్త్ర రెండవ నియమము :
a) కెల్విన్ – ప్లాంక్ ప్రవచనము : ఒక ఉష్ణాశయం నుంచి ఉష్ణశక్తిని గ్రహించి ఏ ఇతర ఫలితాలు కలుగజేయకుండా మొత్తం శక్తిని పనిగా మార్చే చక్రీయ ప్రక్రియ సాధ్యం కాదు.
b) క్లాసియస్ ప్రవచనము : తక్కువ ఉష్ణోగ్రత గల ఒక వస్తువు నుంచి ఎక్కువ ఉష్ణోగ్రత గల మరొక వస్తువుకు తనంతట తాను ఉష్ణరూపంలో శక్తిని బదిలీ చేసే ఏ ప్రక్రియ సాధ్యం కాదు.

→ ఉష్ణగతిక శాస్త్ర రెండవ నియమం ఉష్ణ ప్రసార దిశను తెలుపుతుంది.

→ ఉష్ణగతిక శాస్త్ర రెండవ నియమం ప్రకారము ఏ ఉష్ణ యంత్రం దక్షత η విలువ 1 కి సమానం కాదని మరియు శీతలీకరణ యంత్రం క్రియాశీలతా గుణకం (∝) విలువ అనంతం కాదని చెపుతుంది.

→ ద్విగత ప్రక్రియలు లేదా ఉత్రమణీయ ప్రక్రియలు : ఉష్ణగతిక ప్రక్రియలు తొలిస్థితి (i) నుండి తుదిస్థితి (f) కి చేరేలోపు ఉష్ణరాశి (Q) ని గ్రహించి పని (W) ని జరుపుతాయి. వేరే ఏ ఇతర ఫలితాలు లేకుండా వ్యవస్థను తుదిస్థితి నుండి తొలిస్థితికి తీసుకొనిపోగలిగితే అటువంటి ప్రక్రియలను ద్విగత ప్రక్రియలు లేదా ఉత్రమణీయ ప్రక్రియలు అంటారు.

→ అనుత్రమణీయ ప్రక్రియ లేదా ఏకగతప్రక్రియ : ఈ విధమైన ప్రక్రియలను తొలిస్థితి (i) నుండి తుదిస్థితి (f) కి మారునపుడు ఉష్ణరాశి గ్రహించి పనిని చేయడం జరుగుతుంది. కాని ఏ ఇతర ఫలితాలు లేకుండా వ్యవస్థను తుదిస్థితి (f) నుండి తొలిస్థితి (1) కి తేవడం సాధ్యం కాదు.
ప్రకృతిలో తమంతట తాముగా జరిగే అన్ని ప్రక్రియలు ఏకగత లేక అనుమణీయ ప్రక్రియలే.

→ కార్నో యంత్రము రెండు ఉష్ణోగ్రతల మధ్య ఆదర్శవాయువుతో పనిచేసే ఉత్రమణీయ ఉష్ణయంత్రము.
దీని దక్షత η = \(\frac{w}{Q_l}\) = 1 – \(\frac{\mathrm{Q}_2}{\mathrm{Q}_1}\) లేదా η = 1 – \(\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}\)
(T1 = జనకం ఉష్ణోగ్రత, T2 = ఉష్ణాశయం ఉష్ణోగ్రత, W = జరిగిన పని)

→ వస్తువు స్థితి ‘మార్పు లేకుండా వేడిచేయడానికి అందించిన ఉష్ణరాశి Q = mct.

→ స్థితి మార్పు పొందటానికి వస్తువుకు అందజేసిన ఉష్ణరాశి Q = mL.

→ జౌల్ నియమం నుండి పని W ∝ Q లేదా W = JQ.
J = ఉష్ణయాంత్రిక తుల్యాంకము
TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం 1

→ స్థితి శక్తి ఉష్ణంగా మారినపుడు
(a) జరిగిన పని మొత్తం వస్తువును వేడిచేయటానికి ఉపయోగిస్తే mgh = mct లేదా Δt = \(\frac{\mathrm{Mgh}}{\mathrm{mL}}\)
(b) జరిగిన పని వస్తువు స్థితి మార్పుకు ఉపయోగపడితే mgh = mL లేదా ద్రవీభవించిన వస్తువు ద్రవ్యరాశి m = \(\frac{\mathrm{Mgh}}{\mathrm{L}}\)

→ గతిశక్తి ఉష్ణంగా మారిన సందర్భంలో
(a) గతిశక్తి వస్తువును వేడిచేయటానికి మాత్రమే ఉపయోగపడితే
\(\frac{1}{2}\)mv2 = mct ⇒ Δt = \(\frac{\mathrm{mv}^2}{2 \mathrm{mc}}\)
(b) గతిశక్తి వస్తువు స్థితి మార్పు వరకు మాత్రమే ఉపయోగపడితే \(\frac{\mathrm{mv}^2}{2 \mathrm{mc}}\)mv2 = ML
ద్రవీభవించిన వస్తువు ద్రవ్యరాశి M = \(\frac{\mathrm{mv}^2}{2 \mathrm{mc}}\)

TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం

→ ఉష్ణగతిక శాస్త్ర మొదటి నియమం నుండి dQ = dU + dW

→ వస్తువు ఉష్ణధారణ సామర్థ్యము \(\frac{\Delta \mathrm{Q}}{\Delta \mathrm{t}}\) = mc (i.e., ద్రవ్యరాశి × విశిష్టోష్ణము)

→ విశిష్టోష్టము S లేదా C
TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం 2

→ మిశ్రమ పద్ధతి నియమం నుండి వేడిగా ఉన్న వస్తువు కోల్పోయిన ఉష్ణరాశి = చల్లగా ఉన్న వస్తువు గ్రహించిన ఉష్ణరాశి
a) మిశ్రమ పద్దతి నియమంలో ఘపపదార్థపు విశిష్టోష్ఠము S = \(\frac{\mathrm{m}_1 \mathrm{~S}_1+\left(\mathrm{m}_2 \mathrm{~m}_1\right) \mathrm{S}_2\left(\mathrm{t}_2-\mathrm{t}_1\right)}{\left(\mathrm{m}_3-\mathrm{m}_2\right)\left(\mathrm{t}_2-\mathrm{t}_1\right)}\)J/kg-k
b) ద్రవాల విశిష్టోష్టము S = \(\frac{\left(m_3-m_2\right) S_1\left(t_2-t_1\right)}{\left(m_2-m_1\right)\left(t_3-t_1\right)}-\frac{m_1 S_2}{m_2-m_1}\)

→ రెండు గోళాల వ్యాసార్థాల నిష్పత్తి r1: r2 విశిష్టోష్ణముల నిష్పత్తి S1 : S2 మరియు సాంద్రతల నిష్పత్తి ρ1 : ρ2 అయితే
వాటి ఉష్ణధారణ సామర్థ్యాల నిష్పత్తి = \(\frac{m_1 S_1}{m_2 S_2}=\left(\frac{r_1}{r_2}\right)^3\left(\frac{\rho_1}{\rho_2}\right)\left(\frac{s_1}{S_2}\right)\)
a) వాయువుల విశిష్టోష్టము Cp = ΔQ / mΔT
b) మోలార్ విశిష్టోష్ఠముల నిష్పత్తి Cp = \(\frac{\Delta Q}{\mu \Delta t}\) (μ = మోల్ల సంఖ్య)
c) విశిష్టోష్ఠముల నిష్పత్తి γ = Cp/ Cv; Cv = \(\frac{\gamma \mathrm{R}}{\gamma-1}\). Cp = \(\frac{\gamma \mathrm{R}}{\gamma-1}\)

→ స్థిర పీడనానికి వ్యతిరేకంగా వాయువు వ్యాకోచించుటలో జరిగిన పని dW = P dV.

→ ఆదర్శవాయువు వ్యాకోచించుటలో జరిగిన పని
a) W = P (V2 – V1) లేదా W = R (T2 – T1)
μ = వాయువులోని మోత్ల సంఖ్య; R = సార్వత్రిక వాయు స్థిరాంకము

→ Cp మరియు Cv ల మధ్య సంబంధము Cp – Cv = R.

→ సమోష్ణోగ్రతా ప్రక్రియలో P, V మరియు T ల మధ్య సంబంధము PV = RT లేదా PV = μRT.

→ సమ ఉష్ణప్రక్రియ (adiabatic process) లో P, V మరియు T ల మధ్య సంబంధాలు

  • PVγ = స్థిరరాశి
  • TVγ-1 = స్థిరరాశి
  • PV1-γ Tγ = స్థిరరాశి.

→ సమోష్ణోగ్రతా ప్రక్రియలో జరిగిన పని
a) W = RT loge\(\frac{v_2}{v_1}\)
b) W = 2.303 RT log10\(\frac{v_2}{v_1}\)

→ సమోష్ణ ప్రక్రియలో జరిగిన పని
a) W = \(\frac{1}{\gamma-1}\)(P1V1 – P2V2) మోల్-1 (లేదా)
b) W = \(\frac{\mu \mathrm{R}}{\gamma-1}\)(T1 – T2); μ = మోల్ల సంఖ్య

→ ఉష్ణయంత్రపు దక్షత η = 1 – \(\frac{\mathrm{Q}_2}{\mathrm{Q}_1}\) లేదా η = 1 − \(\frac{\mathrm{T}_2}{\mathrm{~T}_1}\)
T1 = జనకం ఉష్ణోగ్రత, T2 = ఉష్ణాశయం ఉష్ణోగ్రత.

→ వస్తువు స్థితి మార్పు లేకుండా వేడిచేయడానికి అందించిన ఉష్ణరాశి Q = mct.

→ స్థితి మార్పు పొందటానికి వస్తువుకు అందజేసిన ఉష్ణరాశి Q = mL.

TS Inter 1st Year Physics Notes Chapter 13 ఉష్ణోగతిక శాస్త్రం

→ ప్రయోగశాలలో నీటి బాష్పీభవన గుప్తోష్ణము కనుగొనుటలో
L = \(\frac{\left[\mathrm{m}_1 \mathrm{~S}_{\mathrm{c}}+\left(\mathrm{m}_2-\mathrm{m}_1\right) \mathrm{S}_{\mathrm{w}}\right]\left(\mathrm{t}_1-\mathrm{t}_2\right)}{\mathrm{m}_1-\mathrm{m}_2}\) – (t – t2)Sw
Sw = నీటి విశిష్టోష్టము ; Sc = కెలోరీ మీటరు విశిష్టోష్టము